Uttar Pradesh

StateCommission

A/2011/24

Post Office - Complainant(s)

Versus

Vineet Kumar Dixit - Opp.Party(s)

Udayveer Singh

17 Jul 2017

ORDER

STATE CONSUMER DISPUTES REDRESSAL COMMISSION, UP
C-1 Vikrant Khand 1 (Near Shaheed Path), Gomti Nagar Lucknow-226010
 
First Appeal No. A/2011/24
(Arisen out of Order Dated in Case No. of District State Commission)
 
1. Post Office
a
...........Appellant(s)
Versus
1. Vineet Kumar Dixit
a
...........Respondent(s)
 
BEFORE: 
 HON'BLE MR. Ram Charan Chaudhary PRESIDING MEMBER
 HON'BLE MR. Gobardhan Yadav MEMBER
 
For the Appellant:
For the Respondent:
Dated : 17 Jul 2017
Final Order / Judgement

राज्‍य उपभोक्‍ता विवाद प्रतितोष आयोग, उ0प्र0, लखनऊ।

(सुरक्षित)                                                                                  

अपील संख्‍या :24/2011

(जिला उपभोक्‍ता फोरम, अलीगढ़ द्धारा परिवाद सं0-116/2009 में पारित निर्णय/आदेश दिनांक 21.9.2010 के विरूद्ध)

1-       Senior Supdt., Post Office, Aligarh Mandal, Aligarh.

2-      Up Dakpal. Post Office-Tika Ram Mandir, Aligarh.

                                                                  ........... Appellants/ Opp. Parties

Versus    

Vineet Kumar Dixit, S/o Shri Ramesh Chandra Dixit, R/o Gali No.-1, Gular Road, Aligarh.

……..…. Respondent/ Complainant 

समक्ष :-  

मा0 श्री रामचरन चौधरी, पीठासीन सदस्‍य

मा0 श्री गोवर्द्धन यादव, सदस्‍य

अपीलार्थी के अधिवक्‍ता :   श्री डॉ0 उदय वीर सिंह

प्रत्‍यर्थी के अधिवक्‍ता   :   श्री संजय कुमार श्रीवास्‍तव

दिनांक : 31/7/2017

मा0 श्री रामचरन चौधरी, पीठासीन सदस्‍य द्वारा उदघोषित

निर्णय    

मौजूदा अपील जिला उपभोक्‍ता फोरम, अलीगढ़ के परिवाद सं0-116/2009 में पारित निर्णय/आदेश दिनांकित 21.9.2010 के विरूद्ध योजित की गई है, जिसमें जिला उपभोक्‍ता फोरम, अलीगढ़ द्वारा निम्‍न आदेश पारित किया गया है:-

"परिवादी का परिवाद स्‍वीकार किया जाता है तथा विपक्षीगण को आदेशित किया जाता है कि आर0डी0 खाता संख्‍या 363378 से सम्‍बन्धित आर0डी0 की परिपक्‍वता धनराशि इस आदेश के एक माह के भीतर परिवादी को अदा कर दे तथा परिपक्‍वता के बाद से भुगतान की तिथि तक विपक्षीगण परिवादी को 8 प्रतिशत साधारण ब्‍याज भी अदा करे इसके अतिरिक्‍त परिवादी विपक्षीगण से 3000.00 रू0 मानसिक क्षतिपूर्ति एवं 2000.00 रू0 वाद व्‍यय हेतु भी प्राप्‍त करने का अधिकारी है।

संक्षेप में केस के तथ्‍य इस प्रकार है कि परिवादी ने अपनी नावालिग पुत्री बेवी के नाम से अक्‍टूबर-2003 में पहला आर.डी.खाता सं0-363378 मूल्‍य 600.00 रू0 तथा दिनांक 31.12.2004 को दूसरा आर.डी. खाता संख्‍या-363771

 

-2-

मूल्‍य 500.00 रू0 का प्रतिवादी सं0-2 के कार्यालय में खोला था, जिसमें उक्‍त आर.डी.खाता सं0-363378 की समय अवधि नवम्‍बर-2008 में पूर्ण हो गयी थी

 जिसके भुगतान हेतु परिवादी ने प्रतिवादी संख्‍या-2 से सम्‍पर्क किया तो प्रतिवादी संख्‍या-2 ने परिवादी की उक्‍त खातों की पासबुक अपने पास रख ली, लेकिन परिवादी को भुगतान नहीं किया, जिसके बाद परिवादी ने प्रतिवादी संख्‍या-1 से भी सम्‍पर्क किया और लिखित व मौखिक शिकायत की, लेकिन फिर भी परिवादी का भुगतान नहीं किया गया। परिवादी ने इस संबंध में सूचना का अधिकार अधिनियम के अन्‍तर्गत सूचना भी मॉगी, लेकिन वह भी पूर्ण सूचना नहीं दी गयी इसके बाद परिवादी ने अपने अधिवक्‍ता से इस सम्‍बन्‍ध में एक विधिक नोटिस दिनांक 02.4.2009 को दिलाया, जिसके बाद भी ना तो भुगतान किया और न ही कोई उत्‍तर दिया, जिससे परिवादी को परेशानी हुई है। इस प्रकार प्रतिवादीगण द्वारा परिवादी को दी जाने वाली सेवा में कमी की गयी है। अत: परिवादी द्वारा प्रतिवादीगण से उसके प्रश्‍नगत खातों की परिपक्‍वता धनराशि एवं क्षतिपूर्ति का अनुतोष दिलाये जाने हेतु जिला उपभोक्‍ता फोरम के समक्ष परिवाद संस्थित किया गया है।

प्रतिवादीगण की ओर से जिला उपभोक्‍ता फोरम के समक्ष अपना प्रतिवाद पत्र प्रस्‍तुत कर यह कथन किया गया है परिवादी की जिम्‍मेदारी जमा धनराशि के भुगतान के लिए बनती है किन्‍तु श्री रमेश चन्‍द्र दीक्षित उप डाकपाल ने उप डाकघर मैडीकल कालेज, अलीगढ में अपने कार्याकाल के दौरान  5,62,032.00 रू0 का गबन किया था, जिसमें डाक विभाग ने श्री रमेश चन्‍द दीक्षित उप डाकपाल को गबन मामले का दोषी पाते हुए उनके खिलाफ प्रथम सूचना रिपोर्ट उपराध संख्‍या-176/2009 थाना सिविल लाईन अलीगढ़ में अन्‍तर्गत धारा-420/406/467/468/471 भा0दं0सं0 दर्ज करायी है, वर्तमान में मामला न्‍यायालय में लम्बित है। चूंकि विवादित सभी खाते गबन की गयी धनराशि से संचालित किये जाते थे, इसलिए पी.ए.डी. एक्‍ट-1850 के अन्‍तर्गत कार्यवाही कर खातों पर रोक लगायी गयी है। श्री रमेश चन्‍द दीक्षित उप डाकपाल द्वारा गबन की राशि जमा करने पर रोक तत्‍काल हटाकर धनराशि अवमुक्‍त कर दी जायेगी। श्री रमेश चन्‍द दीक्षित द्वारा किए गये गबन से डाक विभाग को बहुत ही आर्थिक संकट से गुजरना पडा है तथा उसकी साख खराब हुई है। परिवाद फोरम के क्षेत्राधिकार से बाहर है जो सव्‍यय खण्डित होने योग्‍य है।

 

-3-

इस सम्‍बन्‍ध में जिला उपभोक्‍ता फोरम के प्रश्‍नगत निर्णय/आदेश दिनांकित 21.9.2010 तथा आधार अपील का अवलोकन किया गया एवं अपीलार्थी की ओर से विद्वान अधिवक्‍ता डॉ0 उदय वीर सिंह तथा प्रत्‍यर्थी के विद्वान अधिवक्‍ता श्री संजय कुमार श्रीवास्‍तव की बहस सुनी गई तथा उभय पक्ष की ओर से दाखिल लिखित बहस का भी अवलोकन किया गया है।

लिखित बहस में अपीलार्थी की ओर से यह कहा गया है कि श्री रमेश चन्‍द दीक्षित ने गबन किया था और जनता के पैसे का दुरूपयोग किया था और यह कहा गया है कि जब वह उप डाकपाल मेडिकल कालेज में तैनात थे, तो उनके द्वारा रू0 5,62,032.00 का गबन किया गया था और उनके खिलाफ प्रथम सूचना रिपोर्ट अन्‍तर्गत धारा-420/406/467/468/471 भा0दं0सं0 दर्ज करायी गई थी एवं आर0डी0 खाता जो बेबी प्रत्‍यर्थी की पुत्र के नाम रमेश चन्‍द दीक्षित द्वारा खोला गया है, वह जॉच में पाया गया कि श्रीमती नीता गुप्‍ता जो कि रमेश चन्‍द दीक्षित की एजेण्‍ट थी, के द्वारा खोला गया था। यह भी कहा गया है कि अपीलार्थी विभाग द्वारा Public Accountants Default Act, 1850 के अन्‍तर्गत अदायगी को रोक दिया गया है और यह भी कहा गया कि उक्‍त अधिनियम के तहत जो भुगतान रोका गया है, उस आदेश को सेवा में कमी का नाम देकर चुनौती नही दी जा सकती है।

     आधार अपील में यह कहा गया है कि श्री रमेश चन्‍द दीक्षित ने अपने नजदीकी रिश्‍तेदारों के नाम से आर0डी0 खोल रखे थे, जो निम्‍नवत है:-

1-   आर.डी. खाता सं0-363353 कु0 आशा पुत्री श्री मनोज कुमार 18,000.00 रूपये।

2-   आर.डी. खाता सं0-363354 कु0 आशा पुत्री श्री मनोज कुमार 19,120.00 रूपये।

3-   आर.डी. खाता सं0-363450 श्री प्रवीन कुमार 26,500.00 रूपये।

4-   आर.डी. खाता सं0-363378 बेबी पुत्री श्री विनीत कुमार दीक्षित 18,000.00 रूपये।

5-   आर.डी. खाता सं0-363771 बेबी पुत्री श्री विनीत कुमार दीक्षित 21,000.00 रूपये।


      आधार अपील में यह भी कहा गया है कि उक्‍त खातों में जमा रकम की जॉच इंस्‍पेक्‍टर, पोस्‍ट आफिस, (नॉर्थ) अलीगढ़ के द्वारा की गई और उनके द्वारा यह पाया गया कि उक्‍त खातों के रूपये श्री रमेश चन्‍द दीक्षित के द्वारा

-4-


अपने एजेण्‍ट श्रीमती नीता गुप्‍ता के द्वारा जमा कराये गये है और जनता के पैसे का गबन श्री रमेश चन्‍द दीक्षित द्वारा किया गया है और विभाग के द्वारा पी.ए.डी. एक्‍ट, 1950 के अन्‍तर्गत श्री रमेश चन्‍द के विरूद्ध वसूली की कार्यवाही शुरू की गई, जिसमें श्री रमेश चन्‍द दीक्षित द्वारा रूपया जमा कर दिया गया और आवश्‍यक आदेश भी विभाग द्वारा जारी किए गये।

      केस के तथ्‍यों एवं परिस्थितियों व दोनों पक्षों द्वारा दाखिल लिखित बहस को देखत हुए हम यह पाते हैं कि मौजूदा केस में जो विभागीय कार्यवाही की गई है, उसके तहत गबन की गई धनराशि की निकासी रोक दी गई थी और उसके संदर्भ में फौजदारी वाद भी दाखिल किया गया है, जो अभी विचाराधीन है। इस प्रकार सम्‍पूर्ण तथ्‍यों पर विचार करते हुए हम यह पाते हैं कि परिवादी द्वारा जो सेवा में कमी की बात कही जा रही है, वह सेवा में कमी की श्रेणी में नहीं आती है, बल्कि विभागीय कार्यवाही उस कर्मचारी के विरूद्ध की गई, जिसने अपने रिश्‍तेदारों के बच्‍चों के नाम से आर0डी0 खातें खोलकर उसमें पैसा जमा करता था और उस पैसे का गबन करता था और इस प्रकार उपभोक्‍ता संरक्षण अधिनियम, 1986 के अन्‍तर्गत जो सेवा में कमी को परिभाषित किया गया है, उसके अन्‍तर्गत प्रत्‍यर्थी/परिवादी का मौजूदा केस नहीं आता है। जिला उपभोक्‍ता फोरम पारित निर्णय/आदेश विधि सम्‍मत नहीं है और निरस्‍त किए जाने योग्‍य है। तद्नुसार अपीलार्थी की अपील स्‍वीकार किए जाने योग्‍य है।

आदेश

अपीलार्थी की अपील स्‍वीकार की जाती है। जिला उपभोक्‍ता फोरम, अलीगढ़ के परिवाद सं0-117/2009 में पारित निर्णय/आदेश दिनांकित 21.9.2010 निरस्‍त किया जाता है।

उभय पक्ष अपीलीय व्‍यय भार स्‍वयं वहन करेगें।

 

     (रामचरन चौधरी)                      (गोवर्धन यादव)

     पीठासीन सदस्‍य                      सदस्‍य

हरीश आशु.,

कोर्ट सं0-4

 
 
[HON'BLE MR. Ram Charan Chaudhary]
PRESIDING MEMBER
 
[HON'BLE MR. Gobardhan Yadav]
MEMBER

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