राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, उ0प्र0, लखनऊ
अपील संख्या-14/2018
(मौखिक)
(जिला उपभोक्ता आयोग, इटावा द्वारा प्रकीर्ण वाद संख्या 08/2016 में पारित आदेश दिनांक 03.11.2017 के विरूद्ध)
छविराम सिंह पुत्र सोबरन सिंह,
निवासी-उदी मोड़, पोस्ट-उदी,
थाना बढ़पुरा, जिला-इटावा
........................अपीलार्थी/परिवादी
बनाम
1. यूनीवर्सल सौम्पों जनरल इन्श्योरेन्स कं0लि0 द्वारा शाखा प्रबंधक शाखा-बलराम सिंह चौराहा, कचहरी रोड, इटावा जिला इटावा।
2. इलाहाबाद बैंक द्वारा शाखा प्रबंधक इलाहाबाद, बैंक शाखा टकपुरा चौपुला, जिला इटावा।
...................प्रत्यर्थीगण/विपक्षीगण
समक्ष:-
माननीय न्यायमूर्ति श्री अशोक कुमार, अध्यक्ष।
अपीलार्थी की ओर से उपस्थित : श्री अश्वनी कुमार पाण्डेय,
विद्वान अधिवक्ता।
प्रत्यर्थी संख्या-1 की ओर से उपस्थित : श्री दिनेश कुमार,
विद्वान अधिवक्ता।
प्रत्यर्थी संख्या-2 की ओर से उपस्थित : कोई नहीं।
दिनांक: 20.12.2021
माननीय न्यायमूर्ति श्री अशोक कुमार, अध्यक्ष द्वारा उदघोषित
निर्णय
अपीलार्थी की ओर से विद्वान अधिवक्ता श्री अश्वनी कुमार पाण्डेय उपस्थित हैं। प्रत्यर्थी संख्या-1 बीमा कम्पनी की ओर से विद्वान अधिवक्ता श्री दिनेश कुमार उपस्थित हैं। प्रत्यर्थी संख्या-2 की ओर से कोई उपस्थित नहीं है।
प्रस्तुत अपील विगत लगभग 04 वर्ष से इस न्यायालय के सम्मुख लम्बित है। अनेकों पूर्व तिथियों पर प्रत्यर्थी/विपक्षी बीमा कम्पनी के विद्वान अधिवक्ता को प्रत्यर्थी/विपक्षी बीमा कम्पनी की ओर से की गयी
-2-
प्रार्थना को स्वीकृत करते हुए लिखित तर्क प्रस्तुत करने हेतु समय प्रदान किया जाता रहा। अन्ततोगत्वा दिनांक 07.01.2019 को निम्न आदेश पारित किया गया:-
''अपीलार्थी की ओर से विद्वान अधिवक्ता श्री ए0के0 पाण्डेय उपस्थित आये। प्रत्यर्थी की ओर से विद्वान अधिवक्ता श्री आनन्द भार्गव उपस्थित आये। प्रत्यर्थी के विद्वान अधिवक्ता ने लिखित तर्क प्रस्तुत करने हेतु समय चाहा। उल्लेखनीय है कि पिछली तिथि 16.10.2018 को भी प्रत्यर्थी के विद्वान अधिवक्ता ने लिखित तर्क प्रस्तुत करने हेतु समय चाहा था, फिर भी आज लिखित तर्क प्रस्तुत नहीं किया गया है, यह उचित नहीं है। दिनांक 22.3.2019 अंतिम सुनवाई हेतु तिथि नियत की जाती है। निश्चित तिथि तक प्रत्यर्थी अपना लिखित तर्क प्रस्तुत कर सकते हैं। पुन: स्थगन किसी भी दशा में स्वीकार नहीं किया जायेगा।''
उपरोक्त अवधि के पश्चात् लगभग 10 तिथियों पर अपील सूचीबद्ध हुई, परन्तु पूर्व आदेशों का अनुपालन प्रत्यर्थी/विपक्षी बीमा कम्पनी द्वारा सुनिश्चित नहीं किया जा सका।
संक्षेप में वाद के तथ्य इस प्रकार हैं कि अपीलार्थी/परिवादी छविराम सिंह द्वारा प्रकीर्ण वाद संख्या-08/2016 छविराम सिंह बनाम यूनीवर्सल सौम्पो जनरल इन्श्योरेन्स कम्पनी लि0 व एक अन्य जिला उपभोक्ता आयोग, इटावा के सम्मुख प्रस्तुत किया गया, जिसे निर्णय एवं आदेश दिनांक 03.11.2017 के द्वारा जिला उपभोक्ता आयोग द्वारा निरस्त किया गया तथा जिला उपभोक्ता आयोग द्वारा उपरोक्त वाद को निरस्त करने का कारण धारा-24ए(1) उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 को
-3-
दृष्टिगत रखते हुए समय-सीमा के बिन्दु पर इस तथ्य को उल्लिखित करते हुए कि परिवाद को प्रस्तुत करने में हुई अप्रत्याशित और अव्याख्यापित विलम्ब क्षमा करने योग्य नहीं है। तद्नुसार प्रकीर्ण आवेदन/परिवाद गुणदोष के आधार पर ससंघर्ष बिना वाद-व्यय के अस्वीकृत किया जाता है।
उक्त आदेश से क्षुब्ध होकर प्रस्तुत अपील इस न्यायालय के सम्मुख योजित की गयी।
अपीलार्थी/परिवादी की ओर से उपस्थित विद्वान अधिवक्ता श्री अश्वनी कुमार पाण्डेय द्वारा कथन किया गया कि वास्तव में परिवाद प्रस्तुत करने में किसी प्रकार की अप्रत्याशित देरी अपीलार्थी/परिवादी की ओर से नहीं हुई तथा यह कि प्रत्यर्थी/विपक्षी बीमा कम्पनी द्वारा दिनांक 05.12.2013 को जो पत्र अपीलार्थी/परिवादी के द्वारा योजित क्लेम को खारिज करने हेतु जारी करना दर्शित किया गया है उक्त पत्र/आदेश की प्रति अपीलार्थी/परिवादी को आज दिनांक तक विधिक रूप से प्राप्त नहीं हुई है तथा न ही प्रत्यर्थी/विपक्षी बीमा कम्पनी के विद्वान अधिवक्ता द्वारा उक्त तथ्यों को इस न्यायालय के सम्मुख विगत 04 वर्ष की लम्बित अवधि में दर्शाया जा सका है, जबकि प्रत्यर्थी/विपक्षी बीमा कम्पनी को अनेकों तिथियों पर तथ्यों को प्रस्तुत किये जाने हेतु समय प्रदान किया गया।
उपरोक्त तथ्यों को दृष्टिगत रखते हुए न्यायहित में प्रस्तुत अपील स्वीकार की जाती है और प्रश्नगत आदेश दिनांकित 03.11.2017 अपास्त करते हुए परिवाद को जिला उपभोक्ता आयोग, इटावा के सम्मुख गुणदोष के आधार पर अन्तिम रूप से निस्तारित करने हेतु आदेश पारित किया
-4-
जाता है तथा आदेशित किया जाता है कि जिला उपभोक्ता आयोग, इटावा द्वारा यथासम्भव प्रतिप्रेषित परिवाद को 06 माह की अवधि में उभय पक्ष के द्वारा उपलब्ध कराये गये प्रपत्रों को दृष्टिगत रखते हुए गुणदोष के आधार पर निर्णीत किया जावे।
आशुलिपिक से अपेक्षा की जाती है कि वह इस निर्णय/आदेश को आयोग की वेबसाइट पर नियमानुसार यथाशीघ्र अपलोड कर दें।
(न्यायमूर्ति अशोक कुमार)
अध्यक्ष
जितेन्द्र आशु0
कोर्ट नं0-1