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SMT. SHOBHA RANI THAKUR filed a consumer case on 19 May 2014 against UNITED INDIA INSURANCE COMPANY LMD. in the Seoni Consumer Court. The case no is CC/16/2014 and the judgment uploaded on 16 Oct 2015.
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण फोरम, सिवनी(म0प्र0)
प्रकरण क्रमांक -16-2014 प्रस्तुति दिनांक-12.03.2014
समक्ष :-
अध्यक्ष - रवि कुमार नायक
सदस्य - श्री वीरेन्द्र सिंह राजपूत,
श्रीमति षोभारानी ठाकुर, पतिन श्री
विजय सिंह ठाकुर, उम्र लगभग 65 वर्श,
निवासी-आजाद वार्ड सिवनी, थाना,
तहसील व जिला सिवनी (म0प्र0)।........................आवेदकपरिवादी।
:-विरूद्ध-:
यूनार्इटेड इंडिया इंष्योरेंस कम्पनी
लिमिटेड, द्वारा-षाखा प्रबंधक,
यूनार्इटेड इंडिया इंष्योरेंस कम्पनी
लिमिटेड, चर्च कम्पाउंड, एन.एच.7,
सिवनी तहसील वा जिला सिवनी
(म0प्र0) 480661.......................................................अनावेदकविपक्षी।
:-आदेश-:
(आज दिनांक- 19-05-2014 को पारित)
द्वारा-अध्यक्ष:-
(1) परिवादी ने यह परिवाद उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम की धारा 12 के तहत, उसके वाहन-कार मारूति सुजुकी पंजीयन नंबर-एम0पी0 28 सी5953 के द्वारा, अनावेदक बीमा कम्पनी षाखा से बीमित रही है, उक्त वाहन की दिनांक-27.07.2012 को दुर्घटना में हुर्इ क्षति के संबंध में परिवादी के क्षतिपूर्ति क्लेम को दिनांक-10.07.2013 के पत्र के द्वारा अस्वीकार कर दिये जाने को अनुचित व सेवा में कमी बताते हुये पेष किया है।
(2) यह स्वीकृत तथ्य है कि-परिवादी का उक्त वाहन, अनावेदक बीमा कम्पनी के द्वारा, दिनांक-02.11.2011 से 01.11.2012 तक की अवधि के लिए बीमित रहा है। यह भी विषिश्टत: विवादित नहीं कि-दिनांक-27.07.2012 को उक्त वाहन का चौरर्इ जाते समय टायर फटने के कारण असंतुलित होकर पलट जाने से हुर्इ वाहन की क्षतिपूर्ति बाबद परिवादी ने अनावेदक बीमा कम्पनी में क्लेम पेष किया था, जिसे अनावेदक के पत्र दिनांक-10.07.2013 के आधार पर, जांच पष्चात मात्र इस आधार पर निरस्त कर दिया गया कि-दुर्घटना की सूचना 25 दिन विलम्ब से दी गर्इ, इस तरह पालिसी षर्तों का उल्लघंन किया गया है।
(3) स्वीकृत तथ्यों के अलावा, परिवाद का सार यह है कि-दिनांक-27.07.2012 को परिवादी का पुत्र पंकज ठाकुर जब अपने घर से चौरर्इ जा रहा था, तो वाहन का अगला टायर फट जाने से वाहन असंतुलित होकर रोड के किनारे पलट गया, जो कि-दुर्घटना में परिवादी के पुत्र-पंकज को चोटें आर्इं और वाहन में भी टूटफूट होकर क्षति हो गर्इ, जो कि-आरक्षी केन्द्र चौरर्इ की पुलिस ने मौके पर पहुंचकर, पंकज को उठाकर उपचार के लिए चिकित्सालय में लाया, जो कि-परिवादी अपने पुत्र के इलाज में लगा रहा, परिवादी के पुत्र के द्वारा, अनावेदक संस्था के टोल फ्री नंबर पर दूसरे दिन दिनांक-28.07.2012 को खुद के मोबार्इल से सूचना दिया था, पुलिस थाना में दिनांक-27.07.2012 को सूचना दर्ज हो गर्इ थी, फिर अनावेदक बीमा कम्पनी षाखा से संपर्क कर, विधिवत घटना की रिपोर्ट अधिकृत सर्विस सेन्टर, कुणाल मोटर्स द्वारा प्रस्तावित 98,000-रूपये के मूल बिल सहित और संपूर्ण दस्तावेजों के साथ दावा पेष किया, जिसे अनावेदक के द्वारा पर्याप्त पूछतांछ कर, संतुशिट पष्चात प्राप्त किया गया, अनावेदक द्वारा, सर्वेयर नियुक्त किया गया, सर्वेयर ने घटना की जांच व निरीक्षण के बाद आंकलन अनुसार, वाहन की क्षति की पुशिट कर, आंकलित राषि प्रदान करने बाबद अनुमोदित किया, लेकिन अनावेदक के द्वारा असत्य व निराधार कारणों पर, बिना परिवादी को सुने ही दावा अस्वीकार कर, सूचना में 25 दिन का विलम्ब होने का पत्र प्रेशित किया। जबकि-घटना के दूसरे दिन ही टोलफ्री नंबर पर, परिवादी के पुत्र द्वारा सूचना दी गर्इ थी और अधिकृत सर्विस सेन्टर, कुणाल मोटर्स द्वारा भी सूचना दी गर्इ थी, जो कि-बीमित वाहन की दुर्घटना में हुर्इ क्षति की प्रतिपूर्ति हेतु दायित्वाधीन होते हुये भी परिवादी का दावा निरस्त कर, परिवादी के प्रति-सेवा में कमी की गर्इ है। अत: क्लेम राषि व हर्जाना चाहा गया है।
(4) स्वीकृत तथ्यों के अलावा, परिवाद के तथ्यों से इंकार करते हुये, अनावेदक के जवाब का सार यह है कि-दुर्घटना में वाहन के टूटफूट का दावा परिवादी द्वारा पेष किया गया था, जिसकी बीमा कम्पनी ने अपने सर्वेयर से जांच कराया था, जो कि-परिवादी द्वारा पेष दस्तावेजों के आधार पर यह पाया गया कि-दुर्घटना की प्रथम सूचना रिपोर्ट करीब 25 दिन विलम्ब से दी गर्इ है, जबकि-पालिसी षर्तों का उल्लघंन होने के फलस्वरूप, दावा निरस्त किया गया। परिवादी के प्रति-कोर्इ सेवा में कमी नहीं की गर्इ है। और इस फोरम में परिवाद सुनवार्इ का क्षेत्राधिकार नहीं।
(5) मामले में निम्न विचारणीय प्रष्न यह हैं कि:-
(अ) क्या परिवाद इस जिला फोरम की क्षेत्रीय
श्रवण अधिकारिता का है?
(ब) क्या अनावेदक बीमा कम्पनी द्वारा, परिवादी के
क्लेम को अस्वीकार किया जाना अनुचित होकर,
परिवादी के प्रति की गर्इ सेवा में कमी है?
(स) क्या परिवादी क्लेम राषि व हर्जाना अनावेदक
से पाने का अधिकारी है?
(द) सहायता एवं व्यय?
-:सकारण निष्कर्ष:-
विचारणीय प्रष्न क्रमांक-(अ) :-
(6) क्योंकि परिवादी को बीमा पालिसी जारी करने वाला, अनावेदक बीमा कम्पनी का षाखा कार्यालय सिवनी में है, अनावेदक की उक्त षाखा के प्रबंधक द्वारा ही परिवादी के क्लेम अस्वीकृति का पत्र जारी किया गया है, तो परिवादी से पालिसी का समव्यवहार करने वाला अनावेदक बीमा कम्पनी का षाखा कार्यालय इस जिला पीठ की स्थानीय क्षेत्रीय अधिकारिता का होने के कारण, परिवाद के श्रवण की क्षेत्रीय अधिकारिता इस पीठ को है, इसलिए परिवाद संधारणीय है। तदानुसार विचारणीय प्रष्न क्रमांक-'अ को निश्कर्शित किया जाता है।
विचारणीय प्रष्न क्रमांक-(ब):-
(7) परिवादी की ओर से पेष प्रदर्ष सी-4 डेली स्टेषन डायरी से यह स्पश्ट है कि-दिनांक-27.07.2012 को उक्त दुर्घटना होने की सूचना पुलिस को दी थी व मौके पर वाहन पलटा हुआ, रोड के किनारे पाया गया था, जबकि-परिवादी के पुत्र- पंकज ठाकुर को अस्पताल में लाकर उससे पूछतांछ की गर्इ जिसने गाड़ी का अगला टायर पंचर होकर, असंतुलित होना बताया और इस आषय का आवेदन भी पुलिस को पेष किया गया और उसकी चोटों का मुलाहिजा भी पुलिस द्वारा कराया गया, सर्वेयर की रिपोर्ट प्रदर्ष आर-9 जो बीमा कम्पनी की ओर से पेष की गर्इ है, उससे भी स्पश्ट है कि-परिवादी के द्वारा प्रथम सूचना रिपोर्ट की प्रति और ड्रायवर के ड्रायविंग लार्इसेंस, वाहन के रजिस्ट्रेषन विवरण आदि सब दस्तावेज जो पेष किये गये थे, उन्हें जांच में सही और समुचित पाये गये, परिवादी-पक्ष की ओर से भी प्रदर्ष सी-2 और सी-3 के रिपोर्ट में ड्रायविंग लार्इसेंस व वाहन का रजिस्ट्रेषन पेष किया गया है।
(8) प्रदर्ष सी-1 व प्रदर्ष आर-6, आर-7 से स्पश्ट है कि-दुर्घटना की सूचना 25 दिन विलम्ब से दिया जाना लेख करते हुये, दावा अस्वीकार कर दिया गया, लेकिन लिखित सूचना अनावेदक को कब प्राप्त हुर्इ थी, इस संबंध में न तो परिवादी के कथित क्लेम सूचना की प्रति पेष की गर्इ है और क्लेम सूचना किस तारिख को प्राप्त हुर्इ, ऐसा कोर्इ प्रमाण भी पेष नहीं। तो सूचना 25 दिन के विलम्ब से प्राप्त होने बाबद गणना का कोर्इ आधार अनावेदक-पक्ष की ओर से न तो क्लेम अस्वीकृति-पत्र में लेख किया गया है, न ही इस पीठ के समक्ष पेष किया गया है।
(9) अनावेदक-पक्ष की ओर से माननीय राश्ट्रीय आयोग के रिवीजन पिटीषन नंबर-19642013, आदेष दिनांक-18 फरवरी-2014 रामप्रसाद विरूद्ध एलियांज जनरल इंष्योरेंस कम्पनी व अन्य की जो फोटोप्रति पेष की गर्इ है, वह वाहन चोरी हो जाने की घटना की पुलिस को रिपोर्ट व बीमा कम्पनी को सूचना देने में हुये विलम्ब को बीमा षर्त का महत्वपूर्ण व आधारभूत भंग होने के आधार पर, क्लेम अस्वीकृति को उपयुक्त मानेजाने के संबंध में है, परन्तु प्रस्तुत मामला वाहन की चोरी की घटना का नहीं है, क्योंकि वाहन चोरी की घटना में वाहन को कुछ दिनों के अंदर ही खुर्दबुर्द किया जा सकने और दूर तक पहुंचा सकने की संभावनायें रहती हैं और तुरंत पतासाजी का अवसर पुलिस व बीमा कम्पनी को प्राप्त न हो पाना महत्वपूर्ण होता है, जबकि-दुर्घटना के वाहन क्षति के मामलों में ऐसी कोर्इ परिसिथतियां नहीं होती और इसलिए न्यायदृश्टांत-2012 (भाग-4) सी0पी0जे0 820 (राश्ट्रीय आयोग) ताराचन्द्र वर्मा बनाम नेषनल इंष्योरेंस कम्पनी लिमिटेड के मामले में माननीय राश्ट्रीय आयोग द्वारा, वाहन के दुर्घटना की क्षति क्लेम के मामले में यह स्पश्ट कर दिया गया है कि- बीमा पालिसी की षर्त नंबर-1 जो तत्काल सूचना के बारे में है, वह वाहन के दुर्घटना में क्षतिग्रस्त होने के मामलों में उतनी महत्वपूर्ण नहीं, जितनी की वाहन चोरी की घटना के क्लेम के संबंध में महत्वपूर्ण होती है।
(10) स्पश्ट है कि-दुर्घटना से वाहन के क्षति के मामले में तुरंत सूचना की षर्त बाबद पक्षकार बीमा कम्पनी के क्लेम की जांच व अनुसंधान के हित पर पड़ने वाला प्रभाव महत्वपूर्ण है, जो कि-ऐसी सूचना के विलंब का महत्व कितना होगा यह प्रत्येक मामले के तथ्य व परिसिथतियों पर निर्भर होगा।
(11) प्रस्तुत मामले में सर्वेयर की रिपोर्ट प्रदर्ष आर-9 में सर्वेयर ने जो जांच व विष्लेशण किया है, उससे यह स्पश्ट है कि-सर्वेयर ने गैरिज में जाकर क्षतिग्रस्त वाहन का निरीक्षण किया और जिस तरह की वाहन में क्षतियां थीं, उसके आधार पर दुर्घटना का कारण व प्रकृति जो क्लेम आवेदन में दर्षार्इ गर्इ थी, उसकी पुशिट करते हुये वह संतुश्ट भी हुआ, तो घटना का कारण, प्रकृति और क्षति का मूल्याकंन किये जा सकने बाबद कोर्इ भी विपरीत प्रभाव अनावेदक बीमा कम्पनी के अवसर व हित पर प्रस्तुत मामले में कतर्इ नहीं पड़ा है और सूचना देने में वास्तव में 25 दिन का विलम्ब हुआ हो, ऐसा अनावेदक बीमा कम्पनी स्थापित भी नहीं कर सकी है, तो मात्र तकनीकी आधार लेकर परिवादिया का क्लेम अस्वीकार कर दिया जाना निषिचत रूप से ही अनुचित व मनमाना होकर, परिवादिया के प्रति की गर्इ सेवा में कमी है। तदानुसार विचारणीय प्रष्न क्रमांक-'ब को निश्कर्शित किया जाता है।े
विचारणीय प्रष्न क्रमांक-(स):-
(12) ऐसे में वास्तव में अनावेदक बीमा कम्पनी द्वारा सर्वेयर रिपोर्ट प्रदर्ष आर- 9 दिनांक-1 मार्च-2013 के आधार पर सर्वेयर द्वारा आंकलित क्लेम भुगतान योग्य राषि 69,698-रूपये का क्लेम स्वीकार करते हुये, परिवादी को तत्काल भुगतान किया जाना चाहिये था और ऐसा भुगतान 1 मार्च 2013 की सर्वेयर रिपोर्ट प्राप्त होने से 15-20 दिन के अंदर कर दिया जाना चाहिये था, जबकि-अनावेदक बीमा कम्पनी ने 10 जुलार्इ-2013 को क्लेम अस्वीकृति का पत्र भेजा, ऐसे में परिवादी, अनावेदक से 69,698-रूपये सर्वेयर द्वारा आंकलित राषि व उक्त राषि पर हर्जाने के रूप में 1 अप्रैल-2013 से भुगतान दिनांक तक की अवधि का 9 प्रतिषत वार्शिक ब्याज की दर से ब्याज अदा करने का पात्र है। तदानुसार विचारणीय प्रष्न क्रमांक-'स को निश्कर्शित किया जाता है।
विचारणीय प्रष्न क्रमांक-(द):-
(13) विचारणीय प्रष्न क्रमांक-'अ से 'स के निश्कर्श के आधार पर, मामले में निम्न आदेष पारित किया जाता है:-
(अ) अनावेदक द्वारा, परिवादी का क्लेम अनुचित रूप से
अस्वीकार कर, उसके प्रति-सेवा में कमी की है तथा
अनावेदक, परिवादी को सर्वेयर द्वारा आंकलित राषि
69,698-रूपये (उन्हत्तर हजार छै सौ अन्ठानवे रूपये)
व उक्त राषि पर 1 अप्रैल-2013 से भुगतान दिनांक
तक की अवधि का 9 प्रतिषत वार्शिक ब्याज की दर से
ब्याज के रूप में हर्जाना अदा करे।
(ब) अनावेदक स्वयं का कार्यवाही-व्यय वहन करेंगे
और परिवादिया को कार्यवाही व्यय के रूप में 2,000-
रूपये (दो हजार रूपये) अदा करे।
मैं सहमत हूँ। मेरे द्वारा लिखवाया गया।
(श्री वीरेन्द्र सिंह राजपूत) (रवि कुमार नायक)
सदस्य अध्यक्ष
जिला उपभोक्ता विवाद जिला उपभोक्ता विवाद
प्रतितोषण फोरम,सिवनी प्रतितोषण फोरम,सिवनी
(म0प्र0) (म0प्र0)
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