राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, उ0प्र0, लखनऊ।
सुरक्षित
अपील संख्या-2080/2002
(जिला उपभोक्ता फोरम, कानपुर नगर द्वारा परिवाद संख्या-577/95 में पारित निर्णय दिनांक 25.07.2002 के विरूद्ध)
मै0 बी.एल.फोटो ट्रेड इण्डस्ट्रीज, 6 अपट्रान इस्टेट पनकी
कानपुर। .....अपीलार्थी/परिवादी
बनाम
युनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लि0, आफिस 17/23 महात्मा गांधी
रोड। ......प्रत्यर्थी/विपक्षी
समक्ष:-
1. मा0 श्री राजेन्द्र सिंह, सदस्य।
2. मा0 श्री सुशील कुमार, सदस्य।
अपीलार्थी की ओर से उपस्थित : श्री एम0एच0 खान, विद्वान
अधिवक्ता।
प्रत्यर्थी की ओर से उपस्थित : सुश्री अलका सक्सेना, विद्वान
अधिवक्ता।
दिनांक 11.01.2022
मा0 श्री सुशील कुमार, सदस्य द्वारा उदघोषित
निर्णय
1. परिवाद संख्या 577/95 मै0 बी.एल. फोटो ट्रेड इंडस्ट्रीज बनाम युनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लि0 में पारित निर्णय व आदेश दिनांक 25.07.2002 के विरूद्ध यह अपील प्रस्तुत की गई है। इस निर्णय व आदेश द्वारा परिवाद खारिज कर दिया गया है।
2. परिवाद के तथ्य संक्षेप में इस प्रकार हैं कि एम.एस वायर का कच्चा सामान 12 मीट्रिक टन, जिसका मूल्य रू. 156000/- था, पंजाब नेशनल बैंक शाखा शास्त्री नगर को बंधक रखा गया और इस माल की सुरक्षा के लिए दि. 24.02.92 से 23.02.93 तक के लिए बीमा पालिसी प्राप्त की थी। दि. 9/10.8.92 को 12 मीट्रिक टन वायर की चोरी हो गई तथा प्लांट मशीनरी भी चोरी चली गई। थाना पनकी में रिपोर्ट लिखाई गई, पुलिस
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द्वारा दि. 31.07.93 को अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। प्लांट एवं मशीनरी के लिए बीमा क्लेम प्रस्तुत किया गया। बीमा कंपनी ने अंकन रू. 14900/- की राशि कटौती करते हुए बीमा क्लेम स्वीकार किया और चेक द्वारा भुगतान भी हो गया, परन्तु एम.एस वायर के क्लेम का भुगतान नहीं किया गया।, इसलिए परिवाद प्रस्तुत किया गया।
3. बीमा कंपनी का कथन है कि दि. 14.06.95 के आदेश द्वारा बीमा क्लेम निरस्त किया गया है। एफ.आई.आर. में 8 मीट्रिक टन वायर चोरी होने का उल्लेख है, जबकि परिवाद में 12 मीट्रिक टन चोरी होना लिखा गया है। यह भी उल्लेख किया गया है कि वादी ने दि. 15.10.83 से उत्पादन शुरू किया, जबकि बीमा पालिसी दि. 14.02.91 से 23.02.92 के लिए थी, जिसका नवीनीकरण दि. 23.02.93 के लिए कराया गया। यह पालिसी केवल कच्चे सामान के लिए थी, कैसेट, टेप रिकार्डर, फोटोग्राफ, आटोमेटिक लाइट फिटिंग के लिए नहीं थी। वादी ने जिस व्यापार के लिए लाइसेन्स लिया उसके विपरीत निर्माण कार्य प्रारंभ किया, व्यापार की प्रकृति बदल दी गई। वादी ने एम.एस वायर निर्माण के स्थान पर बिक्री करने में लग गया, इसलिए दावा निरस्त करने योग्य है।
4. दोनों पक्षकारों के साक्ष्य पर विचार करने के पश्चात जिला उपभोक्ता मंच द्वारा यह निष्कर्ष दिया गया कि बीमा कंपनी ने बीमा क्लेम नकारने में कोई गलती नहीं की है, क्योंकि वायर चोरी होने का तथ्य संदेह से परे साबित नहीं है। एफ.आई.आर. में भी चोरी किए माल का विवरण प्रस्तुत नहीं किया है। तदनुसार परिवाद खारिज कर दिया गया।
5. इस निर्णय व आदेश के विरूद्ध अपील इन आधारों पर प्रस्तुत की गई है कि जिला उपभोक्ता मंच द्वारा विधि विरूद्ध निर्णय पारित किया
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गया है। चोरी की प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। विवेचक ने चोरी होना माना, परन्तु अभियुक्त को नहीं खोजा जा सका, इसलिए अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत की गई जो कानपुर स्थित महानगर मजिस्ट्रेट के न्यायालय द्वारा स्वीकार कर ली गई, इसलिए बीमा कंपनी बीमा क्लेम अदा करने के लिए उत्तरदायी है। एम.एस वायर कच्चे माल के रूप में प्रयोग होता था, इस तथ्य की दस्तावेजी साक्ष्य जिला उपभोक्ता मंच के समक्ष प्रस्तुत की गई थी, परन्तु साक्ष्य को विचार में नहीं लिया गया, इसलिए जिला उपभोक्ता मंच द्वारा पारित निर्णय अपास्त होने योग्य है और परिवादी बीमा क्लेम की राशि पर 18 प्रतिशत ब्याज सहित प्राप्त करने के लिए अधिकृत है।
6. दोनों पक्षकारों के विद्वान अधिवक्ताओं को सुना। प्रश्नगत निर्णय/आदेश व पत्रावली का अवलोकन किया गया।
7. अपीलार्थी के विद्वान अधिवक्ता का तर्क है कि विवेचनाधिकारी ने चोरी होना साबित माना है। चोर का पता न लगने के कारण एफ.आई.आर. प्रस्तुत की गई है, जो स्वीकार कर ली गई है, इसलिए बीमा क्लेम अदा किया जाना चाहिए था।
8. प्रत्यर्थी के विद्वान अधिवक्ता का तर्क है कि प्रथम सूचना रिपोर्ट में केवल 8 मीट्रिक टन चोरी होने का उल्लेख है, जबकि परिवाद पत्र में 12 मीट्रिक टन एम.एस वायर चोरी होने का कथन किया गया है। चोरी का तथ्य स्थापित नहीं है, इसलिए जिला उपभोक्ता मंच द्वारा पारित निर्णय विधिसम्मत है।
9. परिवाद पत्र में बीमासुदा समस्त माल जो 12 मीट्रिक टन चोरी होने का उल्लेख है, जिसका मूल्य रू. 156000/- था। बीमा क्लेम नकारने का पत्र
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पत्रावली पर एनेक्सर संख्या 2 मौजूद है, इस पत्र के अवलोकन से ज्ञात होता है कि बीमा क्लेम इस आधार पर नहीं नकारा गया है कि चोरी की घटना संदिग्ध है या प्रथम सूचना रिपोर्ट में गलत वजन का सामान लिखा गया है। यथार्थ में बीमा क्लेम इस आधार पर नकारा गया है कि एम.एस वायर का लाइसेन्स दि. 25.05.91 को लिया गया और इस तथ्य को बीमा कंपनी को अवगत नहीं कराया गया। पालिसी के नवीनीकरण के समय भी इस तथ्य को नहीं बताया गया था, इसलिए एम.एस वायर के संबंध में कोई बीमाकृत लाभ आपको(परिवादी) को प्राप्त नहीं हैं। एनेक्सर-6 में उल्लेख है कि मूल रूप से कच्चे माल के लिए बीमा पालिसी जारी की गई थी। प्रारंभ में पालिसी दि. 24.02.91 से 23.02.92 की अवधि के लिए थी, जबकि एम.एस वायर के लिए लाइसेन्स दि. 25.05.91 को जारी हुआ है। इस पालिसी के नवीनीकरण के समय इस नए तथ्य को बीमा कंपनी को नहीं बताया गया तथा बीमा पालिसी में कोई परिवर्तन भी नहीं कराया गया, इसलिए जिस पालिसी का नवीनीकरण के समय कराया गया, उसमें एम.एस वायर का कोई उल्लेख नहीं किया गया, अत: जिला उपभोक्ता मंच द्वारा पारित निर्णय में हस्तक्षेप करना उचित प्रतीत नहीं होता है। तदनुसार अपील खारिज होने योग्य है।
आदेश
अपील खारिज की जाती है।
उभय पक्ष अपना-अपना अपीलीय व्यय स्वयं वहन करेंगे।
आशुलिपिक से अपेक्षा की जाती है कि वह इस आदेश को आयोग की
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वेबसाइड पर नियमानुसार यथाशीघ्र अपलोड कर दें।
(राजेन्द्र सिंह) (सुशील कुमार) सदस्य सदस्य
निर्णय आज खुले न्यायालय में हस्ताक्षरित, दिनांकित होकर उद्घोषित किया गया।
(राजेन्द्र सिंह) (सुशील कुमार) सदस्य सदस्य
राकेश, पी0ए0-2
कोर्ट-2