Uttar Pradesh

StateCommission

A/2010/276

Post Office - Complainant(s)

Versus

Tulsi Ram Maurya - Opp.Party(s)

Dr. Uday Veer Singh

23 May 2018

ORDER

STATE CONSUMER DISPUTES REDRESSAL COMMISSION, UP
C-1 Vikrant Khand 1 (Near Shaheed Path), Gomti Nagar Lucknow-226010
 
First Appeal No. A/2010/276
( Date of Filing : 17 Feb 2010 )
(Arisen out of Order Dated in Case No. of District State Commission)
 
1. Post Office
a
...........Appellant(s)
Versus
1. Tulsi Ram Maurya
a
...........Respondent(s)
 
BEFORE: 
 HON'BLE MR. Vijai Varma PRESIDING MEMBER
 HON'BLE MR. Raj Kamal Gupta MEMBER
 
For the Appellant:
For the Respondent:
Dated : 23 May 2018
Final Order / Judgement

सुरक्षित

 

राज्‍य उपभोक्‍ता विवाद प्रतितोष आयोग, उ0प्र0, लखनऊ।

अपील संख्‍या-276/2010

(जिला उपभोक्‍ता फोरम, फैजाबाद द्वारा परिवाद संख्‍या-148/2005 में पारित निर्णय/आदेश दिनांक 12.10.2009 के विरूद्ध)

 

1. सीनियर सुप्रीटेण्‍डेण्‍ट आफ पोस्‍ट आफिसेज, फैजाबाद डिवीजन, फैजाबाद।

2. पोस्‍ट मास्‍टर जनरल, यू0पी0 सर्कल, लखनऊ।

3. सीनियर पोस्‍ट मास्‍टर, एचपीओ, सिविल लाइन्‍स, फैजाबाद।

4. ब्रांच पोस्‍ट मास्‍टर, सब पोस्‍ट आफिस, सिटी चौक, कनक सिनेमा, फैजाबाद।

5. ब्रांच पोस्‍ट मास्‍टर, सब पोस्‍ट आफिस, चिकित्‍सालय, नियांवा रोड, फैजाबाद।

6. यूनियन आफ इण्डिया, द्वारा सेक्रेटरी, मिनिस्‍ट्री आफ कम्‍यूनिकेशन, नई दिल्‍ली।

                             अपीलार्थीगण/विपक्षी संख्‍या-1 त 6

बनाम्     

1. तुलसी राम मौर्य पुत्र स्‍व0 जगन्‍नाथ प्रसाद मौर्य।

2. कुं0 पुष्‍पा पुत्री श्री तुलसी राम मौर्य, निवासी मकान नं0-2151/41, मोहल्‍ला खण्‍डारी बाजार, जिला फैजाबाद।

                                     प्रत्‍यर्थीगण/परिवादीगण

समक्ष:-

1. माननीय श्री विजय वर्मा, पीठासीन सदस्‍य।

2. माननीय श्री राज कमल गुप्‍ता, सदस्‍य।

अपीलार्थीगण की ओर से      : डा0 उदय वीर सिंह, विद्वान अधिवक्‍ता।

प्रत्‍यर्थीगण की ओर से         : सुश्री रेहाना खान, विद्वान अधिवक्‍ता।

 

दिनांक 04.07.2018

मा0 श्री विजय वर्मा, पीठासीन सदस्‍य द्वारा उदघोषित

निर्णय

यह अपील, विद्वान जिला फोरम, फैजाबाद द्वारा परिवाद संख्‍या-148/2005 में पारित निर्णय/आदेश दिनांक 12.10.2009 के विरूद्ध विपक्षी संख्‍या-1 त 6/अपीलार्थीगण की ओर से योजित की गयी है।

अपील से सम्‍बन्धित मुख्‍य तथ्‍य इस प्रकार हैं कि प्रत्‍यर्थीगण/परिवादीगण द्वारा वर्ष 2002 में माह जनवरी से माह अप्रैल के बीच राष्‍ट्रीय बचत पत्र व किसान विकास पत्र अपीलार्थी संख्‍या-4, 5/विपक्षी संख्‍या-5, 6 के यहां से क्रय किये गये थे, जिनका विवरण परिवाद पत्र में प्रत्‍यर्थीगण/परिवादीगण द्वारा दर्शाया गया है। प्रत्‍यर्थी संख्‍या-1/परिवादी संख्‍या-1, तुलसी राम मौर्य द्वारा 1,00,000/- रू0 मूल्‍य के राष्‍ट्रीय बचत पत्र स्‍वंय व अपनी पुत्र वधु रानी मौर्य के नाम से लिये गये थे तथा 1,00,000/- रू0 के किसान विकास पत्र प्रत्‍यर्थी संख्‍या-1/परिवादी संख्‍या-1, तुलसी राम मौर्य ने स्‍वंय व अपनी पुत्री कुं0 रेनू के नाम से लिये थे एवं 3,00,000/- रू0 के किसान विकास पत्र प्रत्‍यर्थी संख्‍या-1/परिवादी संख्‍या-1, तुलसी राम मौर्य ने स्‍वंय व अपनी पुत्री कुं0 पुष्‍पा के नाम से लिये थे। दिनांक 07.08.2000 को प्रत्‍यर्थी संख्‍या-1/परिवादी संख्‍या-1, तुलसी राम मौर्य उपरोक्‍त सभी राष्‍ट्रीय बचत पत्र एवं किसान विकास पत्रों को अपने झोले में रखकर के आयकर विभाग में उनकी छायाप्रतियां जमा करने जा रहा था, जहां रास्‍ते में चौक क्षेत्र में उक्‍त सभी राष्‍ट्रीय बचत पत्र व किसान विकास पत्र गिर गये, जिनकी परिवादी संख्‍या-1 द्वारा दो दिनों तक तलाश की गयी, किन्‍तु जब उक्‍त अभिलेख उन्‍हें प्राप्‍त नहीं हुए तो उन्‍होंने दिनांक 09.08.2000 को इसकी सूचना संबंधित डाकघर में दी। परिवादी संख्‍या-1 से आवश्‍यक शुल्‍क जमा कराया गया और साथ ही आवश्‍यक प्रपत्र भी भराया गया। सम्‍पूर्ण कार्यवाही पूर्ण कराने के बावजूद भी उन्‍हें कोई संतोषजनक उत्‍तर न मिलने के कारण उनके द्वारा दिनांक 10.04.2001 को थाने में सूचना अंकित करायी गयी। परिवादी संख्‍या-1 से जमानतदार की दस लाख रूपये के हैसियत की सालवेन्‍सी प्रमाण पत्र प्रस्‍तुत करने हेतु कहा गया, जिसे परिवादी संख्‍या-1 द्वारा जमा भी कर दिया गया। सम्‍पूर्ण कार्यवाही किये जाने के बावजूद भी परिवादीगण को राष्‍ट्रीय बचत पत्र व किसान विकास पत्रों की द्वितीय प्रति उपलब्‍ध नहीं करायी गयी, जिसके कारण उनके द्वारा उच्‍च अधिकारियों से शिकायत भी की गयी, जिस पर पुन: जांच की गयी। अंतत: अपीलार्थी संख्‍या-5/विपक्षी संख्‍या-6 के द्वारा परिवादी संख्‍या-1 को संबंधित राष्‍ट्रीय बचत पत्र व किसान विकास पत्र की द्वितीय प्रति उपलब्‍ध करायी, किन्‍तु परिवादी संख्‍या-1 जब अपीलार्थी संख्‍या-4/विपक्षी संख्‍या-5 के पास गया तो उसके द्वारा यह कहा गया कि जब आप विपक्षी संख्‍या-7 व 8 के खिलाफ की गयी लिखित शिकायत को वापस नहीं लेंगे तब तक उसे द्वितीय प्रति नहीं दी जायेगी और उसे अनावश्‍यक परेशान किया गया साथ ही सुविधा शुल्‍क भी मांगा गया, जिससे क्षुब्‍ध होकर एक परिवाद जिला फोरम, फैजाबाद में दायर किया गया, जहां पर विपक्षीगण द्वारा अपना प्रतिवाद पत्र दायर करते हुए प्रत्‍यर्थीगण/परिवादीगण द्वारा राष्‍ट्रीय बचत पत्र एवं किसान विकास पत्रों, जिनका विवरण परिवाद पत्र में दिया गया है, को विपक्षीगण से लिया जाना स्‍वीकार करते हुए और अन्‍य तथ्‍यों को इंकार करते हुए मुख्‍यत: यह कथन किया गया है कि परिवादीगण द्वारा सम्‍पूर्ण औपचारिकतायें पूर्ण नहीं कराई जा सकी, जिस कारण से परिवादीगण को द्वितीय अनुलिपि जारी नहीं किये जा सके। उप डाकघर, जनपद चिकित्‍सालय के डाकपाल ने अपने हस्‍ताक्षर करने के बाद अनुलिपि को निर्गत कर दी थी। उप डाकघर फैजाबाद ने भी परिवादीगण को सम्‍बन्धित अनुलिपियों को प्राप्‍त करने के लिए नोटिस जारी किया, किन्‍तु परिवादीगण द्वारा अनुलिपि पत्र प्राप्‍त करने हेतु उपस्थित नहीं हुआ। इस प्रकार विपक्षीगण द्वारा कोई भी सेवा में कमी नहीं की गयी है, अत: परिवाद निरस्‍त किये जाने योग्‍य है।

उभय पक्ष को सुनने के उपरान्‍त विद्वान जिला फोरम द्वारा दिनांक 12.10.2009 को निम्‍नवत् आदेश पारित किया गया :-

'' परिवाद परिवादीगण के पक्ष में निर्णीत किया जाता है। विपक्षी सं0 5 को आदेशित किया जाता है कि वह परिवादीग को उसकी एन0एस0सी0 एवं के0वी0पी0 की अनुलिपि तथा क्षतिपूर्ति मु0 15000/- रू0 एवं वाद व्‍यय मु0 1000/- रू0 एक हजार रूपया एक माह के अन्‍दर अदा करे। ''

उपरोक्‍त आदेश से क्षुब्‍ध होकर अपीलार्थीगण/विपक्षी संख्‍या-1 त 6 द्वारा यह अपील मुख्‍यत: इन आधारों पर दायर की गयी है कि अपीलार्थीगण द्वारा परिवादीगण से संबंधित राष्‍ट्रीय बचत पत्र एवं किसान विकास पत्रों की अनुलिपि प्राप्‍त करने हेतु कहा गया, किन्‍तु परिवादीगण द्वारा उक्‍त अनुलिपियों को प्राप्‍त करने के बजाय विद्वान जिला फोरम में प्रश्‍नगत परिवाद दायर कर दिया गया। इस प्रकार अपीलार्थीगण द्वारा कोई भी सेवा में कमी नहीं की गयी है। विद्वान जिला फोरम द्वारा तथ्‍यों एवं साक्ष्‍यों के विरूद्ध जाकर निर्णय पारित किया गया है, जो निरस्‍त होने और अपील स्‍वीकार किये जाने योग्‍य है।

 अपीलार्थीगण की ओर से विद्वान अधिवक्‍ता डा0 उदय वीर सिंह तथा प्रत्‍यर्थी की ओर से विद्वान अधिवक्‍ता सुश्री रेहाना खान उपस्थित आये। उभय पक्ष के विद्वान अधिवक्‍तागण को विस्‍तार से सुना गया एवं प्रश्‍नगत निर्णय/आदेश तथा उपलब्‍ध अभिलेखों का गम्‍भीरता से परिशीलन किया गया।

इस प्रकरण में यह तथ्‍य निर्विवादित है कि परिवादीगण द्वारा परिवाद में उल्लिखित राष्‍ट्रीय बचत पत्र एवं किसान विकास पत्र अपीलार्थीगण संख्‍या-4 एवं 5/विपक्षीगण संख्‍या-5 एवं 6 से क्रय किये गये थे। यह तथ्‍य भी निर्विवादित है कि परिवादीगण के द्वारा उपरोक्‍त सभी राष्‍ट्रीय बचत पत्र एवं किसान विकास पत्र के खो जाने पर आवश्‍यक प्रक्रिया परिवादीगण द्वारा अपनायी गयी थी। विवादित बिन्‍दु मात्र यह है कि अपीलार्थीगण के अनुसार उपरोक्‍त राष्‍ट्रीय बचत पत्र एवं किसान विकास पत्र की अनुलिपियां जारी करने में उनके द्वारा किसी भी प्रकार की सेवा में कमी नहीं की गयी है, बल्कि जो भी देरी हुई है, वह वास्‍तविकता में परिवादीगण द्वारा औपचारिकतायें देरी से पूर्ण करने के कारण हुई हैं, इस कारण उनके स्‍तर पर किसी भी प्रकार की सेवा में कमी नहीं हुई है, जबकि प्रत्‍यर्थीगण के अनुसार उनके द्वारा सम्‍पूर्ण प्रक्रिया एवं औपचारिकतायें पूर्ण करने के बाद भी अपीलार्थीगण संख्‍या-4 एवं 5/विपक्षीगण संख्‍या-5 एवं 6 द्वारा उन्‍हें राष्‍ट्रीय बचत पत्र एवं किसान विकास पत्र की अनुलिपियां उपलब्‍ध नहीं करायी गयीं। इस प्रकार उनके द्वारा सेवा में कमी की गयी है।

अब यह देखा जाना है कि क्‍या अपीलार्थीगण संख्‍या-4 एवं 5/विपक्षीगण संख्‍या-5 एवं 6 द्वारा परिवादीगण को राष्‍ट्रीय बचत पत्र एवं किसान विकास पत्र की अनुलिपियां जारी करने में अनावश्‍यक विलम्‍ब किया गया है तथा अपीलार्थीगण संख्‍या-4 एवं 5/विपक्षीगण संख्‍या-5 एवं 6 द्वारा परिवादीगण को  राष्‍ट्रीय बचत पत्र एवं किसान विकास पत्र की अनुलिपियां जारी न करके सेवा में कमी की गयी है अथवा नहीं, यदि हां तो उसका प्रभाव।

इस संबंध में उल्‍लेखनीय है कि अपीलार्थीगण/विपक्षीगण की ओर से परिवादीगण को उपरोक्‍त अनुलिपियां जारी न करके के संबंध में परिवादीगण द्वारा औपचारिकायें समय से पूर्ण न करने के संबंध में कथन किया गया है, किन्‍तु उल्‍लेखनीय है कि सम्‍पूर्ण प्रक्रिया एवं औपचारिकतायें पूर्ण करने के उपरांत अपीलार्थी संख्‍या-5/विपक्षी संख्‍या-6 द्वारा परिवादी संख्‍या-1 को उपरोक्‍त अनुलिपियां जारी कर दी गयीं है, जिन्‍हें परिवादी संख्‍या-1 द्वारा प्राप्‍त भी ली गयीं हैं, किन्‍तु अपीलार्थी संख्‍या-4/विपक्षी संख्‍या-5 द्वारा राष्‍ट्रीय बचत पत्र एवं किसान विकास पत्रों की अनुलिपियां परिवादीगण को उपलब्‍ध न कराने के संबंध में यह स्‍पष्‍टीकरण दिया गया है कि संबंधित अनुलिपियां प्राप्‍त हो गयी थीं, जिन्‍हें परिवादी संख्‍या-1 को प्राप्‍त करने हेतु कहा गया था, किन्‍तु परिवादीगण उन्‍हें प्राप्‍त करने के लिए उपस्थित नहीं आये और उनके द्वारा विद्वान जिला फोरम में प्रश्‍नगत परिवाद दायर कर दिया गया। अपीलार्थीगण की ओर से प्रस्‍तुत इस तर्क में कोई बल नहीं है, क्‍योंकि यह तर्कसंगत बात दृष्टिगत नहीं होती है कि परिवादीगण द्वारा अपीलार्थी संख्‍या-5/विपक्षी संख्‍या-6 के द्वारा निर्गत अनुलिपि प्राप्‍त कर ली जाती हैं और अपीलार्थी संख्‍या-4/विपक्षी संख्‍या-5 द्वारा निर्गत अनुलिपियां प्राप्‍त न करे। वस्‍तुत: इस संबंध में परिवादीगण की ओर से यह तर्क दिया गया है कि अपीलार्थी संख्‍या-4/विपक्षी संख्‍या-5 द्वारा परिवादीगण से विपक्षी संख्‍या-7 एवं 8 के विरूद्ध जो शिकायत की गयी थी, उसको वापस लेने का दबाव बनाया गया और यह कहा गया कि जब तक कि वह शिकायत वापस नहीं लेगें तब तक उन्‍हें अनुलिपियां हस्‍तगत नहीं करायी जायेंगी और साथ ही सुविधा शुल्‍क की भी मांग की गयी। वस्‍तुत: सम्‍पूर्ण परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए और यह देखते हुए कि अपीलार्थी संख्‍या-5/विपक्षी संख्‍या-6 के द्वारा जब राष्‍ट्रीय बचत पत्र एवं किसान विकास पत्रों की अनुलिपियां उपलब्‍ध करा दी गयी हैं तो ऐसी स्थिति में अपीलार्थी संख्‍या-4/विपक्षी संख्‍या-5 द्वारा बिना किसी कारण के परिवादीगण को उक्‍त अनुलिपियां उपलब्‍ध न कराके स्‍पष्‍ट रूप से सेवा में कमी की गयी है। अत: इस संबंध में विद्वान जिला फोरम द्वारा जो प्रश्‍नगत आदेश अपीलार्थी संख्‍या-4/विपक्षी संख्‍या-5 के विरूद्ध पारित किया गया है, उसमें किसी भी प्रकार की कोई भी विधिक त्रुटि होना दृष्टिगत नहीं होती है। अत: अपील निरस्‍त किये जाने योग्‍य है।

आदेश

 

अपील निरस्‍त की जाती है।

पक्षकारान अपना-अपना अपीलीय व्‍यय-भार स्‍वंय वहन करेंगे।

इस निर्णय/आदेश की प्रमाणित प्रतिलिपि उभयपक्ष को नियमानुसार उपलब्‍ध करा दी जाये।

 

 

 

 

  (विजय वर्मा)                          (राज कमल गुप्‍ता)

       पीठासीन सदस्‍य                                सदस्‍य

 

 

 

 

 

लक्ष्‍मन, आशु0, कोर्ट-4  

 
 
[HON'BLE MR. Vijai Varma]
PRESIDING MEMBER
 
[HON'BLE MR. Raj Kamal Gupta]
MEMBER

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