राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, उ0प्र0, लखनऊ।
मौखिक
अपील संख्या-1102/2002
जगन्नाथ प्रसाद गुप्ता पुत्र श्री गोपीचन्द्र गुप्ता निवासी मोहल्ला
बसन्तपुर निकट आजाद नर्सरी स्कूल शहर गोरखपुर।
.....अपीलार्थी@परिवादी
बनाम
दि न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लि0 शाखा सिनेमा रोड गोरखपुर द्वारा
शाखा प्रबंधक। .......प्रत्यर्थी/विपक्षी
समक्ष:-
1. मा0 श्री सुशील कुमार, सदस्य।
2. मा0 श्री विकास सक्सेना, सदस्य।
अपीलार्थी की ओर से उपस्थित : श्री बी0के0 उपाध्याय, विद्वान
अधिवक्ता।
प्रत्यर्थी की ओर से उपस्थित : श्री नीरज पालीवाल, विद्वान
अधिवक्ता।
दिनांक 11.10.2022
मा0 श्री सुशील कुमार, सदस्य द्वारा उदघोषित
निर्णय
1. परिवाद संख्या 726/07 जगन्नाथ प्रसाद गुप्ता बनाम दि न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लि0 में पारित निर्णय व आदेश दि. 02.04.02 के विरूद्ध यह अपील प्रस्तुत की गई है। जिला उपभोक्ता मंच ने वाहन दुर्घटना के पश्चात मरम्मत में आए हुए खर्च की प्रतिपूर्ति के लिए प्रस्तुत किया परिवाद इस आधार पर निरस्त कर दिया कि गाड़ी क्रय करने के पश्चात बीमा कराया गया है, इसलिए यह उपधारणा की गई कि जिस समय दुर्घटना हुई तब तक गाड़ी का बीमा नहीं था।
2. इस निर्णय व आदेश को इस आधार पर चुनौती दी गई है कि वाहन दि. 02.04.96 को क्रय किया गया। बीमा 06.04.96 को कराया। दुर्घटना दि. 08.04.96 को हुई, इसलिए दुर्घटना की तिथि से पहले ही बीमा मौजूद था। बीमा कंपनी द्वारा बीमा निरस्त करने का कोई आधार दर्शित नहीं
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किया गया है। बीमा कंपनी का यह कथन नहीं है कि बीमा कराने से पूर्व दुर्घटना हो चुकी थी, इसलिए जिला उपभोक्ता मंच की उपधारणा विधि के अंतर्गत स्वीकार नहीं हो सकती कि बीमा कराने से पूर्व वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो चुका था, अत: इस बिन्दु पर दिया गया निष्कर्ष अपास्त होने योग्य है।
3. अब इस बिन्दु पर विचार किया जाता है कि परिवादी किस राशि की क्षतिपूर्ति प्राप्त करने के लिए अधिकृत है। परिवाद पत्र में स्पष्ट रूप से कथन किया गया है कि गोरखपुर की तरफ से गाड़ी ट्रक वाहन के टैम्पो को टक्कर मारते हुए निकल गया, जिसके कारण बाई साइड में काफी क्षति कारित हुई है, जो स्टीमेट बनाया गया है वह अंकन रू. 12050/- का है ओर 2100/- रूपये का सामान क्रय किया गया है, जो सामान क्रय किया गया है उसका कुल मूल्य रू. 2100/- है, परन्तु जो शेष कार्य दर्शाया गया है उसमें किसी उपकरण का उपयोग नहीं हुआ है और अनेक बार- बाडी फिटिंग के मद में वसूली गई राशि का उल्लेख किया गया है। ऐसा प्रतीत होता है कि स्टीमेट बढ़ा-चढ़ाकर तैयार किया गया है, इसलिए स्टीमेट को हमेशा स्वीकार किए जाने वाला नहीं है। परिवाद पत्र में जिस प्रकृति की क्षति बताई गई है उसके अनुसार क्षति की पूर्ति का आदेश देना विधिसम्मत है। परिवाद पत्र में स्पष्ट कथन किया गया है कि प्रश्नगत टैम्पो के बाई साइट में टक्कर मारी गई, जिस कारण टैम्पो क्षतिग्रस्त हुआ है। बाईं साइड की टक्कर मारने में 17 स्थानों पर मरम्मत दर्शित किए जाने का कोई आचित्य जाहिर नहीं होता है, इसलिए इस मद में केवल रू. 5000/- की क्षतिपूर्ति का आदेश देना विधिसम्मत है, तदनुसार दोनों मदों में रू. 70100/- की क्षतिपूर्ति अदा किया जाना उचित है।
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आदेश
4. अपील आंशिक रूप से स्वीकार की जाती है। प्रत्यर्थी बीमा कंपनी को आदेशित किया जाता है कि परिवादी को अंकन रू. 70100/- परिवाद प्रस्तुत करने की तिथि से भुगतान की तिथि तक 07 प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर से ब्याज के साथ अदा करें।
आशुलिपिक से अपेक्षा की जाती है कि वह इस आदेश को आयोग की वेबसाइड पर नियमानुसार यथाशीघ्र अपलोड कर दें।
(विकास सक्सेना) (सुशील कुमार) सदस्य सदस्य
राकेश, पी0ए0-2
कोर्ट-3