Madhya Pradesh

Seoni

40/2014

ASHOK VISVAKARMA - Complainant(s)

Versus

THE NEW INDIA INSURANCE COMPANY LTD - Opp.Party(s)

MUKESH AVADHIYA

28 Oct 2014

ORDER

जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण फोरम, सिवनी(म0प्र0)


प्रकरण क्रमांक- 40-2014                                  प्रस्तुति दिनांक-28.04.2014


समक्ष :-
अध्यक्ष - व्ही0पी0 षुक्ला    
सदस्य - वीरेन्द्र सिंह राजपूत,

 

अषोक विष्वकर्मा, आत्मज श्री पचकौडी
लाल विष्वकर्मा, निवासी-डूण्डासिवनी
तहसील व जिला सिवनी (म0प्र0)।....................आवेदकपरिवादी।


                :-विरूद्ध-: 

(1)    दी न्यू इणिडया इंष्योरेंस कम्पनी
    लिमिटेड द्वारा-षाखा प्रबंधक, 
    दी न्यू इणिडया इंष्योरेंस कम्पनी
    लिमिटेड, प्रथम मंजिल, एस0ए
    गेट के सामने परासिया रोड़ छिंदवाड़ा
    (म0प्र0)।
(2)    प्रदीप बांगर, आत्मज श्री टी0सी0 बांगर
    प्रोपरार्इटरसंचालक बांगर फायनेंसियल
    सर्विसेस, निवास-षांति चौक, भैरोगंज
    सिवनी, तहसील जिला सिवनी
       (म0प्र0)।........................................अनावेदकगणविपक्षीगण।    


                 :-आदेश-:
     (आज दिनांक-  25.11.2014 को पारित)

द्वारा-अध्यक्ष:-
(1)        परिवादी ने अनावेदकगण के विरूद्ध धारा 12 उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के अन्तर्गत सेवा में कमी के आधार पर मोटरसाइकिल हीरो हाण्डा सी0डी0 डीलक्स, जिसका चेचिस कमांक-13050 और इंजिन नंबर-218531 है, की कीमत 47,650-रूपये मय ब्याज वापस दिलाये जाने, मानसिक प्रताड़ना हेतु 40,000-रूपये एवं वाद-व्यय 2,000- रूपये दिलाये जाने हेतु यह परिवाद प्रस्तुत किया है। 
(2)        परिवादी का पक्ष संक्षेप में इस प्रकार है कि उसने अनावेदक क्रमांक-2 से दिनांक-14.08.2011 को 18,000-रूपये जमा कर हीरो हाण्डा मोटरसाइकिल, जिसका चेचिस कमांक-13050 और इंजिन नंबर- 218531 है, क्रय किया था, षेश राषि अनावेदक कमांक-2 द्वारा परिवादी को फायनेंस की गर्इ थी। परिवादी की मोटरसाइकिल अनावेदक क्रमांक- 1बीमा कम्पनी में दिनांक-03.12.2012 से दिनांक-02.12.2013 तक की अवधि के लिए बीमित थी। अनावेदक कमांक-1 द्वारा परिवादी की बीमा पालिसी क्रमांक-450502311 20100010137 जारी की गर्इ थी। परिवादी के निवासगृह डूण्डा सिवनी से अज्ञात चोर द्वारा दिनांक-13.12.2012 को मोटरसाइकिल चुराकर ले गये। परिवादी ने मोटरसाइकिल ढूंढने का प्रयास किया, किन्तु मोटरसाइकिल नहीं मिली। परिवादी ने दूसरे दिन आरक्षी केन्द्र सिवनी में घटना की रिपोर्ट दर्ज करार्इ एवं इसकी सूचना अनावेदक क्रमांक-2 को भी दी गर्इ थी। अनावेदक क्रमांक-2 द्वारा परिवादी को अनावेदक क्रमांक-1 बीमा कम्पनी में बीमा दावा प्रस्तुत करने का वचन दिया था, परिवादी ने काफी समय तक बीमा दावा निराकृत होने का इंतजार किया, किन्तु उसे कोर्इ राषि प्राप्त नहीं हुर्इ। परिवादी ने मोटरसाइकिल फायनेंस कराते समय अनावेदक क्रमांक- 2 को जो चेक दिया था, उनमें से अनावेदक क्रमांक-2 ने एक चेक बैंक में प्रस्तुत कर दिया। परिवादी के खाते में पर्याप्त निधि न होने के कारण चेक अनादिृत हो गया। अनावेदक क्रमांक-1 द्वारा परिवादी का बीमा दावा निराकृत ल कर सेवा में कमी की गर्इ है। अतएव परिवादी ने अनावेदकगण के विरूद्ध हीरो हाण्डा मोटरसाइकिल जिसका चेचिस कमांक-13050 और इंजिन नंबर- 218531 है, की कीमत 47,650-रूपये मय ब्याज दिलाये जाने एवं मानसिक प्रताड़ना 4,000-रूपये एवं वाद- व्यय 2,000-रूपये दिलाये जाने हेतु परिवाद प्रस्तुत किया है। 
(3)        अनावेदक क्रमांक-1 का पक्ष संक्षेप में इस प्रकार है कि परिवादी ने अनावेदक क्रमांक-1बीमा कम्पनी के समक्ष कोर्इ बीमा दावा प्रस्तुत नहीं किया। इसी तरह अनावेदक क्रमांक-2 द्वारा भी परिवादी की मोटरसाइकिल चोरी होने के संबंध में अनावेदक क्रमांक-1बीमा कम्पनी के समक्ष कोर्इ बीमा दावा प्रस्तुत नहीं किया गया। परिवादी का बीमा दावा प्राप्त न होने के कारण अनावेदक क्रमांक-1 द्वारा कोर्इ कार्यवाही नहीं की गर्इ है। अनावेदक क्रमांक-1 ने सेवा में कोर्इ कमी नहीं की है, अतएव अनावेदक क्रमांक-1 ने परिवादी का परिवाद निरस्त किये जाने का निवेदन किया है। 
(4)        अनावेदक क्रमांक-2 का पक्ष संक्षेप में इस प्रकार है कि परिवादी ने दिनांक-14.08.2011 को अनावेदक क्रमांक-2 के समक्ष 18,000-रूपये जमा कर हीरो हाण्डा मोटरसाइकिल क्रय किया था, षेश राषि अनावेदक क्रमांक-2 द्वारा परिवादी को फायनेंस की गर्इ थी। परिवादी ने मोटरसाइकिल क्रय करते समय अनावेदक क्रमांक-2 को 25 चेक हस्ताक्षरित कर दिया था। उभयपक्षों के मध्य यह करार हुआ था कि परिवादी द्वारा़ ऋण राषि अदा न करने पर अनावेदक क्रमांक-2 चेक बैंक में प्रस्तुत करेगा। परिवादी ने मोटरसाइकिल चोरी होने की सूचना अनावेदक क्रमांक-2 को नही दी थी। परिवादी द्वारा समय पर किष्त अदा न करने पर अनावेदक क्रमांक-2 द्वारा परिवादी द्वारा हस्ताक्षरित चेक बैंक में प्रस्तुत कर दिया था ,जो अनादिृत हो गया। अनावेदक क्रमांक-2 द्वारा परिवादी को इसकी सूचना दी थी। अनावेदक क्रमांक-2 ने परिवादी के विरूद्ध न्यायिक दण्डाधिकारी प्रथम श्रेणी सिवनी के न्यायालय में परिवाद प्रकरण क्रमांक-2292013 प्रस्तुत किया है, जो अभी विचाराधीन है। अनावेदक क्रमांक-2 द्वारा सेवा में कोर्इ कमी नहीं की गर्इ है। अतएव अनावेदक क्रमांक-2 ने परिवादी का परिवाद निरस्त किये जाने का निवेदन किया है। 
(5)        विचारणीय बिन्दु यह हैं कि:-
        क्या अनावेदक क्रमांक-1 द्वारा परिवादी का बीमा                 दावा निराकृत न कर, सेवा में कमी की गर्इ है?
                -:सकारण निष्कर्ष:-
        विचारणीय प्रष्न :-
(6)        यह स्वीकृत तथ्य है कि अनावेदक क्रमांक-1 ने अनावेदक क्रमांक-2 से दिनांक-14.08.2011 को हीरो हाण्डा मोटरसाइकिल, जिसका चेचिस कमांक-13050 और इंजिन नंबर-218531 है, क्रय किया था। परिवादी ने अनावेदक क्रमांक-2 को 18,000-रूप्ये नगद अदा कर दिया था, षेश राषि अनावेदक क्रमांक-2 द्वारा परिवादी को फायनेंस की गर्इ थी। परिवादी की मोटरसाइकिल दिनांक-03.12.2012 से दिनांक-02.12.2013 की अवधि के लिए अनावेदक क्रमांक-1बीमा कम्पनी में बीमित थी। अनावेदक क्रमांक-1 द्वारा परिवादी को बीमा पालिसी क्रमांक-450502311201 00010137 जारी की गर्इ थी। 
(7)        परिवादी अषोक कुमार विष्वकर्मा ने षपथ-पत्र पर प्रकट किया कि दिनांक-13.12.2012 को मोटरसाइकिल उसके निवास स्थान डूण्डा सिवनी में खड़ी थी। अज्ञात चोर उसकी मोटरसाइकिल चुराकर ले गये। उसने मोटरसाइकिल ढूंढने का प्रयास किया, किन्तु मोटरसाइकिल नहीं मिली। उसने दूसरे दिन घटना की लिखित षिकायत आरक्षी केन्द्र सिवनी में दर्ज करार्इ थी। इसके अलावा उसने घटना की सूचना अनावेदक क्रमांक-2 को भी दिया था। अनावेदक क्रमांक-2 द्वारा उससे मोटरसाइकिल की बीमा की प्रति एवं रिपोर्ट की छायाप्रति चाही गर्इ थी। उसने अनावेदक क्रमांक-2 को बीमा की छायाप्रति व रिपोर्ट की प्रति उपलब्ध करा दिया था। उसने 6 माह तक इंतजार किया। इसके बावजूद उसे बीमा दावा राषि प्राप्त नहीं हुर्इ। परिवादी द्वारा अनावेदक क्रमांक-2 को सुरक्षा हेतु चेक प्रदाय किया गया था, जिसे उसने बैंक में प्रस्तुत कर दिया था। अनावेदक क्रमांक-1 द्वारा उसका बीमा दावा निराकृत नहीं किया गया है। 
(8)        परिवादी की ओर से राकेष कुमार धुर्वे ने भी षपथ-पत्र पर प्रकट किया कि-वह परिवादी के साथ अनावेदक क्रमांक-2 के यहां गया था। परिवादी ने उसके सामने अनावेदक क्रमांक-2 को मोटरसाइकिल चोरी होने की सूचना दी थी। अनावेदक क्रमांक-2 ने उसके समक्ष परिवादी को यह आष्वासन दिया था कि वह परिवादी का बीमा दावा अनावेदक क्रमांक- 1बीमा कम्पनी के समक्ष पेष कर देगा।
(9)        अनावेदक क्रमांक-2 की ओर से प्रसतुत जवाब एवं प्रदीप बांगर के षपथ-पत्र में यह आपतित उठार्इ है कि परिवादी ने उसे मोटरसाइकिल चोरी होने की कोर्इ सूचना नहीं दी थी। अनावेदक क्रमांक-2 द्वारा परिवादी की मोटरसाइकिल चोरी के संबंध में अनावेदक क्रमांक- 1बीमा कम्पनी को कोर्इ बीमा दावा प्रस्तुत नहीं किया गया है। 
(10)        अनावेदक क्रमांक-1बीमा कम्पनी की ओर से प्रस्तुत जवाब एवं ए0के0 रावत के षपथ-पत्र में यह आपतित ली गर्इ है कि परिवादी द्वारा अनावेदक क्रमांक-1बीमा कम्पनी के समक्ष कोर्इ बीमा दावा प्रस्तुत नहीं किया गया, जिसके कारण अनावेदक क्रमांक-1बीमा कम्पनी द्वारा परिवादी का बीमा दावा निराकृत नहीं किया गया है। 
(11)        परिवादी ने हमारे समक्ष अनावेदक क्रमांक-2 को दी गर्इ सूचना की डाक डिलेवरी की छायाप्रति प्रस्तुत की है, परिवादी अधिवक्ता का तर्क है कि अनावेदक क्रमांक-2 के पास आर0सी0 बुक थी, जिसके कारण परिवादी की मोटरसाइकिल चोरी होने पर उसने अनावेदक क्रमांक-2 को अनावेदक क्रमांक-1बीमा कम्पनी के समक्ष बीमा दावा प्रस्तुत करने का उत्तरदायित्व दिया था, किन्तु हम परिवादी अधिवक्ता के उक्त तकोर्ंं से सहमत नहीं हैं। बीमा षर्तों के अनुसार मोटरसाइकिल चोरी होने पर संबंधित आरक्षी केन्द्र व बीमा कम्पनी को घटना की सूचना दी जानी चाहिये। परिवादी की मोटरसाइकिल चोरी होने पर अनावेदक क्रमांक- 1बीमा कम्पनी के समक्ष बीमा दावा प्रस्तुत करने का विधिक उत्तरदायित्व परिवादी पर था। परिवादी अनावेदक क्रमांक-2 पर बीमा कम्पनी के समक्ष बीमा दावा प्रस्तुत करने का दायित्व नहीं डाल सकता। स्वयं परिवादी द्वारा अनावेदक क्रमांक-1बीमा कम्पनी के समक्ष बीमा दावा प्रस्तुत नहीं किया गया। इसलिए हम अनावेदकगण द्वारा परिवादी के बीमा दावा का निराकरण न होने पर उनकी सेवा में कमी नहीं मान्य कर सकते। अभी परिवादी का परिवाद अपरिपक्व है, इसलिए हमारे मत में परिवादी का अनावेदक क्रमांक- 1बीमा कम्पनी के समक्ष बीमा दावा प्रस्तुत होने पर 30 दिवस के अंदर बीमा कम्पनी को बीमा दावा को निराकृत करने का निर्देष दिया जाना युकितयुक्त है। इसके अतिरिक्त हम परिवादी को अन्य कोर्इ सहायता दिलाया जाना उपयुक्त नहीं समझते हैं।
(12)        उपरोक्त विवेचना के आधार पर, परिवादी के पक्ष में निम्न आदेष पारित किया जाता है:-
(1)    परिवादी द्वारा अनावेदक क्रमांक-1बीमा                 कम्पनी के समक्ष बीमा दावा प्रस्तुत करने                 पर अनावेदक क्रमांक-1बीमा कम्पनी द्वारा                 परिवादी का बीमा दावा 30 दिवस के अंदर                 निराकृत किया जावे।
(2)    उभयपक्ष अपना-अपना वाद-व्यय वहन करें।
(3)    आदेष की एक-एक नि:षुल्क प्रतिलिपि                 उभयपक्ष को प्रदान की जावे।
(4)    प्रकरण नंबर से निरस्त होकर दाखिल                     अभिलेखागार हो।

   मैं सहमत हूँ।                            मेरे द्वारा लिखाया गया।    

    

( वीरेन्द्र सिंह राजपूत)                         (व्ही0पी0 षुक्ला)
      सदस्य                                             अध्यक्ष
जिला उपभोक्ता विवाद                      जिला उपभोक्ता विवाद 
प्रतितोषणफोरम,सिवनी                     प्रतितोषण फोरम,सिवनी                  

        (म0प्र0)                                           (म0प्र0)

                        

 

 

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