राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, उ0प्र0, लखनऊ।
सुरक्षित
अपील संख्या-1082/2007
(जिला उपभोक्ता फोरम, इटावा द्वारा परिवाद संख्या 89/05 में पारित निर्णय दिनांक 21.04.07 के विरूद्ध)
सुपरिटेन्डेन्ट आफ पोस्ट आफिस, पोस्टल डिवीजन, इटावा। ......अपीलार्थी/विपक्षी
बनाम्
श्रीमती नीलम वर्मा पत्नी श्री संतोष कुमार वर्मा निवासी मुन्नी
का अड्डा, पोस्ट-आईटीआई, जिला इटावा। ......प्रत्यर्थी/परिवादिनी
समक्ष:-
1. मा0 श्री राज कमल गुप्ता, पीठासीन सदस्य।
2. मा0 श्री महेश चन्द, सदस्य।
अपीलार्थी की ओर से उपस्थित : श्री उदय वीर सिंह, विद्वान अधिवक्ता।
प्रत्यर्थी की ओर से उपस्थित :कोई नहीं।
दिनांक 24.05.2017.
मा0 श्री राज कमल गुप्ता, पीठासीन सदस्य द्वारा उदघोषित
निर्णय
यह अपील जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष फोरम इटावा द्वारा परिवाद संख्या 89/05 में पारित प्रश्नगत निर्णय एवं आदेश दि. 21.04.2007 के विरूद्ध प्रस्तुत की गई है। जिला मंच ने निम्न आदेश पारित किया है:-
'' परिवादिनी का परिवाद सव्यय स्वीकार किया जाता है। विपक्षी एक माह के अंदर रू. 2000/- मय दिनांक 04.12.2000 से परिवादिनी को अदा करे। मानसिक कष्ट हेतु रू. 1000/- एवं वाद व्यय हेतु रू. 500/- विपक्षी परिवादिनी को अदा करे।''
संक्षेप में तथ्य इस प्रकार है कि परिवादी ने जिला मंच के समक्ष एक परिवाद इस कथन के साथ प्रस्तुत किया कि उसके द्वारा डाकघर में रू. 500/- प्रतिमाह की दर से एक आवर्ती जमा खाता खोला गया था। जून 2000 तक डाकघर में रू. 500/- मासिक किश्तें उसके द्वारा जमा की गई और इस प्रकार मय ब्याज सहित रू. 30000/- जमा हो गया एवं जमा खाता परिपक्व हो गया। उसके द्वारा दि. 14.09.2000 को धनराशि निकालने हेतु निकासी फार्म भरा गया। डाकघर ने दि. 04.12.2000 को केवल रू. 28000/- मूल तथा ब्याज रू. 11330/- कुल रू. 39330/- वापस किया, जिसे उसके द्वारा आपत्ति सहित प्राप्त किया गया। डाकघर का उस पर रू. 2000/- ब्याज सहित बकाया रहा, जिसका भुगतान पोस्ट आफिस ने नहीं किया।
जिला मंच के समक्ष विपक्षी पोस्ट आफिस ने अपना लिखित उत्तर प्रस्तुत करके
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परिवादी के इस कथन को स्वीकार किया कि रू. 2000/- छोड़कर शेष धनराशि दि. 04.12.2000 को परिवादी को भुगतान कर दी गई, बाकी धनराशि गबन की जांच के कारण रोकी गई थी। जांच के उपरांत रू. 2000/- की राशि परिवादी के खाते में पुन: प्रतिस्थापित कर दी गई है और उसकी सूचना परिवादिनी को सूचित कर दी गई है।
जिला मंच ने अपने आदेश के अंतर्गत विपक्षी डाकघर को रू. 2000/- मय 12 प्रतिशत ब्याज दि. 09.12.2000 से परिवादिनी को अदा करने के निर्देश दिए थे।
पीठ ने अपीलार्थी के विद्वान अधिवक्ता की बहस सुनी एवं पत्रावली पर उपलब्ध अभिलेखों एवं साक्ष्यों का भलीभांति परिशीलन किया गया। प्रत्यर्थी की ओर से कोई उपस्थित नहीं है।
अपीलार्थी ने यह स्वीकार किया है कि परिवादी ने रू. 500/- प्रतिमाह का आवर्ती जमा खाता अपीलार्थी के पोस्ट आफिस में खोला था और यह खाता परिपक्व हो जाने पर दि. 04.12.2000 को रू. 2000/- की धनराशि रोककर रू. 39330/- की धनराशि उसे वापस की गई। अपीलार्थी का कथन है कि पोस्ट आफिस में गबन के कारण रू. 2000/- की धनराशि रोकी गई थी और प्रकरण जांच के बाद सेटेल कर दिया गया है और इस संबंध में परिवादी को सूचित कर दिया गया था। अपीलार्थी के अनुसार उसके द्वारा सेवा में कमी नहीं की गई है।
यह तथ्य निर्विवाद है कि परिवादी का रू. 500/- प्रतिमाह का एक आवर्ती जमा खाता था, जिसकी परिपक्वता के बाद परिवादी/प्रत्यर्थी को केवल रू. 39330/- भुगतान किया गया और उसे रू. 2000/- कम भुगतान किया गया। अपीलार्थी का कथन है कि यह रू. 2000/- की धनराशि कर्मचारी द्वारा गबन किए जाने के कारण भुगतान नहीं की गई और जांच के बाद प्रकरण सेटेल होने के उपरांत रू. 2000/- की धनराशि परिवादिनी के खाते में जमा करा दी गई, अत: यह स्पष्ट है कि दि. 04.12.2000 को पोस्ट आफिस द्वारा परिवादिनी को जो धनराशि दी गई उसमें रू. 2000/- कम का भुगतान किया गया। यह धनराशि अभी तक पोस्ट आफिस के पास रही और उसका उपयोग किया जाता रहा। परिवादिनी इस धनराशि को अपने उपयोग में नहीं ला सकी। अत: अपीलार्थी रू. 2000/- की धनराशि ब्याज सहित परिवादिनी/प्रत्यर्थी को भुगतान करने के लिए बाध्य है।
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जिला मंच ने साक्ष्यों की विस्तृत विवेचना करते हुए अपना निर्णय दिया है, जो विधिसम्मत है, परन्तु उसके द्वारा जो 12 प्रतिशत ब्याज दिलाया गया है वह तथ्य एवं परिस्थितियों को देखते हुए अधिक है और भुगतान की जाने वाली राशि पर 9 प्रतिशत ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित होगा। तदनुसार अपील आंशिक रूप से स्वीकार किए जाने योग्य है।
आदेश
प्रस्तुत अपील आंशिक रूप से स्वीकार की जाती है। जिला मंच का आदेश इस रूप में संशोधित किया जाता है कि विपक्षी रू. 2000/- मय 9 प्रतिशत ब्याज सहित दि. 14.09.2000 से भुगतान की तिथि तक परिवादिनी को अदा करे। जिला मंच के शेष आदेश की पुष्टि की जाती है।
उभय पक्ष अपना-अपना अपीलीय व्यय स्वयं वहन करेंगे।
निर्णय की प्रतिलिपि पक्षकारों को नियमानुसार उपलब्ध कराई जाए।
(राज कमल गुप्ता) (महेश चन्द)
पीठासीन सदस्य सदस्य
राकेश, आशुलिपिक
कोर्ट-3