राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, उ0प्र0, लखनऊ
अपील संख्या– 880/1997 सुरक्षित
( जिला उपभोक्ता फोरम झॉसी द्वारा परिवाद सं0-121/1996 में पारित निर्णय/आदेश दिनांकित 14-03-1997 के विरूद्ध)
सीनियर सुप्रिन्टेन्डेंट आफ पोस्ट आफिस, झॉसी।
अपीलार्थी/विपक्षी
बनाम
श्रीमती नाईमा बेगम पत्नी श्री सलामुद्दीन निवासी-130/7, पोलिस कच्ची घरैया लाइन्स, जेल के पीछे, झॉसी।
प्रत्यर्थी/परिवादिनी
समक्ष:-
माननीय श्री राम चरन चौधरी, पीठासीन सदस्य।
माननीय श्री राज कमल गुप्ता, सदस्य।
अपीलकर्ता की ओर से उपस्थिति : डा0 उदयवीर सिंह, विद्वान अधिवक्ता।
प्रत्यर्थी की ओर से उपस्थिति : कोई नहीं।
दिनांक24-05-2016
माननीय श्री राम चरन चौधरी, पीठासीन सदस्य, द्वारा उद्घोषित
निर्णय
अपीलकर्ता ने यह अपील जिला उपभोक्ता फोरम झॉसी द्वारा परिवाद सं0-121/1996 में पारित निर्णय/आदेश दिनांकित 14-03-1997 के विरूद्ध प्रस्तुत की गई है, जिसमें जिला उपभोक्ता फोरम द्वारा यह आदेश पारित किया गया है कि परिवादिनी का परिवाद स्वीकार किया जाता है। विपक्षीगण सं0-2 और 3 को यह आदेश किया जाता है कि 2,000-00 रूपये परिवादी को बतौर क्षतिपूति अदा करें और 500-00 रूपये वाद व्यय भी अदा करें।
संक्षेप में केस के तथ्य इस प्रकार से है कि विपक्षी सं0-1 ने कुछ उर्दू टीचरों के लिए विज्ञापन निकाला, लिखित टेस्ट दिनांक 26-02-1996 को होना था। परिवादी ने रजिस्टर्ड पोस्ट के द्वारा एम0बी0 चौराहा पोस्ट आफिस झॉसी से भेजा, लेकिन प्राप्तकर्ता को वह पत्र अभी तक नहीं मिला, क्योंकि उसका प्रार्थना पत्र विपक्षी सं0-1 के आफिस में अभी तक नहीं पहुंचा और पोस्टल विभाग की सेवाओं में कमी के कारण पत्र विपक्षी सं0-1 के कार्यालय में नहीं पहुंच सका और इस प्रकार से परिवादी नौकरी नहीं पा सकी और परिवादी ने एक लाख रूपये हर्जाना और पॉच हजार रूपये वाद की कार्यवाही के लिए खर्चा विपक्षी सं0-2 से मांगा है और उसने यह भी प्रार्थना किया है कि विपक्षी सं0-1 को निर्देशित किया जाय कि परिवादी के प्रार्थना पत्र पर विचार करें।
जिला उपभोक्ता फोरम के समक्ष विपक्षी सं0-2 के तरफ से प्रतिवाद पत्र दाखिल किया गया, जिसमें कहा गया है कि रजिस्टर्ड पत्र विपक्षी सं0-2 को भेजने के लिए प्राप्त हुआ था और यह भी कहा गया कि परिवादी कोई भी अनुतोष पाने का हकदार नहीं है। यह भी कहा गया है कि उक्त रजिस्टर्ड पत्र या तो कहीं रास्ते में खो गया या कहीं अन्य जिलें में गलत पते की वजह से चला गया और यह भी कहा गया है कि विपक्षी द्वारा कोई सेवाओं में कमी नहीं किया गया है। यह भी कहा गया है कि धारा-6 इंडियन पोस्ट आफिस एक्ट 1890 के प्राविधान के
(2)
हिसाब से वादी कोई रिलीफ पाने का हकदार नहीं है और अनुकम्पा के तौर पर प्रतिवादी केवल 100-00 रूपये देने को तैयार है। अन्य विपक्षीगण के तरफ से कोई प्रतिवाद पत्र दाखिल नहीं किया गया है।
इस सम्बन्ध में जिला उपभोक्ता फोरम का निर्णय/आदेश दिनांकित 14-03-1997 का अवलोकन किया गया तथा अपील आधार का अवलोकन किया गया एवं अपीलार्थी के विद्वान अधिवक्ता डा0 उदयवीर सिंह, को सुना गया। पत्रावली में शामिल पत्र दिनांक 23-03-2014 जो कि निबन्धक, को सम्बोधित किया गया है, पत्रावली में लगा है और इससे स्पष्ट है कि 27-02-2014 को पंजीकृत डाक से नोटिस प्रत्यर्थी को प्राप्त हो चुकी है और इस सम्बन्ध में हिन्दी भाषा में अपील के आधार की मांग की गई है और सुनवाई के समय प्रत्यर्थी की ओर से कोई उपस्थित नहीं है।
जिला उपभोक्ता फोरम के द्वारा यह पाया गया कि 2,000-00 रूपये हर्जाना दिलाया जाना उचित होगा और 500-00 रूपये वाद व्यय के लिए दिलाया गया। केस के तथ्यों परिस्थितियों में हम यह पाते हैं कि परिवादी ने परिवाद पत्र में यह कहा है कि विपक्षी सं0-1 को आदेशित किया जाय कि वह परिवादी के प्रार्थना पत्र पर नियुक्ति के सम्बन्ध में विचार करें। जिला उपभोक्ता फोरम ने यह पाया कि इस प्रकार का अनुतोष जिला उपभोक्ता फोरम के द्वारा नहीं दिया जा सकता, क्योंकि परिवादी विपक्षी सं0-1 का उपभोक्ता नहीं है और इसके अलावा प्रार्थना पत्र अभी भी विपक्षी सं0-1 के कार्यालय में नहीं पहुंचा और इसलिए इस सम्बन्ध में कोई अनुतोष जिला उपभोक्ता फोरम के द्वारा परिवादी को नहीं दिया गया है।
अपीलकर्ता के तरफ से माननीय राष्ट्रीय आयोग नई दिल्ली द्वारा निर्णीत रूलिंग 2011 (2) कन्ज्यूमर प्रोटेक्शन केसेज पेज-179 युनियन बैंक आफ इंडिया एवं अन्य बनाम एम0एल0 बोरा जो दिनांक 13-10-2010 को निर्णीत हुआ है, पेश किया गया, जिसमें कहा गया है कि:
Consumer Protection Act, 1986- Sections 3 & 21 (b)- Indian Post Office Act, 1898- Section 6- Postal service- Non delivery of letter- Complainant sent two registered letters containing 5.32 shares but letters were not delivered to the addressees- District Forum allowing allowing complaint of complainant (respondent) directed petitioner/OP to pay Rs 2,58,354 in one case and Rs 1,76,244 in another case- State Commission upheld the order passed by the District Forum- Revision filed- Held, as section 6 of the post office Act provides complete immunity to Government from loss or mis- delivery of postal articles- Petitioner cannot be hel liable especially when no specific allegation of any willful act on the part of any official has been made- Relief granted by the Fora below set aside.
(3)
केस के तथ्यों परिस्थितियों को देखते हुए और अपीलार्थी द्वारा दाखिल रूलिंग को देखते हुए हम यह पाते हैं कि परिवादी को कोई प्रतिकर नहीं दिलाया जा सकता था और इस सम्बन्ध में जिला उपभोक्ता फोरम के द्वारा जो प्रतिकर परिवादी को दिलाये जाने का निर्णय पारित किया गया है, वह निरस्त होने योग्य है और अपीलकर्ता की अपील स्वीकार होने योग्य है।
आदेश
अपीलकर्ता की अपील स्वीकार की जाती है तथा जिला उपभोक्ता फोरम का निर्णय/आदेश दिनांकित 14-03-1997 निरस्त किया जाता है।
उभय पक्ष अपना-अपना अपील व्यय स्वयं वहन करेगें।
(आर0सी0 चौधरी) ( राज कमल गुप्ता )
पीठासीन सदस्य सदस्य,
आर.सी. वर्मा, कोर्ट नं0-2