(मौखिक)
राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, उ0प्र0, लखनऊ
अपील संख्या-2047/2007
लाइफ इंश्योरेंस कारपोरेशन आफ इंडिया व अन्य
बनाम
श्रीमती ब्रजेश देवी पत्नी स्व0 नरेश कुमार
समक्ष:-
1. माननीय श्री सुशील कुमार, सदस्य।
2. माननीय श्रीमती सुधा उपाध्याय, सदस्य।
उपस्थिति:-
अपीलार्थी की ओर से उपस्थित: श्री पवन कुमार श्रीवास्तव, विद्धान
अधिवक्ता
प्रत्यर्थी की ओर से उपस्थित: श्री प्रतीक सक्सेना, विद्धान अधिवकता
दिनांक :18.10.2023
माननीय श्री सुशील कुमार, सदस्य द्वारा उदघोषित
निर्णय
1. परिवाद संख्या-62/2006, श्रीमती ब्रजेश देवी बनाम भारतीय जीवन बीमा निगम व अन्य में विद्वान जिला आयोग, बिजनौर द्वारा पारित प्रश्नगत निर्णय/आदेश दिनांक 06.08.2007 के विरूद्ध प्रस्तुत की गयी अपील पर अपीलार्थी के विद्धान अधिवक्ता श्री पवन कुमार श्रीवास्तव एवं प्रत्यर्थी की ओर से विद्धान अधिवक्ता श्री प्रतीक सक्सेना के तर्क को सुना गया। प्रश्नगत निर्णय/आदेश एवं पत्रावली का अवलोकन किया गया।
2. जिला उपभोक्ता मंच ने परिवाद स्वीकार करते हुए बीमित राशि 12 प्रतिशत ब्याज सहित अदा करने का आदेश पारित किया है।
3. परिवाद के तथ्यों के अनुसार परिवादिनी के पति नीरज कुमार द्वारा दिनांक 11.03.2005 को एक बीमा पॉलिसी प्राप्त की गयी थी। अंकन 6,145/-रू0 का प्रीमियम दिया गया था। दूसरा प्रीमियम मार्च 2006 में देना था, परंतु दिनांक 03.06.2005 को ही दिमाग की नस फट जाने के कारण बीमा धारक की मृत्यु हो गयी। बीमा क्लेम प्रस्तुत किया गया, परंतु अदा नहीं किया गया। बीमा कम्पनी का कथन है कि नरेश कुमार की आर्थिक स्थिति 1,00,000/-रू0 बीमा कराने की नहीं थी। उन्हें शुगर की बीमारी थी। इस बीमारी के तथ्य को छिपाया गया। जानकारी मे आया है कि स्वयं बीमा धारक के भाई ने विवाद होने पर सिर में डण्डा मार दिया, जिसके कारण बीमा धारक की मृत्यु हुई है, इसलिए बीमा राशि देय नहीं है।
4. जिला उपभोक्ता मंच ने दोनों पक्षकार के साक्ष्य पर विचार करने के पश्चात बीमित राशि अदा करने का आदेश पारित किया है।
5. अपीलार्थी के विद्धान अधिवक्ता का यह तर्क है कि बीमाधारक बीमा प्रस्ताव भरते समय डायबीटीज की बीमारी से ग्रसित था। इस तथ्य को छिपाया गया और आपसी विवाद में मृत्यु कारित हुई है, परंतु यह दोनो तथ्य जो अपील के ज्ञापन में उठाये गये है, साबित नहीं है। बीमा प्रस्ताव भरते समय शुगर की बीमारी का इलाज कराने का कोई सबूत नहीं है। इसी प्रकार भाई द्वारा सिर में डण्डा मारने का कोइ सबूत मौजूद नहीं है, इसलिए जिला उपभोक्ता मंच द्वारा पारित निर्णय/आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं है। तदनुसार अपील खारिज होने योग्य है।
आदेश
अपील खारिज की जाती है। जिला उपभोक्ता मंच द्वारा पारित निर्णय एवं आदेश की पुष्टि की जाती है।
उभय पक्ष अपना-अपना व्यय भार स्वंय वहन करेंगे।
प्रस्तुत अपील में अपीलार्थी द्वारा यदि कोई धनराशि जमा की गई हो तो उक्त जमा धनराशि मय अर्जित ब्याज सहित संबंधित जिला उपभोक्ता आयोग को यथाशीघ्र विधि के अनुसार निस्तारण हेतु प्रेषित की जाए।
आशुलिपिक से अपेक्षा की जाती है कि वह इस निर्णय एवं आदेश को आयोग की वेबसाइट पर नियमानुसार यथाशीघ्र अपलोड कर दे।
(सुधा उपाध्याय)(सुशील कुमार)
सदस्य सदस्य
संदीप सिंह, आशु0 कोर्ट 3