राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, उ0प्र0, लखनऊ।
मौखिक
अपील संख्या-2361/1997
(जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष फोरम, फैजाबाद द्वारा परिवाद संख्या-156/1994 में पारित निर्णय एवं आदेश दिनांक 01-11-1997 के विरूद्ध)
- Supdt of Post Offices, Faizabad.
- Sub Postmaster, Maholi Post office, Baragaon, District-Faizabad.
अपीलार्थी/विपक्षीगण
बनाम्
- Sidheshwar Nath.
- Rampathi Pandey. (Dead)
2/1.Smt. Kamalawati (Widow)
2/2.Ashok Kumar.
2/3 Hirawati Village Atrauli Post Arasuya Bazar dist. Faizabad.
3. Ram Naresh Tripathi.
4. Sam Surat Pandey.
5. Sadhu Saran Tripathy.
6- Ram Dularey Tripathy. (Dead)
6/1. Smt. Patiraji Widow of Ram Dularey.
6/2. Subhash Tripathi.
6/3. Mukut Mani Tripathi.
6/4. Muthlesh Tripathy.
(All Teachers of Sidheshwarnath Sanskrit Vidyalaya, Mahadevpur, Maholi District-Faizabad through its Principal.
प्रत्यर्थी/परिवादीगण.
समक्ष :-
1- मा0 श्री विजय वर्मा, पीठासीन सदस्य।
2- मा0 श्री राज कमल गुप्ला, सदस्य।
1- अपीलार्थी की ओर से उपस्थित – डा0 उदयवीर सिंह।
2- प्रत्यर्थी की ओर से उपस्थित - श्री वी0 के0 गुप्ता।
दिनांक : 08-06-2017
मा0 श्री विजय वर्मा, पीठासीन सदस्य द्वारा उदघोषित निर्णय :
परिवाद संख्या-156/1994 Shree Sidheshwar Nath Sanskrit Vidyalaya and others. बनाम् Superintendent, Post Offices,
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Faizabad and onother में जिला उपभोक्ता फोरम, फैजाबाद द्वारा पारित आक्षेपित निर्णय और आदेश दिनांक 01-11-1997 के विरूद्ध यह अपील उपरोक्त परिवाद के विपक्षी Supdt of Post Offices, Faizabad व एक अन्य की ओर से धारा-15 उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम-1986 के अन्तर्गत इस आयोग के समक्ष प्रस्तुत की गयी है।
आक्षेपित निर्णय और आदेश के द्वारा जिला फोरम ने निम्न आदेश पारित किया है-
''So, the complaint is allowed for recovery of the amounts so deposited by the complainants with the opposite parties in their respective accounts together with the interest as admissible under the rules of Postal Department upto the date of Complaint in this Fourm and for further interest upto the date of actual payment at the rate of 13% per annum and for recovery of Rs. 1000/- as compenation. The compleinants shall also be entitled to get Rs. 500/- as costs of this complaint from the opposite parties."
इस केस के सुसंगत तथ्य इस प्रकार है कि प्रत्यर्थी/परिवादीगण Shree Sidheshwar Nath Sanskrit Vidyalaya, Mahadeopur Maholi District-Faizabad में प्रधानाचार्य एवं अध्यापक के रूप में कार्यरत है। उक्त विद्यालय में Teachers Provident Fund Scheme अध्यापकों एवं कर्मचारियों के लिए लागू थी। परिवादीगण के उपरोक्त Provident Fund की स्कीम के खाते Maholi पोस्ट आफिस में खोले गये थे और जो कि अपीलार्थी के अधिकार क्षेत्र में थे। परिवादीगण का एकाउन्ट नम्बर-306223 पोस्ट आफिस में अक्टूबर 1990 तक था। इस प्रकार से परिवादीगण की कुल धनराशि रू0 20,706.90 उपरोक्त एकाउन्ट में अक्टूबर 1990 तक जमा थी, बाद में उपरोक्त स्कीम समाप्त हो
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जाने के कारण परिवादीगण द्वारा जमा की गयी धनराशि को मय ब्याज सहित वापस करने हेतु कई बार निवेदन किया गया, किन्तु अपीलार्थी/विपक्षीगण द्वारा परिवादीगण/प्रत्यर्थी की धनराशि को ब्याज सहित वापस नहीं किया गया, जबकि परिवादीगण/प्रत्यर्थी को उक्त धनराशि पर 13 प्रतिशत की दर से ब्याज प्राप्त हो सकता था जिसका परिवादी को नुकसान हुआ। अत: परिवादीगण/प्रत्यर्थी द्वारा एक परिवाद जिला फोरम, फैजाबाद में जमा धनराशि मय ब्याज सहित वापस प्राप्त करने हेतु दाखिल किया गया है।
विपक्षीगण/अपीलार्थी द्वारा अपने प्रतिवाद में यह कथन किया गया है कि मुख्य डाकघर के निर्देशानुसार परिवादीगण/प्रत्यर्थी को जमा धनराशि वापस लेने हेतु कहा गया था किन्तु परिवादीगण/प्रत्यर्थी द्वारा धनराशि लेने से इंकार कर दिया गया, जबकि परिवादीगण को नियमानुसार ब्याज दिया जा रहा था। अत: विपक्षीगण/अपीलार्थी की ओर से कोई सेवा में कमी नहीं की गयी है।
जिला मंच द्वारा उभयपक्ष को सुनने के उपरान्त आदेश पारित किया गया है।
यह अपील मुख्यत: इस आधार पर योजित की गयी है कि परिवादीगण को जो ब्याज नियमानुसार देय था उस दर पर ही जमा धनराशि मय ब्याज सहित वापस की जा रही थी किन्तु परिवादीगण/प्रत्यर्थी द्वारा धनराशि वापस लेने से इंकार कर दिया गया ऐसी स्थिति में अपीलार्थी द्वारा कोई सेवा में त्रुटि नहीं की गयी है और इस संबंध में जिला मंच द्वारा जो प्रश्नगत आदेश पारित किया है वह विधि सम्मत न होने के कारण निरस्त किये जाने योग्य है।
हमने उभयपक्ष के तर्क को विस्तारपूर्वक सुना है तथा आक्षेपित निर्णय और आदेश तथा पत्रावली का अवलोकन किया है।
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इस प्रकरण में यह तथ्य निर्विवादित है कि परिवादीगण/प्रत्यर्थी द्वारा स्कीम के अन्तर्गत अपीलार्थी/विपक्षीगण के पोस्ट आफिस में अपना खाता खोला गया और यह तथ्य भी निर्विवादित है कि उक्त स्कीम के समाप्त हो जाने पर अक्टूबर, 1990 तक खाते में परिवादीगण/प्रत्यर्थी के कुल रू0 20,706.90 जमा थे। विवादित बिन्दु मात्र यह है कि अपीलार्थी/विपक्षीगण के अनुसार उक्त धनराशि पर ब्याज नियमानुसार ही देय था जबकि परिवादीगण/प्रत्यर्थी द्वारा जमा धनराशि पर 13 प्रतिशत ब्याज की मांग की जा रही थी जिसे न देकर अपीलार्थी द्वारा सेवा में कमी की गयी थी।
उल्लेखनीय है कि अपीलार्थी की ओर से यह तो तर्क दिया गया कि जो ब्याज नियमानुसार देय था वह धनराशि मय ब्याज के वह देने को तैयार था जिसे परिवादीगण द्वारा स्वीकार नहीं किया गया किन्तु अपीलार्थी द्वारा यह नहीं दर्शित किया गया कि वास्तव में ब्याज दर क्या देय थी।
बहस के दौरान अपीलार्थी के विद्धान अधिवक्ता द्वारा 13 प्रतिशत के स्थान पर 10 प्रतिशत ब्याज दिये जाने की बात कही गयी है जो प्रत्यर्थी के विद्धान अधिवक्ता को भी स्वीकार है।
यह अपील वर्ष 1997 से लम्बित है तथा यह प्रकरण वर्ष 1990 का है। अत: उभयपक्ष के अभिकथन पर विचार करते हुए हम इस मत के हैं कि इस प्रकरण में उभयपक्ष की सहमति के आधार पर ब्याज की दर हमारे विचार से 13 प्रतिशत के स्थान पर 10 प्रतिशत किया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है।
तद्नुसार अपील आंशिकरूप से स्वीकार किये जाने योग्य है।
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आदेश
अपील आंशिक रूप से स्वीकार की जाती है। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष फोरम, फैजाबाद द्वारा परिवाद संख्या-156/1994 में पारित निर्णय एवं आदेश दिनांक 01-11-1997 को संशोधित करते हुए ब्याज का प्रतिशत 13 के स्थान पर 09 प्रतिशत किया जाता है। निर्णय का शेष भाग यथावत रहेगा।
उभयपक्ष अपना-अपना अपीलीय व्यय स्वयं वहन करेंगे।
(विजय वर्मा) (राज कमल गुप्ता)
पीठासीन सदस्य सदस्य
कोर्ट नं0-2 प्रदीप मिश्रा