राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, उ0प्र0, लखनऊ।
(सुरक्षित)
अपील संख्या:-1932/2011
(जिला उपभोक्ता फोरम, उन्नाव द्धारा परिवाद सं0-219/2008 में पारित निर्णय/आदेश दिनांक 09.9.2011 के विरूद्ध)
1 Superintendent of Post Offices, Mufassil Division, Kanpur Division, Kanpur.
2 Post Master, Head Post Office, Unnao.
3 Rajpal Yadav, Ex-Postman, Head Post Office, Unnao.
........... Appellants/ Opp. Parties
Versus
1- Shashank Vikram, S/o Praveen Kumar Mall, C/o Samar Singh Solanki, House No. 726/2, Utmanpur House, Civil Line, Tehsil and District- Unnao.
……..…. Respondent/ Complainant
2- Daya Nand Subhash National Post Graduate College, College Road, A.B. Nagar, City and District- Unnao through its Principal.
……..…. Profoma Respondent
समक्ष :-
मा0 श्री रामचरन चौधरी, पीठासीन सदस्य
मा0 श्री गोवर्द्धन यादव, सदस्य
अपीलार्थी के अधिवक्ता : डॉ0 उदय वीर सिंह
प्रत्यर्थी के अधिवक्ता : कोई नहीं।
दिनांक : 31-10-2017
मा0 श्री रामचरन चौधरी, पीठासीन सदस्य द्वारा उदघोषित
निर्णय
मौजूदा अपील जिला उपभोक्ता फोरम, उन्नाव द्धारा परिवाद सं0-219/2008 में पारित निर्णय/आदेश दिनांक 09.9.2011 के विरूद्ध योजित की गई है, जिसमें जिला उपभोक्ता फोरम द्वारा निम्न आदेश पारित किया गया है:-
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"परिवाद एतद्द्वारा स्वीकार किया जाता है तथा विपक्षी सं0-1 ता 3 को निर्देशित किया जाता है कि वे परिवादी को क्षतिपूर्ति के रूप में 5,000.00 रूपये की राशि अदा करेगें।"
संक्षेप में केस के तथ्य इस प्रकार है कि परिवादी प्रतिवादी सं0-4 दयानन्द सुभाष नेशनल परास्नातक विद्यालय शिक्षण सत्र 2006-07 में बी0काम पार्ट-1 का संस्थागत छात्र था तथा वर्ष 2006-07 की परीक्षा में उसका अनुक्रमांक 812595 था एवं वर्ष 2007 में परिवादी ने यह परीक्षा उत्तीर्ण कर ली। दितीय वर्ष में प्रवेश हेतु उसको मूल अंक पत्र की आवश्यकता थी, परन्तु जुलाई, 2007 व्यतीत होने तक अंक पत्र प्राप्त नहीं हुआ। परिवादी प्रतिवादी सं0-4 के चक्कर लगाता रहा। परिवादी को दिनांक 13.8.2007 को यह ज्ञात हुआ कि डाक सं0-867/20 दिनांक 03.8.2007 के द्वारा रजिस्टर्ड डाक से अंक पत्र परिवादी को भेजे गए परन्तु इसके बावजूद भी उक्त अंक पत्र प्रतिवादीगण सं0-1 ता 3 के कर्मचारियों द्वारा वितरित नहीं किया गया। दिनांक 22.8.2007 को परिवादी ने शिकायत भी की, परन्तु कोई सुनवाई नहीं हुई और परिवादी प्रवेश लेने में तीन माह पिछड़ गया, अत: परिवादी द्वारा प्रतिवादीगण से रू0 80,000.00 की क्षतिपूर्ति का अनुतोष दिलाये जाने हेतु जिला उपभोक्ता फोरम के समक्ष परिवाद संस्थित किया गया है।
प्रतिवादी सं0-1 ता 3 की ओर से जिला उपभोक्ता फोरम के समक्ष अपना प्रतिवाद पत्र प्रस्तुत कर यह कथन किया गया है कि डी0एस0एन0 डिग्री कालेज उन्नाव द्वारा पंजीकृत पत्र सं0-867/20 परिवादी शशांक मल्ल के नाम व पते पर वितरण हेतु दिनांक 03.8.2007 को प्रधान डाकघर उन्नाव के रजिस्ट्री इम्पोर्ट शाखा को निस्तारण हेतु दिया गया और दिनांक 04.8.2007 को वितरण हेतु यह पत्र सम्बन्धित पोस्टमैन श्री राजपाल यादव को दें दिया गया, परन्तु शेष तथ्यों से इंकार किया है और इस आधार पर प्रतिवाद किया गया
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है कि छ: माह की अवधि के उपरांत रकार्ड बीड आउट हो जाता है। अत: पंजीकृत पत्र का विवरण नहीं बताया जा सकता है एवं परिवादी उपभोक्ता नहीं है तथा पता अधूरा होने के कारण यह पत्र प्रेषक को वापस कर दिया गया था। पोस्ट आफिस अधिनियम, 1988 की धारा-6 के अन्तर्गत प्रतिवादीगण का दायित्व नहीं बनता है तथा परिवाद खारिज किए जाने योग्य है।
इस सम्बन्ध में जिला उपभोक्ता फोरम के प्रश्नगत निर्णय/आदेश दिनांकित 09.9.2011 तथा आधार अपील का अवलोकन किया गया एवं अपीलार्थी की ओर से विद्वान अधिवक्ता डॉ0 उदय वीर सिंह उपस्थित आये। प्रत्यर्थी की ओर से कोई उपस्थित नहीं हुआ एवं इस केस में प्रत्यर्थी की ओर से विद्वान अधिवक्ता श्री राज कुमार सिंह का वकालतनामा वर्ष-2012 से ही पत्रावली पर संलग्न हैं, परन्तु दिनांक 08.02.2012 से प्रत्यर्थी की ओर से कोई उपस्थित नहीं हो रहा है, अत: अपीलार्थी के विद्वान अधिवक्ता की बहस सुनी तथा पत्रावली पर उपलब्ध अभिलेखों एवं लिखित बहस का भी अवलोकन किया गया है।
अपीलार्थी की ओर से यह कहा गया कि परिवादी इस केस में पत्र प्राप्तकर्ता है और उसने डाक विभाग से कोई पत्र नहीं भेजा था, इसलिए परिवादी उपभोक्ता नहीं है और वह बैनीफिशरी भी नहीं है और उपभोक्ता के बैनीफिशरी उसके लीगल हेयर्स होते है और जो पत्र भेजा गया था, वह दयानन्द सुभाष नेशनल विद्यालय द्वारा भेजा जाना कहा गया है और उक्त विद्यालय का परिवादी लीगल हेयर नहीं है और इस प्रकार परिवादी किसी प्रकार से उपभोक्ता नहीं है। अपीलार्थी की ओर से यह भी कहा गया है कि यदि रजिस्ट्री का वितरण होना नहीं पाया जाता है और उसमे डाक विभाग की गलती पायी जाती है, तो उसके लिए डाक विभाग द्वारा परिवादी को अधिक से अधिक 100.00 रू0 का खर्च मिल सकता है। भारतीय पोस्ट ऑफिस एक्ट, 1898 के
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अन्तर्गत कोई क्षतिपूर्ति नहीं दिलायी जा सकती है, क्योंकि परिवादी उपभोक्ता नहीं है।
केस के सम्पूर्ण तथ्यों व परिस्थितियों तथा आधार अपील को देखते हुए एवं अपीलार्थी के विद्वान अधिवक्ता को सुनने के उपरांत हम यह पाते हैं कि जिला उपभोक्ता फोरम द्वारा जो 5,000.00 क्षतिपूर्ति एवं 500.00 रू0 परिवाद व्यय दिलाये जाने हेतु आदेश पारित किया गया है, वह विधि सम्मत नहीं और तर्क पूर्ण नहीं है और निरस्त किए जाने योग्य है। तद्नुसार अपीलार्थी की अपील स्वीकार किए जाने योग्य है।
आदेश
अपीलार्थी की अपील स्वीकार की जाती है जिला उपभोक्ता फोरम, उन्नाव द्धारा परिवाद सं0-219/2008 में पारित निर्णय/आदेश दिनांक 09.9.2011 को निरस्त किया जाता है।
उभय पक्ष अपीलीय व्यय भार स्वयं वहन करेगें।
(रामचरन चौधरी) (गोवर्धन यादव)
पीठासीन सदस्य सदस्य
हरीश आशु.,
कोर्ट सं0-4