Uttar Pradesh

StateCommission

A/2652/2016

Panchimanchal Vidyut Vitaran Nigam - Complainant(s)

Versus

Sharafat Ali - Opp.Party(s)

Isar Husain

25 Apr 2019

ORDER

STATE CONSUMER DISPUTES REDRESSAL COMMISSION, UP
C-1 Vikrant Khand 1 (Near Shaheed Path), Gomti Nagar Lucknow-226010
 
First Appeal No. A/2652/2016
( Date of Filing : 24 Oct 2016 )
(Arisen out of Order Dated 23/09/2016 in Case No. C/21/2016 of District Bulandshahr)
 
1. Panchimanchal Vidyut Vitaran Nigam
Bulandshahr
...........Appellant(s)
Versus
1. Sharafat Ali
Bulandshahr
...........Respondent(s)
 
BEFORE: 
 HON'BLE MR. JUSTICE AKHTAR HUSAIN KHAN PRESIDENT
 
For the Appellant:
For the Respondent:
Dated : 25 Apr 2019
Final Order / Judgement

                                                  (सुरक्षित)

राज्‍य उपभोक्‍ता विवाद प्रतितोष आयोग, उ0प्र0, लखनऊ

अपील सं0- 2652/2016

(जिला उपभोक्‍ता विवाद प्रतितोष फोरम, बुलन्‍दशहर द्वारा परिवाद सं0-21/2016 में पारित निर्णय और आदेश दि0 23.09.2016 के विरूद्ध)

Pachimanchal vidyut vitran nigam ltd. through its Executive engineer, electricity distribution division I, Bulandshahr, District Bulandshahr.

                                                                             ………..Appellant

                                                      Versus

Sharafat ali S/o Sri Badlu khan, R/o Mohalla  Peer khan near Ek minar masjid, Kasba Gulavthi, Tahsil and District, Bulandshahr.

                                                                          ……….. Respondent   

समक्ष:-                       

माननीय न्‍यायमूर्ति श्री अख्‍तर हुसैन खान, अध्‍यक्ष   

अपीलार्थी की ओर से उपस्थित             : श्री इसार हुसैन,

                                    विद्वान अधिवक्‍ता।

प्रत्‍यर्थी की ओर से उपस्थित             : श्री सुशील कुमार शर्मा,

                                    विद्वान अधिवक्‍ता। 

दिनांक:- 11.06.2019

माननीय न्‍यायमूर्ति श्री अख्‍तर हुसैन खान, अध्‍यक्ष  द्वारा उद्घोषित                                                 

निर्णय

          परिवाद सं0- 21/2016 शराफत अली बनाम पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लि0 में जिला फोरम, बुलन्‍दशहर द्वारा पारित निर्णय व आदेश दि0 23.09.2016 के विरूद्ध यह अपील धारा 15 उपभोक्‍ता संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत राज्‍य आयोग के समक्ष प्रस्‍तुत की गई है।

          आक्षेपित निर्णय और आदेश के द्वारा जिला फोरम ने परिवाद स्‍वीकार करते हुए निम्‍न आदेश पारित किया है:-

          ‘’परिवादी का परिवाद विपक्षी के विरुद्ध स्‍वीकार किया जाता है तथा विपक्षी द्वारा परिवादी के विरुद्ध विद्युत बिल में दर्शायी गयी डेबिट धनराशि मु038511/-रू0 निरस्‍त की जाती है। विपक्षी परिवादी से आई0डी0एफ0 विद्युत बिलों को लगाये गये नये विद्युत मीटर की पिछले 3 माह की औसत यूनिट के आधार पर तत्‍कालीन विद्युत दरों के अनुसार धनराशि निर्धारित करते हुए परिवादी द्वारा आई0डी0एफ0 बिलों के तहत जमा की गयी धनराशि को समायोजित कर बिल वसूल कर सकते हैं। विपक्षी को यह भी निर्देश दिया जाता है कि वह 30 दिन के अन्‍दर परिवादी के विद्युत कनैक्‍शन को नियमानुसार पुन: ऊर्जित करें। परिवादी विपक्षी से 2,000/-रू0 क्षतिपूर्ति और 1000/-रू0 वाद व्‍यय भी पाने का अधिकारी होगा।‘’

          जिला फोरम के निर्णय और आदेश से क्षुब्‍ध होकर परिवाद के विपक्षी ने यह अपील प्रस्‍तुत की है।

          अपील की सुनवाई के समय अपीलार्थी की ओर से विद्वान अधिवक्‍ता श्री इसार हुसैन और प्रत्‍यर्थी की ओर से विद्वान अधिवक्‍ता श्री सुशील कुमार शर्मा उपस्थित आये हैं।

          मैंने उभय पक्ष के तर्क को सुना है और आक्षेपित निर्णय व आदेश तथा पत्रावली का अवलोकन किया है।  

          अपील के निर्णय हेतु संक्षिप्‍त सुसंगत तथ्‍य इस प्रकार हैं कि प्रत्‍यर्थी/परिवादी ने उपरोक्‍त परिवाद जिला फोरम के समक्ष अपीलार्थी/विपक्षी के विरुद्ध इस कथन के साथ प्रस्‍तुत किया है कि उसके आवास में 02 किलोवाट का घरेलू विद्युत कनेक्‍शन सं0- 1215/982310 स्‍वीकृत है जिसके बिलों का भुगतान वह करता रहा है। माह नवम्‍बर 2013 में उसका मीटर खराब हो गया जिसको बदलने के लिए उसने विपक्षी के यहां दि0 30.11.2013 को प्रार्थना पत्र दिया, परन्‍तु अपीलार्थी/विपक्षी ने उसका मीटर नहीं बदला और आई0डी0एफ0 श्रेणी के अत्‍यधिक राशि के बिल प्रेषित किया जिसको ठीक कराने के लिए वह अपीलार्थी/विपक्षी के कार्यालय गया तो उसे बताया गया कि नया मीटर लगाने के बाद बिल औसत यूनिट के अनुसार ठीक कर दिया जायेगा। उसके बाद अपीलार्थी/विपक्षी के कर्मचारियों द्वारा दि0 11.06.2015 को उसका मीटर बदला गया। उस समय मीटर की रीडिंग 1743 यूनिट थी और मीटर की सील सुरक्षित थी।

          परिवाद पत्र के अनुसार पुराने मीटर को मौके पर सील पैक नहीं किया गया और प्रत्‍यर्थी/परिवादी से अवैध धन की मांग की गई जिसको न देने पर उसे परिणाम भुगतने की धमकी दी गई। प्रत्‍यर्थी/परिवादी ने दि0 29.07.2015 को जिलाधिकारी बुलन्‍दशहर को शिकायती पत्र भी भेजा। उसके बाद दि0 07.07.2015 से दि0 15.08.2015 तक की अवधि का बिल अपीलार्थी/विपक्षी द्वारा भेजा गया जिसमें डेबिट राशि 38,511/-रू0 को जोड़कर कुल 40,180/-रू0 का बिल गलत भेजा गया। परिवाद पत्र के अनुसार प्रत्‍यर्थी/परिवादी ने दि0 18.06.2015 को माह मई 2015 तक का बिल 678/-रू0 जमा कर दिया था जिसके बाद कोई राशि बकाया नहीं थी। अत: अपीलार्थी/विपक्षी द्वारा उसके बाद के त्रुटिपूर्ण बिल जारी किये गये हैं जिनको ठीक कराने के लिए वह अपीलार्थी/विपक्षी के यहां गया, परन्‍तु बिल ठीक नहीं किया गया और कहा गया कि बिल जमा करो, अन्‍यथा कनेक्‍शन काटकर आर0सी0 भेज दी जायेगी तब प्रत्‍यर्थी/परिवादी ने बिल को ठीक कराने के लिए जिलाधिकारी के यहां दि0 01.01.2016 को प्रार्थना पत्र दिया और पुन: एक प्रार्थना पत्र दि0 04.01.2016 को विपक्षी को दिया, फिर भी बिल सही नहीं किया गया और विपक्षी के कर्मचारी दि0 10.01.2016 को उसके घर आये तथा बिल जमा करने को कहा और जमा न करने पर कनेक्‍शन काटने व आर0सी0 जारी करने की चेतावनी देकर चले गये। अत: क्षुब्‍ध होकर प्रत्‍यर्थी/परिवादी ने परिवाद जिला फोरम के सक्षम प्रस्‍तुत किया है।

          जिला फोरम के समक्ष अपीलार्थी/विपक्षी ने अपना लिखित कथन प्रस्‍तुत किया है और कहा है कि परिवादी की मीटर द्वारा रीडिंग स्‍पष्‍ट न देने के कारण आई0डी0एफ0 के बिल भेजे गये जिनकी अनुमानित राशि परिवादी द्वारा जमा की गई। लिखित कथन में कहा गया है कि दि0 28.06.2015 को परिवादी का मीटर का लैब में परीक्षण होने पर मीटर रीडिंग 9270 पायी गई जिसके अनुसार पूर्व में भेजे गये अनुमानित आई0डी0एफ0 में चार्ज यूनिटों का समायोजन कर शेष यूनिट के बिलों की राशि का बिल भेजा गया है।

          लिखित कथन में कहा गया है कि परिवादी के कार्यालय में आने पर मीटर लैब से प्राप्‍त जांच आख्‍या दिखाकर संतुष्‍ट कर मीटर में स्‍टोर रीडिंग का बिल भेजा गया है जो सही है। उसके भुगतान हेतु प्रत्‍यर्थी/परिवादी उत्‍तरदायी है।

          लिखित कथन में कहा गया है कि दि0 11.06.2015 को परिवादी का मीटर बदलते समय लिखित में दि0 24.06.2015 को मीटर  का परीक्षण लैब में अपने सामने कराने हेतु कहा गया था, लेकिन प्रत्‍यर्थी/परिवादी नहीं आया। लिखित कथन में कहा गया है कि प्रत्‍यर्थी/परिवादी ने विद्युत बिल कम चुकाने की गर्ज से मीटर रीडिंग स्‍टोर कर ली थी।

          जिला फोरम ने उभय पक्ष के अभिकथन एवं उपलब्‍ध साक्ष्‍यों पर विचार करने के उपरांत अपने निर्णय में यह उल्‍लेख किया है कि विपक्षी का ऐसा कोई कथन नहीं है कि पुराना मीटर उतारते समय उसकी कोई सील आदि टूटी हुई हो और न ही पत्रावली पर ऐसा कोई साक्ष्‍य उपलब्‍ध है जिससे प्रश्‍नगत मीटर की सील टूटी होना स्‍पष्‍ट होता हो। यदि मीटर इंटैक्‍ट था तब मीटर में हेराफेरी करके रीडिंग स्‍टोर करने का कोई प्रश्‍न नहीं है। अत: मीटर में हेराफेरी का कथन विश्‍वसनीय प्रतीत नहीं होता है। जिला फोरम ने सम्‍पूर्ण तथ्‍यों व साक्ष्‍यों पर विचार करने के उपरांत यह माना है कि अपीलार्थी/विपक्षी ने प्रत्‍यर्थी/परिवादी को प्रेषित बिलों में डेबिट धनराशि गलत अंकित किया है। अत: जिला फोरम ने परिवाद स्‍वीकार करते हुए आदेश पारित किया है जो ऊपर अंकित किया गया है।

          अपीलार्थी के विद्वान अधिवक्‍ता का तर्क है कि जिला फोरम का निर्णय और आदेश साक्ष्‍य एवं विधि के विरुद्ध है। प्रत्‍यर्थी/परिवादी ने विद्युत चोरी के उद्देश्‍य से मीटर रीडिंग स्‍टोर कर ली थी जो मीटर परीक्षण के उपरांत स्‍पष्‍ट हुआ है। अत: प्रत्‍यर्थी/परिवादी के जिम्‍मा जो डेबिट धनराशि बिल में अंकित की गई है वह उचित है और मीटर की सही रीडिंग पर आधारित है।

          अपीलार्थी के विद्वान अधिवक्‍ता का तर्क है कि जिला फोरम द्वारा पारित निर्णय और आदेश दोषपूर्ण है और निरस्‍त किये जाने योग्‍य है।

          प्रत्‍यर्थी के विद्वान अधिवक्‍ता का तर्क है कि जिला फोरम द्वारा पारित निर्णय और आदेश साक्ष्‍य एवं विधि के अनुकूल है। प्रत्‍यर्थी/परिवादी ने अपीलार्थी/विपक्षी द्वारा भेजे गये बिलों का भुगतान किया है उसके जिम्‍मा जो 38,511/-रू0 की डेबिट धनराशि बिल में अंकित की गई है वह गलत और विधि विरुद्ध है।

          मैंने उभय पक्ष के तर्क पर विचार किया है।

          प्रत्‍यर्थी/परिवादी ने अपना प्रश्‍नगत मीटर खराब होने के सम्‍बन्‍ध में और मीटर बदलने के लिए दि0 30.11.2013 को अपीलार्थी/विपक्षी के यहां प्रार्थना पत्र प्रस्‍तुत किया है।  उक्‍त प्रार्थना पत्र की प्रति अपील की पत्रावली के पृष्‍ठ 20 पर अपीलार्थी/विपक्षी द्वारा संलग्‍न की गई है। परिवाद पत्र के अनुसार प्रत्‍यर्थी/परिवादी के इस पत्र के बाद उसे बिल आई0डी0एफ0 श्रेणी का भेजा गया है और उसका मीटर दि0 11.06.2015 को बदला गया है। अपीलार्थी/विपक्षी की ओर से यह नहीं कहा गया है कि पुराना मीटर जब उतारा गया तो उसकी सील आदि टूटी हुई थी और न इस बात का कोई साक्ष्‍य दिया गया है। अपीलार्थी/विपक्षी की ओर से इस बात का भी कोई प्रमाण नहीं दिया गया है कि प्रत्‍यर्थी/परिवादी के पुराने मीटर को अपीलार्थी/विपक्षी के कर्मचारी ने निकालने के बाद प्रत्‍यर्थी/परिवादी के सामने सील मुहर किया था जब कि प्रत्‍यर्थी/परिवादी ने स्‍पष्‍ट कहा है कि मीटर को मौके पर सील पैक नहीं किया गया था। अत: यह स्‍पष्‍ट है कि अपीलार्थी/विपक्षी के कर्मचारियों ने उचित प्रक्रिया अपनाते हुए मीटर का परीक्षण नहीं कराया है। ऐसी स्थिति में मीटर परीक्षण के समय कथित रूप से मीटर में स्‍टोर पायी गई यूनिट की विश्‍वसनीयता संदिग्‍ध है। प्रत्‍यर्थी/परिवादी ने नवम्‍बर 2013 में मीटर दोषपूर्ण होने का कथन कर मीटर बदलने का निवेदन किया है जब कि अपीलार्थी/विपक्षी के कर्मचारियों ने मीटर दि0 11.06.2015 को बदला है और मीटर बदलने में विलम्‍ब का कोई कारण अपीलार्थी/विपक्षी की ओर से नहीं बताया गया है। अत: यह स्‍पष्‍ट है कि अपीलार्थी/विपक्षी ने सेवा में कमी की है।

          उल्‍लेखनीय है कि प्रत्‍यर्थी/परिवादी का पुराना मीटर दि0 11.06.2015 को बदला गया है और मीटर का लैब में परीक्षण दि0 28.06.2015 को 17 दिन बाद किया गया है जब कि उपरोक्‍त विवरण से स्‍पष्‍ट है कि मीटर सील्‍ड पैक मौके पर नहीं किया गया था। अत: इतनी लम्‍बी अवधि में मीटर में टैम्‍परिंग किये जाने की सम्‍भावना से इंकार नहीं किया जा सकता है।

          उपरोक्‍त सम्‍पूर्ण तथ्‍यों व परिस्थितियों पर विचार करते हुए मैं इस मत का हूं कि जिला फोरम ने जो अपीलार्थी/विपक्षी द्वारा प्रत्‍यर्थी/परिवादी को प्रेषित बिल में मीटर परीक्षण के आधार पर अंकित डेबिट धनराशि 38,511/-रू0 को गलत माना है वह उचित और युक्ति संगत है। सम्‍पूर्ण तथ्‍यों व परिस्थितियों पर विचार करते हुए मैं इस मत का हूं कि जिला फोरम ने जो निर्णय और आदेश पारित किया है वह वाद की परिस्थितियों में उचित और युक्ति संगत है उसमें किसी हस्‍तक्षेप की आवश्‍यकता नहीं है।

          उपरोक्‍त निष्‍कर्ष के आधार पर अपील निरस्‍त की जाती है।                     

          अपील में उभय पक्ष अपना-अपना वाद व्‍यय स्‍वयं वहन करेंगे।

          अपील में धारा 15 उपभोक्‍ता संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत जमा धनराशि 1500/-रू0 अर्जित ब्‍याज सहित जिला फोरम को निस्‍तारण हेतु प्रेषित की जाए।

      

 

               (न्‍यायमूर्ति अख्‍तर हुसैन खान)                                               

                                     अध्‍यक्ष                                   

शेर सिंह आशु0,

कोर्ट नं0-1

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 
 
[HON'BLE MR. JUSTICE AKHTAR HUSAIN KHAN]
PRESIDENT

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