Uttar Pradesh

StateCommission

A/2003/1604

Post Office - Complainant(s)

Versus

Sahkari Chini Mil Ltd - Opp.Party(s)

Km Asha Chaudhry

06 Oct 2015

ORDER

STATE CONSUMER DISPUTES REDRESSAL COMMISSION, UP
C-1 Vikrant Khand 1 (Near Shaheed Path), Gomti Nagar Lucknow-226010
 
First Appeal No. A/2003/1604
(Arisen out of Order Dated in Case No. of District State Commission)
 
1. Post Office
A
...........Appellant(s)
Versus
1. Sahkari Chini Mil Ltd
A
...........Respondent(s)
 
BEFORE: 
 HON'BLE MR. Raj Kamal Gupta PRESIDING MEMBER
 
For the Appellant:
For the Respondent:
ORDER

राज्‍य उपभोक्‍ता विवाद प्रतितोष आयोग, उ0प्र0, लखनऊ।

सुरक्षित

अपील सं0-१६०४/२००३

 

(जिला फोरम, बिजनौर, द्वारा परिवाद सं0-१८५/१९९९ में पारित निर्णय एवं आदेश दिनांक १६-०१-२००३ के विरूद्ध)

 

१. सुपरिण्‍टेण्‍डेण्‍ट डाकघर, बिजनौर मण्‍डल, बिजनौर।

२. डिप्‍टी डाक पाल, नजीवाबाद डाकघर, नजीवाबाद, बिजनौर।

                                     .....................   अपीलार्थीगण/विपक्षीगण।

बनाम्

किसान सहकारी चीनी मिल लिमिटेड, स्‍नेह रोड, नजीवाबाद, बिजनौर।

                                    .....................           प्रत्‍यर्थी/परिवादी।

समक्ष:-

१-  मा0 श्री उदय शंकर अवस्‍थी, पीठासीन सदस्‍य।

२-  मा0 श्री राज कमल गुप्‍ता , सदस्‍य।

 

अपीलार्थी की ओर से उपस्थित :- डॉ0 उदयवीर सिंह विद्वान अधिवक्‍ता।

प्रत्‍यर्थी की ओर से उपस्थित   :- श्री विक्रम सोनी विद्वान अधिवक्‍ता

 

दिनांक : २३-१०-२०१५.

 

मा0 श्री उदय शंकर अवस्‍थी, पीठासीन सदस्‍य द्वारा उदघोषित

निर्णय

      प्रस्‍तुत अपील, परिवाद सं0-१८५/१९९९ में जिला मंच, बिजनौर द्वारा पारित निर्णय एवं आदेश दिनांक १६-०१-२००३ के विरूद्ध योजित की गयी है।

संक्षेप में तथ्‍य इस प्रकार हैं कि प्रत्‍यर्थी/परिवादी ने अपीलार्थी सं0-२ के यहॉं एक वर्ष के लिए सावधि जमा खाते में २,००,०००/- रू० दिनांक २६-०८-१९९६ को जमा किए, जिस पर १०.५ प्रतिशत वार्षिक ब्‍याज तय था। एक वर्ष व्‍यतीत होने पर प्रत्‍यर्थी/परिवादी ने जब अपीलार्थी सं0-२ से उपरोक्‍त जमा धनराशि ०२.०० लाख रू० मय १०.५ प्रतिशत सालाना ब्‍याज वापस करने को कहा तब अपीलार्थी संख्‍या-१ ने कहा कि केवल मूल धन ही वापस हो सकता है, क्‍योंकि प्रत्‍यर्थी/परिवादी एक संस्‍था है और संस्‍था द्वारा सावधि जमा खाता नहीं खोला जा सकता। अत: प्रत्‍यर्थी/परिवादी ने जिला मंच के समक्ष परिवाद ०२.०० लाख रू० मय ब्‍याज अदायगी तथा क्षतिपूर्ति एवं वाद व्‍यय की अदायगी हेतु योजित किया।

 

 

 

-२-

अपीलार्थी/विपक्षी का यह कथन है कि प्रत्‍यर्थी/परिवादी एक संस्‍था है और केन्‍द्र सरकार की विज्ञप्ति के अनुसार संस्‍था के पक्ष में सावधि जमा खाता नहीं खोला जा सकता। यह विधि विरूद्ध खाता डाक कर्मियों की अज्ञानता के कारण खोला गया, किन्‍तु क्‍योंकि ऐसे खाते खोलने की विधि अनुसार अनुमति नहीं है, तद्नुसार ऐसी संविदा शून्‍य होगी, अत: प्रत्‍यर्थी/परिवादी मात्र मूल धन प्राप्‍त करने का अधिकारी है। ब्‍याज प्राप्‍त करने का अधिकारी नहीं है। प्रत्‍यर्थी/परिवादी को मूल धन प्राप्‍त करने हेतु सूचित किया गया, किन्‍तु उनके द्वारा मूल धन प्राप्‍त न करके, परिवाद योजित किया गया।

विद्वान जिला मंच ने अपीलार्थी सं0-२ की गलती के कारण प्रश्‍नगत खाता खोलना मानते हुए परिवादी का परिवाद आंशिक रूप से स्‍वीकार किया तथा अपीलार्थी सं0-२ को निर्देशित किया गया कि वह परिवादी को २,००,०००/- रू० मय ब्‍याज १०.५ प्रतिशत दिनांक २६-०८-१९९६ से २५-०८-१९९७ तक तथा २,००,०००/- रू० पर २६-०८-१९९७ से भुगतान की तिथि तक ५ प्रतिशत ब्‍याज सालाना भुगतान ३० दिन के अन्‍दर करे। इसके अतिरिक्‍त परिवाद व्‍यय के रूप में २,०००/- रू० भी अदा करने हेतु अपीलार्थी सं0-२ को निर्देशित किया गया। अपीलार्थी सं0-१ को किसी भी उत्‍तरदायित्‍व से मुक्‍त किया। उल्‍लेखनीय है कि जिला मंच ने परिवादी को २६-०८-१९९७ से भुगतान की तिथि तक ५ प्रतिशत ब्‍याज सालाना भुगतान करने हेतु अपीलार्थी सं0-२ को इसलिए निर्देश दिया क्‍योंकि जिला मंच के मतानुसार स्‍वयं परिवादीने प्रश्‍नगत सावधि जमा खाता के परिपक्‍व होने के बाद भुगतान प्राप्‍त नहीं किया।

इस निर्णय से क्षुब्‍ध होकर यह अपील योजित की गयी है।

हमने अपीलार्थी डाक विभाग के विद्वान अधिवक्‍ता डॉ0 उदय वीर सिंह एवं प्रत्‍यर्थी/परिवादी के विद्वान अधिवक्‍ता श्री विक्रम सोनी के तर्क सुने तथा अभिलेख का अवलोकन किया।

प्रत्‍यर्थी/परिवादी के विद्वान अधिवक्‍ता द्वारा तर्क प्रस्‍तुत किया गया कि प्रस्‍तुत अपील विलम्‍ब से योजित की गयी है और विलम्‍ब से योजित करने के कारण यह अपील पोषणीय नहीं है।

यह अपील जिला मंच द्वारा पारित निर्णय एवं आदेश दिनांकित १६-०१-२००३ के

 

-३-

विरूद्ध दिनांक २०-०६-२००३ को विलम्‍ब से योजित की गयी है, जबकि प्रश्‍नगत निर्णय की प्रमाणत प्रतिलिप अपीलार्थी द्वारा दिनांक २१-०१-२००३ को प्राप्‍त की गयी। विलम्‍ब को क्षमा किये जाने हेतु अपीलार्थी द्वारा प्रार्थना पत्र प्रस्‍तुत किया गया है। इस प्रार्थना पत्र के अनुसार अपीलार्थी का कथन है कि निर्णय की प्रमाणित प्रतिलिपि प्राप्‍त करने के उपरान्‍त अपील योजित करने की अनुमति उच्‍च अधिकारियों द्वारा दिनांक ०३-०६-२००३ को प्राप्‍त हुई। तदोपरान्‍त अभिलेख प्राप्‍त करने के पश्‍चात् अधिवक्‍ता से सम्‍पर्क करने हेतु पैरोकार को दिनांक १५-०६-२००३ को भेजा गया। तब अधिवक्‍ता द्वारा यह अपील योजित की गयी। विलम्‍ब क्षमा प्रार्थना पत्र के साथ अपील योजित किये जाने के सन्‍दर्भ में अपीलार्थी के उच्‍च अधिकारियों द्वारा दी गयी अनुमति से सम्‍बन्धित उनका आदेश संलग्‍न किया गया है एवं पैरोकार श्री महज भारद्वाज का शपथ पत्र भी संलग्‍न किया गया है। अपीलार्थी द्वारा प्रस्‍तुत किए गये इस प्रार्थना पत्र के विरूद्ध प्रत्‍यर्थी/परिवादी की ओर से कोई आपत्ति अथवा प्रतिशपथ पत्र प्रस्‍तुत नहीं किया गया है। मामले के तथ्‍यों एवं परिस्थितियों के आलोक में हमारे विचार से अपील के प्रस्‍तुतीकरण में हुए विलम्‍ब का, जो स्‍पष्‍टीकरण अपीलार्थी द्वारा प्रस्‍तुत किया गया है, वह सन्‍तोषजनक है। अत: विलम्‍ब क्षमा किए जाने योग्‍य है। तद्नुसार अपील के प्रस्‍तुतीकरण में हुआ विलम्‍ब क्षमा किया जाता है।

जहॉं तक इस मामले को गुणदोष के आधार पर निस्‍तारण का प्रश्‍न है, इस सन्‍दर्भ में मुख्‍य विचारणीय प्रश्‍न यह है कि क्‍या प्रत्‍यर्थी/परिवादी प्रश्‍नगत सावधि जमा खाता पर कोई ब्‍याज प्राप्‍त करने का अधिकारी है ?

अपीलार्थी की ओर से यह तर्क प्रस्‍तुत किया गया कि प्रत्‍यर्थी/परिवादी किसान सहकारी चीनी मिल लि0 एक संस्‍था है। भारत सरकार वित्‍त मंत्रालय इकोनोमिक अफेयर्स द्वारा जारी विज्ञप्ति सं0-जी.एस.आर.११८ (ई), जी.एस.आर.११९ (ई), जी.एस.आर.१२० (ई) गजेटी आफ इण्डिया एक्‍स्‍ट्रा ओर्डीनरी पार्ट-११ सेक्‍शन-३ सब   सेक्‍शन -१ दिनांक ०८-०३-१९९५ के अनुसार दिनांक ०१-०४-१९९५ से डाकघरों में संस्‍थाओं द्वारा सावधी जमा में धन जमा नहीं किया जा सकता। महानिदेशक, नई दिल्‍ली के   पत्र सं0-६१-११/९५-एसबी दिनांक ०९-१०-१९९५ के अनुसार दिनांक ०१-०४-१९९५ के बाद

 

 

-४-

संस्‍थाओं द्वारा खोले गये अनियमित खातों को नियमित नहीं किया जा सकता। उनके द्वारा यह तर्क भी प्रस्‍तुत किया गया कि पोस्‍ट आफिस सेबिंग बैंक जनरल रूल्‍स १९८१ के नियम-१७ के अनुसार नियमों के विरूद्ध खोले गये खातों पर कोई ब्‍याज देय नहीं होगा। इस सन्‍दर्भ में अपीलार्थी के विद्वान अधिवक्‍ता द्वारा Civil Appeal No. 4995 of 2006, Arulmighu Dhandayudhapaniswamy Vs. Director General of Post Offices, Department of Post & Ors. में माननीय उच्‍चतम न्‍यायालय द्वारा दिये गये निर्णय पर विश्‍वास व्‍यक्‍त किया गया। 

प्रत्‍यर्थी/परिवादी के विद्वान अधिवक्‍ता द्वारा यह तर्क प्रस्‍तुत किया गया कि प्रत्‍यर्थी एक को-ऑपरेटिव सोसायटी है। को-ऑपरेटिव सोसायटी के पक्ष में सावधि जमा खाता खोला जा सकता है। इस सन्‍दर्भ में उनके द्वारा यह तर्क प्रस्‍तुत किया गया कि पोस्‍ट आफिस टाइम डिपोजिट रूल्‍स १९८१ के स्‍पष्‍टीकरण सं0-८ में यह उल्लिखित किया गया है कि को-ऑपरेटिव सोसायटी के पक्ष में सावधि जमा खाता टे‍बिल के आइटम-६ के अन्‍तर्गत खोला जा सकता है। प्रत्‍यर्थी के विद्वान अधिवक्‍ता द्वारा सन्‍दर्भित स्‍पष्‍टीकरण की टे‍बिल के आइटम-६ के अवलोकन से यह स्‍पष्‍ट है कि इस सन्‍दर्भ में प्रत्‍यर्थी के विद्वान अधिवक्‍ता द्वारा प्रस्‍तुत किया गया यह तर्क भ्रामक है। उपरोक्‍त स्‍पष्‍टीकरण सं0-८ के अनुसार निम्‍नवत् प्रावधन है :-

‘’ (8) (i) In connection with opening of TD  account under item 6 of the Table a doubt has been raised whether the said account should be opened in the name of person or body who has been allowed to open account of behalf the person or whether the account should be opend in the name of person on whose behalf the account is to be opened. The matter was referred to the Ministry of Finance (DEA) who have clarified that in such case the account will be opened in the name of the individual (s) on whose behalf money is invested by the body or person. For example, Mr. X is a member of a Co-operative Society and account is to be opened by the co-operative Society on his behalf.  In such a case the account will be opened in the name of Mr. X through the said Co-operative Society.  The application form   (SB-3) will be signed by the authorised person of the Co-operative Society.

 

 

-५-

(ii) It is also clarified that a person or body opening the account on behalf of others may be allowed to draw annual interest every year on the basis of written authority obtained from the depositors every time the interest is drawn.  The person or body opening the accounts may be allowed to close the accounts also on the basis of written authority obtained from the depositors.  ‘’

प्रस्‍तुत मामले में प्रश्‍नगत सावधि जमा खाता को-ऑपरेटिव सोसायटी के नाम में खोला गया है, किसी सदस्‍य के नाम से नहीं। अत: इस स्‍पष्‍टीकरण का लाभ प्रत्‍यर्थी/परिवादी को प्रदान नहीं किया जा सकता है, बल्कि स्‍पष्‍टीकरण सं0-९ में यह पूर्णरूप से स्‍पष्‍ट किया गया है कि दिनांक ०१-०४-१९९५ से संस्‍थाओं के पक्ष में सावधि जमा खाता नहीं खोला जा सकता। इस सम्‍बन्‍ध में यदि कोई अनियमितता पाई जाती है तो सम्‍बन्धित कर्मचारी के विरूद्ध उचित कार्यवाही की जायेगी।

पोस्‍ट आफिस सेविंग बैंक जनरल रूल्‍स १९८१ के नियम-१७ के अनुसार – (मा0 उच्‍चतम न्‍यायालय द्वारा दिये गये निर्णय 2011 (2) CPC 495 के अन्‍तर्गत)

17. Accounts opened in contravention of rules.- Subject to the provisions of rule 16, where an account is found to have been opened in contravention of any relevant rule for the time being in force and applicable to the accounts kept in the Post Office Savings Bank, the relevant Head Savings Bank may, at any time, cause the account to be closed and the deposits made in the account refunded to the depositor without interest.

अपीलार्थी के विद्वान अधिवक्‍ता द्वारा सन्‍दर्भित मा0 उच्‍चतम न्‍यायालय द्वारा Civil Appeal No. 4995 of 2006, Arulmighu Dhandayudhapaniswamy Vs. Director General of Post Offices, Department of Post & Ors. 2011 (2) CPC 495 के मामले दिये गये निर्णय में समान परिस्थितियों में मा0 उच्‍चतम न्‍यायालय द्वारा पोस्‍ट आफिस सेविंग बैंक जनरल रूल्‍स १९८१ के नियम-१७ पर विचार करते हुए यह निर्णीत किया गया कि दिनांक ०१-०४-१९९५ के बाद से संस्‍थाओं के पक्ष में सावधि जमा खाता नहीं खोला जा सकता। अत: यदि किसी संस्‍था के पक्ष में उक्‍त तिथि के बाद सावधि जमा खाता खोला जाता है तो भी खाते पर कोई ब्‍याज देय नहीं होगा।

 

 

-६-

इस विधिक स्थिति के आलोक में हमारे विचार से विद्वान जिला मंच ने प्रत्‍यर्थी/परिवादी के परिवाद को स्‍वीकार करके त्रुटि की है।

पत्रावली के अवलोकन से यह विदित होता है कि प्रत्‍यर्थी/परिवादी द्वारा प्रस्‍तुत प्रार्थना पत्र दिनांकित १४-०८-२००६ निस्‍तारण हेतु लम्बित है। इस प्रार्थना पत्र द्वारा प्रत्‍यर्थी/परिवादी ने यह प्रार्थना की है कि जिला मंच, बिजनौर द्वारा निष्‍पादन सं0-०३/२००३ में पारित आदेश दिनांकित १९-०४-२००६ का क्रियान्‍वयन रोका जाय। आदेश दिनांकित १९-०४-२००२ की फोटोप्रति प्रत्‍यर्थी/परिवादी द्वारा द‍ाखिल की गयी है, जिसके अवलोकन से यह विदित होता है कि आदेश दिनांक १९-०४-२००६ द्वारा अध्‍यक्ष जिला मंच, बिजनौर ने प्रत्‍यर्थी/परिवादी को नोटिस इस आशय का भेजा था कि परिवाद में विपक्षी डाक विभाग द्वारा २,१०,०००/- रू० बैंक ड्राफ्ट द्वारा राज्‍य आयोग के आदेश दिनांक ०६-०९-२००३ के अनुपालन में जमा किया गया, लेकिन वह ड्राफ्ट जिला फोरम, बिजनौर के पक्ष में न होकर प्रबन्‍धक, किसान सहकारी चीनी मिल लि0 नजीवाबाद के नाम दाखिल किया गया तथा उस ड्राफ्ट को प्रत्‍यर्थी/परिवादी द्वारा राज्‍य आयोग के आदेश के विपरीत प्राप्‍त कर लिया गया है। अत: प्रत्‍यर्थी/परिवादी को जिला मंच द्वारा निर्देशित किया गया कि वह २,१०,०००/- रू० जिला मंच में दिनांक १५-०५-२००६ से पूर्व जमा करे।

उल्‍लेखनीय है कि दिनांक ०३-०९-२००३ को इस अपील में इस आशय का आदेश पारित किया गया कि यदि अपीलार्थी २,००,०००/- रू० एवं इस धनराशि पर दिनांक    २६-०८-१९९६ से २५-०८-१९९७ तक की अवधि का ०५ प्रतिशत ब्‍याज सहित एक माह में नगद अथवा बैंक ड्राफ्ट से जिला मंच में जमा कर देता है, तब जिला मंच के निर्णय एवं आदेश दिनांक १६-०१-२००३ के अनुसार शेष धनराशि की निष्‍पादन कार्यवाही स्‍थगित रहेगी। यदि यह धनराशि अपीलार्थी द्वारा जमा की जाती है, तब जिला मंच यह धनराशि सावधि संचय जमा खाते में ०६ माह के लिए समय-समय पर नवीनीकृत कराते हुए तब तक जमा रखेंगे जब तक कि इस आयोग द्वारा कोई अग्रिम आदेश इस सम्‍बन्‍ध में पारित नहीं किया जाता है अथवा इस अपील का अन्तिम रूप से निस्‍तारण नहीं किया जाता है।  

 

 

-७-

इस प्रकार यह स्‍पष्‍ट है कि आयोग द्वारा पारित आदेश दिनांक ०३-०९-२००३ के अनुसार अपीलार्थी द्वारा जमा की जाने वाली धनराशि का भुगतान प्रत्‍यर्थी/परिवादी को नहीं किया जाना था, बल्कि यह धनराशि जिला मंच में जमा की जानी थी। अपीलार्थी द्वारा जमा की गयी धनराशि प्रत्‍यर्थी/परिवादी द्वारा अनधिकृत रूप से प्राप्‍त की गयी। निर्विवाद रूप से २,००,०००/- रू० प्रत्‍यर्थी/परिवादी का मूलधन है, किन्‍तु क्‍योंकि प्रत्‍यर्थी/परिवादी इस धनराशि पर कोई ब्‍याज पाने का अधिकारी नहीं है, अत: प्रत्‍यर्थी/परिवादी १०,०००/- रू० ब्‍याज की धनराशि, जो उसके द्वारा प्राप्‍त कर ली गयी है,

अपीलार्थी को वापस करने का उत्‍तरदायी है।

      परिणामस्‍वरूप, अपील स्‍वीकार करते हुए जिला मंच का प्रश्‍नगत निर्णय एवं आदेश अपास्‍त होने तथा परिवाद निरस्‍त होने योग्‍य है। 

                           आदेश

      अपील स्‍वीकार की जाती है। जिला मंच, बिजनौर, द्वारा परिवाद सं0-१८५/१९९९ में पारित निर्णय एवं आदेश दिनांक १६-०१-२००३ अपास्‍त करते हुए परिवाद निरस्‍त किया जाता है। प्रत्‍यर्थी/परिवादी को निर्देशित किया जाता है कि ब्‍याज का १०,०००/- रू०, जो उसके द्वारा अनधिकृत रूप से प्राप्‍त कर लिया गया है, उसे इस आदेश की प्राप्ति से ३० दिन के भीतर जिला मंच में जमा किया जाना सुनिश्चित करे और प्रत्‍यर्थी/परिवादी द्वारा जमा की जाने वाली उपरोक्‍त धनराशि तदोपरान्‍त जिला मंच द्वारा अपीलार्थी को उपलब्‍ध करा दी जाय।

पक्षकार अपीलीय व्‍यय-भार अपना-अपना स्‍वयं वहन करेंगे।

उभय पक्ष को इस निर्णय की प्रमाणित प्रति नियमानुसार उपलब्‍ध करायी जाय।     

 

                                               (उदय शंकर अवस्‍थी)

                                                 पीठासीन सदस्‍य

 

 

                                                (राज कमल गुप्‍ता)

                                                    सदस्‍य

 

प्रमोद कुमार

वैय0सहा0ग्रेड-१,

कोर्ट-२.

 

 

 

 

 
 
[HON'BLE MR. Raj Kamal Gupta]
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