Uttar Pradesh

Faizabad

CC/04/2012

Annta - Complainant(s)

Versus

Sahkari Bank - Opp.Party(s)

15 Oct 2015

ORDER

DISTRICT CONSUMER DISPUTES REDRESSAL FORUM
Judgement of Faizabad
 
Complaint Case No. CC/04/2012
 
1. Annta
milkipur Faizabad
...........Complainant(s)
Versus
1. Sahkari Bank
FAIZABAD
............Opp.Party(s)
 
BEFORE: 
 HON'BLE MR. JUSTICE MR. CHANDRA PAAL PRESIDENT
 HON'BLE MRS. MAYA DEVI SHAKYA MEMBER
 HON'BLE MR. VISHNU UPADHYAY MEMBER
 
For the Complainant:
For the Opp. Party:
ORDER

जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष फोरम फैजाबाद । ़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़ ़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़उपस्थितिः-(1) श्री चन्द्र पाल, अध्यक्ष (2) श्रीमती माया देवी शाक्य, सदस्या (3) श्री विष्णु उपाध्याय, सदस्य परिवाद सं0-04/2012 मु0 अनन्ता विधवा अयोध्या प्रसाद निवासी ग्राम देवरिया परगना पश्चिमराठ तहसील मिल्कीपुर जिला फैजाबाद ....................परिवादिनी बनाम शाखा प्रबन्धक फैजाबाद जिला सहकारी बैंक लि0 फैजाबाद मुख्य शाखा सदर जिला फैजाबाद ................... विपक्षी निर्णय दिनाॅंक 15.10.2015 निर्णय उद्घोषित द्वारा: श्री चन्द्र पाल, अध्यक्ष परिवादिनी ने यह परिवाद विपक्षी के विरूद्ध जमा धनराशि का भुगतान करने तथा क्षतिपूर्ति दिलाये जाने हेतु योजित किया है। संक्षेप में परिवादिनी का केस इस प्रकार है कि परिवादिनी विपक्षी बैंक शाखा में बचत खाता सं0-10058 लेजर फाइल सं0-34/83 दिनाॅंकित 08.01.03 की खाता धारक है। उक्त खाते का आहरण न्यायालय के निर्देश के अधीन दि0 06.02.05 तक प्रतिबन्धित था। प्रतिबन्ध अवधि समाप्त होने के उपरान्त् पूर्व शाखा प्रबन्धक द्वारा परिवादिनी को उक्त खाते से दि0 13.12.05, 16.12.05, 28.3.06 व 03.10.06 को ( 2 ) धनराशि का भुगतान किया जा चुका है तथा इसी खाते में दि0 18.01.11 को परिवादिनी के द्वारा मु0 34,937=00 जमा भी किया गया है। वर्तमान में परिवादिनी के खाते में उसके मु0 39,683=00 जमा है। परिवादिनी के लड़के की शादी थी। परिवादिनी अपने उक्त खाते से भुगतान के लिए विपक्षी के पास गयी, तो विपक्षी आज कल करते हुए परिवादी को बार-बार दौड़ाता रहा और भुगतान न किये जाने का कोई उचित व स्पष्ट कारण नहीं बताया। इस प्रकार विवश होकर परिवादिनी ने यह परिवाद योजित किया। विपक्षी ने अपने जवाब में कहा कि परिवादिनी का एक बचत खाता संख्या-10058 विपक्षी फैजाबाद जिला सहकारी बैंक लि0 फैजाबाद शाखा सदर में है। परिवादिनी द्वारा न्यायालय श्रीमान अपर जिला जज नं0-5 फैजाबाद के द्वारा पारित आदेश दि0 23.09.2002 क्लेम वाद संख्या-11/2002 श्रीमती अनन्ता बनाम भगवान प्रसाद आदि की छायाप्रति जो विपक्षी उसमें कहीं भी उपरोक्त खाता संख्या-10058 में जमा धनराशि के भुगतान हेतु रोक नहीं लगाया गया है और न ही न्यायालय के द्वारा इस प्रकार का कोई निर्देश प्राप्त हुआ है। परिवादिनी को कथित धनराशि के भुगतान से विपक्षी बैंक द्वारा रोका नहीं गया और न ही वह उक्त बचत खाता में जमा रूपयो को निकालने हेतु शाखा द्वारा निकासी हेतु कोई विद ड्राल फार्म प्रस्तुत किया गया जो बैंक द्वारा निरस्त किया गया हो। भुगतान न किये जाने पर परिवादिनी के द्वारा कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया न ही बैंक में धन निकासी हेतु जिसकी तारीख ही दर्शायी गयी है। इस प्रकार विपक्षी ने परिवादिनी के परिवाद को निरस्त करने की याचना किया है। परिवादिनी के लिखित बहस का अवलोकन किया तथा पत्रावली में उपलब्ध साक्ष्य का अवलोकन किया। परिवादिनी ने अपने परिवाद में विपक्षी द्वारा बचत खाता सं0-10058 लेजर फाइल सं0-34/83 से पैसा आहरण करने के सम्बन्ध में यह परिवाद योजित किया है कि विपक्षी जमा धनराशि का भुगतान करे तथा भुगतान न होने के कारण परिवादिनी को परेशानी होती है। विपक्षी ने इस कथन से इन्कार किया है कि परिवादिनी को पैसा आहरण करने में परेशान करता है। उ0प्र0 में जिला सहकारी बैंक की साख अच्छी नहीं है जिससे खाता धारकों की संख्या काफी कम होती जा रही है। जिस उद्देश्य से जिला सहकारी बैंक का निर्माण किया गया उसका उद्देश्य जिला सहकारी बैंक नहीं कर पा रही है। आये दिन कुछ न कुछ घोटाला ( 3 ) होता रहता है। जिला सहकारी बैंक की प्रदेश में छवि अच्छी नहीं है। इस स्थिति को देखते हुए जिला सहकारी बैंक को अपनी सेवा में किसी प्रकार की कमी नहीं रखनी चाहिए और परिवादिनी को परिवादिनी के खाते से जो पैसा नियमानुसार भुगतान होना चाहिए उसे भुगतान करना चाहिए। चूॅंकि विपक्षी ने अपने जवाबदावे में परिवादिनी के परिवाद के कथन से इन्कार किया है और कहा है कि जमा धनराशि का भुगतान करने में किसी प्रकार से परिवादिनी को परेशान नहीं कर रहा है। परिवादिनी ने कोई ऐसा साक्ष्य प्रेषित नहीं किया है जिससे विपक्षी परिवादिनी को उसके खाते से पैसे का भुगतान नहीं कर रहा है। इस प्रकार परिवादिनी के परिवाद में मैं बल नहीं पाता हॅंू। परिवादिनी का परिवाद खारिज किये जाने योग्य है। आदेश परिवादिनी का परिवाद खारिज किया जाता है। ( विष्णु उपाध्याय ) ( माया देवी शाक्य ) ( चन्द्र पाल ) सदस्य सदस्या अध्यक्ष निर्णय एवं आदेश आज दिनांक 15.10.2015 को खुले न्यायालय में हस्ताक्षरित एवं उद्घोषित किया गया। (विष्णु उपाध्याय) (माया देवी शाक्य) ( चन्द्र पाल ) सदस्य सदस्या अध्यक्ष

 
 
[HON'BLE MR. JUSTICE MR. CHANDRA PAAL]
PRESIDENT
 
[HON'BLE MRS. MAYA DEVI SHAKYA]
MEMBER
 
[HON'BLE MR. VISHNU UPADHYAY]
MEMBER

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