(सुरक्षित)
राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, उ0प्र0, लखनऊ
अपील संख्या-1278/2005
(जिला आयोग, द्वितीय लखनऊ द्वारा परिवाद संख्या-142/2000 में पारित निर्णय/आदेश दिनांक 01.07.2005 के विरूद्ध)
बृजेश नारायण पाण्डेय पुत्र स्व0 राम गुलाम, निवासी निकट मुण्डाबीर बाबा, आजाद नगर, थाना कृष्णानगर, आलमबाग, लखनऊ।
अपीलार्थी/परिवादी
बनाम
1. सचिव, स्थानीय निकाय लखनऊ (उ0प्र0)।
2. मुख्य अभियंता, जल संस्थान, मुख्यालय ऐशबाग, लखनऊ।
3. अधिशासी अभियंता, जल संस्थान, आलमबाग जोन, लखनऊ।
4. सहायक अभियंता, जल संस्थान, आलमबाग जोन, लखनऊ।
प्रत्यर्थीगण/विपक्षीगण
समक्ष:-
1. माननीय श्री सुशील कुमार, सदस्य।
2. माननीय श्री विकास सक्सेना, सदस्य।
अपीलार्थी की ओर से उपस्थित : श्री बी.एन. पाण्डेय,
विद्वान अधिवक्ता।
प्रत्यर्थीगण की ओर से उपस्थित : कोई नहीं।
दिनांक: 29.03.2023
माननीय श्री सुशील कुमार, सदस्य द्वारा उद्घोषित
निर्णय
1. परिवाद संख्या-142/2000, बृजेश नारायण पाण्डेय बनाम सचिव स्थानीय निकाय तथा तीन अन्य में विद्वान जिला आयोग, द्वितीय लखनऊ द्वारा पारित निर्णय एवं आदेश दिनांक 01.07.2005 के विरूद्ध यह अपील स्वंय परिवादी द्वारा प्रस्तुत की गई है, क्योंकि जल संस्थान द्वारा पानी की आपूर्ति न करने पर उपभोक्ता परिवाद को संधारणीय नहीं माना गया।
2. अपीलार्थी के विद्वान अधिवक्ता उपस्थित आए। प्रत्यर्थीगण की ओर से कोई उपस्थित नहीं हुआ। केवल अपीलार्थी के विद्वान अधिवक्ता को सुना गया तथा प्रश्नगत निर्णय/आदेश एवं पत्रावली का अवलोकन किया गया।
3. अपीलार्थी के विद्वान अधिवक्ता का यह तर्क है कि पानी का कनेक्शन प्राप्त करने के पश्चात भी प्रत्यर्थीगण द्वारा पानी की आपूर्ति नहीं की गई, इसलिए परिवादी वांछित अनुतोष प्राप्त करने के लिए अधिकृत है। नजीर, उत्ताखंड जल संस्थान बनाम सीमा शर्मा, एडवोकेट में व्यवस्था दी गई है कि जल संस्थान के विरूद्ध उपभोक्ता परिवाद संधारणीय नहीं है। चूंकि परिवादी यथार्थ में जल संस्थान का उपभोक्ता नहीं माना जा सकता। जल संस्थान द्वारा नगरीय सुविधाएं एक शुल्क प्राप्त करके प्रदान की गई हैं। यदि नगरीय सुविधाओं को प्रदान करने में किसी विभाग द्वारा कोई लापरवाही बरती जाती है तब उच्च अधिकारियों के समक्ष इस तथ्य की शिकायत सुगमता से की जा सकती है। अत: विद्वान जिला आयोग द्वारा पारित निर्णय एवं आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई औचित्य नहीं है। तदनुसार प्रस्तुत अपील निरस्त होने योग्य है।
आदेश
4. प्रस्तुत अपील निरस्त की जाती है।
उभय पक्ष अपना-अपना व्यय भार स्वंय वहन करेंगे।
आशुलिपिक से अपेक्षा की जाती है कि वह इस निर्णय/आदेश को आयोग की वेबसाइट पर नियमानुसार यथाशीघ्र अपलोड कर दे।
(विकास सक्सेना) (सुशील कुमार)
सदस्य सदस्य
लक्ष्मन, आशु0,
कोर्ट-3