राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, उ0प्र0, लखनऊ।
(मौखिक)
अपील संख्या:-1796/2006
श्रीमती शान्ति देवी पत्नी स्व0 श्री कृपा राम
बनाम
एस0डी0ओ0, इलैक्ट्रिसिटी (सप्लाई) व अन्य
समक्ष :-
मा0 न्यायमूर्ति श्री अशोक कुमार, अध्यक्ष
अपीलार्थी के अधिवक्ता : श्री आर0डी0 क्रान्ति
प्रत्यर्थीगण के अधिवक्ता : श्री इसार हुसैन
दिनांक :- 11.7.2023
मा0 न्यायमूर्ति श्री अशोक कुमार, अध्यक्ष द्वारा उदघोषित
निर्णय
प्रस्तुत अपील, अपीलार्थी/ परिवादिनी श्रीमती शान्ति देवी द्वारा इस आयोग के सम्मुख धारा-15 उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 के अन्तर्गत जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, गाजियाबाद द्वारा परिवाद सं0-771/2000 में पारित निर्णय/आदेश दिनांक 28.6.2006 के विरूद्ध योजित की गई है।
संक्षेप में वाद के तथ्य इस प्रकार है कि अपीलार्थी/परिवादी के पिता के नाम एक घरेलू कनेक्शन 500 वाट का लिया गया था। अपीलार्थी/परिवादी टेलीफोन विभाग में कार्यरत रहा और वर्ष-1973 से 1995 तक नौकरी पर सपरिवार बाहर रहा है। अपीलार्थी/परिवादी समय-समय पर बिल अदा करता रहा एवं अपीलार्थी/परिवादी ने वर्ष-1988 तक बिल अदा किये। वर्ष-1989 में अपीलार्थी/परिवादी कैंसर रोग से पीडित हो गया तथा अपना इलाज कराने लगा। अपीलार्थी/परिवादी के ऑपरेशन होने के बाद वर्ष-1993 में कुछ सुधार हुआ, तो अपीलार्थी/परिवादी अपना बिल जमा करने के लिए बिजली के आफिस मे गया तब वहॉ अपीलार्थी/परिवादी पाया कि वर्ष-1989 से 1993 मार्च तक के सारे बिल गलत और बढ़ाचढ़ा कर बनाये गये थे, जिसे अपीलार्थी/परिवादी ने ठीक
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करने को कहा तो अपीलार्थी/परिवादी से कहा गया कि तुम्हारा मीटर खराब है, उसे बदला जाना है और मई, 1993 को दूसरा मीटर लगाया गया, जबकि मीटर सही था। अपीलार्थी/परिवादी प्रत्यर्थी/विपक्षी के आफिस बिल ठीक कराने गया, परंतु बिल ठीक नहीं किया गया और उसके बाद प्रत्यर्थी/विपक्षी द्वारा गलत रीडिंग लिखकर भेज दी गई। दिनांक 29.11.2015 को एक प्रार्थना पत्र जे0ई को दिया गया, जिसको जे0ई0 द्वारा चेक किया गया और मीटर रीडि़ग 1542 बताई, जिसको वह आफिस में जमा करने गया, तब आफिस वालों ने कह दिया कि जे0ई0 की रिपोर्ट पर हम बिल जमा नहीं करेंगे और यदि जमा करना है तो 2,000/-रू0 अलग से दो। अपीलार्थी/परिवादी ने 2,000/-रू0 अलग से देने में असमर्थता जताई अत्एव अपीलार्थी/परिवादी का बिजली कनेक्शन दिनांक 24.09.1998 को काटते समय मीटर रीडिग 2624 दर्शायी गयी जबकि मीटर रीडिंग 4047 पर मीटर खराब दिखाकर बिल अपनी मर्जी से बढ़ाकर भेजे जाते रहे, जिससे अपीलार्थी/परिवादी को बहुत मानसिक एवं शारीरिक क्षति हुई अत्एव क्षुब्ध होकर परिवाद जिला उपभोक्ता आयोग के सम्मुख प्रस्तुत किया गया।
प्रत्यर्थी/विपक्षी द्वारा जिला उपभोक्ता आयोग के सम्मुख प्रतिवाद पत्र कर यह कथन किया गया कि भगवान सहाय के नाम विद्युत कनेक्श्न था। वर्ष-1993 में मीटर बदलने का कोई साक्ष्य अपीलार्थी/परिवादी द्वारा दाखिल नहीं किया गया है लेकिन परिवादी के यहां 1614 नम्बर का मीटर लगा हुआ है। दिनांक 24.09.1998 को विद्युत संयोजन विच्छेदित किया गया, उस समय मीटर में 2624, रीडिंग थी। दिनांक 20.3.1993 से 24.9.1998 तक का बिल रू0 20,508.12पैसे का संशोधित किया गया है। अपीलार्थी/परिवादी के विद्युत कनेक्शन की स्थायी विच्छेदन रिपोर्ट पूर्ण की गयी और अंतिम
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लेखा तैयार किया गया। अंतिम लेखा के अनुसार अपीलार्थी/परिवादी पर रू0 23,169/-रू0 बकाया है, जो अपीलार्थी/परिवादी ने नहीं दिया है अत्एव परिवाद निरस्त किये जाने योग्य है।
विद्वान जिला उपभोक्ता आयोग ने उभय पक्ष के अभिकथन एवं उपलब्ध साक्ष्य पर विस्तार से विचार करने के उपरांत परिवाद को निरस्त कर दिया है, जिससे क्षुब्ध होकर अपीलार्थी/परिवादी की ओर से प्रस्तुत अपील योजित की गई है।
प्रस्तुत अपील विगत 17 वर्षों से लम्बित है एवं पूर्व में अनेकों तिथियों पर अधिवक्तागण की अनुपस्थिति के कारण स्थगित की जाती रही है। मेरे द्वारा उभय पक्ष के विद्वान अधिवक्ता द्व्य को सुना गया तथा प्रश्नगत निर्णय/आदेश व पत्रावली पर उपलब्ध समस्त प्रपत्रों का अवलोकन किया गया।
मेरे द्वारा विद्वान जिला उपभोक्ता आयोग द्वारा पारित प्रश्नगत निर्णय/आदेश एवं पत्रावली पर उपलब्ध समस्त अभिलेखों के परिशीलनोंपरांत यह पाया गया कि विद्वान जिला उपभोक्ता आयोग द्वारा पारित निर्णय/आदेश पूर्णत: विधि सम्मत है तथा विद्वान जिला उपभोक्ता आयोग द्वारा सम्पूर्ण तथ्यों का परिशीलन एवं परीक्षण करते हुए जो निष्कर्ष अपने निर्णय में अंकित किया है उसमें किसी प्रकार कोई अवैधानिकता अथवा विधिक त्रुटि अपीलीय स्तर पर नहीं पायी गई, तद्नुसार प्रस्तुत अपील निरस्त की जाती है।
अंतरिम आदेश यदि कोई पारित हो, तो उसे समाप्त किया जाता है।
प्रस्तुत अपील को योजित करते समय यदि कोई धनराशि अपीलार्थी द्वारा जमा की गयी हो, तो उक्त जमा धनराशि मय अर्जित
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ब्याज सहित सम्बन्धित जिला उपभोक्ता आयोग को यथाशीघ्र विधि के अनुसार निस्तारण हेतु प्रेषित की जाए।
आशुलिपिक/वैयक्तिक सहायक से अपेक्षा की जाती है कि वह इस निर्णय/आदेश को आयोग की वेबसाइट पर नियमानुसार यथाशीघ्र अपलोड कर दें।
(न्यायमूर्ति अशोक कुमार)
अध्यक्ष
हरीश सिंह
वैयक्तिक सहायक ग्रेड-2.,
कोर्ट नं0-1