
SMT.ANITA RATHOR filed a consumer case on 13 Aug 2014 against RELIANCE LIFE INSURANCE in the Seoni Consumer Court. The case no is CC/23/2014 and the judgment uploaded on 15 Oct 2015.
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण फोरम, सिवनी(म0प्र0)
प्रकरण क्रमांक -23.2014 प्रस्तुति दिनांक-24.03.2014
समक्ष :-
अध्यक्ष - व्ही0पी0 षुक्ला,
सदस्य - वीरेन्द्र सिंह राजपूत,
श्रीमति अनिता राठौर, पतिन श्री देवी सिंह
राठौर, निवासी-डूण्डा सिवनी, तहसील व
जिला सिवनी (म0प्र0)।...........................................आवेदकपरिवादी।
:-विरूद्ध-:
(1) रिलाइंस लार्इफ इंष्योरेस कम्पनी लिमिटेड,
द्वारा-श्रीमान षाखा प्रबंधक,
रिलायंस लार्इफ इंष्योरेंस कम्पनी
लिमिटेड, कचहरी चौक, सिवनी,
तहसील व जिला सिवनी
(म0प्र0)।
(2) एक्जीकेटिव डायरेक्टर एण्ड प्रेसीडेंट
इंष्योरेंस कम्पनी पंजीयन कार्यालय
एच-ब्लाक, फस्र्ट फलोर धीरूभार्इ
अम्बानी सिटी, नवी मुम्बर्इ
महाराश्ट्र-400710...........................................अनावेदकगणविपक्षीगण।
:-आदेश-:
(आज दिनांक- 23.09.2014 को पारित)
द्वारा-अध्यक्ष:-
(1) परिवादी ने अनावेदक के विरूद्ध सेवा में कमी के आधार पर, प्रेमा चौहान की बीमा पालिसी की वैधता के अन्तर्गत उसकी मृत्यु होने के कारण, बीमाधन मय ब्याज दिलाये जाने, मानसिक कश्ट हेतु 5,000-रूपये एवं वाद-व्यय 2,000-रूपये दिलाये जानेे हेतु यह परिवाद प्रस्तुत किया है।
(2) परिवादी का पक्ष संक्षेप में इस प्रकार है कि परिवादी के पिता प्रेमा चौहान ने 15,000-रूपये वार्शिक प्रीमियम अदा कर, अनावेदकबीमा कम्पनी से बीमा पालिसी क्रमांक-19881627 लिया था, जिसमें जोखिम राषि 3,00,000-रूपये थी। पालिसी की वैधता अवधि र्मे अचानक प्रेमा चौहान की दिनांक-28.12.2012 को गैसिट्रक विकास से आकसिमक मृत्यु हो गर्इ। परिवादी ने अनावेदक के समक्ष सभी आवष्यक जानकारी सहित बीमा दावा प्रस्तुत किया, अनावेदक ने बिना कोर्इ उपयुक्त आधार दर्षाये हुये परिवादी का बीमा दावा दिनांक-31.05.2013 को आमान्य कर दिया। अत: परिवादी ने प्रेमा चौहान की मृत्यु होने के कारण प्रेमा चौहान द्वारा ली गर्इ बीमा पालिसी के अन्तर्गत बीमाधन मय ब्याज दिलाये जाने, मानसिक कश्ट हेतु 5,000-रूपये एवं वाद-व्यय 2,000-रूपये दिलाये जानेे हेतु यह परिवाद प्रस्तुत किया है।
(3) अनावेदक का पक्ष संक्षेप में इस प्रकार है कि परिवादी के पिता प्रेमा चौहान ने अनावेदक को 15,000-रूपये वार्शिक प्रीमियम अदा कर रिलार्इंस क्लासिक प्लान सेकेंट बीमा पालिसी लिया था, बीमा पालिसी का नंबर-19881627 था। परिवादी के पिता प्रेमा चौहान द्वारा प्रस्तुत प्रपोजल फार्म प्रदर्ष डी-1 है। प्रेमा चौहान ने प्रपोजल फार्म में अपनी वार्शिक आय 1,00,000-रूपये एवे आय स़्ोत बिजनेष दर्षाया है। प्रेमा चौहान ने छंजनतम व किनजपमे ध् श्रवइ क्मेबतपचजपवद में म्समबजतवदपब ैीवच वता दर्षाया है। प्रेमा चौहान ने प्रपोजल फार्म दिनांक-22.02.2012 को भरा था, उसके 10 माह 5 दिन बाद अर्थात दिनांक-28.12.2012 को प्रेमा चौहान की मृत्यु हो गर्इ। परिवादी ने बीमा कम्पनी के समक्ष बीमा दावा प्रस्तुत किया था। परिवादी ने ग्राम पंचायत, बादलपुर द्वारा जारी प्रमाण-पत्र प्रस्तुत किया था, जिसमें परिवादी के पिता को मजदूर दर्षाया गया है, बीमा कम्पनी द्वारा, परिवादी का बीमा दावा प्राप्त होने पर इन्वेसिटगेंषन करवाया कराया गया। इन्वेस्टीगेंषन में यह पाया गया कि प्रेमा चौहान ने पालिसी लेतेे समय अपना व्यवसाय बिजनेष दर्षाया था, जबकि वह मजदूरी करता था। प्रेमा चौहान ने व्यवसाय एवं आय से संबंधित गलत जानकारी देकर पालिसी लिया था, जिसके कारण परिवादी का बीमा दावा प्रदर्ष डी-5 के पत्र के द्वारा दिनांक-31.05.2013 को आमान्य कर दिया गया। परिवादी के पिता पे्रमा चौहान ने महत्वपूर्ण तथ्य को छिपाते हुये पालिसी लिया था, जिसके कारण परिवादी का बीमा दावा आमान्य किया गया है। अनावेदक द्वारा सेवा में कोर्इ त्रुटि नहीं की गर्इ है। अतएव अनावेदक ने परिवादी का परिवाद निरस्त किये जाने का निवेदन किया है।
(4) मामले में विचारणीय बिन्दु यह हैं कि:-
(अ) क्या अनावेदक द्वारा, परिवादी का बीमा दावा
आमान्य कर, सेवा में त्रुटि की गर्इ है?
-:सकारण निष्कर्ष:-
विचारणीय प्रष्न :-
(5) यह स्वीकृत तथ्य है कि-पे्रमा चौहान ने 15,000-रूपये प्रीमियम अदा कर, अनावेदकबीमा कम्पनी से 3,00,000-रूपये की पालिसी ली थी। अनावेदकबीमा कम्पनी द्वारा प्रेमा चौहान को दिनांक-28.02.2012 को त्मसपंउबम ब्सेेंपब च्संद प्प् जारी किया गया था, अनावेदक द्वारा, परिवादी को पालिसी नंबर-19881627 जारी किया गया है।
(6) परिवादी अनिता राठौर ने षपथ-पत्र पर प्रकट किया कि उसके पिमा प्रेमा चौहान ने अभिकर्ता के माध्यम से अनावेदक से दिनांक-14.03.2012 को 15,000-रूपये वार्शिक प्रीमियम अदा कर पालिसी क्रमांक-19881627 लिया था, जिसमें जोखिम राषि 3,00,000-रूपये कव्हर थी। उसके पिता की दिनांक-28.12.2012 को गैसिट्रक विकार के कारण आकसिमक मृत्यु हो गर्इ थी। प्रेमा चौहान ने प्रपोजल-फार्म में उसे नामिनी दर्षाया था । उसने बीमा कम्पनी के समक्ष बीमा दावा प्रस्तुत किया था, बीमा कम्पनी द्वारा उसका बीमा दावा दिनांक-31.03.2011 को निरस्त कर दिया गया।
(7) अनावेदक की ओर से षैलेश जैन ने षपथ-पत्र पर प्रकट किया कि-प्रेमा चौहान ने प्रपोजल फार्म प्रदर्ष डी-1 भरा था। प्रपोजल फार्म नंबर-डी 2543799 दिनांकित-28.02.2012 में बीमा संबंधी सुविधा की मांग की गर्इ थी। अनावेदकबीमा कम्पनी द्वारा प्रेमा चौहान को दिनांक-28.02.2012 को त्मसपंउबम ब्सेेंपब च्संद प्प् जारी किया गया था। परिवादी के पिता का पालिसी नंबर-19881627 था।
(8) षैलेश जैन ने षपथ-पत्र पर यह भी प्रकट किया कि-परिवादी के पिता द्वारा प्रपोजल फार्म में अपनी वार्शिक आय 1,00,000-रूपये तथा आय स्त्रोत बिजनेष दर्षाया था। प्रेमा चौहान ने छंजनतम व किनजपमे ध् श्रवइ क्मेबतपचजपवद में म्समबजतवदपब ैीवच वता दर्षाया है। पे्रमा चौहान की पालिसी लेने के दिनांक-22.12.2012 से मात्र 10 माह 5 दिन बाद दिनांक-28.12.2012 को मृत्यु हो गर्इ। परिवादी ने बीमा कम्पनी के समक्ष दिनांक-13.03.2013 को बीमा दावा प्रस्तुत किया था, जिसमें परिवादी ने ग्राम पंचायत, बादलपुर द्वारा जारी प्रमाण-पत्र दिनांकित-19.03.2013 प्रस्तुत किया था, जिसमें परिवादी के पितापालिसी धारक को मजदूरी का कार्य करना लेख था। ग्राम पंचायत, बादलपुर द्वारा दिया गया प्रमाण-पत्र प्रदर्ष डी-3 है। बीमा कम्पनी द्वारा, परिवादी के बीमा दावा का इन्वेसिटगेषन कराया गया, इन्वेसिटगेषन में यह जानकारी मिली थी कि परिवादी के पिता मजदूरी करते थे, इनवेस्टीगेटर रिपोर्ट प्रदर्ष डी-4 है। परिवादी के पिता प्रेमा चौहान द्वारा बीमा कम्पनी को गलत जानकारी देकर पालिसी ली गर्इ थी, जिसके कारण अनावेदकबीमा कम्पनी द्वारा, परिवादी का बीमा दावा को आमान्य किया गया है।
(8) प्रपोजल फार्म डी-1 अंग्रजी में है, जिसमें परिवादी के पिता प्रेमा चौहान के हस्ताक्षर हैं। प्रेमा चौहान षिक्षित नहीं था, वह किसी प्रकार हस्ताक्षर करता था। प्रपोजल फार्म प्रदर्ष डी-1 बीमाकत्र्ता के अभिकत्र्ता द्वारा भरा गया है। अनावेदक अधिवक्ता ने हमारा ध्यान ग्राम पंचायत, बादलपुर द्वारा दिये गये प्रमाण-पत्र पत्र प्रदर्ष डी-3 की ओर आकर्शित किया है, जिसमें मृतक प्रेमा चौहान की पेषाब की नली में केंसर होने का उल्लेख है, जबकि न तो अनावेदक ने जवाब में मृतक प्रेमा चौहान की केंसर से मृत्यु होने का कोर्इ अभिवचन किया है और न ही किसी चिकित्सक का चिकित्सकीय प्रमाण-पत्र संलग्न हैे। प्रदर्ष डी-3 का प्रमाण-पत्र सरपंच प्रमिला के द्वारा जारी किया गया है, जिन्हें चिकित्सकीय ज्ञान होने के अभिलेख पर कोर्इ साक्ष्य नहीं हैं। प्रदर्ष डी-3 के प्रमाण-पत्र में प्रेमा चौहान को मजदूरी का कार्य करना दर्षाया गया है, जबकि प्रपोजल फार्म प्रदर्ष डी-1 में प्रेमा चौहान का व्यवसाय बिजनेष दर्षाया गया है एवं उसकी इलेक्ट्रानिक षाप की दुकान लेख है। तर्क के लिये यदि यह मान्य कर लिया जावे कि प्रेमा चौहान मजदूर था किन्तु उसने अपनी आय का षोध बिजनेष दर्षाया था तथा छंजनतम व किपजपमेध् श्रवइ क्तकबतपचजपवद में म्समबजतवदपब ैीवच वता लेख किया था, तो भी अनावेदक द्वारा प्रेमा चौहान की प्रीमियम ली जाकर बीमा किया गया था। प्रेमा चौहान ने स्वयं बीमारी के संबंध में कोर्इ तथ्य नहीं छिपाया था, मृतक प्रेमा चौहान का यह दायित्व था कि वह किस प्रकार अनावेदक को प्रीमियम अदा करता। मृतक प्रेमा चौहान के व्यवसाय से उसके द्वारा अदा की गर्इ प्रीमियम का कोर्इ संबंध नहीं है। प्रपोजल फार्म प्रदर्ष डी-1 में ऐसी कोर्इ षर्त अंतर्निहित नहीं है जिसके आधार पर यह निश्कर्श निकाला जा सके कि यदि बीमा धारक अपने व्यवसाय अथवा आय के संबंध में सही जानकारी नहीं देता,
तब बीमाधारक का बीमा दावा आमान्य कर दिया जावेगा। परिवादी ने हमारे समक्ष बीमा पालिसी की छायाप्रति प्रस्तुत की है जिसमें यह सब अधिरोपित नहीं है कि परिवादी की आय अथवा व्यवसाय के संबंध में गलत जानकारी देने पर बीमा दावा आमान्य कर दिया जावेगा। वास्तव में अनावेदक क्रमांक-2 द्वारा अत्यंत तकनीकी रूख अपनाते हुये परिवादी का बीमा दावा आमान्य किया गया है। इस प्रकार अनावेदक द्वारा परिवादी का बीमा दावा आमान्य कर, सेवा में कमी की गर्इ है।
(9) अनावेदक की ओर से न्यायदृश्टांत-मायादेवी विरूद्ध लार्इफ इंष्यारेंस कार्पोरेषन सी0पी0आर0 2011 भाग-1 प्रस्तुत किया गया है, जिसमें माननीय राश्ट्रीय आयोग में अभी निर्धारित किया है कि ऐसा व्यकित जो बीमा कराना चाहता है, को अपने स्वास्थ्य के संबंध में सभी तथ्यों को प्रकट करना चाहिये। अनावेदक की ओर से न्यायदृश्टांत-श्रीमति दलभीर कौर विरूद्ध एल0आर्इ0सी0, सी0पी0आर0 2011 (भाग-2) पृश्ठ क्रमांक-300 एन0सी0 प्रस्तुत किया गया है जिसमें माननीय राश्ट्रीय आयोग ने अभी निर्धारित किया है कि-बीमा धारक द्वारा महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाना बीमा पालिसी की षर्तों का उल्लघंन है। इस मामले में मृतक प्रेमा चौहान ने पालिसी लेते समय किसी भी महत्वपूर्ण तथ्य को नहीं छिपाया है, मृतक प्रेमा चौहान अषिक्षित था अनावेदक के अभिकर्ता द्वारा मृतक प्रेमा चौहान का प्रपोजल फार्म प्रदर्ष डी-1 भरकर मृतक प्रेमा चौहान के हस्ताक्षर कराया गया है एवं मृतक प्रेमा चौहान से 15,000-रूपये प्रीमियम ली जाकर 3,00,000-रूपये की कवरेज की बीमा पालिसी जारी की गर्इ अनावेदक ने बिना कोर्इ युकितयुक्त आधार के ही मृतक प्रेमा चौहान की नामिनी अनिता राठौर को बीमाधन प्रदाय करने से इंकार कर दिया, जो अनावेदक की सेवा में त्रुटि है। अनावेदक द्वारा परिवादी का बीमा दावा आमान्य करने से उसे जो मानसिक कश्ट हुआ उसके लिए हम परिवादी को 5,000-रूपये प्रतिकर की राषि दिलाया जाना उचित समझते हैं।
(10) उपरोक्त विवेचन के आधार पर यह निश्कर्श निकलता है, कि अनावेदक द्वारा परिवादी का बीमा दावा अमान्य कर सयेयवा में त्रुटि की गर्इ इस लिए हम परिवादी के पक्ष में निम्न आदेष पारित करते है।
(अ) अनावेदक परिवादी को बीमाधन 3,00,000- रूपये अदा करे।
(ब) अनावेदक परिवादी को प्रेमा चौहान की मृत्यु दिनांक-28.12.2012 से बीमाधन 3,00,000- पर 8 प्रतिषत वार्शिक ब्याज की दर से रकम अदायगी तक ब्याज अदा करें।
(स) अनावेदक परिवादी को मानसिक प्रताड़ना हेतु 5,000-रूपये एवं वाद-व्यय 1,000-रूपये अदा करे।
(द) उभय पक्षों को आदेष की प्रति नि:षुल्क प्रदान की जावे।
मैं सहमत हूँ। मेरे द्वारा लिखवाया गया।
(श्री वीरेन्द्र सिंह राजपूत) (व्ही0पी0 षुक्ला)
सदस्य अध्यक्ष
जिला उपभोक्ता विवाद जिला उपभोक्ता विवाद
प्रतितोषण फोरम,सिवनी प्रतितोषण फोरम,सिवनी
(म0प्र0) (म0प्र0)
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