Uttar Pradesh

StateCommission

C/2014/108

R. A. Yadav - Complainant(s)

Versus

Reliance General Insurance Co. - Opp.Party(s)

S K Sharma

04 Nov 2015

ORDER

STATE CONSUMER DISPUTES REDRESSAL COMMISSION, UP
C-1 Vikrant Khand 1 (Near Shaheed Path), Gomti Nagar Lucknow-226010
 
First Appeal No. C/2014/108
(Arisen out of Order Dated in Case No. of District State Commission)
 
1. R. A. Yadav
Varanasi
...........Appellant(s)
Versus
1. Reliance General Insurance Co.
Varanasi
...........Respondent(s)
 
BEFORE: 
 HON'BLE MR. JUSTICE Virendra Singh PRESIDENT
 HON'BLE MR. Jugul Kishor MEMBER
 HON'BLE MR. Raj Kamal Gupta MEMBER
 
For the Appellant:
For the Respondent:
ORDER

राज्‍य उपभोक्‍ता विवाद प्रतितोष आयोग, उ0प्र0, लखनऊ।

सुरक्षित

परिवाद संख्‍या-108/2014

 

 

Ram Avtar Yadav s/o Late Kanhaiya Yadav, resident of Village Pichwari, Post Panchron, District Varansasi.

परिवादी।

बनाम्    

Reliance General Insurance Company Limited through its Branch Manager, having its Branch Office D-58/12-a-7, Near TVS Sigra District Varanasi.

                                           विपक्षी।

समक्ष:-

1. माननीय न्‍यायमूर्ति श्री वीरेन्‍द्र सिंह, अध्‍यक्ष।

2. माननीय श्री जुगुल किशोर, सदस्‍य।

3. माननीय श्री राज कमल गुप्‍ता, सदस्‍य।

 

परिवादी की ओर से उपस्थित    : श्री सर्वेश कुमार शर्मा के ब्रिफ होल्‍डर श्री एस0पी0                          पाण्‍डेय, विद्वान अधिवक्‍ता।

विपक्षी की ओर से उपस्थित     : श्री एम0एन0 मिश्रा, विद्वान अधिवक्‍ता।

दिनांक 17.12.2015

माननीय श्री जुगुल किशोर, सदस्‍य द्वारा उदघोषित

निर्णय

        प्रस्‍तुत परिवाद, राम अवतार यादव की ओर से विपक्षी रिलायन्‍स जनरल इन्‍श्‍योरेन्‍स कम्‍पनी लि0 के विरूद्ध प्रस्‍तुत किया गया है।

      संक्षेप में प्रकरण के तथ्‍य इस प्रकार हैं कि परिवादी द्वारा एक टाटा ट्रक नं0 UP 65 BT 7191, मॉडेल LPT3118TC इंजन नं0 21C63248598 व चेचिस नं0 MAT466385C5D08189 पुनीत आटो मोबाइल्‍स प्रा0लि0, जी0टी0 रोड, मरहिया, पाराओ, जिला वाराणसी से दिनांक 16.04.2012 को रू0 21,19,000/- में खरीदा गया, जो विपक्षी, रिलायन्‍स जनरल इन्‍श्‍योरेन्‍स कम्‍पनी लि0 से दिनांक 16.04.2013 से 15.04.2014 तक रिलायन्‍स गुड्स कैरिंग व्‍हीकल पैकेज, पॉलिसी नं0 1906932334150343 के अन्‍तर्गत रू0 20,25,258/- हेतु बीमित था। पॉलिसी लेते समय प्रीमियम रू0 56,136/- का भुगतान किया गया था। दिनांक 15.10.2013 की मध्‍य रात्रि करीब सुबह 1.00 से 4.00 के बीच प्रश्‍नगत ट्रक का ड्राइवर कृष्‍णावतार यादव नींद आने के कारण फतेहपुर बाईपास के पास ट्रक को लाक्‍ड करके चाय पीने के लिए उतरा, परन्‍तु सभी दुकानें बंद होने के कारण वह वहीं एक खाली बेंच पर सो गया। करीब 4.00 बजे सुबह जब वह उठा तो उसे प्रश्‍नगत ट्रक वहां मौजूद नहीं मिला। ट्रक चोरी हो गया था। ड्राइवर द्वारा काफी खोजबीन की गयी, परन्‍तु ट्रक का कोई पता नहीं चला। ट्रक चोरी की सूचना ट्रक ड्राइवर ने ट्रक मालिक को दी और पुलिस कोतवाली फतेहपुर में एफआईआर दिनांक 23.10.2013 को मुकदमा अपराध सं0-491/13 आईपीसी की धारा 379 के अन्‍तर्गत दर्ज करायी गयी, जिसकी विवेचना की गयी और घटना स्‍थल व गवाहन का बयान लिया गया, लेकिन माल-‍मुल्जिम का पता न लगने के कारण विवेचना समाप्‍त करते हुए अंतिम रिपोर्ट एस0आई0 मणिकांत दूबे द्वारा दिनांक 27.12.2013 को न्‍यायालय सी0जे0एम0 फतेहपुर के समक्ष प्रेषित की गयी, जिसे न्‍यायालय सी0जे0एम0 द्वारा दिनांक 01.02.2014 को स्‍वीकार कर लिया गया। परिवादी द्वारा इसकी जानकारी बीमा कम्‍पनी को भी दी गयी और वांछित औपचारिकताओं को पूर्ण करने हेतु परिवादी बीमा कम्‍पनी के आफिस गया, परन्‍तु  बीमा कम्‍पनी कम्‍पनी द्वारा कोई कार्यवाही नहीं की गयी। परिवादी द्वारा दिनांक 16.01.2014 को रजिस्‍टर्ड डाक के माध्‍यम से प्रबन्‍धक, रिलायन्‍स जनरल इंश्‍योरेन्‍स कम्‍पनी लि0 D 58/12-A-7, सिगरा, वाराणसी को यह कहते हुए प्रार्थना पत्र दिया गया कि परिवादी का उक्‍त ट्रक नं0 UP 65 BT 7191, इंजन नं0 21C63248598 व चेचिस नं0 MAT466385C5D08189 फतेहपुर बाईपास के पास दिनांक 14/15.10.2013 की मध्‍य रात्रि को चोरी हो गया, जिसकी प्रथम सूचना रिपोर्ट की प्रति, वाहन बीमा की प्रति बीमा दावे के निस्‍तारण हेतु प्रेषित की गयी, परन्‍तु बीमा कम्‍पनी द्वारा कोई कार्यवाही नहीं की गयी। परिवादी द्वारा पुन: दिनांक 07.02.2014 को रजिस्‍टर्ड डाक के माध्‍यम से प्रबन्‍धक, रिलायन्‍स जनरल इंश्‍योरेन्‍स कम्‍पनी लि0 D 58/12-A-7, सिगरा, वाराणसी को यह कहते हुए प्रार्थना पत्र दिया गया कि यदि उनका बीमा दावे का निस्‍तारण नहीं किया गया तो वह सक्षम न्‍यायालय में उनके विरूद्ध वैधानिक कार्यवाही करने को विवश होगें, इस पर भी बीमा कम्‍पनी द्वारा कोई ध्‍यान नहीं दिया गया। परिवादी द्वारा पुन: रजिस्‍टर्ड डाक से दिनांक 18.07.2014 को प्रबन्‍धक, रिलायन्‍स जनरल इंश्‍योरेन्‍स कम्‍पनी लि0 D 58/12-A-7, सिगरा, वाराणसी को यह कहते हुए प्रार्थना पत्र दिया गया कि ट्रक चोरी की अन्तिम रिपोर्ट न्‍यायालय सी0जे0एम0 द्वारा दिनांक 01.02.2014 को स्‍वीकार कर ली गयी है। इस तथ्‍य की भी अनदेखी करते हुए बीमा कम्‍पनी द्वारा कोई कार्यवाही नहीं की गयी। प्रश्‍नगत ट्रक चोरी चले जाने के कारण वह मानसिक, शारीरिक व आर्थिक संकट में है, क्‍योंकि प्रश्‍नगत ट्रक ही परिवादी के जीविकोपार्जन का साधन था। विपक्षी बीमा कम्‍पनी द्वारा बीमा दावा स्‍वीकार नहीं किया गया, जबकि प्रश्‍नगत ट्रक बीमा अवधि में ही चोरी गया था। विपक्षी बीमा कम्‍पनी द्वारा बीमा दावा स्‍वीकार न करने से क्षुब्‍ध होकर परिवादी द्वारा निम्‍न अनुतोष हेतु परिवाद प्रस्‍तुत किया गया।

      1. बीमा धनराशि रू0 20,25,258/- मय 24 प्रतिशत ब्‍याज ट्रक चोरी दिनांक 15.10.2013 की दिनांक से।

      2. शारीरिक, मानसिक कष्‍ट हेतु रू0 5,00,000/- मय 24 प्रतिशत ब्‍याज।

      3. परिवाद व्‍यय के रूप में रू0 25,000/- की धनराशिक मय 24 प्रतिशत ब्‍याज के साथ दिलाया जाये।

     परिवादी ने अपने कथन के समर्थन में शपथपत्र के माध्‍यम से निम्‍न साक्ष्‍य प्रस्‍तुत किया है।

1. प्रश्‍नगत चोरी गये ट्रक की बीमा पॉलिसी।

2. प्रश्‍नगत चोरी गये ट्रक की आर0सी0।

3. प्रश्‍नगत चोरी गये ट्रक का फिटनेस प्रमाण पत्र।

4. प्रश्‍नगत चोरी गये ट्रक के वाहन चालक का वैध लाईसेन्‍स।

5. प्रश्‍नगत चोरी गये ट्रक का राष्‍ट्रीय परमिट की प्रति।

6. प्रश्‍नगत चोरी गये ट्रक की प्रथम सूचना रिपोर्ट की छायाप्रति

7. प्रश्‍नगत चोरी गये ट्रक के संबंध में पुलिस द्वारा विवेचना के उपरान्‍त न्‍यायालय द्वारा स्‍वीकार की गयी अन्तिम रिपोर्ट की छाया प्रति।

8. प्रश्‍नगत चोरी गये ट्रक का बीमा दावा के भुगतान के संबंध में विपक्षी बीमा कम्‍पनी से किये गये पत्राचारों की छायाप्रतियां।

      विपक्षी बीमा कम्‍पनी ने अपना लिखित कथन प्रस्‍तुत कर परिवाद का विरोध किया। विपक्षी ने अपने लिखित कथन में यह अभिवचित किया है कि परिवादी द्वारा इस आयोग के समक्ष फर्जी परिवाद प्रस्‍तुत किया गया है और इसमें कोई आधार नहीं है। परिवाद आधारहीन है, अत: निरस्‍त किये जाने योग्‍य है। विद्वान अधिवक्‍ता द्वारा मुख्‍यत: यह तर्क किया गया कि परिवादी द्वारा ट्रक की चोरी के सम्‍बन्‍ध में उन्‍हें कोई भी सूचना नहीं दी गयी है और आज तक कोई भी सूचना उन्‍हें प्राप्‍त नहीं हुई है। परिवाद पत्र के पैरा नं0-5 पर अंकित है कि ट्रक ड्राइवर चाय पीने के लिए गाड़ी रोकी और फिर वह सो गया और जब वह सुबह उठा तो गाड़ी चोरी हो चुकी थी, जिसकी प्रथम सूचना रिपोर्ट लिखायी गयी। परिवादी द्वारा जो प्रथम सूचना रिपोर्ट लिखायी गयी है, वह विलम्‍ब से लिखायी गयी है। जैसा कि परिवाद पत्र के के पैरा नं0-17 पर अंकित है। विपक्षी द्वारा यह भी कथन किया गया कि परिवाद पत्र के साथ साक्ष्‍य के साथ जो प्रपत्र दिये गये हैं, वह तर्कसंगत नहीं। जो प्रपत्र बीमा कम्‍पनी को सूचनार्थ भेजे जाने हेतु कहा जा रहा है, वह गलत पिन व गलत पते पर भेजे गये हैं, जिसका कोई परिवादी के पास साक्ष्‍य नहीं है कि उन्‍हें सही पते पर सूचना भेजी गयी है।

      विद्वान अधिवक्‍ता के तर्कों के परिप्रेक्ष्‍य में पत्रावली का परिशीलन किया गया, जिसमें पाया गया कि परिवादी द्वारा बीमा कम्‍पनी को जो सूचनार्थ पत्र भेजे गये हैं, उनमें पोस्‍ट आफिस की रसीद की छायाप्रति‍ भी प्रस्‍तुत की गयी है, जिसमें वाराणसी ब्रांच मैनेजर, के नाम से रजिस्‍ट्री होना पाया जाता है, जिसमें पिन नं0 221001 लिखा हुआ है, जिसमें भेजने वाले का नाम राम अवतार यादव लिखा हुआ है, जो दिनांक 18.07.2014 को 13 बजकर 03 मिनट पर भेजी गयी है। इस प्रकार से विपक्षी द्वारा जो आरोप लगाया जा रहा है कि उन्‍हें सूचना प्राप्‍त नहीं हुई, यह तथ्‍यात्‍मक प्रतीत नहीं होता है, क्‍योंकि परिवादी द्वारा बराबर उनके द्वारा कार्यालय सम्‍पर्क किया जाता रहा है, परन्‍तु विपक्षी द्वारा जानबूझकर परिवादी को परेशान करने की नियत से दावा क्‍लेम नहीं दिया गया। इसी आधार पर विपक्षी की सेवा में कमी पायी जाती है, परन्‍तु चूंकि विपक्षी का यह कथन रहा है कि परिवादी ने कोई सूचना विपक्षी को नहीं दी है और कोई दावा क्‍लेम प्रस्‍तुत नहीं किया गया है और न ही कोई दावा क्‍लेम विपक्षी ने अस्‍वीकार किया है, इसलिए हम न्‍यायहित में यह उचित पाते हैं कि परिवादी को यह निर्देश दिया जाये कि वह अपना दावा क्‍लेम विपक्षी के समक्ष प्रस्‍तुत करे और विपक्षी को निर्देश दिया जाये कि वह परिवादी का दावा क्‍लेम विधि सम्‍मत तरीके से विचार कर निर्णीत करे। तदनुसार परिवादी का परिवाद अंशत: स्‍वीकार होने योग्‍य है।

आदेश

     परिवाद अंशत: स्‍वीकार किया जाता है। विपक्षी, बीमा कम्‍पनी को आदेश दिया जाता है कि वह परिवादी के चोरी हुए ट्रक के सम्‍बन्‍ध में बीमा क्‍लेम का निस्‍तारण परिवादी द्वारा दावा क्‍लेम प्रस्‍तुत करने के दो माह में करना सुनिश्‍चत करें और परिवादी को निर्देशित किया जाता है कि वह अपना दावा क्‍लेम विधिवत् विपक्षी के समक्ष प्रस्‍तुत करे तथा विपक्षी दावा क्‍लेम से सम्‍बन्धित समस्‍त प्रपत्र परिवादी से प्राप्‍त करे।

     उभय पक्ष अपना-अपना परिवाद-व्‍यय स्‍वंय वहन करेंगे।

      इस निर्णय की प्रमाणित प्रतिलिपि पक्षकारों को नियमानुसार उपलब्‍ध करा दी जाए। 

 

 

(न्‍यायमूर्ति वीरेन्‍द्र सिंह)    (जुगुल किशोर)    (राज कमल गुप्‍ता)

           अध्‍यक्ष               सदस्‍य             सदस्‍य                      

 

 

 

लक्ष्‍मन, आशु0

   कोर्ट-1

 

 

 

 

 

 
 
[HON'BLE MR. JUSTICE Virendra Singh]
PRESIDENT
 
[HON'BLE MR. Jugul Kishor]
MEMBER
 
[HON'BLE MR. Raj Kamal Gupta]
MEMBER

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