राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, उ0प्र0, लखनऊ।
सुरक्षित
अपील संख्या-614/2014
(जिला उपभोक्ता फोरम, औरैया द्वारा परिवाद संख्या 130/13 में पारित निर्णय दिनांक 18.01.14 के विरूद्ध)
डाक अधीक्षक(पोस्ट मास्टर), हेड पोस्ट आफिस औरैया।
.......अपीलार्थी/विपक्षी
बनाम्
1.रश्मि पाल पत्नी श्री संजय सिंह, निवासी मोहल्ला बनारसीदास
टाउन एण्ड जिला औरैया।
2. जिला मजिस्ट्रेट औरैया। ........प्रत्यर्थीगण/परिवादीगण
समक्ष:-
1. मा0 श्री राज कमल गुप्ता, पीठासीन सदस्य।
2. मा0 श्री महेश चन्द, सदस्य।
अपीलार्थी की ओर से उपस्थित : श्री उदयवीर सिंह के सहयोगी श्री श्रीकृष्ण
पाठक।
प्रत्यर्थी की ओर से उपस्थित :श्री संजय कुमार वर्मा, विद्वान अधिवक्ता।
दिनांक 16.10.2018
मा0 श्री राज कमल गुप्ता, पीठासीन सदस्य द्वारा उदघोषित
निर्णय
प्रस्तुत अपील जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष फोरम औरैया द्वारा परिवाद संख्या 130/13 में पारित प्रश्नगत निर्णय एवं आदेश दि. 18.01.2014 के विरूद्ध प्रस्तुत की गई है। जिला मंच द्वारा निम्न आदेश पारित किया गया है:-
‘’ परिवाद विपक्षी संख्या 2 के विरूद्ध रू. 25000/- की वसूली हेतु स्वीकार किया जाता है। इस धनराशि पर वादयोजन की तिथि 02.09.2013 से वास्तविक भुगतान की तिथि तक 7 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज भी देय होगा। विपक्षी संख्या 2 को आदेशित किया जाता है कि वह उपरोक्तानुसार धनराशि परिवादिनी को निर्णय के एक माह में अदा करे।‘’
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संक्षेप में तथ्य इस प्रकार है कि परिवादी ने कारपोरेशन बैंक आफ इंडिया की शाखा रोडवेज बस स्टैन्ड औरैया में एक बचत खाता खुलवाए जाने के लिए दि. 05.04.13 करे आवेदन दिया। बैंक के अधिकारी द्वारा सभी प्रपत्र लेने के बाद यह कहा कि खाता खुलने की सूचना बैंक के अनुसार डाक विभाग से पंजीकृत डाक द्वारा दिया जाएगा, जिसका कोई शुल्क आपसे नहीं लिया जाएगा। परिवादिनी के खाता खुलने की जानकारी प्रार्थिनी को दि. 15.04.13 तक प्राप्त न होने की स्थिति में परिवादिनी के पति ने जांच-पड़ताल की तो यह बताया गया खाता खुलने की सूचना पंजीकृत डाक द्वारा दि. 05.04.13 को ही प्रेषित कर दी गई है। इस संबंध में अधीक्षक औरैया से जानकारी प्राप्त की गई। उन्होंने समुचित जवाब नहीं दिया। बैंक अधिकारियों ने अपनी एक रजिस्ट्री दि. 16.05.13 को कर दी और रजिस्ट्री का मूल्य 22 रूपये परिवादिनी के खाते से काट लिया, जिससे परिवादिनी की हकतलफी हुई। बैंक द्वारा यह अवगत कराया कि पता न मिलने के कारण रजिस्ट्री वापस कर दी गई है, जबकि परिवादिनी का मकान जनपद एवं सत्र न्यायालय के मध्य गेट के ठीक सामने है, अत: डाक विभाग द्वारा डाक न वितरण कर सेवा में त्रुटि की है।
पीठ ने उभय पक्ष के विद्वान अधिवक्ताओं की बहस सुनी एवं पत्रावली पर उपलब्ध अभिलेखों एवं साक्ष्यों का भलीभांति परिशीलन किया गया।
अपीलार्थी ने अपने अपील आधार में यह अभिकथन किया है कि इंडियन पोस्ट आफिस गाइड 1898 की धारा 6 के अंतर्गत उनको क्षतिपूर्ति की अदायगी हेतु उत्तरदायी नहीं माना जा सकता। जिला मंच ने पोस्ट आफिस एक्ट के क्लाज 84 को नहीं रखा, जिसके अंतर्गत पोस्टल सामान की misdelivery, Delay या loss के लिए डाक विभाग को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
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प्रत्यर्थी ने यह तर्क दिया कि डाक विभाग की अकर्मण्यता, लापरवाही और गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार से डाक उन तक नहीं पहुंची।
मा0 राष्ट्रीय आयोग, नई दिल्ली द्वारा यूनियन आफ इंडिया व अन्य बनाम एम0एल0 बोरा रिवीजन पिटीशन संख्या 2411/2006 में पारित निर्णय दि. 13.10.2010 में निम्नानुसार अवधारित किया गया है:-
"………….Section 6 of the Indian Post Office Act, 1898 reads as under:
"Exemption from liability for loss, misdelivery, delay or damage. – The Government shall not incur any liability by reason of the loss, misdelivery or delay of, or damage to, any postal article in course of transmission by post, except in so far as such liability may in express terms
be undertaken by the Central Government as hereinafter provided and no officer of the Post Office shall incur any liability by reason of any such loss, misdelivery, delay or damage unless he has caused the same fraudulently or by his willful act of default."
…………..Section 6 grants complete immunity to the government for the loss, misdelivery or damage to the postal artiles. In the present case neither any allegation has been made against any officer of the Postal Department that the loss or damage was caused due to fraudulent or willful act or default of such an officer, nor any of the employees of the Department has been impleaded as a party-Respondent making allegations as stated above. In the absence of same no relief can be granted against any of the officers of the department."
जिला मंच के समक्ष प्रत्यर्थी/परिवादी द्वारा ऐसा कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया जिससे यह निष्कर्ष निकाला जा सकता कि प्रश्नगत डाक अपीलार्थी के कर्मचारी ने कपटपूर्वक वितरित नहीं की अथवा जानबूझकर वितरित नहीं की। ऐसी परिस्थिाति में भारतीय डाक अधिनियम की धारा 6 के आलोक में अपीलार्थीगण को क्षतिपूर्ति की अदायगी का उत्तरदायी नहीं माना जा सकता। विद्वान जिला मंच ने पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्य एवं विधिक स्थिति का
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उचित परिशीलन न करते हुए प्रश्नगत निर्णय पारित किया है जो निरस्त किए जाने योग्य है। तदनुसार प्रस्तुत अपील स्वीकार किए जाने योग्य है।
आदेश
प्रस्तुत अपील स्वीकार की जाती है और जिला मंच औरैया द्वारा परिवाद संख्या 130/2013 में पारित प्रश्नगत निर्णय/आदेश दि. 18.01.2014 निरस्त किया जाता है तथा परिवाद भी निरस्त किया जाता है।
उभय पक्ष अपना-अपना अपीलीय-व्यय भार स्वंय वहन करेंगे।
निर्णय की प्रमाणित प्रतिलिपि पक्षकारों को नियमानुसार उपलब्ध कराई जाए।
(राज कमल गुप्ता) (महेश चन्द )
पीठासीन सदस्य सदस्य
राकेश, पी0ए0-2
कोर्ट-3