Uttar Pradesh

StateCommission

A/2010/1919

Post Office - Complainant(s)

Versus

Ranjeet Singh - Opp.Party(s)

U V Singh

17 Jan 2017

ORDER

STATE CONSUMER DISPUTES REDRESSAL COMMISSION, UP
C-1 Vikrant Khand 1 (Near Shaheed Path), Gomti Nagar Lucknow-226010
 
First Appeal No. A/2010/1919
(Arisen out of Order Dated in Case No. of District State Commission)
 
1. Post Office
a
...........Appellant(s)
Versus
1. Ranjeet Singh
a
...........Respondent(s)
 
BEFORE: 
 HON'BLE MR. Ram Charan Chaudhary PRESIDING MEMBER
 HON'BLE MR. Gobardhan Yadav MEMBER
 
For the Appellant:
For the Respondent:
Dated : 17 Jan 2017
Final Order / Judgement

राज्‍य उपभोक्‍ता विवाद प्रतितोष आयोग, उ0प्र0, लखनऊ।

(सुरक्षित)                                                                                  

अपील संख्‍या :1919/2010

(जिला मंच, बिजनौर द्धारा परिवाद सं0-178/2009 में पारित निर्णय/ आदेश दिनांक 11.10.2010 के विरूद्ध)

1-       Superintendent of Post Offices, Bijnore Division, Bijnore.

2-      Senior Post Master, Head Post Office, Allahabad.

                                                                 ........... Appellants/ Opp. Parties

Versus    

1        Ranjeet Singh, Advocate, Civil Court, Bijnore  

    ……..…. Respondent/ Complainant

2       Sachiv, Bar Council of Uttar Pradesh, 19 Maharshi Dayanand Road, Allahabad.

……..…. Respondent/ Opp. Party

समक्ष :-  

मा0 श्री रामचरन चौधरी, पीठासीन सदस्‍य

मा0 श्री गोवर्धन यादव, सदस्‍य

अपीलार्थी के अधिवक्‍ता    :   डॉ0 उदय वीर सिंह

प्रत्‍यर्थी के अधिवक्‍ता   :   श्री एस0पी0 सिंह एवं रंजीत सिंह (स्‍वयं)

दिनांक :26-5-2017

मा0 श्री रामचरन चौधरी, पीठासीन सदस्‍य द्वारा उदघोषित

निर्णय    

प्रस्‍तुत अपील जिला उपभोक्‍ता फोरम, बिजनौर द्वारा परिवाद सं0-178/2009 में पारित निर्णय/आदेश दिनांकित 11.10.2010 के विरूद्ध योजित की गई है, जिसमें जिला उपभोक्‍ता फोरम, बिजनौर द्वारा निम्‍न आदेश पारित किया गया है:-

"विपक्षी सं0-2 व 3 को आदेशित किया जाता है कि वह 30 दिन के अन्‍दर परिवादी का उक्‍त पार्सल उसको उपलब्‍ध कराये, शारीरिक व मानसिक क्षति के लिए रू0 100,000.00 और वाद व्‍यय के रूप में रू0 3000.00 का भुगतान 30 दिन के अन्‍दर करें।"

संक्षेप में केस के तथ्‍य इस प्रकार है परिवादी ने दिनांक 21.08.2007 को जनपद बिजनौर में वकालत करने के आशय से बार कौंसिल आफ उत्‍तर प्रदेश, इलाहाबाद से रजिस्‍ट्रेशन कराने हेतु अपने हाईस्‍कूल, इण्‍टर, बी0ए0 तीना वर्षों, एम0 ए0 दोनों वर्षों एवं एल0एल0 बी0 तीनों वर्षों की मूल

-2-

अंकतालिकाएं और हाईस्‍कूल, इण्‍टर, बी0ए0, एम0 ए0 तथा एल0एल0बी के प्रमाण पत्र व डिग्रीयॉ मूल रूप तथा फोटो आदि और इन्डियन ओवरसीज बैंक पुलिस लाइन मेरठ से बने तीन ड्राफ्ट रू0 1000.00, रू0 25.00 एवं रू0 1215.00 दिनांकित 26.8.2007 ट्रेमोन कोरियर बिजनौर के माध्‍यम से सचिव बार कौंसिल आफ उत्‍तर प्रदेश, 19 महर्षि दयानन्‍द रोड- 2, इलाहाबाद को भेजे थे एवं परिवादी को श्री बलवन्‍त सिंह सदस्‍य बार कौंसिल आफ उत्‍तर प्रदेश, इलाहाबाद के द्वारा सचिव बार कौंसिल आफ उत्‍तर प्रदेश, इलाहाबाद का सूचना पत्र जिसमें परिवादी का रजिस्‍ट्रेशन सं0-4170/07 अंकित है माह दिसम्‍बर 2007 में प्राप्‍त हो गया था, लेकिन रजिस्‍ट्रेशन हेतु भेजे गये महत्‍वपूर्ण प्रमाण पत्र उपरोक्‍त व आई कार्ड प्राप्‍त नहीं हुए मूल अभिलेखों के वापसन मिलने पर परिवादी ने बार कौंसिल आफ उत्‍तर प्रदेश, इलाहाबाद को दिनांक 09.4.2008 एवं 29.8.2008 को लिखे एवं दिनांक 01.7.2008 को सचिव, बार कौंसिल को एक नोटिस शैक्षिक प्रमाण पत्रों की वापसी हेतु श्री हरिशंकर सिंह उपाध्‍यक्ष, श्री सुभाष पाण्‍डेय सहायक सचिव, बार कौंसिल आफ उत्‍तर प्रदेश, इलाहाबाद को स्‍मृति पत्र भी लिखा गया, इसके बाद अध्‍यक्ष व सचिव बार कौंसिल आफ उत्‍तर प्रदेश, इलाहाबाद और सीनियर पोस्‍ट मास्‍टर इलाहाबाद को पुन: एक स्‍मृति पत्र दिनांक 19.3.2009 को लिखा गया लेकिन प्रमाण पत्र वापस नहीं हुए। पुन: एक स्‍मृति पत्र दिनांक 05.7.2009 को बार कौंसिल आफ उत्‍तर प्रदेश को लिखा गया पर प्रमाण पत्र वापस नहीं हुए। परिवादी के अनुसार डाकघर बिजनौर से उक्‍त भेजे गये पार्सल की व्‍यक्तिगत जानकारी की गयी लेकिन पार्सल सं0-6060 आने की कोई जानकारी नहीं मिली उसके बाद सुभाष चन्‍द्र पाण्‍डेय सहायक सचिव, बार कौंसिल आफ उत्‍तर प्रदेश ने अपने पत्रांक 8242/08 दिनांक 14.12.2008 को सीनियर पोस्‍ट मास्‍टर प्रधान डाकघर, इलाहाबाद को पार्सल सं0-6060 दिनांक 24.09.2007 के विषय में जॉच हेतु लिखा गया साथ ही परिवादी द्वारा भी दिनांक 02.01.2009 को एक पत्र सीनियर पोस्‍ट मास्‍टर इलाहाबाद को पार्सल व अभिलेखों की तलाश हेतु लिखा पर कोई सफलता नहीं मिली। परिवादी के अनुसार सीनियर पोस्‍ट मास्‍टर इलाहाबाद ने अपने पत्रांक दिनांकित 21.01.2009 के द्वारा अवगत कराया कि उन्‍होंने खोज पत्र जारी किया, खोज

-3-

पत्र वापसी पर अवगत करा दिया जाएगा। सूचना के अधिकार अधिनियम के अन्‍तर्गत सीनियर पोस्‍ट मास्‍टर से तीन बिन्‍दुओं की सूचना वैध पोस्‍टल आर्डर के साथ दिनांक 05.02.2009 को भेज कर चाही गयी। सीनियर पोस्‍ट मास्‍टर ने अपने पत्रांक सी0पी0/जिसका/आर0टी0आई0 एक्‍ट 09 दिनांक 24.02.2009 द्वारा सूचित किया गया कि खोज पत्र वापस आने पर अवगत कराया जायेगा। परिवादी के अनुसार उसने इस बारे में बार कौंसिल आफ इण्डिया को एक पत्र दिनांक 19.3.2009 को लिखा जिसके संदर्भ में बार कौंसिल आफ इण्डिया ने भी बार कौंसिल आफ उत्‍तर प्रदेश को एक पत्र दिनांक 25.02.2009 को लिखा बार कौंसिल आफ उत्‍तर प्रदेश ने दिनांक 14.3.2009 को पत्रांक सं0-2386/2009 के द्वारा इनसे सूचित किया कि परिवादी को आज तक प्राप्‍त नहीं हुए प्रयास करने के बाद भी उक्‍त पार्सल के बारे में कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला, जिसके कारण परिवादी द्वारा प्रतिवादीगण के विरूद्ध उनसे पार्सल को उपलब्‍ध कराये जाने एवं क्षतिपूर्ति का अनुतोष प्राप्‍त किये जाने हेतु जिला उपभोक्‍ता फोरम के समक्ष परिवाद प्रस्‍तुत किया गया है।

जिला उपभोक्‍ता फोरम के समक्ष प्रतिवादी सं0-1 की ओर से कोई उपस्थित नहीं हुआ और न ही उनकी ओर से कोई प्रतिवाद पत्र प्रस्‍तुत किया गया है, अत: प्रतिवादी सं0-1 के विरूद्ध एक पक्षीय कार्यवाही का आदेश किया गया है।

जिला उपभोक्‍ता फोरम के समक्ष प्रतिवादी सं0-2 की ओर से प्रतिवाद पत्र दाखिल किया गया और यह कथन किया गया है कि पंजीकृत बार कौंसिल आफ उत्‍तर प्रदेश के द्वारा श्री रंजीत सिंह अधिवक्‍ता नगर ट्यूबवैल कालोनी बिजनौर उ0प्र0 के नाम पर बुक कराया गया था। जो पार्सल लिस्‍ट के क्रम सं0-118/192 पर अंकित कर दिनांक 24.9.2007 को ही इलाहाबाद आर0 एम0एस0 को प्रेषित कर दी गयी थी उक्‍त पार्सल के संबंध में शिकायत प्रेषक द्वारा प्राप्‍त हुई जिसमें परिवाद सं0-211001-01300 दिनांक 09.8.2008 को पंजीकृत किया गया जिस पर मंडलीय कार्यालय बिजनौर ने दिनांक 12.8.2008 को सूचित किया कि उक्‍त पार्सल प्राप्‍त नहीं हुआ खोज पत्र जारी करें इस कार्यालय द्वारा खोज पत्र जारी किया गया उक्‍त रजिस्‍टर्ड पार्सल के संबंध में इलाहाबाद आर0एम0एस0 ने लखनऊ आर0एम0एस0 को दिनांक

-4-

24.9.2007 को पार्सल प्रेषण जानकारी भेजा तत्‍पश्‍चात लखनऊ आर0एम0एस0 ने दिनांक 25.9.2007 को पार्सल को मुरादाबाद आर0एम0एस0 को प्रेषित किया गया। नजीबाबाद आर0एम0एस0 ने अपने सब रिकार्ड कार्यालय आर0एम0एस0एस0 को डिवीजन नजीबाबाद आर0एम0एस0 ने डिवीजन नजीबाबाद पत्रांक 46109 दिनांक 20.6.2009 के द्वारा अवगत कराया गया कि उनके कार्यालय रिकार्ड नष्‍ट किये जा चुके है। उपरोक्‍त संबंध में मुख्‍य अभिलेख कार्यालय बरेली का पत्रांक सं0-सी CH-319B-007/HRO/BLY/2009 Dt. 15-1-09  प्रवर अ‍धीक्षक आर0एम0एस0 लखनऊ का पत्रांक K4/5B-29108-09 Lko Dt. 19-1-09, मुख्‍य अभिलेख कार्यालय बरेली का पत्रांक CH 315 B-381/11RO/08 Dt. 15-6-09 तथा उप-अभिलेख कार्यालय नजीबाबाद का पत्रांक सं0-46/09 Dated at SRO N.B./Dt. 20-6-09 की छाया प्रतियॉ भी हमारी ओर से दाखिल की गयी है। प्रतिवादी सं0-2 का यह भी कथन है कि परिवादी/शिकायतकर्ता डाकघर का उपभोक्‍ता नहीं है केवल प्रेषक ही उपभोक्‍ता हो सकता है एवं न्‍याय क्षेत्र इलाहाबाद होना चाहिए बिजनौर फोरम में वाद नहीं चल सकता है।

प्रतिवादी सं0-3 की ओर से भी जिला उपभोक्‍ता फोरम के समक्ष अपना प्रतिवाद पत्र दाखिल कियागया और यह कथन किया गया है कि इलाहाबाद से पंजीकृत पार्सल सं0-6060 दिनांक 24.9.2007 को रणजीत सिंह अधिवक्‍ता शिवाजी नगत टयूबवैल कालोनी, बिजनौर को वितरित होना था। वितरित न होने की शिकायत इस कार्यालय में प्रथम बार दिनांक 121.8.2009 को प्राप्‍त हुई (फोरम के समन सं0 178/09/2009 दिनांक 11.8.2009 से) कथित पार्सल के वितरण की शिकायत निर्धारित अवधि पूर्ण होने पर रिवर्ड बीड आउट कर दिया गया था समय रहते पार्सल के वितरण न होने की शिकायत विभाग के समक्ष समय पर फाईल न करने के कारण प्रेषक व प्राप्‍तकर्ता दोनों ही दोषी है। शिकायत कालातीत होने से पार्सल का वितरण सूचित करना संभव नहीं है और शिकायकर्ता उपरोक्‍त पार्सल के प्रेषक नहीं है एवं उनके द्वारा विभाग की कोई भुगतान नहीं किया गया है।

अपीलार्थी की ओर से विद्वान अधिवक्‍ता डॉ0 उदय वीर सिंह तथा प्रत्‍यर्थी की ओर से विद्वान अधिवक्‍ता श्री एस0पी0 सिंह एवं श्री रंजीत सिंह

-5-

को सुना गया तथा जिला उपभोक्‍ता फोरम के निर्णय/आदेश दिनांकित 11.10.2010 का अवलोकन किया गया तथा अपील आधार का अवलोकन किया गया।

बहस के दौरान प्रत्‍यर्थी के विद्वान अधिवक्‍ता एवं स्‍वयं प्रत्‍यर्थी द्वारा यह स्‍वीकार किया गया कि दिनांक 23.8.2014 को मूल दस्‍तावेज उसे प्राप्‍त हो चुके है, जबकि जिला उपभोक्‍ता फोरम द्वारा प्रश्‍नगत निर्णय दिनांक 11.10.2010 को पारित किया गया था और इस प्रकार अपील के दौरान दिनांक 23.8.2014 को प्रत्‍यर्थी को अपने मूल दस्‍तावेज प्राप्‍त हो चुके है। अपीलार्थी के विद्वान अधिवक्‍ता द्वारा बहस के दौरान यह कथन किया गया है कि चूंकि बार कौंसिल आफ उत्‍तर प्रदेश, इलाहाबाद ने मूल दस्‍तावेज प्रत्‍यर्थी को भेजे थे, इसलिए इस केस में बार कौंसिल आफ उत्‍तर प्रदेश, इलाहाबाद ही उपभोक्‍ता है, प्रत्‍यर्थी रंजीत सिंह उपभोक्‍ता नहीं है और रंजीत सिंह ने डाक से कोई पार्सल नहीं भेजा था और अपीलार्थी की ओर से यह भी कहा गया कि आर0टी0आई0 में भी एक केस रंजीत सिंह नें दाखिल किया था, जिसमें हर्जाने के तौर पर उसे रू0 500.00 प्राप्‍त हो चुके है और जिला उपभोक्‍ता फोरम द्वारा कोई धनराशि देय नहीं है। लिखित बहस में अपीलार्थी की ओर से यह कहा गया है कि परिवाद स्‍वीकार नहीं हो सकता था क्‍योंकि पोस्‍ट आफिस पब्लिक सर्विस करने के लिए अधीकृत है और डिलिवरी न होने और देरी से डिलिवरी देने की जिम्‍मेदारी पोस्‍ट आफिस पर नहीं थोपी जा सकती है, जैसा कि पोस्‍ट आफिस एक्‍ट में प्राविधान दिया गया है और इस प्रकार किसी भी हालत में रू0 100.00 से अधिक कोई जिम्‍मेदारी पोस्‍ट आफिस की नहीं हो सकती है। इस संबंध में अपीलार्थी की ओर से मा0 राष्‍ट्रीय आयोग की नजीर Speed Post Through Manager Speed Post Office, Gpo Building, Jaipur  Vs.  Laxman Singh, 2010 NCJ 309 (NC) तथा Union of India & Ors  Vs.  R.C. Puri, II (2005) CPJ 49 (NC) दाखिल की गई हैं। पीठ द्वारा अपीलार्थी की ओर से प्रस्‍तुत उपरोक्‍त वर्णित नजीरों का अवलोकन किया गया।

यह तथ्‍य स्‍वीकार है कि अपील के दौरान दिनांक 23.8.2014 को प्रत्‍यर्थी को अपने सारे मूल दस्‍तावेज मिल चुके है, जो कि बार कौंसिल आफ

-6-

उत्‍तर प्रदेश, इलाहाबाद द्वारा उसे भेजे गये थे और जो बीच में कही गुम हो गये थे और इन सारे हालात को देखते हुए हम इस निषकर्ष पर पहुंचते है कि जिला उपभोक्‍ता फोरम ने जो 1,00,000.00 रू0 शारीरिक व मानसिक क्षति के लिए दिलाया है, वह बहुत अधिक है और हम यह भी पाते है कि शारीरिक व मानसिक कष्‍ट परिवादी/प्रत्‍यर्थी को उन अभिलेखों के न मिलने के कारण हुआ है, उसके लिए 15,000.00 रू0 क्षतिपूर्ति दिलाया जाना न्‍यायोचित होगा और जो वाद व्‍यय के रूप में रू0 3,000.00 जिला उपभोक्‍ता फोरम द्वारा दिलाया गया है, वह उचित है, अत: अपीलार्थी की अपील आंशिक रूप से स्‍वीकार किये जाये योग्‍य है।

आदेश

अपीलार्थी की अपील आंशिक रूप से स्‍वीकार की जाती है तथा जिला उपभोक्‍ता फोरम, बिजनौर द्वारा परिवाद सं0-178/2009 में पारित निर्णय/आदेश दिनांकित 11.10.2010 में जो 1,00,000.00 रू0 शारीरिक व मानसिक क्षति के लिए दिलाया है, उसके स्‍थान पर 15,000.00 रू0 परिवर्तित किया जाता है एवं प्रत्‍यर्थी/परिवादी वाद व्‍यय के रूप में 3,000.00 रू0 अपीलार्थी/विपक्षी से पाने का हकदार होगा। दो माह के अन्‍दर उक्‍त धनराशि अदा न करने पर इस निर्णय की तिथि से उक्‍त धनराशि पर 09 प्रतिशत ब्‍याज भी देय होगा।

उभय पक्ष अपीलीय व्‍यय भार स्‍वयं वहन करेगें।

 

 

    (रामचरन चौधरी)                   (गोवर्धन यादव)

    पीठासीन सदस्‍य                       सदस्‍य

हरीश आशु.,

कोर्ट सं0-4

 
 
[HON'BLE MR. Ram Charan Chaudhary]
PRESIDING MEMBER
 
[HON'BLE MR. Gobardhan Yadav]
MEMBER

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