राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, उ0प्र0, लखनऊ।
मौखिक
अपील संख्या-2106/1997
(जिला उपभोक्ता फोरम, बुलंदशहर द्वारा परिवाद संख्या-521/1996 में पारित निर्णय दिनांक 09.10.1997 के विरूद्ध)
1.श्री बृजेश नारायण त्रिवेदी प्राधानाचार्य राजकीय कृषि विद्यालय बुलंदशहर।
2.राजकीय कृषि विद्यालय बुलंदशहर द्वारा प्राधानाचार्य/संयुक्त कृषि निदेशक।
3.कृषि निदेशक कृषि भवन, लखनऊ।
4.उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा कृषि सचिव उ0प्र0 सरकार लखनऊ जवाहर
भवन, विधानसभा मार्ग, लखनऊ। .........अपीलार्थी/विपक्षी
बनाम्
श्री प्यारे लाल सेवा निवृत्त प्रवक्ता राजकीय कृषि विद्यालय
बुलंदशहर। ........प्रत्यर्थी/परिवादी
समक्ष:-
1. मा0 श्री राम चरन चौधरी, पीठासीन सदस्य।
2. मा0 श्री राज कमल गुप्ता, सदस्य।
अपीलार्थी की ओर से उपस्थित : कोई नहीं।
प्रत्यर्थी की ओर से उपस्थित :कोई नहीं।
दिनांक 15.07.2015
मा0 श्री राज कमल गुप्ता, सदस्य द्वारा उदघोषित
निर्णय
प्रस्तुत अपील जिला फोरम बुलंदशहर द्वारा परिवाद संख्या 521/1996 में पारित निर्णय/आदेश दि. 09.10.1997 के विरूद्ध योजित की गई है। जिला मंच का आदेश निम्न प्रकार है:-
'' प्रस्तुत परिवाद सव्यय स्वीकार किया जाता है तथा विपक्षीगण को आदेशित किया जाता है कि वह परिवादी को टोकिन क्षतिपूर्ति स्वरूप अंकन रू. 10000/- एक माह के अंदर भुगतान करें।
विपक्षीगण को यह भी आदेशित किया जाता है कि वह परिवादी को इस परिवाद के व्ययस्वरूप अंकन रू. 500/- भी उक्त अवधि में भुगतान करें।
यदि विपक्षीगण उपरोक्त आदेशित समस्त धनराशि को उपरोक्त अवधि में परिवादी को भुगतान नहीं करेंगे तो उस दशा में विपक्षीगण परिवादी को दिनांक 10.11.97 से तारीख भुगतान तक उपरोक्त आदेशित समस्त धनराशि पर 18 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी भुगतान करने के जिम्मेदार होंगे।''
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संक्षेप में केस के तथ्य इस प्रकार हैं कि परिवादी के जिम्मे विपक्षी कृषि विद्यालय अथवा कृषि विभाग का कोई किराया देय बकाया नहीं था। परिवादी विपक्षीगण की विभागीय व्यवस्था एवं तदर्थ बनाये गये नियमों के अंतर्गत सेवानिवृत्त होने के दो माह देय लाभा पेंशन, ग्रेच्युटी आदि पाने तथा इससे पूर्व इसी अवधि में देयता प्रमाणपत्र प्राप्त करने का अधिकारी था। विपक्षीगण को बार-बार कहने पर भी प्रदान नहीं किया गया। परिवादी की देय ग्रेच्युटी व अन्य लाभ इतने लम्बे समय उपरांत भी परिवादी को भुगतान नहीं किया गया, जिससे परिवादी विपन्न स्थिति में पहुंच गया।
विपक्षीगण की ओर से इस परिवाद को इस फोरम के समक्ष सुने जाने के संबंध में प्रथम मुद्दा इस फोरम में परिवादी की न्यायिक अधिकारिता के संबंध में उठाया गया है अन्य कोई मुद्दा नहीं उठाया गया है।
अपीलकर्ता की ओर से कोई उपस्थित नहीं है न ही प्रत्यर्थी की ओर से कोई उपस्थित है। पत्रावली के अवलोकन से स्पष्ट है कि प्रत्यर्थी को नोटिस दि. 13.07.2011 को भेजा गया, लेकिन कोई उपस्थित नहीं है।
पत्रावली पर उपलब्ध अभिलेखों एवं अपील आधार का भलीभांति परिशीलन किया गया। अपील के आधार में कहा गया है कि प्रत्यर्थी उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम की धारा 2(डी) के अनुसार न तो उपभोक्ता है और न ही दोनों पक्षों के बीच क्रेता और विक्रेता का संबंध है और जिला फोरम को इस परिवाद को सुनने का क्षेत्राधिकार प्राप्त नहीं था।
केस के तथ्य एवं परिस्थिति के आधार व जिला फोरम के निर्णय एवं आदेश के अवलोकन के उपरांत हम यह पाते हैं कि ग्रेच्युटी, जी.पी.एफ व टी.ए. बिल के संबंध में जो अनुतोष मांगा है वह उपभोक्ता का विवाद नहीं है और हम यह पाते हैं कि इस केस में जो निर्णय पारित किया गया है, वह विधिसम्मत नहीं है और निरस्त किए जाने योग्य है। तदनुसार अपील स्वीकार किए जाने योग्य है।
आदेश
प्रस्तुत अपील स्वीकार की जाती है तथा जिला फोरम द्वारा पारित निर्णय/आदेश
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दि. 09.10.97 निरस्त किया जाता है।
(राम चरन चौधरी) (राज कमल गुप्ता)
पीठासीन सदस्य सदस्य
राकेश, आशुलिपिक
कोर्ट-5