
SEKHRAJ MOMAMAD filed a consumer case on 20 Aug 2014 against PRO SANCHALK DEEPAK KRISHI KENDRA in the Seoni Consumer Court. The case no is CC/42/2014 and the judgment uploaded on 15 Oct 2015.
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण फोरम, सिवनी (म0प्र0)
प्रकरण क्रमांक 422014 प्रस्तुति दिनांक-13.5.2014
समक्ष :-
अध्यक्ष - व्ही0 पी0 षुक्ला,
सदस्य - श्री वीरेन्द्र सिंह राजपूत,
षेख राज मोहम्मद आ0 श्री षेख मजीद,
निवासी ग्राम पिपरियाकला, तह0 केवलारी,
जिला सिवनी (म0प्र0) ............परिवादी
:-विरूद्ध-:
प््रो0संचालक,
छीपक कृशि केन्द्र, जी0एन0 रोड महावीर मढि़या
सिवनी (म0प्र0) ...............अनावेदक
:-आदेश-:
(आज दिनांक-20.8.2014 को पारित)
(1) परिवादी ने अनावेदक के विरूद्ध धारा 12 उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत सेवा में कमी के आधार पर विक्रित सबमर्सिबल पम्प को बोर से वापिस निकलवाकर सही स्थान पर लगाये जाने, मानसिक पीड़ा हेतु 45,000-रूपये तथा वाद व्यय 2,000-रूपये दिलाये जाने हेतु यह परिवाद प्रस्तुत किया है।
(2) परिवादी का पक्ष संक्षेप में इस प्रकार है कि परिवादी ने अनावेदक से दिनांक 04.02.13 को महिन्द्रा कम्पनी का अच्छी गुणवत्ता वाला 12,000-रूपये में पम्प क्रय किया। अनावेदक के अधिकृत मैकेनिक ने परिवादी के घर जाकर बोर में पम्प लगाया एवं टेसिटंग की, किन्तु पम्प नहीं चला। परिवादी ने इसकी जानकारी अनावेदक को दी। परिवादी की सलाह पर अनावेदक ने परिवादी की मोटर बदलकर टैक्समों कम्पनी का दूसरा गुणवत्ता पूर्ण मोटर दिया। अनावेदक द्वारा परिवादी से दूसरा मोटर देने के लिये अतिरिक्त 5,000-रूपये भी लिये गये। अनावेदक ने दूसरा मोटर देने के पष्चात कोर्इ दूसरा बिल नहीं दिया, बलिक पुराने बिल में ही सुधार कर दिया। अनावेदक के अधिकृत मिस्त्री ने षोभाराम, थानसिंह एवं असलम के सामने मोटर फिट करने का प्रयास किया, किन्तु मिस्त्री द्वारा पर्याप्त सावधानी नहीं बरती गर्इ, उसने बोर में चैन, पाना गिरा दिया, जिसके कारण दूसरी मोटर फंस गर्इ और चालू
नहीं हो पायी, इसके बाद परिवादी अनावेदक से लगातार सम्पर्क करता रहा, किन्तु अनावेदक ने परिवादी की मोटर चालू नहीं किया, अत: परिवादी ने अनावेदक के विरूद्ध यह विक्रित सबमर्सिबल पम्प को बोर से निकलवाकर मोटर पम्प सही स्थान पर लगाये जाने, मानसिक पीड़ा हेतु 45,000-रूपये तथा वाद व्यय 2,000-रूपये दिलाये जाने हेतु यह परिवाद प्रस्तुत किया है।
(3) अनावेदक का पक्ष संक्षेप में इस प्रकार है कि परिवादी ने अपनी इच्छा अनुसार महिन्द्रा कम्पनी की आधे हार्स पावर का सबमर्सिबल पम्प क्रय किया था, किन्तु अनावेदक ने अधिकृत मिस्त्री द्वारा परिवादी के बोर में मोटर नहीं लगाया। परिवादी ने स्वयं महिन्द्रा कम्पनी की मोटर बदलकर टैक्समों कम्पनी की मोटर की मांग की, जो अनावेदक द्वारा परिवादी के अनुरोध पर प्रदान किया गया। परिवादी से मोटर की अंतर की राषि ली गर्इ है। अनावेदक मोटर पम्प एवं अन्य मोटर पम्प एवं अन्य आवष्यक उपकरण विक्रय करने का व्यवसाय करता है। अनावेदक द्वारा परिवादी के बोर में मोटर लगाने हेतु न तो कोर्इ मिस्त्री भेजा गया और न ही बोर में मोटर फिटिंग की कार्यवाही की गर्इ। परिवादी ने काल्पनिक आधारों पर परिवाद प्रस्तुत किया है। अनावेदक द्वारा सेवा में कमी नहीं की गर्इ है। अत: अनावेदक ने परिवादी का परिवाद निरस्त करने का निवेदन किया है।
(4) विचारणीय बिन्दू यह है कि क्या अनावेदक के मिस्त्री द्वारा परिवादी के बोर में मोटर लगाने में असावधानी बरती गर्इ, जिसके कारण परिवादी की मोटर चालू नहीं हो पायी, जो अनावेदक की ''सेवा में त्रुटि है ?
(5) यह स्वीकृत तथ्य है कि परिवादी ने अनावेदक की दुकान से महिन्द्रा कम्पनी का आधे हार्स पावर का सबमर्सिबल पम्प क्रय किया था। यह भी स्वीकृत तथ्य है कि परिवादी के अनुरोध पर अनावेदक ने महिन्द्रा कम्पनी की मोटर को बदलकर टैक्समों कम्पनी का मोटर पम्प दिया था एवं अनावेदक द्वारा परिवादी से दोनों मोटरों की अंतर की कीमत 5,000-रूपये भी लिये गये।
(6) परिवादी षेखराज मोहम्मद ने षपथ पत्र पर प्रकट किया कि उसने दिनांक 04.02.13 को अनावेदक से मोटर क्रय किया था, किन्तु वह मोटर उसके बोर में नहीं चली, तब उसने अनावेदक से दूसरी टैक्समों कम्पनी की मोटर खरीदा, तब उसने अनावेदक को 5,000-रूपये अंतर की राषि अदा किया। अनवेदक के अधिकृत मिस्त्री द्वारा उसके बोर में मोटर फिट किया जा रहा था, किन्तु मिस्त्री द्वारा पर्याप्त सावधानी नहीं बरती गर्इ, जिसके कारण बोर में चैन पाना गिर गया और मोटर फंस गर्इ, किन्तु परिवादी षेख राज मोहम्मद ने षपथ पत्र पर यह नहीं बताया कि अनावेदक की ओर
से कौन सा मिस्त्री परिवादी के बोर में सबमर्सिबल पम्प फिट करने के लिये गया था। परिवादी की ओर से थानसिंह एवं असलम खान ने भी षपथ पत्र पर प्रकट किया कि अनावेदक के मिस्त्री ने परिवादी के बोर में मोटर फिट करने का प्रयास किया, किन्तु मोटर बोर में फंस गर्इ, किन्तु थानसिंह एवं असलम खान ने षपथ पत्र पर यह नहीं बताया कि अनावेदक की ओर से कौन सा मिस्त्री परिवादी के बोर में मोटर लगाने के लिये गया था। अनावेदक दीपक रघुवंषी ने षपथ पत्र पर प्रकट किया कि वह मषीनरी पार्इप, मोटर इत्यादि का विक्रय करने का व्यवसाय करता है, उसकी दुकान में फिटिंग की कोर्इ व्यवस्था नहीं है। उसने परिवादी को मोटर विक्रय किया था। परिवादी के अनुरोध पर उसने पुन: मोटर बदलकर टैक्समों कम्पनी की प्रदाय कर दिया, किन्तु उसने परिवादी से मोटर फिटिंग का कोर्इ चार्ज नहीं लिया। परिवादी ने हमारे समक्ष मोटर क्रय करने की रसीद भी प्रस्तुत की है। रसीद में भी मोटर फिटिंग का कोर्इ उल्लेख नहीं है।
(8) अनावेदक द्वारा परिवादी के बोर में मोटर लगाने संबंधी कोर्इ प्रामाणिक साक्ष्य नहीं है। हमारे मत में परिवादी द्वारा अनावेदक को मात्र मोटर विक्रय किया गया है, किन्तु अनावेदक द्वारा परिवादी के बोर में मोटर की फिटिंग नहीं किया गया है। स्पश्ट साक्ष्य के अभाव में हम इस निश्कर्श पर पहुंचते हैं कि अनावेदक द्वारा परिवादी के मोटर फिटिंग संबंधी कोर्इ कार्य नहीं किया गया है। अनावेदक द्वारा सेवा में कोर्इ त्रुटि नहीं की गर्इ है।
(9) उपरोक्त विवेचन के अनुसार हम परिवादी कोर्इ भी सहायता दिलाया जाना उचित नहीं समझते। अत: परिवादी का परिवाद निरस्त किया जाता है।
(10) मामले में आये तथ्यों को देखते हुए उभयपक्ष अपना-अपना वादव्यय वहन करेंगे।
(11) पक्षकारों को आदेष की प्रति नि:षुल्क प्रदान की जावे।
मेरे निर्देषन में टंकित।
आदेष खुले न्यायालय में घोशित।
हस्ताक्षरित एवं दिनांकित। मैं सहमत हूं।
(व्ही0 पी0 षुक्ला ) (श्री वीरेन्द्र सिंह राजपूत)
अध्यक्ष सदस्य
जिला उपभोक्ता विवाद जिला उपभोक्ता विवाद
प्रतितोषण फोरम,सिवनी प्रतितोषण फोरम,सिवनी (म0प्र0) (म0प्र0)
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