Uttar Pradesh

StateCommission

A/2004/1016

Post Office - Complainant(s)

Versus

Prasant - Opp.Party(s)

S P Singh

24 Jul 2015

ORDER

STATE CONSUMER DISPUTES REDRESSAL COMMISSION, UP
C-1 Vikrant Khand 1 (Near Shaheed Path), Gomti Nagar Lucknow-226010
 
First Appeal No. A/2004/1016
(Arisen out of Order Dated in Case No. of District State Commission)
 
1. Post Office
A
...........Appellant(s)
Versus
1. Prasant
A
...........Respondent(s)
 
BEFORE: 
 HON'BLE MR. Alok Kumar Bose PRESIDING MEMBER
 HON'BLE MRS. Smt Balkumari MEMBER
 
For the Appellant:
For the Respondent:
ORDER

(सुरक्षित)

 

राज्‍य उपभोक्‍ता विवाद प्रतितोष आयोग, उ0 प्र0, लखन

 

अपील संख्‍या-1016/2004

 (जिला उपभोक्‍ता फोरम, उन्‍नाव द्वारा परिवाद संख्‍या 39/2002 में पारित निर्णय/आदेश दिनांक 23.02.2004 के विरूद्ध)

       

  1. भारतीय डाक एवं तार विभाग द्वारा पोस्‍ट मास्‍टर जनरल, लखनऊ उ0प्र0।
  2. भारतीय डाक एवं तार विभाग द्वारा पोस्‍ट मास्‍टर जनरल, देहरादून, उत्‍तराखण्‍ड।                                 

                                     ..........अपीलार्थीगण/विपक्षीगण

बनाम

प्रशान्‍त पुत्र श्री बी0के0 श्रीवास्‍तव निवासी मकान नम्‍बर-101 पुरानी बाजार निकट श्री सिद्धनाथ मंदिर शहर परगना तहसील व जिला उन्‍नाव।

                                         .............प्रत्‍यर्थी/परिवादी

समक्ष:-

1. माननीय श्री आलोक कुमार बोस, पीठासीन सदस्‍य।

2. माननीय श्रीमती बाल कुमारी, सदस्‍य।

1- अपीलार्थीगण की ओर से उपस्थित : श्री एस0 पी0 सिंह।

2- प्रत्‍यर्थी की ओर से उपस्थित       :    कोई नहीं।

दिनांक: 13-08-2015

माननीय श्रीमती बाल कुमारी सदस्‍य द्वारा उदघोषित निर्णय

     अपीलार्थी द्वारा प्रस्‍तुत अपील विद्धान जिला उपभोक्‍ता फोरम, उन्‍नाव द्वारा परिवाद संख्‍या 39/2002 में पारित आदेश दिनांक 23.02.2004 के विरूद्ध योजित की गयी है। विवादित आदेश निम्‍नवत् है:-

     '' परिवाद इस प्रकार स्‍वीकार किया जाता है कि आज से दो माह के भीतर विपक्षी संख्‍या-2 परिवादी को अंकन 20,000/-रू0 क्षतिपूर्ति के रूप में अदा करें, अन्‍यथा विपक्षी संख्‍या-2 परिवाद योजित करने की तिथि दिनांक 26-02-2002 से भुगतान की तिथि तक उपर्युक्‍त धनराशि पर 18 प्रतिशत ब्‍याज भी अदा करने का उत्‍तरदायी होगा। परिवादी अंकन 1,000/-रू0 वाद व्‍यय के रूप में प्राप्‍त करने का अधिकारी है।''

     प्रस्‍तुत अपील दिनांक 24-07-2015 को अंतिम सुनवाई हेतु सूचीबद्ध थी। अपीलार्थीगण/विपक्षीगण की ओर से विद्धान अधिवक्‍ता श्री एस0पी0 सिंह उपस्थित आए परन्‍तु प्रत्‍यर्थी/परिवादी की ओर से सूचना के बावजूद भी कोई उपस्थित नहीं हुआ। चूंकि यह अपील पिछले 10 वर्ष से भी अधिक समय से अंगीकरण के स्‍तर पर निस्‍तारण हेतु सूचीबद्ध है अत: उपभोक्‍ता संरक्षण अधिनियम-1986 (अधिनियम संख्‍या-68 सुन् 1986) की धारा-30 की उपधारा(2) के अन्‍तर्गत निर्मित उत्‍तर प्रदेश उपभोक्‍ता संरक्षण नियमावली 1987 के नियम 8 के उप नियम (6) में दिये गये प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए पीठ द्वारा यह समीचीन पाया गया कि पत्रावली पर उपलब्‍ध साक्ष्‍य/अभिलेख एवं अपीलार्थी डाक विभाग के विद्धान अधिवक्‍ता के तर्कों के आधार पर इस अपील में न्‍यायोचित आदेश पारित किया जाए। तद्नुसार अपीलार्थी डाक विभाग के विद्धान अधिवक्‍ता को एकल रूप से विस्‍तारपूर्वक सुना गया एवं उनके तर्कों के परिप्रेक्ष्‍य में पत्रावली पर उपलब्‍ध साक्ष्‍यों का गहनता से परिशीलन किया गया।

     संक्षेप में तथ्‍य इस प्रकार है कि परिवादी ने रोजगार समाचार पत्र दिनांक 04 अगस्‍त, 2001  से दिनांक 10 अगस्‍त, 2001 में प्रकाशित स्‍टेशन हेड क्‍वाटर्स सेल देहरादून में एकाउन्‍ट्स क्‍लर्क के पद हेतु आवेदन दिनांक 07-08-2001 को किया था। संबंधित विभाग ने परिवादी को विपक्षीगण/अपीलार्थी डाक विभाग के माध्‍यम से दिनांक 14-08-2001 को स्‍टेशन रोड देहरादून से काल सेंटर संख्‍या-5007/1/ईएसटी परिवादी के पते पर पत्र भेजा जिसके अनुसार परिवादी को दिनांक 27-08-2001 को सुबह साढ़े नौ बजे साक्षात्‍कार के लिए स्‍टेशन देहरादून में उपस्थित होना था। परन्‍तु इन्‍टरव्‍यू का यह काल लेटर परिवादी को इन्‍टरव्‍यू की तिथि निकल जाने के बाद दिनांक 04-09-2001 को प्राप्‍त हुआ। फलस्‍वरूप वह साक्षात्‍कार में सम्मिलित नहीं हो सका। इसी को सेवा में कमी मानते हुए परिवादी ने प्रश्‍नगत परिवाद विद्धान अधीनस्‍थ‍ फोरम में दाखिल किया।

विपक्षी संख्‍या-1 व 2 द्वारा संयुक्‍त प्रतिवाद पत्र प्रस्‍तुत किया गया और यह स्‍वीकार किया गया कि प्रश्‍नगत इन्‍टरव्‍यू लेटर दिनांक 14-08-2001 को देहरादून से साधारण डाक द्वारा भेजा गया था। साथ ही यह भी स्‍वीकार किया गया कि उन्‍नाव में उक्‍त इन्‍टरव्‍यू लेटर दिनांक 04-09-2001 को ही वितरित कर दिया गया।

उभयपक्ष के तर्कों एवं प्रलेखीय साक्ष्‍यों के आधार पर विद्धान जिला मंच, उन्‍नाव द्वारा परिवाद को दिनांक 23-02-2004 को स्‍वीकार करते हुए उपरोक्‍तानुसार आदेश पारित किया गया। विद्धान अधीनस्‍थ फोरम के इसी आदेश से क्षुब्‍ध होकर अपीलार्थी डाक विभाग द्वारा प्रस्‍तुत अपील योजित की गयी है।

अपीलार्थीगण डाक विभाग द्वारा अपने लिखित संयुक्‍त कथन में यह स्‍वीकार किया गया कि प्रश्‍नगत इण्‍टरव्‍यू लेटर दिनांक 14-08-2001 को देहरादून से साधारण डाक द्वारा भेजा गया था। साथ ही यह भी स्‍वीकार किया गया कि उन्‍नाव में उक्‍त इन्‍टरव्‍यू लेटर दिनांक 04-09-2001 को ही वितरित कर दिया गया। भारतीय डाक अधिनियम-1898 की धारा-6 में यह प्राविधान दिया गया है कि-

Section 6 of the Indian Post Office Act. 1898 reads as under:

"6"- Exemption from liability for loss, mesdelivery, delay or damage-The Government shall not incur any liability by reason of the loss, misdelivary or delay of, or damage to, any postal article in course of transmission by post, except insofar as such liability may in express terms be undertaken by the Central Government as hereinafter provided and no officer of the post Office shall incur any liability by reason of any such loss, misdelivery, delay or damage, unless he has caused the same fraudulently or by his willful act or default,".

उपरोक्‍त प्राविधानों तथा माननीय राष्‍ट्रीय आयोग द्वारा टीकाराम बनाम् इण्डिया पोस्‍टल डिपार्टमेंट IV (2007) CPJ 123 (NC) के अतिरिक्‍त माननीय राष्‍ट्रीय आयोग द्वारा यूनियन आफ इण्डिया व अन्‍य बनाम एम0एल0 बोरा 2011(2) सीपीसी 179 एवं (2000) एनसीजे 142 पोस्‍ट मास्‍टर इम्‍फाल बनाम जामिनी देवी सगोलबंद तथा सुपरिण्‍टेण्‍डेण्‍ट आफ पोस्‍ट आफिसेज व अन्‍य बनाम उपभोक्‍ता सुरक्षा परिषद III(1996) CPJ 105 (NC) में दिये गये विधिक सिद्धांत को दृष्टिगत रखते हुए हमारे विचार से अधीनस्‍थ फोरम द्वारा पारित प्रश्‍नगत निर्णय एवं आदेश विधि अनुरूप नहीं है। अधीनस्‍थ फोरम द्वारा तथ्‍यों एवं विधि के विरूद्ध आदेश पारित किया गया है जो किसी भी दृष्टिकोण से पोषणीय नहीं है। वर्णित परिस्थिति में अधीनस्‍थ फोरम द्वारा पारित प्रश्‍नगत निर्णय एवं आदेश तथ्‍य एवं विधि के विपरीत होने के कारण अपास्‍त होने तथा अपील स्‍वीकार होने योग्‍य है।

आदेश

प्रस्‍तुत अपील स्‍वीकार की जाती है। विद्धान जिला उपभोक्‍ता फोरम, उन्‍नाव द्वारा परिवाद संख्‍या 39/2002 में पारित आदेश दिनांक 23.02.2004 अपास्‍त किया जाता है। पक्षकार अपीलीय व्‍यय-भार अपना-अपना स्‍वयं वहन करेंगे। उभयपक्ष को इस निर्णय की प्रमाणित प्रतिलिपि नियमानुसार उपलब्‍ध करायी जाए।

 

 

 

 

( आलोक कुमार बोस )                         ( बाल कुमारी )

  पीठासीन सदस्‍य                                 सदस्‍य

कोर्ट नं0-4 प्रदीप मिश्रा, आशु0

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 
 
[HON'BLE MR. Alok Kumar Bose]
PRESIDING MEMBER
 
[HON'BLE MRS. Smt Balkumari]
MEMBER

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