Rajasthan

Jhunjhunun

419/2013

SANTRA DEVI - Complainant(s)

Versus

POST OFFICE - Opp.Party(s)

VIDHYADHAR MAHLA

16 Feb 2016

ORDER

Heading1
Heading2
 
Complaint Case No. 419/2013
 
1. SANTRA DEVI
UDAIPURWATI
...........Complainant(s)
Versus
1. POST OFFICE
JHUNJHUNU
............Opp.Party(s)
 
BEFORE: 
 
For the Complainant:
For the Opp. Party:
ORDER

जिला फोरम उपभोक्ता विवाद प्रतितोष, झुन्झुनू (राजस्थान)
परिवाद संख्या - 419/13

समक्ष:-    1. श्री सुखपाल बुन्देल, अध्यक्ष।     
            2. श्रीमती शबाना फारूकी, सदस्या।
            3. श्री अजय कुमार मिश्रा, सदस्य।

श्रीमती सन्तरा देवी आयु 48 वर्ष पत्नी स्व0 बनवारी लाल जाति भार्गव निवासी नांगल तहसील उदयपुरवाटी जिला झुंझुनू (राज.)                        -  परिवादिया
                         बनाम
1.    अधीक्षक डाकघर जरिये सक्षम प्राधिकारी मुख्य पोस्ट आफिस झुंझुनू तहसील व जिला झुंझुनू (राज.) 
2.    उप-डाकपाल जरिये सक्षम प्राधिकारी, पोस्ट आफिस कार्यालय, उदयपुरवाटी तहसील उदयपुरवाटी जिला झुंझुनू (राज.)                    - विपक्षीगण

        परिवाद पत्र अन्तर्गत धारा 12 उपभोक्ता सरंक्षण अधिनियम 1986 

उपस्थित:-
1.    श्री विद्याधर महला, अधिवक्ता - परिवादिया की ओर से।
2.    श्री इन्दुभूषण शर्मा, अधिवक्ता -  विपक्षीगणकी ओर से।

                  - निर्णय -             दिनांक: 16.02.2016
परिवादिया ने यह परिवाद पत्र मंच के समक्ष पेष किया, जिसे दिनांक         05.08.2013 को संस्थित किया गया। 
  विद्धान अधिवक्ता परिवादिया ने परिवाद पत्र मे अंकित तथ्यों को उजागर करते हुए बहस के दौरान यह कथन किया है कि परिवादिया के पति ने विपक्षीगण द्वारा चलाई जा रही बीमा योजना सरल पोस्टल लाईफ इंष्योरेंस ग्राम सन्तोष     (सावधि बीमा) योजना के अन्तर्गत बीमा करवाया, जिसमें परिवादिया नोमिनी थी। इसलिये परिवादिया विपक्षीगण की उपभोक्ता है।
 विद्धान अधिवक्ता परिवादिया ने बहस के दौरान यह भी कथन किया है कि परिवादिया के पति की 50,000/-रूपये की बीमा पालिसी संख्या R/RJ/JD/EA/044820 दिनांक 05.08.05 को शुरू की गई। उक्त पालिसी के संबंध में 336/-रूपये मासिक प्रीमियम का भुगतान विपक्षीगण को किया जाता था। जिसकी परिपक्व तिथि        05.08.2018 थी। परिवादिया के पति की मृत्यु दिनांक 05.03.2011 को अचानक बुखार होकर इलाज के दौरान हो गई। परिवादिया द्वारा बीमा क्लेम हेतु क्लेम फार्म भरकर विपक्षीगण के द्वारा मांगे गये सभी दस्तावेजात पेष किये व बीमित राषि 50,000/- रूपये के भुगतान हेतु निवेदन किया। विपक्षीगण द्वारा दिनांक 27.12.2011 को परिवादिया के पति की बीमा के भुगतान के एवज में 26,971/-रूपये का चैक भेजा गया। जो विपक्षीगण की सेवा में कमी है।
अन्त में परिवादिया ने अपना परिवाद पत्र मय खर्चा स्वीकार कर विपक्षीगण से बीमा पालिसी की बीमित राषि 50,000/-रूपये व अन्य देय लाभ मय ब्याज के दिलाये जाने का निवेदन किया।   
विद्धान् अधिवक्ता विपक्षीगण बीमा कम्पनी ने अपने जवाब के अनुसार बहस के दौरान उपरोक्त बीमा पालिसी संख्या R/RJ/JD/EA/ 044820 परिवादिया के पति द्वारा लिया जाना तथा मासिक प्रीमियम 336/-रूपये प्रतिमाह होकर उक्त पालिसी       की परिपक्व तिथि 05.08.2018 होना स्वीकार करते हुयेे कथन किया है कि परिवादिया के पति ने मासिक किष्ते माह जनवरी,2011 तक ही जमा करवाई तथा माह फरवरी व मार्च, 2011 की किष्ते जमा नहीं करवाई। माह फरवरी की किष्त का ग्रेस पीरियड भी समाप्त हो जाने के कारण परिवादिया के पति की पालिसी परिवादिया के पति की मृत्यु से पूर्व ही लेप्स हो गई। डाकघर बीमा निधि के नियम 41 के अनुसार परिवादिया के पति द्वारा लेप्स पालिसी को अपने जीवनकाल में पुनः चालू नहीं करवाई गई, इसलिये उक्त पालिसी निष्क्रय थी। परिवादिया के पति की उक्त पालिसी के दिनांक         05.08.2005 से माह जनवरी,2011 तक कुल 66 किष्तों के अनुसार 336/-रूपये प्रति किष्त के हिसाब से 22,176/-रूपये जमा करवाये गये थे, जिस पर पालिसी की शर्तो व नियमानुसार उपार्जित बोनस राषि 4795/-रूपये, इस प्रकार  कुल 26,971/- रूपये का भुगतान परिवादिया को किया जा चुका है । नियमानुसार सम इन्ष्योर्ड राषि का भुगतान नहीं किया जाता है। इस प्रकार डाक विभाग द्वारा पालिसी की शर्तो एवं नियमानुसार देय राषि का भुगतान कर दिया गया है।
अन्त में विद्वान् अधिवक्ता विपक्षीगण बीमा कम्पनी ने परिवादिया का परिवाद पत्र मय खर्चा खारिज किये जाने का निवेदन किया। 
 उभयपक्ष की बहस सुनी गई। पत्रावली का ध्यानपूर्वक अवलोकन किया गया। 
  प्रस्तुत प्रकरण में यह तथ्य निर्विवादित उभरकर आये हैं कि परिवादिया के पति स्वः बनवारीलाल द्वारा ग्रामीण डाक जीवन बीमा पाॅलिसी संख्या R/RJ/JD/EA/ 044820  में वर्णित शर्तो के अनुसार 50,000/-रूपये  की पालिसी 60 वर्ष तक की आयु के लिये दिनांक 05.08.2005 को ली गई थी, जिसके अनुसार मासिक प्रीमियम राषि 336/-रूपये का भुगतान माह जुलाई, 2018 तक नियमित अदा किया जाना था। परिवादिया के पति की मृत्यु दिनांक 05.03.2011 को हो गई तथा उक्त पालिसी में परिवादिया श्रीमती संतरा देवी नोमिनी है।
प्रस्तुत प्रकरण के विवरण से यह स्पष्ट हुआ है कि परिवादिया के पति ने दिनांक 05.08.2005 से माह जनवरी, 2011 तक कुल 66 किष्तों के 336/-रूपये प्रतिमाह किष्त के हिसाब से 22,176/-रूपये जमा कराये थे। पालिसी की शर्तो के अनुसार उक्त जमा कराई गई राषि पर नियमानुसार उपार्जित बोनस राषि 4795/-रूपये, कुल 26,971/-रूपये का भुगतान विपक्षी द्वारा मृतक की पत्नी परिवादिया श्रीमती संतरा देवी को जरिये चैक दिनांक 27.12.2011 को किया जा चुका है। चैक की फोटो प्रति पत्रावली में संलग्न है।

परिवादिया के पति बनवारी लाल को पालिसी की शर्तो के अनुसार अपने जीवनकाल में 01 फरवरी,2011 से रियायत (ग्रेस पीरियड सहित) के आधार पर फरवरी महिने के अंतिम कार्य दिवस तक प्रीमियम राषि विपक्षी के यहां जमा कराई जानी थी। लेकिन परिवादिया के पति द्वारा माह फरवरी, 2011 की किष्त ग्रेस पीरियड की अवधि समाप्त होने के बावजूद जमा नहीं करवाने के कारण ग्रामीण डाक जीवन बीमा अनुबंध की शर्तो के अनुसार बीमाधारी के जीवनकाल में ही पालिसी निष्क्रिय व लेप्स हो गई। परिवादिया के पति ने अपने जीवनकाल में लेप्स पालिसी को पुनः चालु नहीं करवाया। इसलिये परिवादिया बीमित राषि 50,000/-रूपये व अन्य कोई दीगर राषि प्राप्त करने की अधिकारी नहीं है।
विपक्षीगण द्वारा पालिसी की शर्तो एवं नियमानुसार देय राषि 26,971/-रूपये का भुगतान परिवादिया श्रीमती संतरा देवी को कर दिया गया है। इस प्रकार विपक्षीगण का किसी प्रकार से कोई सेवा दोष होना प्रतीत नहीं होता है। 
अतः प्रकरण के तमाम तथ्यों व परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुये परिवादिया की ओर से प्रस्तुत परिवाद पत्र खारिज किये जाने योग्य है, जो एतद्द्वारा खारिज किया जाता है।
  पक्षकारान खर्चा मुकदमा अपना-अपना स्वंय वहन करेगें। 
  निर्णय आज दिनांक 16.02.2016 को लिखाया जाकर मंच द्धारा सुनाया गया। 

 

 

 

 

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