Uttar Pradesh

StateCommission

A/2082/2015

Sadan Lal - Complainant(s)

Versus

Post Office - Opp.Party(s)

Manoj Kumar

06 Sep 2017

ORDER

STATE CONSUMER DISPUTES REDRESSAL COMMISSION, UP
C-1 Vikrant Khand 1 (Near Shaheed Path), Gomti Nagar Lucknow-226010
 
First Appeal No. A/2082/2015
(Arisen out of Order Dated 27/08/2015 in Case No. c/80/2014 of District Kanpur Nagar)
 
1. Sadan Lal
Kanpur Nagar
...........Appellant(s)
Versus
1. Post Office
Kanpur Nagar
...........Respondent(s)
 
BEFORE: 
 HON'BLE MR. JUSTICE AKHTAR HUSAIN KHAN PRESIDENT
 
For the Appellant:
For the Respondent:
Dated : 06 Sep 2017
Final Order / Judgement

राज्‍य उपभोक्‍ता विवाद प्रतितोष आयोग, उ0प्र0, लखनऊ

अपील सं0- 2082/2015

                                   (मौखिक)

(जिला उपभोक्‍ता विवाद प्रतितोष फोरम, कानपुर नगर द्वारा परिवाद सं0- 80/2014 में पारित आदेश दि0 27.08.2015 के विरूद्ध)

सदन लाल पुत्र वंशू निवासी- प्‍लाट नं0 35, नई बस्‍ती, विजय नगर, कानपुर नगर, कानपुर।

                                                                          ………….. अपीलार्थी                                                    

बनाम

चीफ पोस्‍ट मास्‍टर, मुख्‍य डाकघर बड़ा चौराहा, कानपुर नगर, कानपुर।

                                                                                   .....……….. प्रत्‍यर्थी   

समक्ष:-                       

माननीय न्‍यायमूर्ति श्री अख्‍तर हुसैन खान, अध्‍यक्ष। 

अपीलार्थी की ओर से उपस्थित : श्री मनोज कुमार, विद्वान अधिवक्‍ता।

प्रत्‍यर्थी की ओर से उपस्थित :  डॉ0 उदयवीर सिंह, विद्वान अधिवक्‍ता।  

दिनांक:-  06.09.2017

 

माननीय न्‍यायमूर्ति श्री अख्‍तर हुसैन खान, अध्‍यक्ष  द्वारा उद्घोषित

                                                     

निर्णय

 

  परिवाद सं0- 80/2014 सदन लाल बनाम चीफ पोस्‍ट मास्‍टर, मुख्‍य डाकघर बड़ा चौराहा, कानपुर नगर में जिला फोरम, कानपुर नगर द्वारा पारित निर्णय और आदेश दि0 27.08.2015 के विरूद्ध यह अपील धारा 15 उपभोक्‍ता संरक्षण अधिनियम, 1986 के अंतर्गत आयोग के समक्ष प्रस्‍तुत की गई है।

  आक्षेपित निर्णय और आदेश के द्वारा जिला फोरम ने परिवाद एक हजार रूपया हर्जा सहित निरस्‍त कर दिया है, जिससे क्षुब्‍ध होकर परिवाद के परिवादी ने यह अपील प्रस्‍तुत किया है।

  अपील की सुनवाई के समय अपीलार्थी अपने विद्वान अधिवक्‍ता श्री मनोज कुमार के साथ उपस्थित आया। प्रत्‍यर्थी की ओर से उसके विद्वान अधिवक्‍ता डॉ0 उदयवीर सिंह उपस्थित आये हैं।

  मैंने उभयपक्ष के विद्वान अधिवक्‍तागण के तर्क को सुना है और आक्षेपित निर्णय और आदेश तथा पत्रावली का अवलोकन किया है।

  अपील के निर्णय हेतु संक्षिप्‍त सुसंगत तथ्‍य इस प्रकार हैं कि अपीलार्थी/परिवादी ने परिवाद जिला फोरम के समक्ष इस कथन के साथ प्रस्‍तुत किया है कि उसने दि0 17.12.2013 को एक रजिस्‍टर्ड पत्र राम बहादुर पुत्र स्‍व0 शेर बहादुर निवासी जी-2टी, क्‍वार्टर नं0- 382, अर्मापुर स्‍टेट, कानपुर नगर को मुख्‍य डाकघर बड़ा चौराहा, कानपुर से भेजा, परन्‍तु यह पत्र पावती राम बहादुर को डिलीवर नहीं किया गया और न ही उसे वापस किया गया। अपीलार्थी/परिवादी ने प्रत्‍यर्थी/विपक्षी से शिकायत की तो भ्रामक उत्‍तर दिया गया। इस प्रकार प्रत्‍यर्थी/विपक्षी ने सेवा में कमी की है। अत: अपीलार्थी/परिवादी ने परिवाद प्रस्‍तुत कर क्षतिपूर्ति व वाद व्‍यय की मांग की है। साथ ही क्षतिपूर्ति की धनराशि पर ब्‍याज भी मांगा है।

  विपक्षी की ओर से जिला फोरम के समक्ष लिखित कथन प्रस्‍तुत कर कहा गया है कि अपीलार्थी/परिवादी के कथित पत्र पर प्रापक एवं प्रे‍षक दोनों का पता अस्‍पष्‍ट और अपूर्ण था। इस कारण उसे प्रापक को डिलीवर नहीं किया जा सका और न ही अपीलार्थी/परिवादी को उसे वापस किया जा सका। अत: उक्‍त पता भारतीय डाक विभाग के नियम के अनुसार रिटर्न लेटर ऑफिस को दाखिल किया जा चुका है।

  जिला फोरम ने उभयपक्ष के अभिकथन एवं साक्ष्‍यों पर विचार करने के उपरांत यह निष्‍कर्ष निकाला है कि अपीलार्थी/परिवादी द्वारा प्रेषित रजिस्‍टर्ड पत्र पर प्रापक और प्रेषक दोनों का पता अस्‍पष्‍ट व अपूर्ण होने के कारण न तो यह पत्र प्रापक को डिलीवर किया जा सका है और न प्रेषक को वापस किया जा सका है। प्रत्‍यर्थी/विपक्षी ने सेवा में कोई त्रुटि नहीं की है। जिला फोरम ने यह भी निष्‍कर्ष निकाला है कि अपीलार्थी/परिवादी द्वारा प्रस्‍तुत परिवाद Frivolous and vexatious है। अत: जिला फोरम ने 1,000/-रू0 हर्जा सहित परिवाद खारिज कर दिया है।

  अपीलार्थी/परिवादी के विद्वान अधिवक्‍ता का तर्क है कि जिला फोरम द्वारा पारित आक्षेपित निर्णय और आदेश तथ्‍य एवं साक्ष्‍य के विरूद्ध है।

  प्रत्‍यर्थी/विपक्षी के विद्वान अधिवक्‍ता का तर्क है कि जिला फोरम का निर्णय उचित और विधि सम्‍मत है।

  मैंने उभयपक्ष के तर्क पर विचार किया है।

  अपील की पत्रावली में अपीलार्थी/परिवादी ने प्रत्‍यर्थी/विपक्षी के पत्र की प्रति प्रस्‍तुत की है, जो अपील की पत्रावली का पृष्‍ठ 29 है। इसमें स्‍पष्‍ट लिखा है कि अपीलार्थी/परिवादी का पत्र दि0 18.12.2013 को प्रापक को वितरण हेतु अर्मापुर डाकघर का पोस्‍टमैन लेकर गया तो पोस्‍टमैन ने प्रापक का पता नाट नोन टिप्‍पणी अंकित कर प्रेषक के लिए वापस कर दिया तब प्रेषक को वितरण हेतु एच0एन0एस0 नगर डाकघर का पोस्‍टमैन दि0 19.12.2013 को लेकर वितरण हेतु गया, परन्‍तु प्रेषक का पता अपूर्ण होने के कारण उसे डाक वितरित नहीं हो सकी। अत: पत्र नाट नोन टिप्‍पणी के साथ आर0एल0ओ0 लखनऊ को प्रेषित कर दिया गया है।

  उभयपक्ष के अभिकथन एवं उपलब्‍ध साक्ष्‍यों के आधार पर जिला फोरम का निर्णय अनुचित और विधि विरूद्ध नहीं कहा जा सकता है, परन्‍तु जिला फोरम ने जो 1,000/-रू0 का हर्जा अपीलार्थी/परिवादी पर लगाया है उसे समाप्‍त किया जाना उचित है।

  उपरोक्‍त निष्‍कर्ष के आधार पर अपील आंशिक रूप से स्‍वीकार की जाती है और जिला फोरम द्वारा अपीलार्थी/परिवादी पर लगाया गया 1,000/-रू0 हर्जा अपास्‍त किया जाता है।

  उभयपक्ष अपील में अपना-अपना वाद व्‍यय स्‍वयं वहन करेंगे।

 

(न्‍यायमूर्ति अख्‍तर हुसैन खान)                                           

                                      अध्‍यक्ष                         

 

शेर सिंह आशु0,

कोर्ट नं0-1

     

  

 
 
[HON'BLE MR. JUSTICE AKHTAR HUSAIN KHAN]
PRESIDENT

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