मौखिक
राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, उ0प्र0 लखनऊ
(जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष फोरम, प्रथम, लखनऊ द्वारा परिवाद संख्या 622 सन 2001 में पारित प्रश्नगत निर्णय एवं आदेश दिनांक 17.12.2003 के विरूद्ध)
अपील संख्या 233 सन 2004
राजेन्द्र कुमार अवस्थी पुत्र स्व0 श्री रहस बिहारी अवस्थी, निवासी 151-ए, नया सरदारी खेडा आलमबाग, लखनऊ एवं अन्य .......अपीलार्थी/प्रत्यर्थी
बनाम
चीफ पोस्ट मास्टर जी0पी0ओ0 हजरतगंज, लखनऊ एवं अन्य
......प्रत्यर्थी/परिवादी
समक्ष:-
1 मा0 श्री राम चरन चौधरी, पीठासीन सदस्य।
2 मा0 श्री गोवर्धन यादव, सदस्य।
अपीलार्थी की ओर से विद्वान अधिवक्ता - कोई नहीं ।
प्रत्यर्थी की ओर से विद्वान अधिवक्ता - डा0 उदय वीर सिंह ।
दिनांक: 06.10.2016
श्री राम चरन चौधरी, पीठासीन सदस्य द्वारा उदघोषित ।
निर्णय
प्रस्तुत अपील, जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष फोरम, प्रथम, लखनऊ द्वारा परिवाद संख्या 622 सन 2001 में पारित प्रश्नगत निर्णय एवं आदेश दिनांक 17.12.2003 के विरूद्ध प्रस्तुत की गयी है जिसके अंतर्गत जिला मंच द्वारा परिवादी के परिवाद को अपास्त किया गया है।
संक्षेप में, केस के तथ्य इस प्रकार हैं कि परिवादीगण ने एम0आई0एस0 योजना के अन्तर्गत विभिन्न तिथियों में क्रमश: 04.02.94 को 36000.00 रू0, परिवादीगण 1, 2 व 4 के नाम दिनांक 08.02.94 को 36000.00 रू0, परिवादीगण 1 व 3 के नाम दिनांक 08.02.94 को 30000.00 रू0, परिवादीगण 3 व 5 के नाम, दिनांक 23.02.94 को 36000.00 रू0, परिवादीगण 3 व 5 के नाम एवं दिनांक 17.06.94 को 42000.00 रू0, परिवादीगण 1 व 4 के नाम जमा की थी। फरवरी 2000 में भुगतान हेतु जब वह अपनी जमा धनराशि प्राप्त करने हेतु गए तो उन्हें बताया गया कि अभी रजिस्टर नहीं मिल रहा है। बाद में समाचार पत्रों में प्रकाशित होने पर अपीलार्थीगण को ज्ञात हुआ कि विपक्षीगण के कर्मचारी एवं एजेंट ने निवेशकों की धनराशि फर्जी तरीके से निकाल कर हडप ली है। परिवादीगण ने इस संबंध में मुकदमा अपराध संख्या 741/2000 के अन्तर्गत धारा 406,420,467,468, एवं 471 में अंकित कराया जो विचाराधीन है । अनेको पत्राचार के बाद खाता संख्या 2004670, 2004673, 2005135, 2004735 व 2004737 की धनराशि का भुगतान की गयी लेकिन उसमें एक माह का ब्याज कम लगाया गया। जिसे दिलाए जाने हेतु परिवाद जिला मंच में योजित किया गया ।
जिला मंच के समक्ष विपक्षी द्वारा यह अभिकथन किया गया कि परिवादीगण की खातें में जमा धनराशियों को फर्जी तरीके से आहरित कर लिए जाने और परिवादी की शिकायत पर उसकी विभागीय जांच करने पर तथ्यों को सही पाए जाने पर परिवादीगण को उनकी जमा धनराशियों की देय धनराशि विभागीय नियमानुसार देय ब्याज से भुगतान कर दी गयी जिसमें विपक्षीगण की सेवा में कोई त्रुटि नहीं है।
जिला मंच ने उभय पक्ष के साक्ष्य एवं अभिवचनों के आधार पर यह पाते हुए कि परिवादीगण को उनकी जमा धनराशि ब्याज सहित प्राप्त हो चुकी है, परिवादी का परिवाद खारिज कर दिया, जिससे क्षुब्ध होकर यह अपील योजित की गयी है।
पत्रावली के अवलोकन से विदित होता है कि अपीलार्थी की ओर से अपील योजित करने के पश्चात से कोई उपस्थित नहीं हो रहा है। हमने प्रत्यर्थी के विद्वान अधिवक्ता डा0 उदय वीर सिंह की बहस विस्तार से सुनी तथा पत्रावली का सम्यक अवलोकन किया।
केस के तथ्य एवं परिस्थिति के आधार पर हम यह पाते हैं कि जिला मंच द्वारा साक्ष्यों की पूर्ण विवेचना करते हुए विवेच्य निर्णय पारित है, जो कि विधिसम्मत है और उसमें हस्तक्षेप करने की कोई आवश्यकता नहीं है। तदनुसार अपील खारिज किए जाने योग्य है।
आदेश
प्रस्तुत अपील खारिज की जाती है।
पक्षकारान अपना-अपना अपील व्यय स्वयं वहन करेंगे।
(राम चरन चौधरी) (गोवर्धन यादव)
पीठासीन सदस्य सदस्य
कोर्ट-3
(S.K.Srivastav,PA)