राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, उ0प्र0, लखनऊ।
सुरक्षित
अपील सं0-1849/2012
(जिला उपभोक्ता फोरम, सीतापुर द्वारा परिवाद सं0-१२/२०११ में पारित निर्णय/आदेश दिनांक-३१/०७/२०१२ के विरूद्ध)
प्रभात कुमार उम्र लगभग ३२ वर्ष पुत्र हरि प्रसाद निवासी माधुरी निवास आदर्श नगर सेक्टर सीतापुर।
.............अपीलार्थी.
बनाम
- डाक अधीक्षक महोदय सीतापुर।
- पोस्ट मास्टर प्रधान डाकघर सीतापुर।
- चीफ पोस्ट मास्टर जनरल हजरतगंज लखनऊ।
- प्रवर डाक अधीक्षक आर0एम0एस0 गोरखपुर।
..............प्रत्यर्थीगण
समक्ष:-
- माननीय श्री राज कमल गुप्ता, पीठा0सदस्य।
- माननीय श्री महेश चन्द, सदस्य।
अपीलार्थी की ओर से उपस्थित : सुश्री तारा गुप्ता विद्वान
अधिवक्ता।
प्रत्यर्थी की ओर से उपस्थित : डा0 उदयवीर सिंह विद्वान
अधिवक्ता ।
दिनांक: 04/01/2018
माननीय श्री महेश चन्द, सदस्य द्वारा उदघोषित
निर्णय
प्रस्तुत अपील जिला उपभोक्ता फोरम, सीतापुर द्वारा परिवाद सं0-१२/२०११ में पारित निर्णय/आदेश दिनांक-३१/०७/२०१२ के विरूद्ध योजित की गयी है।
संक्षेप में विवाद के तथ्य इस प्रकार हैं कि अपीलकर्ता/परिवादी ने अपना आवेदन पत्र उ0प्र0 लोक सेवा आयोग इलाहाबाद को दिनांक ०५/१०/२०१० को स्पीड पोस्ट के माध्यम से प्रेषित किया और स्पीड पोस्ट पर रू0 ३४/- का डाक टिकट लगाकर पंजीकृत डाक के माध्यम से प्रेषित किया। यह डाक ४८ घण्टे के अन्तर्गत प्राप्तकर्ता को प्राप्त हो जाना चाहिए था और उक्त आवेदन पत्र पहुंचने की अंतिम तिथि दिनांक ११/१०/२०१० नियत थी। उक्त आवेदन पत्र के माध्यम से उसने सम्मिलित राज्य अधीनस्थ सेवा प्रारंभिक परीक्षा २००९ में भाग लेने हेतु आवेदन किया था किन्तु निर्धारित तिथि पर स्पीड पोस्ट न पहुंचने के कारण उसका प्रार्थना पत्र लोक सेवा आयोग द्वारा स्वीकार नहीं किया गया और वह परीक्षा में सम्मिलित होने से वंचित हुआ जिससे परिवादी का भविष्य अंधकार में हो गया। इसी से क्षुब्ध होकर परिवाद जिला मंच के समक्ष योजित किया गया।
उक्त परिवाद का प्रत्यर्थी की ओर से विरोध किया गया।
विद्वान जिला मंच द्वारा उभय पक्षों को सुनने एवं पत्रावली पर उपलब्ध अभिलेखों का परिशीलन करने के बाद निम्न आदेश पारित किया है-
‘’ परिवादी प्रभात कुमार का परिवाद पत्र विपक्षी डाक अधीक्षक आदि के विरूद्ध आंशिक रूप से आज्ञप्त किया जाता है तथा विपक्षी को निर्देश दिया जाता है कि वह निर्णय की प्रमाणित प्रति प्राप्त होने के ३० दिन के अन्दर विपक्षी परिवादी को ५०००/-(पांच हजार रूपये) क्षतिपूर्ति हेतु अदा करे। यदि विपक्षी नियत अवधि के अन्दर यह धनराशि परिवादी को अदा नहीं करता है तब परिवादी को अधिकार होगा कि वह फोरम के माध्यम से धनराशि को वसूल करवा सकता है। ‘’
उपरोक्त आक्षेपित आदेश से क्षुब्ध होकर यह अपील दायर की गयी है।
अपील में अभिकथन किया गया है कि विद्वान जिला मंच द्वारा अनुमन्य की गयी धनराशि क्षतिपूर्ति के रूप में बहुत ही कम है। विपक्षी की लापरवाही के कारण अपीलकर्ता मुख्य परीक्षा में भाग नहीं ले सका और उसका भविष्य अंधकारमय हो गया जिससे उसे सामाजिक एवं मानसिक आघात हुआ जिसकी क्षतिपूर्ति भविष्य में किया जाना संभव नहीं है। अपीलकर्ता ने परिवाद पत्र में मांगी गयी धनराशि ब्याज सहित दिए जाने की प्रार्थना की है।
अपीलकर्ता की अपील का प्रत्यर्थी डाक विभाग द्वारा विरोध किया गया है।
सुनवाई हेतु यह अपील पीठ के समक्ष प्रस्तुत हुई। अपीलकर्ता की ओर से विद्वान अधिवक्ता सुश्री तारा गुप्ता उपस्थित हुई। प्रत्यर्थी की ओर से विद्वान अधिवक्ता डा0 उदय वीर सिंह उपस्थित है। उभय पक्षों के तर्कों को सुना गया। पत्रावली पर उपलब्ध अभिलेखों का परिशीलन किया गया।
अपीलकर्ता के विद्वान अधिवक्ता ने जिला मंच के समक्ष प्रस्तुत किए गए परिवाद पत्र में उल्लिखित अभिकथनों की पुनरावृत्ति की और बलपूर्वक कहा कि प्रत्यर्थी की लापरवाही के कारण वह परीक्षा में सम्मिलित नहीं हो सका जिससे कारण उसका भविष्य अंधकारमय हो गया।
प्रत्यर्थी की ओर से विद्वान अधिवक्ता ने तर्क प्रस्तुत करते हुए कहा कि विद्वान जिला मंच ने प्रश्नगत आदेश पारित कर कोई त्रुटिनहीं की है। विद्वान अधिवक्ता ने तर्कप्रस्तुत करतेहुए कहा कि प्रत्यर्थी एक संविधीय संस्था है। पोस्ट आफिस अधिनियम १८९८ की धारा ०६ में निम्नलिखित प्राविधान है- Exemption from liability for loss, misdelivery, delay or damage.- The [Government] shall not incur any liability by reason of the loss, misdelivery or delay of, or damage to, any postal article in course of transmission by post, except in so far as such liability may in express terms be undertaken by the Central Government as hereinafter provided; and no officer of the Post Office shall incur any liability by reason of any such loss, misdelivery, delay or damage, unless he has caused the same fraudulently or by his willful act or default.
इसके अन्तर्गत किसी डाक का वितरण समय पर न होने, उसके खो जाने अथवा नष्ट हो जाने के कारण डाक घर पर अथवा उसके किसी कर्मचारी पर किसी प्रकार का कोई वाद नहीं चलाया जा सकता है, जबतक कि ऐसा किसी बुरी नियत अथवा धोंखाधड़ी के कारण न किया गया हो।
पत्रावली पर उपललब्ध अभिलेखों के परिशीलन से यह पीठ इस मत की है कि प्रत्यर्थी/परिवादी एक संविधीय संस्था है और उसे पोस्ट आफिस अधिनियम १८९८ के अन्तर्गत किसी डाक के वितरण अथवा खो जाने पर उसे किसी प्रकार के उत्तरदायित्व से मुक्ति का अधिकार प्राप्त है उस पर किसी प्रकार का कोई परिवाद अथवा दायित्व अधिरोपित नहीं किया जा सकता है। विद्वान जिला मंच ने प्रश्नगत आदेश पारित करके कोई त्रुटि नहीं की है। चूंकि प्रश्नगत आदेश के अन्तर्गत अधिरोपित रू0 ५०००/- की क्षतिपूर्ति के विरूद्ध अपीलकर्ता द्वारा किसी प्रकार की कोई अपील दायर नहीं की गयी है। अत: उक्त निर्णय प्रत्यर्थी केविरूद्ध अंतिम हो चुका है। अपीलकर्ता की अपील में कोई बल नहीं है। तदनुसार अपील निरस्त किए जाने योग्य है।
आदेश
अपील निरस्त की जाती है। जिला उपभोक्ता फोरम, सीतापुर द्वारा परिवाद सं0-१२/२०११ में पारित निर्णय/आदेश दिनांक-३१/०७/२०१२ की पुष्टि की जाती है ।
उभय पक्ष अपना-अपना वाद व्यय स्वयं वहन करेंगे।
उभय पक्षों को इस निर्णय की प्रमाणित प्रतिलिपि नियमानुसार नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाए।
(राज कमल गुप्ता) (महेश चन्द)
पीठा0सदस्य सदस्य
सत्येन्द्र, आशु0 कोर्ट नं0-5