राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, उ0प्र0 लखनऊ।
अपील संख्या : 3097/2001
(सुरक्षित)
(जिला उपभोक्ता फोरम, देवरिया द्वारा परिवाद संख्या-26/2001 में पारित निर्णय एवं आदेश दिनांक 28-11-2001 के विरूद्ध)
नीलम सिंह पत्नी महेन्द्र प्रताप सिंह ग्राम बटवा बुर्जग (ठिकड़ी) पोस्ट बढया बुर्जग जिला देवरिया।
अपीलार्थी/परिवादी
बनाम्
1- भारत संघ द्वारा सचिव भारतीय डाक विभाग, नई दिल्ली।
तामिला जरिए प्रवर अधीक्षक डाकघर देवरिया मण्डल देवरिया।
2- पोस्ट मास्टर प्रधान डाकघर देवरिया जिला देवरिया।
3- सहायक पोस्टमास्टर उपडाकघर बढया बुजुर्ग पोस्ट बढया बुजुर्ग जिला देवरिया।
प्रत्यर्थी/विपक्षीगण
समक्ष :-
1- मा0 श्री उदय शंकर अवस्थी, पीठासीन सदस्य।
2- मा0 श्रीमती बाल कुमारी, सदस्य।
उपस्थिति :
अपीलार्थी की ओर से उपस्थित- श्री बी0 के0 उपाध्याय।
प्रत्यर्थी की ओर से उपस्थित- डा0 उदयवीर सिंह।
दिनांक :19-09-2017
मा0 श्रीमती बाल कुमारी सदस्य द्वारा उद्घोषित निर्णय
परिवाद संख्या-26/2001 नीलम सिंह बनाम् पोस्ट मास्टर प्रधान डाकघर, देवरिया में जिला फोरम, देवरिया द्वारा पारित आक्षेपित निर्णय और आदेश दिनांक 28-11-2001 के विरूद्ध यह अपील उपरोक्त परिवाद के परिवादिनी नीलम सिंह पत्नी महेन्द्र प्रताप सिंह ग्राम बटवा बुर्जग (ठिकड़ी) पोस्ट बढया बुर्जग जिला देवरिया की ओर से धारा-15 उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के अनतर्गत इस आयोग के समक्ष प्रस्तुत की है।
आक्षेपित निर्णय और आदेश के द्वारा जिला फोरम ने परिवादिनी का परिवाद सव्यय निरस्त कर दिया है।
संक्षेप में इस केस के तथ्य इस प्रकार है कि परिवादिनी ने उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड, इलाहाबाद में अर्थशास्त्र प्रवक्ता क पद हेतु
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आवेदन पत्र दिया था, जिसका पंजीयन संख्या-131207 है तथा परिवादिनी का अनुक्रमांक 041303098 रहा है। परिवादिनी के लिखित परीक्षा हेतु तुलसीदास इण्टर कालेज गोरखपुर में दिनांक 16-12-2000 को समय एवं स्थान निर्धारित किया गया था, इसकी कोई जानकारी परिवादिनी को प्रतिपक्षीगण की लापरवाही से दिनांक 18-12-2000 के पूर्व नहीं हो सकी। जबकि परिवादिनी का प्रवेश पत्र उ0प्र0 माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड इलाहाबाद द्वारा दिनांक 29-11-2000 को जरिये रजिस्ट्री डाक द्वारा भेजागया जो दिनांक 18-12-2000 को मिला जिससे परिवादिनी को जानकारी हुई। विपक्षीगण की घोर लापरवाही के कारण परिवादिनी परीक्षा में सम्मिलित नहीं हो सकी जबकि परिवादिनीको पूर्ण विश्वास था कि यदि परिवादिनी परीक्षा में सम्मिलित हुई होती तो निश्चय ही उसको सफलता मिलती, लेकिन विपक्षीगण ने अपने दायित्वों का निर्वहन नहीं किया जिसके फलस्वरूप परिवादी वंचित रही। विपक्षीगण द्वारा घोर लापरवाही एवं सेवा में त्रुटि किया गया जिसकी वजह से परिवादिनी को मानसिक एवं आर्थिक क्षति हुई। इसलिए यह परिवाद योजित किया गया है।
विपक्षीगण ने वादोत्तर प्रस्तुत किया है जिसमें वाद निराधार एवं खारिज होने योग्य बताया है। विपक्षीगण ने अपने कथन से यह स्पष्ट किया है कि यह पंजीकृत पत्र दिनांक 04-12-2000 को प्रस्तुत हुआ, तथा उसी दिन बिना किसी विलम्ब के प्रधान डाकघर देवरिया द्वारा शाखा डाकघर बढ़या बुजुर्ग को प्रेषित कर दिया गया। उक्त कथनानुसार शाखा डाकघरद्वारा बढ़या बुजुर्ग टोला ठीकरी को दिनांक 04-12-2000 को ही ग्राम में गया परन्तु प्रापक से मुलाकात नहीं हो सकी जिसके कारण पंजीकृत पत्र डाक का वितरण नहीं हो सका।
विपक्षीगण ने अपने जवाब देही के पैरा-4 में कहा है कि दिनांक 05-12-2000 से दिनांक 17-12-2000 तक डाकविभाग के कर्मचारीयों की हड़ताल आकस्मिक रूप से पूरे देश में हो गयी जिससे डाक सेवा भी प्रभावित हुई ऐसी स्थिति में जानबूझकर लापरवाही नहीं की गयी है। इसी आधार पर वाद निरस्त होने योग्य है। इसके साथ ही यह भी कथन किया गया कि पंजीकृत पत्र वादिनी को नहीं मिल सकी जिसकी जिम्मेदारी प्रतिपक्षीगण की नहीं है। अत: परिवादिनी विपक्षीगण से क्षतिपूर्तिपाने की अधिकारिणी नहीं है। अत: परिवाद निरस्त किया जाए।
अपीलार्थी की ओर से विद्धान अधिवक्ता श्री बी0 के0 उपाध्याय उपस्थित। प्रत्यर्थी की ओर से विद्धान अधिवक्ता डा0 उदयवीर सिंह उपस्थित।
हमने उभयपक्ष के विद्धान अधिवक्तागण के तर्क को सुना है तथा आक्षेपित निर्णय और आदेश एवं पत्रावली का अवलोकन किया है।
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अपीलार्थी के विद्धान अधिवक्ता का तर्क है कि जिला फोरम ने साक्ष्य तथा तथ्यों का सही आंकलन न करके विधि विरूद्ध आदेश पारित किया है। अपीलार्थी के अधिवक्ता का तर्क है कि परिवादिनी/अपीलार्थी का पंजीयन संख्या-131207 है तथा अनुक्रमांक-041303098 है के अनुसार दिनांक 16-12-2000 को गोरखपुर तुलसीदास इण्टर कालेज, गोरखपुर में लिखित परीक्षा में 12 बजे सम्मिलित होना था जो 2.00 बजे तक परीक्षा देना था। उक्त पंजीकृत पत्र विपक्षी संख्या-1 को दिनांक 04-12-2000 को समय से मिल गया था, लेकिन विपक्षी संख्या-3 द्वारा दिनांक 18-12-2000 को उक्त पत्र का वितरण कराया गया। जबकि परीक्षा दिनांक 16-12-2000 को थी लेकिन परीक्षा समय बीतने के बाद यह पंजीकृत पत्र विपक्षी संख्या-3 के कर्मचारी डाकिया की घोर सेवा में कमी है। अपीलार्थी/परिवादिनी विपक्षीगण की लापरवाही के कारण लिखित परीक्षा में प्रवेश पत्रके अभाव में सम्मिलित नहीं हो सकी। विपक्षी संख्या-2 ने लापरवाही बरतते हुए उक्त पत्र परिवादिनी/अपीलार्थी को नहीं दिया अत: अपील स्वीकार कर जिला फोरम के आदेश को निरस्त किया जाए।
प्रत्यर्थी/विपक्षी के विद्धान अधिवक्ता का तर्क है कि जिला फोरम ने सभी तथ्यों पर विचार कर उचित आदेश पारित किया है। विपक्षी संख्या-3 उसी दिन दिनांक 04-12-2000 को ही पत्र लेकर ग्राम बढ़या बुजुर्ग टाल ठिकडी में गया था परन्तु प्रापक से मुलाकात नही हो सकी इसलिए पंजीकृत पत्र वितरण नहीं हो सका तथा दिनांक 05-12-2000 से दिनांक 17-12-2000 तक डाक विभाग के कर्मचारियों का आकस्मिक रूप से पूरे देश में हड़ताल हो गयी जिससे डाक सेवायें प्रभावित रहीं। प्रत्यर्थीगण द्वारा जानबूझकर कोई लापरवाही नहीं की गयी है तथा भारतीय डाक अधिनियम 1898 की धारा-6 के तहत सेवा में कमी नहीं की गयी है अत: अपील निरस्त की जाए।
पत्रावली का परिशीलन यह दर्शाता है कि अपीलार्थी द्वारा विपक्षी/प्रत्यर्थी को यह तथ्य स्वीकार है कि उक्त पंजीकृत डाक दिनांक 04-12-2000 को ही विपक्षी को प्राप्त हो गयी थी तथा विपक्षी का कथन कि उक्त पत्र लेकर डाकिया प्राप्तकर्ता के उक्त पते पर दिनांक 04-12-2000 को गया था मगर प्राप्तकर्ता के न मिलने के कारण वितरण नहीं हो सकी और दिनांक 05-12-2000 से दिनांक 17-12-2000 तक आकस्मिक हड़ताल देशव्यापी हो गयी इसलिए उक्त पत्र दिनांक 18-12-2000 को ही वितरण हुई इसमें विपक्षी/प्रत्यर्थी ने जानबूझकर कोई लापरवाही नहीं की गयी है तथा भारतीय डाक अधिनियम-1898 की धारा-6 के अनुसार डाक विभाग के संबंधित व्यक्ति के द्वारा जानबूझकर द्धेष की भावना से कोई त्रुटि नहीं की गयी है। अत: उन्हें दोषी नहीं माना जा सकता है क्योंकि उपरोक्त के अनुसार अपीलार्थी/विपक्षीगण द्वारा जानबूझकर द्धेषपूर्ण व्यवहार के द्वारा उक्तपत्र वितरण में विलम्ब नहीं किया गया है अत: जिला फोरम ने विस्तृत
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विवरणके बाद विधि अनुसार आदेश पारित किया है। जिसमें किसी हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है। तद्नुसार अपील निरस्त किये जाने योग्य है।
आदेश
अपील निरस्त की जाती है। जिला उपभोक्ता फोरम, देवरिया द्वारा परिवाद संख्या-26/2001 में पारित निर्णय एवं आदेश दिनांक 28-11-2001 की पुष्टि की जाती है।
उभयपक्ष अपना-अपना अपीलीय व्यय स्वयं वहन करेंगे।
(उदय शंकर अवस्थी) ( बाल कुमारी )
पीठासीन सदस्य सदस्य
कोर्ट नं0-2 प्रदीप मिश्रा, आशु0