Uttar Pradesh

StateCommission

A/2661/2015

Mujahid - Complainant(s)

Versus

Paschimanchal Vidyut Vitran Nigam Ltd - Opp.Party(s)

S.P. Pandey

18 Sep 2019

ORDER

STATE CONSUMER DISPUTES REDRESSAL COMMISSION, UP
C-1 Vikrant Khand 1 (Near Shaheed Path), Gomti Nagar Lucknow-226010
 
First Appeal No. A/2661/2015
( Date of Filing : 28 Dec 2015 )
(Arisen out of Order Dated 28/11/2015 in Case No. C/22/2015 of District Shambhal)
 
1. Mujahid
Shambhal
...........Appellant(s)
Versus
1. Paschimanchal Vidyut Vitran Nigam Ltd
Shambhal
...........Respondent(s)
 
BEFORE: 
 HON'BLE MR. Udai Shanker Awasthi PRESIDING MEMBER
 HON'BLE MR. Gobardhan Yadav MEMBER
 
For the Appellant:
For the Respondent:
Dated : 18 Sep 2019
Final Order / Judgement

सुरक्षित

 

राज्‍य उपभोक्‍ता विवाद प्रतितोष आयोग, उ0प्र0, लखनऊ।

अपील संख्‍या-2661/2015

(जिला मंच, सम्‍भल द्वारा परिवाद संख्‍या-22/2015 में प‍ारित प्रश्‍नगत निर्णय एवं आदेश दिनांक 28.11.2015 के विरूद्ध)

 

मुजाहिद पुत्र वाहिद अली, निवासी-मोहल्‍ला बदांयू दरवाजा, सिटि व जिला सम्‍भल।

 

                                   अपीलार्थी/परिवादी

 

बनाम

 

पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लि0, द्वारा अधिशासी अभियन्‍ता, विद्युत वितरण खण्‍ड लि0, सम्‍भल।

 प्रत्‍यर्थी/विपक्षी

समक्ष:-

1. माननीय श्री उदय शंकर अवस्‍थी, पीठासीन सदस्‍य।

2. माननीय श्री गोवर्द्धन यादव, सदस्‍य।

अपीलार्थी की ओर से     : श्री एस0पी0 पाण्‍डेय, विद्वान अधिवक्‍ता।

प्रत्‍यर्थीगण की ओर से    : कोई नहीं।

 

दिनांक : 18.10.2019

 

मा0 श्री उदय शंकर अवस्‍थी, पीठासीन सदस्‍य द्वारा उदघोषित

निर्णय

 

प्रस्‍तुत अपील, जिला मंच, सम्‍भल द्वारा परिवाद संख्‍या-22/2015 में प‍ारित प्रश्‍नगत निर्णय एवं आदेश दिनांक 28.11.2015 के विरूद्ध योजित की गयी है।

संक्षेप में तथ्‍य इस प्रकार हैं कि अपीलकर्ता/परिवादी के कथनानुसार परिवादी के पिता श्री वाहिद अली को घरेलू विद्युत कनेक्‍शन संख्‍या-5785/124543 एक किलोवाट का स्‍वीकृत किया गया था। परिवादी के पिता उक्‍त विद्युत कनेक्‍शन के संबंध में विद्युत बिलों का भुगतान नियमानुसार कर रहे थे। प्रत्‍यर्थी द्वारा विद्युत मीटर में आई रीडिंग के अनुसार विद्युत बिल जारी न करके फर्जी बकाया दर्शाकर दिनांक 25.03.2010 को विद्युत कनेक्‍शन विच्‍छेदित कर दिया। परिवादी के पिता ने अपने जीवन-काल में कई बार प्रत्‍यर्थी से इस आशय का अनुरोध किया कि उसका विद्युत कनेक्‍शन दिनांक 25.03.2010 से विच्‍छेदित है, इसलिए दिनांक 25.03.2010 से पूर्व का बकाया के विषय में कार्यालय ज्ञापन जारी किया जाए, किंतु प्रत्‍यर्थी द्वारा फर्जी विद्युत बिल प्रेषित किये गये। अंतत: अपीलकर्ता/परिवादी के पिता श्री वाहिद अली की दिनांक 25.12.2012 को मृत्‍यु हो गयी। परिवादी के पिता की मृत्‍यु के उपरान्‍त परिवादी ने प्रत्‍यर्थी के अधिशासी अभियन्‍ता से इस आशय का अनुरोध किया कि प्रश्‍नगत विद्युत कनेक्‍शन के संबंध में दिनांक 25.03.2010 से पूर्व के बकाये का कार्यालय ज्ञापन/अंतिम बिल जारी किया जाए तो अधिशासी अभियन्‍ता ने अपने अधीनस्‍थ उप खण्‍ड अधिकारी विद्युत वितरण उप खण्‍ड प्रथम सम्‍भल को परिवादी के मामलें का निस्‍तारण करने का निर्देश दिया, जिसके अनुक्रम में उप खण्‍ड अधिकारी ने एक कार्यालय ज्ञापन दिनांकित 05.03.2014 जारी करके 1494/- रूपये जमा करने के निर्देश दिये, जो कि परिवादी ने दिनांक 04.08.2014 को प्रत्‍यर्थी के कार्यालय में जमा कराकर रसीद प्राप्‍त की। परिवादी द्वारा अंतिम बिल में वर्णित धनराशि जमा करने के उपरान्‍त प्रत्‍यर्थी का दायित्‍व था कि परिवादी के पिता से संबंधित लेजर को पूर्णतया बन्‍द कर देते तथा प्रश्‍नगत बिल दिनांकित 13.10.2014 जारी नहीं करते, किंतु प्रत्‍यर्थी द्वारा परिवादी के नाम ज्ञापन एवं फर्जी बिल निरन्‍तर प्रेषित किये जा रहे हैं। परिवादी प्रत्‍यर्थी के अशिशासी अभियन्‍ता से दिनांक 20.01.2015 को मिला तथा प्रत्‍यर्थी से अवगत कराया, किंतु कोई कार्यवाही नहीं की गयी। अत: परिवाद जिला मंच के समक्ष विद्युत बिल दिनांकित 17.10.2014 को निरस्‍त किये जाने तथा प्रश्‍नगत विद्युत कनेक्‍शन के संबंध में परिवादी को भविष्‍य में कोई विद्युत बिल जारी न किये जाने तथा क्षतिपूर्ति की अदायगी हेतु योजित किया गया।

प्रत्‍यर्थी द्वारा प्रतिवाद पत्र जिला मंच के समक्ष योजित किया गया। प्रत्‍यर्थी के कथनानुसार गलत कथनों के आधार पर परिवाद योजित किया गया है। प्रत्‍यर्थी का यह भी कथन है कि यद्यपि परिवादी ने उसके पिता द्वारा विद्युत बिलों का भुगतान नियमानुसार किया जाना अभिकथित किया है, किंतु भुगतान की कोई रसीद दाखिल नहीं की गयी है। प्रत्‍यर्थी के कथनानुसार प्रश्‍नगत विद्युत कनेक्‍शन दिनांक 25.03.2010 को विच्‍छेदित नहीं किया गया। परिवादी द्वारा प्रस्‍तुत दिनांक 05.03.2014 का कार्यालय ज्ञापन फर्जी है। परिवादी ने फर्जी ज्ञापन दिखाकर कर्मचारियों को गुमराह करके 1494/- रूपये की रसीद दिनांक 04.08.2014 को कटवाई। परिवादी पर विद्युत मूल्‍य का 69,894/- रूपये बकाया है, इस राशि को हड़पने के उद्देश्‍य से परिवाद जिला मंच में योजित किया गया है।

जिला मंच द्वारा पत्रावली पर उपलब्‍ध साक्ष्‍य के परिशीलन के उपरांत परिवाद प्रश्‍नगत निर्णय द्वारा निरस्‍त कर दिया गया है।

इस निर्णय एवं आदेश से क्षुब्‍ध होकर यह अपील योजित की गयी है।

हमने अपीलकर्ता के विद्वान अधिवक्‍ता श्री एस0पी0 पाण्‍डेय के तर्क सुने। प्रत्‍यर्थी की ओर से तर्क प्रस्‍तुत करने हेतु कोई उपस्थित नहीं हुआ।

अपीलकर्ता के विद्वान अधिवक्‍ता द्वारा यह तर्क प्रस्‍तुत किया गया कि प्रश्‍नगत विद्युत कनेक्‍शन जो परिवादी के पिता के नाम स्‍वीकृत था, के संबंध में गलत विद्युत बिल लगातार भेजे जा रहे थे। दिनांक 25.03.2010 को प्रश्‍नगत विद्युत कनेक्‍शन काट दिया गया। परिवादी के पिता द्वारा दिनांक 25.03.2010 से पूर्व बिलों का विवरण मांगा गया, किंतु कोई कार्यवाही नहीं की गयी। पिता की मृत्‍यु के उपरांत परिवादी ने अधिशासी अभियन्‍ता से प्रश्‍नगत विद्युत कनेक्‍शन के संबंध में अंतिम बिल प्रस्‍तुत करते हुए कार्यालय ज्ञापन जारी किये जाने का अनुरोध किया। तब कार्यालय ज्ञापन दिनांकित 05.03.2014 को 1494/- रूपये का जारी किया गया। यह धनराशि परिवादी द्वारा जमा की गयी, इसके बावजूद परिवादी को फर्जी विद्युत बिल भेजे जाते रहे।

पत्रावली के अवलोकन से यह विदित होता है कि प्रत्‍यर्थी का यह स्‍पष्‍ट अभिकथन है कि प्रश्‍नगत विद्युत कनेक्‍शन के संबंध में विद्युत देयों का भुगतान न किये जाने के कारण 69,894/- रूपये का बिल भेजा गया। परिवादी ने प्रश्‍नगत विद्युत कनेक्‍शन के संबंध में उसके पिता द्वारा नियमित रूप से भुगतान किया जाना बताया है, किंतु भुगतान की कोई रसीद परिवादी द्वारा दाखिल नहीं की गयी है। प्रत्‍यर्थी का यह भी कथन है कि प्रश्‍नगत विद्युत कनेक्‍शन स्‍थायी रूप से विच्‍छेदित नहीं किया गया। ऐसी स्थिति में प्रश्‍नगत विद्युत कनेक्‍शन के संदर्भ में अंतिम बिल प्राप्‍त किये जाने का कोई औचित्‍य नहीं था। परिवादी द्वारा अंतिम बिल के संदर्भ में फर्जी कार्यालय ज्ञापन प्राप्‍त किया गया और इस ज्ञापन के आधार पर कर्मचारियों को गुमराह करके 1494/- रूपये की धनराशि जमा करायी गयी है। उल्‍लेखनीय है कि जिला मंच के समक्ष परिवादी ने उसके पिता द्वारा जमा किये गये विद्युत बिलों से संबंधित कोई साक्ष्‍य प्रस्‍तुत नहीं की है। कथित फर्जी बिलों के संबंध में किसी स्‍तर पर कोई शिकायत किये जाने से संबंधी कोई साक्ष्‍य भी जिला मंच के समक्ष प्रस्‍तुत नहीं की है। जिला मंच के समक्ष प्रश्‍नगत विद्युत कनेक्‍शन के स्‍थायी रूप से विच्‍छेदित किये जाने के संबंध में भी कोई साक्ष्‍य प्रस्‍तुत नहीं की है। ऐसी परिस्थिति में प्रत्‍यर्थी का यह कथन स्‍वीकार किये जाने योग्‍य है कि स्‍थायी रूप से विद्युत कनेक्‍शन विच्‍छेदित किये बिना प्रश्‍नगत विद्युत कनेक्‍शन का अंतिम बिल प्राप्‍त नहीं किया जा सकता। प्रश्‍नगत निर्णय के अवलोकन से यह विदित होता है कि जिला मंच द्वारा तर्कसंगत आधारों पर प्रश्‍नगत निर्णय पारित किया गया है। अपील मे कोई बल नहीं है। अपील तदनुसार निरस्‍त किये जाने योग्‍य है।

आदेश

 

प्रस्‍तुत अपील निरस्‍त की जाती है।

उभय पक्ष प्रस्‍तुत अपील का व्‍यय स्‍वंय अपना-अपना वहन करेंगे।

उभय पक्ष को इस निर्णय एवं आदेश की सत्‍यप्रतिलिपि नियमानुसार उपलब्‍ध करा दी जाये।

                   

 

 

 

(उदय शंकर अवस्‍थी)                        (गोवर्द्धन यादव)

पीठासीन सदस्‍य                                सदस्‍य

 

 

 

लक्ष्‍मन, आशु0, कोर्ट-2     

 
 
[HON'BLE MR. Udai Shanker Awasthi]
PRESIDING MEMBER
 
 
[HON'BLE MR. Gobardhan Yadav]
MEMBER
 

Consumer Court Lawyer

Best Law Firm for all your Consumer Court related cases.

Bhanu Pratap

Featured Recomended
Highly recommended!
5.0 (615)

Bhanu Pratap

Featured Recomended
Highly recommended!

Experties

Consumer Court | Cheque Bounce | Civil Cases | Criminal Cases | Matrimonial Disputes

Phone Number

7982270319

Dedicated team of best lawyers for all your legal queries. Our lawyers can help you for you Consumer Court related cases at very affordable fee.