सुरक्षित
राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, उ0प्र0 लखनऊ
(जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष फोरम, महोबा द्वारा परिवाद संख्या 136/2012 में पारित प्रश्नगत निर्णय एवं आदेश दिनांक 20.07.2013 के विरूद्ध)
अपील संख्या 1980 सन 13
उप डाकपाल, डाकघर चरखारी जिला महोबा एवं अन्य ।
.......अपीलार्थी/प्रत्यर्थी
-बनाम-
परीक्षित पुत्र श्री विश्वनाथ निवासी ग्राम सालत, तहसील चरखारी जिला महोबा
. .........प्रत्यर्थी/परिवादी
समक्ष:-
मा0 श्री उदय शंकर अवस्थी, पीठासीन सदस्य।
मा0 श्री गोवर्धन यादव, सदस्य।
अपीलार्थी की ओर से विद्वान अधिवक्ता - डा0 उदयवीर सिंह के सहयोगी
श्री कृष्ण पाठक।
प्रत्यर्थी स्वयं - श्री परीक्षित ।
दिनांक:-
श्री गोवर्धन यादव, सदस्य द्वारा उद्घोषित
निर्णय
प्रस्तुत अपील, जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष फोरम, महोबा द्वारा परिवाद संख्या 136/2012 में पारित प्रश्नगत निर्णय एवं आदेश दिनांक 20.07.2013 के विरूद्ध प्रस्तुत की गयी है ।
संक्षेप में, प्रकरण के आवश्यक तथ्य इस प्रकार हैं कि परिवादी ने राजकीय सेवाओं विकलांग जन के लिए चिन्हित रिक्त चतुर्थ श्रेणी के पद पर अपना आवेदन दिनांक 25.07.2012 को पंजीकृत डाक से भेजा था। निदेशक समाज कल्याण उ0प्र0 द्वारा साक्षात्कार हेतु दिनांक 11.08.2012 को उपस्थित होने हेतु परिवादी को साक्षात्कार पत्र दिनांक 31.07.2012 को भेजा जो डाक विभाग की लापरवाही के कारण परिवादी को दिनांक 19.08.2012 को सायंकाल 5.00 बजे प्राप्त हुआ जिसके कारण परिवादी उक्त साक्षात्कार में उपस्थित होने तथा नौकरी प्राप्त करने से वंचित रह गया, अत: परिवादी ने क्षतिपूर्ति हेतु जिला मंच के समक्ष परिवाद योजित किया।
विपक्षीगण की ओर से अपना जबावदावा प्रस्तुत कर उल्लिखित किया गया कि परिवाद गलत तथ्यों पर दाखिल किया गया तथा गलत पक्षकार बनाए गए हैं। प्रश्नगत डाक दिनांक 04.08.2012 को वितरित कर दी गयी थी। अज्ञात कारणो से प्रेरित होकर काल्पनिक आधारों पर परिवादी ने यह परिवाद योजित किया है।
जिला मंच ने उभय पक्ष के साक्ष्य एवं अभिवचनों के आधार पर निम्न आदेश पारित किया :-
'' परिवादी का परिवाद खिलाफ विपक्षीगण 1 ता 3 स्वीकार किया जाता है। विपक्षीगण 1 ता 3 को आदेशित किया जाता है कि वे परिवादी को इस निर्णय के अंदर एक माह मानसिक कष्ट के एवज में 2000.00रू0 तथा वाद व्यय के रूप में 1000.00 रू0 प्राप्त कराऐं। अन्यथा परिवादी विपक्षीगण 1 ता 3 से उपरोक्त धनराशि पर 09 प्रतिशत सालाना की दर से प्राप्त ब्याज भी पाने का अधिकारी होगा । ''
उक्त आदेश से क्षुब्ध होकर प्रस्तुत अपील योजित की गयी है।
अपील के आधारों में कहा गया है कि जिला मंच का प्रश्नगत निर्णय विधिपूर्ण नहीं है तथा सम्पूर्ण तथ्यों को संज्ञान में लिए बिना प्रश्नगत निर्णय पारित किया गया है जो अपास्त किए जाने योग्य है।
हमने अपीलार्थी के विद्वान अधिवक्ता डा0 उदयवीर सिंह के सहयोगी श्री कृष्ण पाठक तथा प्रत्यर्थी श्री परीक्षित के तर्क विस्तार पूर्वक सुने एवं पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का सम्यक अवलोकन किया।
पत्रावली के अवलोकन से स्पष्ट होता है कि परिवादी ने राजकीय सेवाओं विकलांग जन के लिए चिन्हित रिक्त चतुर्थ श्रेणी के पद पर अपना आवेदन दिनांक 25.07.2012 को पंजीकृत डाक से भेजा था। निदेशक समाज कल्याण उ0प्र0 द्वारा साक्षात्कार हेतु दिनांक 11.08.2012 को उपस्थित होने हेतु परिवादी को साक्षात्कार पत्र दिनांक 31.07.2012 को भेजा जो डाक विभाग की लापरवाही के कारण परिवादी को दिनांक 19.08.2012 को सायंकाल 5.00 बजे प्राप्त हुआ जिसके कारण परिवादी उक्त साक्षात्कार में उपस्थित होने तथा नौकरी प्राप्त करने से वंचित रह गया जबकि विपक्षीगण की ओर से उल्लिखित किया गया है कि परिवाद गलत तथ्यों पर दाखिल किया गया तथा गलत पक्षकार बनाए गए हैं। प्रश्नगत डाक दिनांक 04.08.2012 को वितरित कर दी गयी थी। अज्ञात कारणो से प्रेरित होकर काल्पनिक आधारों पर परिवादी ने यह परिवाद योजित किया है।
बहस के दौरान अपीलार्थी के विद्वान अधिवक्ता द्वारा यह अवगत कराया गया कि डाकघर द्वारा दी गयी सेवायें मात्र Statutory and there is no contractual liability हैं। उनका यह भी तर्क है कि समान्यतया पंजीकृत पत्र को एक स्थान से उनके गन्तव्य तक एक सप्ताह का समय लगता है। अपीलार्थी द्वारा प्रश्नगत प्रपत्र गन्तब्य तक पहुंचा दिया था ऐसी स्थिति में अपीलार्थी की ओर से कोई सेवा में कमी नहीं की गयी है। अपीलार्थी के विद्वान अधिवक्ता का यह भी तर्क है कि प्रश्नगत प्रकरण इण्डियन पोस्ट आफिस एक्ट की धारा-06 से बाधित है, जो निम्नवत् अंकित है :-
Section 6 of the Indian Post Office Act. 1989 reads as under :
“6, Exemption from liability for loss, misdelivery, delay or damage - The Government shall not incur any liability by reason of the loss, misdelivery or delay of or damage to, any postal article in course of transmission by post, except insofar as such liability may in express terms be undertaken by the Central Government as hereinafter provided and no officer of the Post Office shall incur any liability by reason of any such loss, misdelivery, delay or damage, unless he has caused the same fraudulently or by his willful act or default.”
अपीलार्थी के विद्वान अधिवक्ता ने अपने तर्क के समर्थन में मा0 राष्ट्रीय आयोग नई दिल्ली द्वारा IV (2017) CPJ 10 (NC) MANAGER, SPEED POST &ORS VS BHANWAR LAL GORA में पारित विधि व्यवस्था को सन्दर्भित किया है।
उपरोक्त विश्लेषण के आधार पर पीठ इस निष्कर्ष पर पहुँचती है कि भारतीय डाक अधिनियम की धारा-06 एवं माननीय राष्ट्रीय आयोग के द्वारा अवधारित विधि व्यवस्था के आलोक में जिला मंच द्वारा पारित प्रश्नगत निर्णय एवं आदेश विधि संगत एवं न्यायोचित नहीं है। फलस्वरूप अपील स्वीकार करते हुए जिला मंच का प्रश्नगत निर्णय एवं आदेश अपास्त होने योग्य है।
आदेश
प्रस्तुत अपील स्वीकार करते हुए जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष फोरम, महोबा द्वारा परिवाद संख्या 136/2012 में पारित प्रश्नगत निर्णय एवं आदेश दिनांक 20.07.2013 निरस्त किया जाता है।
उभय पक्ष इस अपील का अपना अपना व्यय स्वयं वहन करेंगे।
(उदय शंकर अवस्थी) (गोवर्धन यादव)
पीठासीन सदस्य सदस्य
कोर्ट-5
(S.K.Srivastav,PA)