Uttar Pradesh

Chanduali

CC/14/2013

Chandrakala Devi - Complainant(s)

Versus

Oriental Ins.co.LTD - Opp.Party(s)

Dhirendra Pratap

09 Aug 2016

ORDER

District Consumer Disputes Redressal Forum, Chanduali
Final Order
 
Complaint Case No. CC/14/2013
 
1. Chandrakala Devi
vill-akodva p0-rampurkla Chandauli
Chandauli
UP
...........Complainant(s)
Versus
1. Oriental Ins.co.LTD
Hjarathganj Lucknow
............Opp.Party(s)
 
BEFORE: 
 HON'BLE MR. JUSTICE Ramjeet Singh Yadav PRESIDENT
 HON'BLE MRS. Shashi Yadav MEMBER
 
For the Complainant:
For the Opp. Party:
Dated : 09 Aug 2016
Final Order / Judgement

न्यायालय जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष फोरम, चन्दौली।
परिवाद संख्या 14                                सन् 2013ई0
चन्द्रकलॉ देवी पत्नी स्व0 अमरनाथ निवासी अकोढवा पो0 रामपुर कलॉं जिला चन्दौली।
                                      ...........परिवादिनी                                                                                                                                    बनाम
1-मण्डलीय प्रबन्धक दि ओरियेण्टल इश्योरेंस कम्पनी लि0 मण्डलीय कार्यालय जीवन भवन फेस-1 तृतीय तल पो0बा0नं0 9743 हजरतगंज लखनऊ 226001
2-जिलाधिकारी चन्दौली।
                                            .............................विपक्षीगण
उपस्थितिः-
 रामजीत सिंह यादव, अध्यक्ष
 शशी यादव, सदस्या
                               निर्णय
द्वारा श्री रामजीत सिंह यादव,अध्यक्ष
1-    परिवादिनी ने यह परिवाद विपक्षीगण से किसान दुर्घटना बीमा राशि रू0 100000/-तथा मानसिक एवं शारीरिक क्षति व वाद व्यय हेतु रू0 50000/-कुल रू0 150000/- दिलाये  जाने हेतु प्रस्तुत किया है।
2-    परिवादिनी ने संक्षेप में कथन किया है कि परिवादिनी उपरोक्त पते की स्थायी निवासिनी है। परिवादिनी के पति स्व0 अमरनाथ पुत्र स्व0 हरीदास पेशे से किसान थे और किसान दुर्घटना बीमा योजना के अर्न्तगत आते है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश के समस्त किसानों का सन् 2009-2010 तक के लिए किसान बीमा दुर्घटना योजना के अर्न्तगत रू0 100000/- का बीमा विपक्षी संख्या 1 से  कराया था। परिवादिनी के पति स्व0 अमरनाथ की मृत्यु दिनांक 29-11-2010 को वाहन दुर्घटना में हो गयी। जिनके मृत्यु के उपरान्त थाना चकिया द्वारा पंचनामा,पोस्टमार्टम कराया गया। परिवादिनी ने पंजीकृत किसान दुर्घटना बीमा योजना के अर्न्तगत बीमित राशि प्राप्त करने के लिए सभी अभिलेखों के साथ विपक्षी संख्या 2 के यहॉं प्रार्थना पत्र दिया। परिवादिनी का उक्त प्रार्थना पत्र विपक्षी संख्या 2 के अधिकारियों/कर्मचारियों के माध्यम से विपक्षी संख्या 1 के क्लेम फार्म भराने के अनुसार सभी कार्यवाही पूर्ण करके विपक्षी संख्या 1 को प्रेषित कर दिया गया। परिवादिनी अपने उपरोक्त दावा हेतु बार-बार विपक्षी संख्या 2 के यहॉं सर्म्पक करती रही और उसे आश्वासन दिया जाता रहा कि विपक्षी संख्या 1 से दावे का चेक प्राप्त होते ही सूचना दी जायेगी। परिवादिनी विपक्षी संख्या 2 के कार्यालय में भागदौड करती रही किन्तु संतोषजनक कार्यवाही न होने पर दिनांक 13-6-2012 को रजिस्टर्ड नोटिस विपक्षी संख्या 1 को दिया। किन्तु विपक्षी संख्या 1 द्वारा परिवादिनी के दावे का भुगतान नहीं किये और न ही नोटिस का जबाब दिये। तत्पश्चात परिवादिनी द्वारा यह परिवाद प्रस्तुत किया गया।
3-    संक्षेप में विपक्षी संख्या 1 की ओर से कथन किया गया है कि परिवादिनी ने परिवाद विपक्षी को परेशान करने की गरज से दाखिल किया गया है जिसमे कोई सच्चाई नहीं है। अतः परिवादिनी का परिवाद निरस्त किये जाने योग्य है। उपभोक्ता
                                                                                                       2
 संरक्षण अधिनियम के तहत फोरम में वही व्यक्ति वाद संस्थित कर सकता है जिसने प्रतिफल देकर सेवायें प्राप्त की हो, किन्तु परिवादिनी ने न तो कोई प्रतिफल दिया है और न ही कोई सेवा प्राप्त किया है। परिवादिनी का परिवाद कालबाधित है। उत्तर प्रदेश सरकार ने विपक्षी से बीमा कराया था या नहीं इसका कोई प्रमाण पत्रावली पर उपलब्ध नहीं है। मृतक किसान का बीमा यदि विपक्षी से होगा तो विपक्षी संख्या 2 द्वारा पूर्ण रूप से भरा आवेदन पत्र बीमा कम्पनी के क्षेत्रीय कार्यालय को प्रेषित किया जायेगा जिसका निस्तारण क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा किया जायेगा। बीमा का प्रीमियम लेकर बीमा पालिसी उत्तर प्रदेश सरकार ने लिया है न कि परिवादिनी ने ऐसी स्थिति में बीमा कम्पनी के विरूद्ध शिकायत उत्तर प्रदेश सरकार कर सकती है न कि परिवादिनी। परिवादिनी द्वारा पंजीकृत नोटिस विपक्षी को देना कहा गया है जबकि उसे ऐसा कोई अधिकार नहीं है और न ही ऐसी कोई नोटिस बीमा कम्पनी को प्राप्त हुई है। परिवादिनी ने गलत तौर पर हम विपक्षी के विरूद्ध वाद संस्थित करके परिवादी को कन्टेस्ट करने को बाध्य किया है। अतः परिवादिनी से स्पेशल कास्ट प्राप्त करने के अधिकारी है। इस आधार पर परिवादिनी के परिवाद को निरस्त किये जाने की प्रार्थना विपक्षी संख्या 1 द्वारा किया गया है।
4-    इस फोरम द्वारा विपक्षी संख्या 2 को नोटिस भेजी गयी जो उन पर तामिल हुई किन्तु विपक्षी संख्या 2 की ओर से न तो कोई हाजिर आये एवं न हीं जबाबदावा दाखिल किया गया। 
5-    परिवादिनी ने अपने परिवाद के समर्थन में अपना शपथ पत्र दाखिल किया है इसके अतिरिक्त दस्तावेजी साक्ष्य के रूप में परिवादिनी चन्द्रकलां द्वारा उप जिलाधिकारी चकिया को किसान दुर्घटना बीमा योजना का लाभ दिलाये जाने हेतु दिये गये प्रार्थना पत्र की छायाप्रति,प्रथम सूचना रिर्पोट,पोस्टमार्टम रिर्पोट,आरोप पत्र,नक्शा नजरी की छायाप्रति,खतौनी की नकलें,कानूनी नोटिस की छायाप्रति दाखिल की गयी है।
6-    विपक्षी की ओर से जबाबदावा के समर्थन में वरिष्ठ मण्डल प्रबन्धक श्री राकेश चन्द्र पाठक का शपथ पत्र दाखिल किया है इसके अतिरिक्त अन्य कोई साक्ष्य नहीं है।
7-    उभय पक्ष के विद्वान अधिवक्तागण की बहस सुनी गयी है। पत्रावली का सम्यक रूपेण परिशीलन किया गया।
8-    परिवादिनी के विद्वान अधिवक्ता द्वारा तर्क दिया गया है कि परिवादिनी के पति स्व0 अमर नाथ पुत्र हरिदास उर्फ हरिहर की दिनांक 29-11-2010 को वाहन दुर्घटना में मृत्यु हो गयी। स्व0 अमर नाथ एक किसान थे, और उत्तर प्रदेश के समस्त किसानों का दुर्घंटना हित लाभ हेतु, बीमा सरकार द्वारा कराया गया है। स्0 अमरनाथ की मृत्यु के बाद थाने में प्रथम सूचना रिर्पोट दर्ज करायी गयी है। शव का पोस्टमार्टम हुआ और विवेचना के उपरान्त सम्बन्धित वाहन चालक 
                                                                                                     3
के विरूद्ध पुलिस द्वारा आरोप पत्र भी प्रेषित किया गया है। परिवादिनी ने किसान दुर्घटना बीमा योजना के तहत बीमित धनराशि प्राप्त करने हेतु उप जिलाधिकारी चकिया के यहॉं प्रार्थना पत्र दिया जिसकी छायाप्रति दाखिल की गयी है। जिलाधिकारी कार्यालय द्वारा सारी औपचारिकताएं पूर्ण करने के उपरान्त पैसा के भुगतान हेतु पत्रावली विपक्षी संख्या 1 अर्थात ओरियण्टल इश्योरेंस कम्पनी लि0 को प्रेषित की गयी है लेकिन परिवादिनी के लगातार भागदौड करने के बावजूद उसे पैसा प्राप्त नहीं हुआ तब दिनांक 13-6-2012 को उसने विपक्षी संख्या 1 को पंजीकृत डाक से कानूनी नोटिस दिया जिसका कोई जबाब विपक्षी संख्या 1 अर्थात बीमा कम्पनी द्वारा नहीं दिया गया और न ही पैसे का भुगतान किया गया जिससे परिवादिनी को काफी मानसिक,शारीरिक कष्ट हुआ और आर्थिक क्षति हुई। अतः परिवादिनी विपक्षीगण से रू0 100000/-किसान दुर्घटना बीमा की धनराशि के रूप तथा रू0 50000/-मानसिक एवं शारीरिक क्षति,वाद व्यय तथा भागदौड की क्षतिपूर्ति के रूप में प्राप्त करने की अधिकारिणी है।
9-    इसके विपरीत विपक्षी के विद्वान अधिवक्ता द्वारा तर्क दिया गया कि प्रस्तुत वाद कालबाधित है क्योंकि परिवादिनी के पति की मृत्यु दिनांक 29-11-2010 को हुई है और परिवाद दिनांक 26-2-2013 को अर्थात परिवादिनी के पति के मृत्यु के लगभग 2 वर्ष 3 माह बाद दाखिल किया गया है जबकि विधिक रूप से दावा दाखिल करने की मियाद 2 वर्ष ही है। फोरम की राय में विपक्षी के अधिवक्ता के उपरोक्त तर्क में कोई बल नहीं पाया जाता है क्योकि किसी भी मुकदमें को दाखिल करने की मियाद उस दिन से प्रारम्भ होती है जिस दिन वाद कारण उत्पन्न हो। प्रस्तुत मामले में परिवादिनी के पति की मृत्यु के दिन ही वाद कारण उत्पन्न होना नहीं माना जा सकता है। परिवादिनी की अेर से दाखिल दस्तावेजी साक्ष्य से यह स्पष्ट है कि उसने दिनांक 28-12-2010 को ही उप जिलाधिकारी चकिया के यहॉं किसान दुर्घटना बीमा का लाभ प्राप्त करने हेतु प्रार्थना पत्र दे दिया था। स्वाभाविक है कि प्रार्थना पत्र देने के बाद उचित समय तक परिवादिनी इस पर विधिक कार्यवाही किये जाने का इन्तजार करेगी और जब अन्तिम रूप से विपक्षीगण द्वारा उसे कार्यवाही करने से मना किया जायेगा या समुचित समय व्यतीत हो जाने के बाद भी उचित कार्यवाही नहीं की जायेगी तभी वाद कारण उत्पन्न होगा। अतः सम्पूर्ण तथ्यों एवं परिस्थितियों को देखते हुए प्रस्तुत वाद कालबाधित नहीं माना जा सकता है।
10-    विपक्षी के विद्वान अधिवक्ता द्वारा यह भी तर्क दिया गया कि परिवादिनी ने ऐसा कोई साक्ष्य नहीं दिया है जिससे यह साबित हो कि परिवादिनी ने कोई प्रतिफल देकर सेवाएं प्राप्त की है अतः परिवादिनी विपक्षी संख्या 1 की उपभोक्ता नहीं है और इस प्रकार वह कोई क्षतिपूर्ति प्राप्त करने की अधिकारिणी नहीं है। उनके द्वारा यह भी तर्क दिया गया कि किसान दुर्घटना बीमा से सम्बन्धित दावा जिलाधिकारी कार्यालय द्वारा अनुमोदित होकर बीमा कम्पनी को भेजा जाता है और

                                                                                                          4
 क्षतिपूर्ति की धनराशि जिलाधिकारी कार्यालय के माध्यम से लाभार्थी को प्रदान की जाती है।
    विपक्षी बीमा कम्पनी के अधिवक्ता के उपरोक्त तर्को में भी कोई बल नहीं पाया जाता है क्योंकि यह स्वीकृत तथ्य है कि उत्तर प्रदेश के समस्त किसानों के लाभ के लिए प्रदेश में किसान दुर्घटना बीमा योजना लागू की गयी है और जब किसी किसान की दुर्घटना में मृत्यु होगी तब जिलाधिकारी कार्यालय के माध्यम से प्रार्थना पत्र प्रेषित किये जाने के उपरान्त पैसे का भुगतान सम्बन्धित बीमा कम्पनी द्वारा किया जायेगा। पैसा प्राप्त करने के लिए प्रार्थना पत्र मृत किसान के वारिसों द्वारा ही दिया जायेगा और यदि पैसा प्राप्त नहीं होता है तो दावा भी उन्हीं के द्वारा दाखिल किया जायेगा न कि सरकार के द्वारा। प्रस्तुत मामले में पत्रावली में उपलब्ध साक्ष्य से यह बात भलीभांति सिद्ध है कि परिवादिनी ने अपने पति के मृत्यु के उपरान्त दुर्घटना बीमा योजना के अर्न्तगत लाभ प्राप्त करने हेतु समय से प्रार्थना पत्र दिया है। परिवादिनी का कथन है कि यह प्रार्थना पत्र विधिक रूप से कार्यवाही करते हुए भुगतान हेतु विपक्षी संख्या 1 अर्थात ओरियण्टल इश्योरेंस कम्पनी को प्रेषित किया गया है।बीमा कम्पनी की ओर से अपने प्रतिवाद पत्र में कही भी स्पष्ट रूप से यह नहीं कहा गया है कि उन्हें जिलाधिकारी कार्यालय के माध्यम से कोई प्रार्थना पत्र प्राप्त नहीं हुआ है।स्वयं जिलाधिकारी को इस मुकदमें में पक्षकार बनाया गया है लेकिन उनकी ओर से कोई जबाबदावा दाखिल नहीं किया गया है और न ही इस तथ्य से इन्कार किया गया है कि परिवादिनी द्वारा अपने पति के मृत्यु के उपरान्त दुर्घटना बीमा योजना का लाभ प्राप्त करने हेतु प्रार्थना दिया गया जिसको अनुमोदन के पश्चात भुगतान हेतु सम्बन्धित बीमा कम्पनी को प्रेषित किया गया। बल्कि पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्य से यही सिद्ध होता है कि परिवादिनी ने अपने पति के मृत्यु के बाद समय से ही उप जिलाधिकारी चकिया कार्यालय में दुर्घटना बीमा योजना के तहत लाभ प्राप्त करने हेतु प्रार्थना पत्र दिया है। परिवादिनी ने अपने परिवाद में व शपथ पत्र में स्पष्ट रूप से कहा है कि उसके प्रार्थना पत्र को जिलाधिकारी के यहॉं से सभी कार्यवाही पूर्ण करने के बाद विपक्षी संख्या 1 अर्थात ओरियण्टल इश्योरेंस कम्पनी को प्रेषित किया गया है। परिवादिनी ने यह भी कहा है कि उसने कार्यवाही न होने पर बीमा कम्पनी को कानूनी नोटिस भी प्रेषित किया था जिसका कोई जबाब विपक्षी संख्या 1 अर्थात बीमा कम्पनी ने नहीं दिया इससे भी यही निष्कर्ष निकलता है कि परिवादिनी के कथनों में सत्यता है क्योंकि यदि उसके कथन असत्य होते तो विपक्षी उसके कानूनी नोटिस का जबाब अवश्य देता।
    उपरोक्त सम्पूर्ण विवेचन के आधार पर फोरम की राय में परिवादिनी का परिवाद स्वीकार किये जाने योग्य है और उसे किसान दुर्घटना बीमा हित लाभ के रूप में विपक्षीगण से रू0 100000/-(एक लाख)दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है इसके अतिरिक्त समस्त तथ्यों एवं परिस्थितियों को देखते हुए परिवादिनी को शारीरिक,मानसिक एवं आर्थिक क्षति के क्षतिपूर्ति हेतु रू0 5000/-(पांच हजार) तथा वाद व्यय के रूप में रू0 2000/-(दो हजार) अर्थात कुल रू0

                                                                                  5
 107000/-(एक लाख सात हजार)दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है और इस प्रकार परिवादिनी का परिवाद आंशिक रूप से स्वीकार किये जाने योग्य है।
आदेश
    परिवादिनी का परिवाद आंशिक रूप से स्वीकार किया जाता है। विपक्षीगण को आदेशित किया जाता है कि वे 3 माह के अन्दर परिवादिनी को उसके पति के मृत्यु के फलस्वरूप प्राप्त होने वाले किसान दुर्घटना बीमा योजना के तहत रू0 100000/-(एक लाख) तथा शारीरिक,मानसिक व आर्थिक क्षति की क्षति पूर्ति हेतु रू0 5000/-(पांच हजार) एवं वाद व्यय तथा भागदौड के खर्च के रूप में रू0 2000/-(दो हजार) अर्थात कुल रू0 107000/-(एक लाख सात हजार) अदा करें। यदि उक्त अवधि में विपक्षीगण द्वारा उपरोक्त धनराशि का भुगतान नहीं किया जाता है तो परिवादिनी उक्त धनराशि पर 8 प्रतिशत साधारण वार्षिक व्याज भी प्राप्त करने की अधिकारिणी होगी।

 (शशी यादव)                                       (रामजीत सिंह यादव)
  सदस्या                                                अध्यक्ष
                                                 दिनांक- 9-8-2016

 

 

 
 
[HON'BLE MR. JUSTICE Ramjeet Singh Yadav]
PRESIDENT
 
[HON'BLE MRS. Shashi Yadav]
MEMBER

Consumer Court Lawyer

Best Law Firm for all your Consumer Court related cases.

Bhanu Pratap

Featured Recomended
Highly recommended!
5.0 (615)

Bhanu Pratap

Featured Recomended
Highly recommended!

Experties

Consumer Court | Cheque Bounce | Civil Cases | Criminal Cases | Matrimonial Disputes

Phone Number

7982270319

Dedicated team of best lawyers for all your legal queries. Our lawyers can help you for you Consumer Court related cases at very affordable fee.