Madhya Pradesh

Seoni

CC/46/2014

NARAYAN PRASHAD NAMDEV - Complainant(s)

Versus

NIRMAL CHURASIYA - Opp.Party(s)

MUKESH AVADHIYA

28 Oct 2014

ORDER

जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण फोरम, सिवनी (म0प्र0)

  -:समक्ष:-
    
अध्यक्ष : श्री व्ही0पी0 शुक्ला
 सदस्य : वीरेन्द्र सिंह राजपूत
              
प्रकरण क्रमांक:-46/2014                           प्रस्तुति दिनांक:-16.5.2014 

 


1.     नारायण प्रसाद नामदेव आ0 श्री शोभाराम
नामदेव उम्र लगभग 62 वर्श,

2.     श्रीमति निर्मला नामदेव पतिन श्री नारायण
प्रसाद नामदेव उम्र लगभग 45 वर्श,
दोनों निवासी हा0मु0 सी.ओ. श्री जी.पी.
अवधिया टूटी पुलिया, एम.पी.र्इ.बी. आफिस
के पीछे, षास्त्री वार्ड बारा पत्थर सिवनी 
(म0प्र0) 480661


        ................परिवादीगण
           वि रू द्ध
निर्मल चौरसिया आ0 श्री गोकल प्रसाद 
चौरसिया उम्र लगभग 51 वर्श, गुरूनानक
वार्ड तहसील व जिला सिवनी (म0प्र0)  
                            ................अनावेदक                                         

             आ  दे  श

( दिनांक:-28.10.2014 को पारित )
पीठासीन अध्यक्ष :- विमल प्रकाश शुक्ला,

1.             परिवादीगण ने अनावेदक के विरूद्ध धारा 12 उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत सेवा में कमी के आधार पर विकि्रत प्लाट को बंधक मुक्त कराये जाने, आर्थिक क्षतिपूर्ति 92,000-रूपये दिलाये जाने एवं वादव्यय 3,000-रूपये दिलाये जाने हेतु प्रस्तुत किया है।  

2.        परिवादी का पक्ष संक्षेप में इस प्रकार है कि परिवादी क्रमांक 2 परिवादी क्रमांक 1 की पतिन है। अनावेदक लार्इसेंसधारी कोलोनार्इजर है। अनावेदक ने परिवादी क्रमांक 2 को गोकुल बिहार कालोनी में प्लाट क्रमांक 29 क्षेत्र 30ग55त्र 1650 वर्ग फुट 3,84,000-रूपये में दिनांक 30.7.2011 को पंजीकृत विक्रय पत्र के जरिये विक्रय किया था। अनावेदक ने प्लाट विक्रय करने के पूर्व परिवादीगण को यह आष्वासन दिया था कि उसका प्लाट विधिक रूप से मान्य एवं स्वीकृत है। अनावेदक द्वारा प्लाट विक्रय करते समय यह जानकारी दी गर्इ थी कि प्लाट रहवास प्रयोजन हेतु सक्षम विभाग से 

 

                                                                                                                                                                                     प्रकरण क्रमांक:-46/2014

स्वीकृत है। परिवादीगण ने प्लाट पर भवन निर्माण हेतु नगर पालिका प्रषासन सिवनी के समक्ष आवेदन पत्र दिया था। नगर पालिका सिवनी ने परिवादीगण को दिनांक 28.03.2013 को यह जानकारी दी कि विकि्रत प्लाट संख्या 29 बंधकनामा सूची में दर्ज है। अनावेदक द्वारा प्रस्तावित प्लाटों में से कुछ प्लाट नियमानुसार बंधक रखे गये हैं। अनावेदक द्वारा परिवादीगण को बंधकसुदा प्लाट विक्रय कर सेवा में कमी की गर्इ है। अतएव परिवादीगण को अनावेदक से विकि्रत प्लाट को बंधक मुक्त कराये जाने, आर्थिक क्षतिपूर्ति 92,000-रूपये दिलाये जाने वं वादव्यय 3,000-रूपये  दिलाये जाने का निवेदन किया है।

3.       अनावेदक का पक्ष संक्षेप में इस प्रकार है कि अनावेदक ने परिवादीगण को प्लाट विक्रय करते समय सम्पूर्ण जानकारी उपलब्ध करा दी थी। परिवादीगण ने अनावेदक को यह आष्वासन दिया था कि वह अपने स्तर से षेश समस्त काम करवा लेगा। अनावेदक ने परिवादीगण को प्लाट वर्तमान दर से प्रचलित कम दर से विक्रय किया था। अनावेदक ने सक्षम प्राधिकारी के समक्ष प्लाट बंधक मुक्त करने की कार्यवाही की है, जो अनुविभागीय अधिकारी सिवनी के समक्ष लंबित है। परिवादीगण को प्लाट विक्रय करते समय यह जानकारी दी थी कि प्लाट जब तक बंधक मुक्त नहीं हो जाता, तब तक प्लाट पर भवन निर्माण की अनुमति नहीं मिलेगी। परिवादीगण द्वारा चाहा गया अनुतोश विधि एवं तथ्यों के जटिल प्रष्नों का समिश्रण है, जिसके कारण परिवादीगण का परिवाद सिविल न्यायालय द्वारा विचारण योग्य है। परिवादीगण उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम की धारा 2 (1) (घ) के अंतर्गत उपभोक्ता नहीं हंै। परिवादीगण व अनावेदक के मध्य भूमि के क्रेता-विक्रेता का संबंध है, जिसके कारण इस फोरम को सुनवार्इ का अधिकार नहीं है। अतएव अनावेदक ने परिवादीगण का   परिवाद निरस्त किये जाने का निवेदन किया है। 

4.        विचारणीय बिन्दू यह है कि :- 
     
 (1)    क्या परिवादीगण उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम की धारा 2 (1) (घ) के अंतर्गत उपभोक्ता है ? 

(2)    क्या अनावेदक द्वारा परिवादी क्रमांक 2 को बंधकषुदा प्लाट विक्रय कर ''सेवा में कमी की गर्इ है ?

विचारणीय बिन्दू क्रमांक 1 एवं 2 :-

5.        यह स्वीकृत तथ्य है कि अनावेदक द्वारा परिवादी क्रमांक 2 के पक्ष में दिनांक 30.7.2011 को पंजीकृत विक्रय पत्र निश्पादित कर प्लाट क्रमांक 29 गोकुल बिहार कालोनी सिवनी में विक्रय किया गया था। 

6.        परिवादी निर्मल प्रसाद नामदेव ने शपथ पत्र पर प्रकट किया कि अनावेदक लार्इसेंसधारी कोलोनार्इजर है और वह सिवनी में प्लाट विक्रय 


                                                                                                                                                                                 प्रकरण क्रमांक:-46/2014

करने का व्यवसाय करता है। अनावेदक ने उसकी पतिन के नाम से सिवनी के स्थानीय क्षेत्र के अंतर्गत निर्मित एवं प्रस्तावित गोकुल कालोनी में प्लाट क्रमांक 29 क्षेत्र 30ग55त्र 1650 वर्ग फुट सी0व्ही0 रमन वार्ड बारा पत्थर सिवनी को विक्रय किया गया। परिवादीगण ने अनावेदक को 3,84,000-रूपये अदा कर, परिवादी क्रमांक 2, जो उसकी पतिन है, के नाम दिनांक 30.7.2011 को पंजीकृत विक्रय पत्र निश्पादित कराया है। उसने प्लाट क्रय करने के पष्चात सक्षम प्राधिकारी की अनुमति हेतु नगर पालिका प्रषासन सिवनी के समक्ष आवेदन पत्र दिया था, तब नगरपालिका सिवनी द्वारा दिनांक 28.3.2013 को यह जानकारी दी गर्इ कि अनावेदक द्वारा विकि्रत प्लाट क्रमांक 29 सक्षम प्राधिकारी द्वारा स्वीकृत लेआउट बंधकनामा सूची में दर्ज है। अनावेदक द्वारा प्रस्तावित कालोनी में अधोसंरचना विकसित कराने हेतु सक्षम अधिकारी द्वारा प्लाट बंधक रखा गया है।

7.        अनावेदक निर्मल कुमार चौरसिया ने षपथ पत्र पर प्रकट किया कि उसने परिवादीगण को कम कीमत पर प्लाट विक्रय किया था। परिवादीगण ने यह आष्वासन दिया था कि वह अपने स्तर से बाकी काम करवायेंगे। उसने परिवादी को प्लाट विक्रय करते समय कोर्इ तथ्य नहीं छुपाया, बलिक परिवादी की पतिन के नाम पंजीकृत विक्रय पत्र निश्पादित करते समय उसे यह बताया था कि प्लाट बंधक रखा हुआ है और जब तक प्लाट बंधक मुक्त नहीं हो जाता, तब तक उस पर भवन निर्माण की अनुज्ञा नहीं होगी। 

8.        परिवादीगण ने हमारे समक्ष पंजीकृत विक्रय पत्र दिनांक 30.7.2011 की छायाप्रति प्रस्तुत की है, जिसमें अनावेदक ने आवासीय प्रयोजन हेतु गोकुल बिहार कालोनी में प्लाट संख्या 29 परिवादी क्रमांक 2 को विक्रय किये जाने का उल्लेख है। विक्रय पत्र में प्लाट की चतुर्थ सीमा अंकित है तथा विक्रय पत्र में विनिर्दिश्ट रूप से यह उल्लेख है कि प्लाट कही भी बंधक नहीं रखा गया है। इस प्रकार अनावेदक द्वारा परिवादी क्रमांक 2 को प्लाट विक्रय करते समय यह जानकारी दी गर्इ थी कि प्लाट पर कोर्इ भार नहीं है और प्लाट कही पर भी बंधक नहीं है। तर्क के लिये यदि यह मान्य कर लिया जावे कि अनावेदक द्वारा परिवादी क्रमांक 2 को पंजीकृत विक्रय पत्र निश्पादन के पूर्व प्लाट के नगर पालिका सिवनी में बंधक रखने की जानकारी दी गर्इ थी, तब विक्रय पत्र दिनांक 30.7.2011 में किन परिसिथतियों में प्लाट के बंधक होने का उल्लेख नहीं है, के संबंध में अनावेदक द्वारा कोर्इ जानकारी नहीं दी गर्इ है। 

9.        अनावेदक की ओर से यह आपतित ली गर्इ है कि उसने परिवादीगण को तत्समय प्रचलित कम दर पर प्लाट विक्रय किया था, किन्तु अनावेदक ने हमारे समक्ष यह नहीं बताया कि उस समय गोकुल बिहार कालोनी सिवनी में प्लाट की क्या दर प्रचलित थी। अनावेदक ने तत्समय प्रचलित कलेक्टर दर के अनुसार गोकुल बिहार कालोनी में भूखंड की कीमत के संबंध में भी कोर्इ जानकारी नहीं दी है। 

 


                                                                                                                                                                                      प्रकरण क्रमांक:-46/2014

10.        अनावेदक कोलोनार्इजर है और अनावेदक द्वारा विभिन्न व्यकितयों को गोकुल बिहार कालोनी में प्लाट विकसित कर विक्रय किया गया है। परिवादी क्रमांक 2 ने अनावेदक द्वारा दिये गये विज्ञापन से प्रभावित होकर उसे प्रतिफल अदा कर प्लाट क्रय किया है। इसलिए हमारे मत में परिवादीगण उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम की धारा 2 (1) (घ) के अंतर्गत उपभोक्ता है। 

11.        अनावेदक अधिवक्ता ने हमारे समक्ष यह आपतित उठार्इ है कि परिवादीगण ने कलेक्टर सिवनी के समक्ष यह षिकायत की है कि अनावेदक द्वारा बिना बंधक विमोचन किये हुए प्लाट विक्रय किया गया है। अनावेदक ने कलेक्टर सिवनी के न्यायालय में जांच लंबित है। परिवादी क्रमांक 2 विभिन्न न्यायालय में कार्यवाही कर रहा हूं, जिसके कारण इस फोरम को सुनवार्इ का अधिकार नहीं है तथा अनावेदक द्वारा उठार्इ गर्इ आपतित सिविल प्रकृति की है, जिसकी सुनवार्इ का क्षेत्राधिकार सिविल न्यायालय से ही संभव है, किन्तु हम अनावेदक अधिवक्ता की उक्त आपतितयाें से सहमत नहीं है। परिवादीगण ने हमारे समक्ष कलेक्टर सिवनी द्वारा मुख्य नगर पालिका अधिकारी सिवनी को सम्बोधित पत्र की छायाप्रति प्रस्तुत की है, जिसमें कलेक्टर सिवनी द्वारा मुख्य नगर पालिका अधिकारी एवं जिला पंजीयक सिवनी को यह निर्देषित किया गया है कि अनावेदक द्वारा किन परिसिथतियों में बंधक रखे प्लाट को विक्रय किया गया है, की जांच कर एक सप्ताह में प्रतिवेदन दिया जावे। नगर पालिका परिशद सिवनी द्वारा अनावेदक को इस आषय का सूचना पत्र भी दिया गया है कि किन परिसिथतियों में बिना प्लाट का बंधक विमोचन कराकर प्लाट संख्या 29 का विक्रय किया गया है। अनावेदक द्वारा परिवादीगण को सभी भार से मुक्त होना बताते हुए गोकुल बिहार कालोनी में सिथत प्लाट संख्या 29 विक्रय किया गया है। अनावेदक का यह दायित्व था कि वह परिवादीगण को प्लाट संख्या 29 के बंधक के संबंध में स्पश्ट जानकारी उपलब्ध कराते। अनावेदक द्वारा परिवादी क्रमांक 2 को बंधक षुदा प्लाट विक्रय कर ''सेवा में कमी की गर्इ है। 

12.        अनावेदक अधिवक्ता का यह तर्क है कि परिवादीगण प्लाट संख्या 29 के बंधक विमोचन की कार्यवाही स्वयं करा सकता है, जिसके लिये अनावेदक परिवादीगण की सहायता करने के लिये तत्पर है, किन्तु हम अनावेदक अधिवक्ता के उक्त तर्को से सहमत नहीं है। अनावेदक द्वारा गोकुल बिहार कालोनी को विकसित करते समय सम्पूर्ण कोलोनार्इजर से संबंधित सम्पूर्ण षर्तो का पालन नहीं किया गया है, जिसके कारण प्लाट संख्या 29 व अन्य प्लाट नगर पालिका परिशद सिवनी में बंधक रखे गये हैं। यदि अनावेदक द्वारा कोलोनार्इजर की षर्तो का पालन करते हुए प्लाट विकसित किया गया है, तब अनावेदक स्वयं नगर पालिका से बंधक विमोचन की कार्यवाही कर सकता है, इसमें परिवादीगण की कोर्इ भूमिका नहीं है।

13.        अनावेदक अधिवक्ता का यह भी तर्क है कि परिवादी ने दिनांक 30.7.2011 को प्लाट क्रय किया, जबकि परिवादी ने यह परिवाद दिनांक 16.5.14 को प्रस्तुत किया है।  परिवादीगण ने  धारा 24 ए 

 

                                                                                                                                                                                 प्रकरण क्रमांक:-46/2014

उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम अंतर्गत पृथक से आवेदन पत्र भी प्रस्तुत नहीं किया है, जिसके कारण परिवादी का यह परिवाद अवधि बाहय है, किन्तु हम अनावेदक अधिवक्ता के उक्त तर्को से सहमत नहीं है। अनावेदक द्वारा परिवादीगण को दिनांक 30.7.2011 को विक्रीत प्लाट में यह दर्षाया था कि प्लाट संख्या 29 गोकुल बिहार कालोनी सिवनी पर भी बंधक नहीं है। परिवादी ने जब नगर पालिका में भवन निर्माण हेतु अनुमति प्रदान करने बाबत कार्यवाही प्रारंभ की, तब नगर पालिका सिवनी द्वारा परिवादी को दिनांक 28.3.13 को यह जानकारी दी गर्इ कि प्लाट संख्या 29 बंधक है। परिवादीगण ने नगर पालिका द्वारा प्रेशित पत्र दिनांक 28.3.13 की छायाप्रति भी प्रस्तुत की है। इस प्रकार परिवादी सर्वप्रथम दिनांक 28.3.13 को प्लाट संख्या 29 के बंधक होने के संबंध में जानकारी दी गर्इ है, जिसके कारण परिवादी को परिवाद प्रस्तुत करने का वाद कारण दिनांक 28.3.13 से प्रारंभ हुआ, जबकि परिवादीगण ने यह परिवाद दिनांक 16.5.2014 को प्रस्तुत कर दिया है, जिसके कारण परिवादीगण का परिवाद समयावधि भीतर है।    

14.        उपरोक्त विवेचन के आधार पर हम इस निश्कर्श पर पहुंचते हैं कि अनावेदक द्वारा परिवादी को गोकुल बिहारी कालोनी में सिथत प्लाट संख्या 29, जो विक्रय के समय बंधक था, को परिवादी क्रमांक 2 को विक्रय कर सेवा में कमी की गर्इ है। हमारे मत में अनावेदक को परिवादी को प्लाट संख्या 29 गोकुल बिहार कालोनी का दो माह में बंधक विमोचन कराने का निर्देष दिया जाना युकितयुक्त है। विकल्प में यदि अनावेदक परिवादी को बंधक षुदा प्लाट संख्या 29 का बंधक विमोचन नहीं करा पाता है, तब उसे गोकुल बिहार कालोनी में सिथत प्लाट की वर्तमान कीमत, जो कम से कम उस क्षेत्र में प्रचलित कलेक्टर दर के समूल्य की हो, दिलाया जाना युकितयुक्त है। इसके अतिरिक्त अनावेदक द्वारा परिवादी क्रमांक 2 को बंधक षुदा प्लाट विक्रय कर ''सेवा में कमी की गर्इ है, जिसके कारण परिवादीगण वर्श 2011 से भवन निर्माण करने में असफल रहे हैं, इससे उन्हें जो मानसिक कश्ट हुआ उसके लिये हम परिवादीगण को 20,000-रूपये मानसिक क्षतिपूर्ति दिलाया जाना उचित समझते हैं। 

15.        अत: उपरोक्त विवेचना के आधार पर परिवादीगण के पक्ष में तथा अनावेदक के विरूद्ध निम्न आदेष पारित करते हैं :-

¿1À    अनावेदक परिवादी क्रमांक 2 को प्लाट संख्या 29 गोकुल बिहार कालोनी का दो माह में बंधक विमोचन कराये विकल्प में यदि अनावेदक परिवादी को बंधक षुदा प्लाट संख्या 29 का बंधक विमोचन नहीं करा पाता है, तब अनावेदक परिवादी क्रमांक 2 को गोकुल बिहार कालोनी में सिथत प्लाट की वर्तमान कीमत, जो कम से कम उस क्षेत्र में प्रचलित कलेक्टर दर के समूल्य की हो अदा करे। 

¿2À  अनावेदक परिवादीगण को मानसिक कष्ट हेतु 20,000-रूपये ¿बीस हजार रू0À एक माह में अदा करे।

 


                                                                                                                                                                                     प्रकरण क्रमांक:-46/2014


¿3À    अनावेदक परिवादीगण को वाद व्यय हेतु 1,000-रूपये ¿एक हजार रू0À एक माह में अदा करें। उपरोक्त समस्त राषि आदेष दिनांक से एक माह में अदा कर दी जावे अन्यथा संपूर्ण आदेषित राषि पर आदेश दिनांक से 10 प्रतिषत वार्षिक दर से ब्याज देय होगा। 
    
15.        आदेष की प्रति पक्षकारों को नि:षुल्क प्रदान की जावे। 

   मैं सहमत हूँ।                        मेरे निर्देषन में टंकित किया गया।         

(वीरेन्द्र सिंह राजपूत)                             (व्ही0पी0 षुक्ला)
      सदस्य                                        अध्यक्ष
जिला उपभोक्ता विवाद                           जिला उपभोक्ता विवाद
प्रतितोषण फोरम,सिवनी                          प्रतितोषण फोरम,सिवनी
     (म0प्र0)                                        (म0प्र0)
 

 
 


     
 
 
  
 

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