राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, उ0प्र0, लखनऊ
परिवाद संख्या-55/2015
(सुरक्षित)
Rugs Mart,
Through Its Partner (Shri R.A. Ansari),
Office Post Box No. 237,
Peerkhanpur Road,
Bhadohi-221401.
....................परिवादी
बनाम
1. The New India Assurance Co. Ltd.
Through Its Branch Manager,
Branch Office : Opp. Nagar Mahapalika,
Barabanki-420504.
2. Sanjay Road Lines, Through Appropriate Authority
C/o Main Road, Maryadpatti, Bhadohi.
...................विपक्षीगण
समक्ष:-
1. माननीय श्री गोवर्धन यादव, सदस्य।
2. माननीय श्री विकास सक्सेना, सदस्य।
परिवादी की ओर से उपस्थित : श्री विकास अग्रवाल,
विद्वान अधिवक्ता।
विपक्षी सं01 की ओर से उपस्थित : श्री बी0पी0 दुबे,
विद्वान अधिवक्ता।
विपक्षी सं02 की ओर से उपस्थित : श्री हिमांशु सूर्यवंशी,
विद्वान अधिवक्ता।
दिनांक: 25.08.2021
माननीय श्री गोवर्धन यादव, सदस्य द्वारा उदघोषित
निर्णय
यह परिवाद परिवादी रग्स मार्ट ने विपक्षी संख्या-1 दि न्यू इण्डिया एश्योरेंस कं0लि0 एवं विपक्षी संख्या-2 संजय रोड लाइंस के विरूद्ध राज्य आयोग के समक्ष प्रस्तुत किया है और निम्न अनुतोष चाहा है:-
-2-
“Wherefore, it is most respectfully prayed that this Hon’ble State Commission may kindly be pleased to allow the present complaint by directing to the opposite parties to pay a sum of Rs. 46,60,000/- (Rupees Forty Six Lacs Sixty Thousand only) as mentioned in paragraph No. 9 of the complaint, alongwith interest @ 18% per annum with effect from date of loss i.e. 14.05.2014 till the date of actual payment, as compensation and to award the cost throughout in favour of the complainant and/or to pass any such other & further order which may be deemed justified into the circumstances of the case.”
संक्षेप में परिवाद के तथ्य इस प्रकार हैं कि दिनांक 06.05.2014 को विपक्षी संख्या-1 दि न्यू इण्डिया एश्योरेंस कं0लि0 द्वारा मरीन कारगो इंश्योरेंस पॉलिसी जो कि 41,00,000/-रू0 के माल को बीमित करने हेतु जारी की गयी थी एवं परिवादी रग्स मार्ट के 105 बण्डल कार्पेट जो कि भदोही से इस्ताम्बुल (टर्की) तक जाने के लिए बीमित किये गये थे। भदोही से सड़क मार्ग द्वारा 105 बण्डल कार्पेट मुम्बई जाने थे एवं मुम्बई से इस्ताम्बुल (टर्की) पानी के जहाज द्वारा पहुँचाये जाने थे। उपरोक्त 105 बण्डल कार्पेट परिवादी के भदोही स्थित गोदाम से इस्ताम्बुल (टर्की) में खरीददार के गोदाम तक विपक्षी दि न्यू इण्डिया एश्योरेंस कं0लि0 द्वारा
-3-
बीमित किये गये थे। परिवादी द्वारा दिनांक 06.05.2014 को उपरोक्त पॉलिसी नं0-42050421140400000008 द्वारा उपरोक्त माल बीमित कराया गया था। दिनांक 12.05.2014 को परिवादी का उपरोक्त कन्साइनमेन्ट संजय रोड लाइंस, विपक्षी संख्या-2 द्वारा भदोही से मुम्बई के लिए सड़क मार्ग से बुक कराया गया था, जिसके एवज में संजय रोड लाइंस, विपक्षी संख्या-2 द्वारा इन्वॉइस सं0 481 दिनांक 12.05.2014 जारी की गयी और भदोही से मुम्बई माल पहुँचाने हेतु माल-भाड़ा 27,555/-रू0 प्राप्त किया गया। उपरोक्त माल दिनांक 12.05.2014 को ट्रक संख्या-डी0एन0-09-एम-9408 द्वारा संजय रोड लाइंस द्वारा परिवादी के 105 बण्डल कार्पेट के अलावा अन्य दो व्यापारियों के 211 बण्डल कार्पेट सहित भेजे गये थे। उपरोक्त ट्रक जब दिनांक 14.05.2014 को जिला-झॉंसी में पी0एस0-चिरगॉंव पहुँचा तो वहॉं पर कुछ लोगों द्वारा ट्रक को रोककर उसमें लूट की गयी और समस्त 316 बण्डल कार्पेट को लूट लिया गया, जिसमें परिवादी के 105 रोल कार्पेट भी शामिल थे। ट्रक के ड्राइवर द्वारा थाना-चिरगॉंव में तुरन्त सूचना दी गयी और ट्रांसपोर्टर एवं परिवादी को भी सूचित किया गया, परन्तु थाना-चिरगॉंव, झॉंसी द्वारा अपनी गहन जांच-पड़ताल करने के बाद पुलिस द्वारा दिनांक 19.05.2014 को एफ0आई0आर0 दर्ज की गयी, जिसकी प्रति परिवाद के साथ संलग्न की गयी है। परिवादी के अनुसार पुलिस द्वारा जांच-पड़ताल की गयी, परन्तु माल व मुल्जिम का पता नहीं चल सका, जिस कारण पुलिस द्वारा
-4-
उपरोक्त एफ0आई0आर0 में माल व मुल्जिम का पता न चल पाने के कारण अन्तिम रिपोर्ट दिनांक 25.07.2014 को लगा दी गयी, जिसे दिनांक 19.10.2014 को ए0सी0जे0एम0 न्यायालय, झॉंसी द्वारा स्वीकार कर लिया गया। तदोपरान्त परिवादी द्वारा विपक्षी संख्या-1 बीमा कम्पनी से अपने माल की क्षति हेतु 41,00,000/-रू0 का बीमा क्लेम, जो कि पहले दर्ज कराया जा चुका था, की मांग की गयी, जिस पर विपक्षी संख्या-1 बीमा कम्पनी द्वारा अपना इन्वेस्टीगेटर श्री मनोज कुमार को नियुक्त किया गया, जिसके द्वारा दिनांक 13.10.2014 को अपनी आख्या प्रस्तुत की गयी और उसकी आख्या के अनुसार उसने लूट की घटना को सही पाया और आगे की कार्यवाही हेतु बीमा कम्पनी को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की। इन्वेस्टीगेटर की रिपोर्ट के बाद भी बीमा कम्पनी द्वारा बीमा धनराशि को अदा करने हेतु कोई भी कार्यवाही नहीं की गयी, जबकि परिवादी द्वारा समय-समय पर विपक्षी बीमा कम्पनी द्वारा मांगे गये सभी कागजों को बीमा कम्पनी को उपलब्ध कराया जाता रहा, परन्तु बीमा कम्पनी द्वारा कोई भी कार्यवाही नहीं की गयी, जिससे व्यथित होकर परिवादी के द्वारा एक लीगल नोटिस दिनांक 20.01.2015 को उपरोक्त क्लेम को दिलाये जाने हेतु विपक्षी संख्या-1 बीमा कम्पनी को दी गयी, परन्तु विपक्षी संख्या-1 बीमा कम्पनी द्वारा कुछ भी नहीं किया गया, जिससे व्यथित होकर दिनांक 17.03.2015 को उपरोक्त परिवाद इस आयोग के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जिसमें दि न्यू इण्डिया
-5-
एश्योरेंस कं0लि0 एवं संजय रोड लाइंस जिसके द्वारा उपरोक्त माल भेजा गया था, को विपक्षीगण बनाया गया।
विपक्षी संख्या-1 बीमा कम्पनी द्वारा अपना जवाबदावा मय शपथ पत्र एवं संलग्नकों के साथ दाखिल किया गया, जिसमें उनके द्वारा कहा गया कि परिवादी द्वारा दाखिल क्लेम को बीमा कम्पनी द्वारा दिनांक 09.12.2015 को रिपुडिएट अर्थात् निरस्त कर दिया गया है, जो कि विपक्षी संख्या-1 के जवाबदावा के एनेक्जर-1, पृष्ठ 29 पर लगा है, जिसके अनुसार उनके द्वारा सात बिन्दुओं पर यह क्लेम निरस्त करना बताया गया है, जो निम्नवत् है:-
- संजय रोड लाइंस, ट्रांसपोर्टर एक रेपूटेड/रजिस्टर्ड ट्रांसपोर्ट कम्पनी नहीं है।
- एफ0आई0आर0 दर्ज कराने में पॉंच दिन की देरी की गयी है।
- परिवादी द्वारा कोई भी एफ0आई0आर0 ट्रांसपोर्टर के विरूद्ध दर्ज नहीं करायी गयी है।
- टाइगर नामक जहाज जिसके द्वारा माल भेजा जाना था, वह एक ऑयल टैंकर के रूप में दर्ज है।
- ट्रक ड्राइवर के द्वारा प्रथम सूचना रिपोर्ट अन्तर्गत धारा-420, 406 और 365 आई0पी0सी0 में दर्ज करायी गयी है।
- मालिक अर्थात् परिवादी द्वारा कोई भी प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज नहीं करायी गयी है।
- पुलिस द्वारा लगायी गयी अन्तिम आख्या पर परिवादी द्वारा कोई भी आपत्ति नहीं की गयी है।
-6-
उपरोक्त बिन्दुओं के आधार पर परिवादी का क्लेम निरस्त किया गया।
विपक्षी संख्या-2 संजय रोड लाइंस द्वारा भी अपना जवाबदावा दाखिल किया गया, जिसमें उनके द्वारा परिवाद पत्र में कथित बिन्दुओं का समर्थन किया गया और उनके द्वारा यह कहा गया है कि उनके ट्रांसपोर्ट द्वारा उपरोक्त माल को भदोही से मुम्बई के लिए भेजा गया था, परन्तु दिनांक 14.05.2014 को उपरोक्त ट्रक में चिरगॉंव, झॉंसी के पास लूट हो गयी, जिसकी सूचना ड्राइवर द्वारा सम्बन्धित पुलिस थाना में दी गयी थी, जो कि दिनांक 19.05.2014 को दर्ज की गयी, जिसमें पुलिस द्वारा अन्तिम आख्या लगा दी गयी है। अत: विपक्षी संख्या-1 बीमा कम्पनी ही पॉलिसी के अनुसार चोरी/लूट के माल की क्षतिपूर्ति देने के लिए उत्तरदायी है।
परिवाद की अन्तिम सुनवाई की तिथि पर परिवादी की ओर से विद्वान अधिवक्ता श्री विकास अग्रवाल, विपक्षी संख्या-1 की ओर से विद्वान अधिवक्ता श्री बी0पी0 दुबे और विपक्षी संख्या-2 की ओर से विद्वान अधिवक्ता श्री हिमांशु सूर्यवंशी उपस्थित आये हैं।
हमने उभय पक्ष को सुना एवं पत्रावली में उपलब्ध प्रपत्रों का गहनतापूर्वक परीक्षण किया, जिसके अनुसार विपक्षी संख्या-1 द्वारा दिनांक 06.05.2014 को एक मरीन कारगो इंश्योरेंस पॉलिसी 41,00,000/-रू0 की जारी की गयी थी, जिसके अनुसार 105
-7-
बण्डल कार्पेट परिवादी के गोदाम से बीमित होकर इस्ताम्बुल (टर्की) में खरीददार के गोदाम तक ले जाने हेतु बीमित किये गये थे और दिनांक 12.05.2014 को विपक्षी संख्या-2 के ट्रक द्वारा उपरोक्त माल अन्य दो व्यापारियों के माल के साथ भदोही से मुम्बई के लिए सड़क मार्ग द्वारा रवाना किया गया था और दिनांक 14.05.2014 को थाना-चिरगॉंव, जिला-झॉंसी में उपरोक्त ट्रक को लूट लिया गया और समस्त 316 बण्डल कार्पेट की लूट की गयी, जिसमें परिवादी के 105 बण्डल कार्पेट, जिनका बीमा 41,00,000/-रू0 के लिए किया गया था, भी शामिल थे। पुलिस द्वारा जांच की गयी, परन्तु माल व मुल्जिम का पता न लग पाने के कारण पुलिस द्वारा अन्तिम आख्या प्रस्तुत की गयी, जिसे दिनांक 19.10.2014 को सम्बन्धित न्यायालय द्वारा स्वीकार किया गया। यहॉं यह कहना समीचीन होगा कि लूट की घटना की सूचना के उपरान्त विपक्षी संख्या-1 बीमा कम्पनी द्वारा अपना इन्वेस्टीगेटर नियुक्त किया गया और उसके द्वारा दिनांक 13.10.2014 को अपनी आख्या प्रस्तुत की गयी, जिसमें उसने लूट की घटना को सही पाया। अत: इस बात की पुष्टि होती है कि उपरोक्त माल चोरी/लूट होने के बाद आज तक नहीं मिल पाया है और विपक्षी द्वारा दिनांक 13.10.2014 की रिपोर्ट के बाद भी परिवादी को बीमित धनराशि को अदा नहीं किया गया है। पत्रावली में विपक्षी द्वारा दाखिल दस्तावेजों में संलग्नक सं0-19 पर हमने यह पाया है कि बीमा कम्पनी के जॉंचकर्ता को ट्रक के ड्राइवर ने
-8-
यह बताया था कि टोल प्लाजा की रसीदें चिरगॉंव पुलिस ने जॉंच हेतु लिया था, जिसके आधार पर सन्तुष्ट होने के बाद उन्होंने एफ0आई0आर0 दर्ज किया था। अत: विपक्षी संख्या-1 बीमा कम्पनी द्वारा यह कहना कि एफ0आई0आर0 दर्ज कराने में पॉंच दिन की देरी है गलत है क्योंकि पत्रावली में दाखिल कागजों से यह स्पष्ट होता है कि चोरी होने के दिनांक 14.05.2014 के तुरन्त बाद ही ट्रक के ड्राइवर द्वारा सम्बन्धित पुलिस थाने में सम्पर्क किया गया और उन्हें सूचित किया गया, परन्तु पुलिस द्वारा अपनी जॉंच करने के बाद ही दिनांक 19.05.2014 को प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करायी गयी। विपक्षी संख्या-1 बीमा कम्पनी द्वारा यह कहना कि जिस पानी के जहाज में उपरोक्त माल मुम्बई से टर्की को जाना था, वह एक ऑयल टैंकर है, का कोई मतलब नहीं निकलता है क्योंकि वहॉं पहुँचने से पहले ही रास्ते में ट्रक को लूट लिया गया था और ट्रक मुम्बई तक पहुँच ही नहीं पाया था। यहॉं यह भी कहना समीचीन होगा कि अपने रिपुडिएशन लेटर दिनांक 09.12.2015 में विपक्षी संख्या-1 बीमा कम्पनी ने यह कहा है कि प्रथम सूचना रिपोर्ट ट्रक के ड्राइवर द्वारा दर्ज करायी गयी है, जबकि परिवादी द्वारा कोई भी एफ0आई0आर0 दर्ज नहीं करायी गयी है। इस सम्बन्ध में हमने पत्रावली में उपलब्ध कागजों में यह पाया कि पुलिस द्वारा एक मामले में एक ही एफ0आई0आर0 दर्ज की जाती है तथा परिवादी एवं ट्रांसपोर्टर द्वारा दी गयी शिकायत को पुलिस द्वारा यह कहते हुए नकार दिया गया कि उनके द्वारा पहले ही इस मामले में एक
-9-
एफ0आई0आर0 दर्ज करा ली गयी है। अत: यह कहना कि परिवादी द्वारा कोई एफ0आई0आर0 नहीं करायी गयी है, इसका कोई भी मतलब नहीं निकलता है। दौरान बहस परिवादी के अधिवक्ता द्वारा यह बताया गया कि उस ट्रक में भदोही से मुम्बई जाने हेतु परिवादी के 105 बण्डल कार्पेट के अलावा दो अन्य व्यापारियों का भी माल उक्त ट्रक में भदोही से मुम्बई जाने हेतु बुक कराया गया था, जिसमें कि एक व्यापारी ए0आर0 इण्टरनेशनल का भी माल था और सामान्य परिस्थितियों में विपक्षी संख्या-1 बीमा कम्पनी द्वारा उनका भी बीमा क्लेम नकारा गया, जिस पर ए0आर0 इण्टरनेशनल द्वारा जिला उपभोक्ता आयोग, बाराबंकी के समक्ष परिवाद संख्या-25/2015 दाखिल किया गया, जिसमें विपक्षी संख्या-1 बीमा कम्पनी को भी पार्टी बनाया गया चूँकि परिवादी की पॉलिसी और ए0आर0 इण्टरनेशनल की पॉलिसी विपक्षी संख्या-1 के बाराबंकी स्थित कार्यालय द्वारा जारी की गयी थी। अत: जिला उपभोक्ता आयोग, बाराबंकी द्वारा ए0आर0 इण्टरनेशनल द्वारा दाखिल परिवाद में परिवादी के हक में आदेश पारित किये गये और विपक्षी बीमा कम्पनी को ए0आर0 इण्टरनेशनल का माल जो कि 6,90,000/-रू0 में बीमित था, की अदायगी हेतु आदेश पारित किये गये और विपक्षी संख्या-1 बीमा कम्पनी द्वारा उपरोक्त मामले में सम्पूर्ण अदायगी कर दी गयी है, जिसके विरूद्ध कोई भी अपील प्रस्तुत नहीं की गयी है। अत: परिवादी के मामले में भी यह बल मिलता है कि जब विपक्षी संख्या-1 द्वारा उसी ट्रक में जा रहे
-10-
ए0आर0 इण्टरनेशनल के कार्पेट की लूट का बीमा क्लेम एक न्यायालय के आदेश के उपरान्त दे दिया गया है तो परिवादी के माल के बीमा क्लेम को भी विपक्षी संख्या-1 द्वारा दिया जाना समीचीन होगा।
सम्पूर्ण तथ्यों एवं परिस्थितियों पर विचार करते हुए हम इस मत के हैं कि विपक्षी संख्या-1 बीमा कम्पनी द्वारा परिवादी के क्लेम को रिपुडिएट किये जाने के कारण सेवा में कमी की गयी है। अत: परिवादी को बीमित धनराशि मय ब्याज दिलाया जाना उचित प्रतीत होता है और बीमित धनराशि 41,00,000/-रू0 परिवाद दाखिल करने की तिथि दिनांक 17.03.2015 से अदायगी की तिथि तक 09 प्रतिशत वार्षिक की दर से ब्याज सहित एक माह के अन्दर परिवादी को दिलाया जाना समीचीन होगा।
आदेश
परिवादी का परिवाद अंशत: स्वीकार किया जाता है। विपक्षी संख्या-1 बीमा कम्पनी को आदेशित किया जाता है कि वह परिवादी को इस निर्णय के एक माह के अन्दर बीमित धनराशि 41,00,000/-रू0 (इक्तालिस लाख रूपया मात्र) परिवाद दाखिल करने की तिथि दिनांक 17.03.2015 से अदायगी की तिथि तक 09 प्रतिशत वार्षिक की दर से ब्याज सहित अदा करे। इसके साथ ही विपक्षी संख्या-1 बीमा कम्पनी 25,000/-रू0 (पच्चीस हजार रूपया मात्र) क्षतिपूर्ति एवं 25,000/-रू0 (पच्चीस हजार रूपया मात्र) वाद व्यय के रूप में परिवादी को इस निर्णय के एक माह के अन्दर
-11-
अदा करे। अन्यथा की स्थिति में एक माह के बाद उपरोक्त समस्त धनराशि पर 12 प्रतिशत वार्षिक की दर से ब्याज देय होगा।
आशुलिपिक से अपेक्षा की जाती है कि वह इस निर्णय/आदेश को आयोग की वेबसाइट पर नियमानुसार यथाशीघ्र अपलोड कर दें।
(गोवर्धन यादव) (विकास सक्सेना)
सदस्य सदस्य
जितेन्द्र आशु0
कोर्ट नं0-2