राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, उत्तर प्रदेश, लखनऊ।
सुरक्षित
अपील सं0-1785/2014
(जिला उपभोक्ता आयोग, बुलन्दशहर द्वारा परिवाद सं0-191/2005 में पारित प्रश्नगत निर्णय एवं आदेश दिनांक 05-08-2014 के विरूद्ध)
डॉ0 राकेश कक्कड़ पुत्र श्री बी0पी0 कक्कड़ निवासी कक्कड़ नर्सिंग होम, भूड़, नगर बुलन्दशहर, परगना बरन, जिला बुलन्दशहर।
...........अपीलार्थी/परिवादी।
बनाम
1. दी न्यू इण्डिया एश्योरेंस कम्पनी लि0 पंजीकृत एवं मुख्य कार्यालय न्यू इण्डिया एश्योरेंस बिल्डिंग-87, महात्मा गांधी रोड फोर्ट मुम्बई द्वारा चयेयरमेन/मैनेजिंग डायरेक्टर।
2. शाखा प्रबन्धक दी न्यू इण्डिया एश्योरेंस कम्पनी लि0 शाखा कार्यालय पुरानी जेल के सामने अस्पताल रोड, नगर बुलन्दशहर, जिला बुलन्दशहर।
3. रीजनल मैनेजर दी न्यू इण्डिया एश्योरेंस कम्पनी लि0 दिल्ली क्षेत्रीय कार्यालय द्वितीय, 10वां तल, स्कोप मीनार, डिस्ट्रीक सैन्टर लक्ष्मीनगर, दिल्ली-110092.
4. मण्डलीय प्रबन्धक दी न्यू इण्डिया एश्योरेंस कम्पनी लि0 मण्डलीय कार्यालय 38 नवयुग मार्केट गाजियाबाद।
5. बीमा लोकपाल, कार्यालय इंश्योरेंस ओबटर्स मैन, जीवन भवन फेस-2, 6वॉं तल नवल किशोर रोड, हजरतगंज लखनऊ-226001.
................. प्रत्यर्थीगण/विपक्षीगण।
समक्ष:-
1. मा0 श्री राजेन्द्र सिंह, सदस्य।
2. मा0 श्री सुशील कुमार, सदस्य।
अपीलार्थी की ओर से उपस्थित: श्री सुशील कुमार शर्मा विद्वान अधिवक्ता।
प्रत्यर्थीगण की ओर से उपस्थित : श्री दिनेश कुमार विद्वान अधिवक्ता।
दिनांक :- 21-03-2023.
मा0 श्री राजेन्द्र सिंह, सदस्य द्वारा उदघोषित
निर्णय
यह अपील, जिला उपभोक्ता आयोग, बुलन्दशहर द्वारा परिवाद सं0-191/2005 में पारित प्रश्नगत निर्णय एवं आदेश दिनांक 05-08-2014 के विरूद्ध योजित की गयी है।
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संक्षेप में अपीलार्थी का कथन है कि उसने न्यू इण्डिया एश्योरेंस कम्पनी लि0 से दिनांक 14-08-1992 को डॉक्टर इण्डेमिनिटी इंश्योरेंस पालिसी प्राप्त की थी जिसके अन्तर्गत डॉक्टर के द्वारा यदि बीमा अवधि में रोगी के प्रति किसी भी क्षति के भुगतान करने के दायित्व के साथ-साथ यदि रोगी कोई वाद या परिवाद दायर करता है तब डॉक्टर की ओर से बचाव करने का दायित्व भी बीमा कम्पनी का होगा। दिनांक 19-09-1992 को अपीलार्थी के यहॉं रोगी का आपरेशन किया गया जिससे असन्तुष्ट होने पर अपीलार्थी के विरूद्ध एक परिवाद प्रस्तुत किया गया और 6,58,850/- रू0 की मांग की। वाद में बीमा कम्पनी को भी पक्षकार बनाया गया। वाद में आपसी सलाह करके अपीलार्थी ने 15,000/- रू0 रोगी को प्रदान किया। इसके अतिरिक्त अपीलार्थी को इस केस को लड़ने के लिए 61,000/- रू0 तथा 24,500/- रू0 भी व्यय करने पड़े, जिसकी प्रतिपूर्ति के लिए अपीलार्थी ने बीमा कम्पनी को लिखा किन्तु बीमा कम्पनी ने कोई उत्तर नहीं दिया तब बीमा कम्पनी के विरूद्ध वर्तमान परिवाद प्रस्तुत किया गया, जिसे विद्वान जिला आयोग ने खारिज कर दिया।
अपीलार्थी का यह भी कथन है कि प्रश्नगत निर्णय एवं आदेश विधि विरूद्ध है। बीमा कम्पनी को डॉक्टर द्वारा किए गए व्यय की प्रतिपूर्ति करनी चाहिए थी जो उसने नहीं की। अपीलार्थी ने समझौते की धनराशि 15,000/- रू0 परिवादी को अदा किए किन्तु उसका वाद के चलाने और अपनी प्रतिरक्षा में काफी धनराशि व्यय करनी पड़ी जिसे विद्वान जिला आयोग ने नहीं देखा। अत: ऐसी स्थिति में मा0 राज्य आयोग से निवेदन है कि विद्वान जिला आयोग का प्रश्नगत निर्णय एवं आदेश अपास्त होने एवं अपील स्वीकार होने योग्य है।
हमने उभय पक्ष के विद्वान अधिवक्तागण को सुना एवं पत्रावली का
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सम्यक रूप से परिशीलन किया।
हमने विद्वान जिला आयोग के प्रश्नगत निर्णय एवं आदेश का अवलोकन किया। विद्वान जिला आयोग ने लिखा है कि पक्षकारों के मध्य हुए फैसला हुआ था कि द्वितीय पक्ष डॉ0 राकेश कक्कड़ प्रथम पक्ष श्री इकवाल एवं नवेद अहमद को 15000/- रू0 की धनराशि का भुगतान करने पर प्रथम पक्ष अपनी प्रस्तुत याचिका एवं निगरानी को वापस ले लेगा। स्पष्ट है कि यहॉं पक्षकारों के बीच एक समझौता हुआ। ऐसे किसी लिखित समझौता में बीमा कम्पनी पक्षकार नहीं है। विद्वान जिला आयोग ने इन तथ्यों को देखते हुए कहा कि बीमाधारक द्वारा उक्त फैसला बीमा कम्पनी की लिखित स्वीकृति के बिना एवं बीमा कम्पनी के अधिकृत व्यक्ति की अनुपस्थिति में निष्पादित किया गया। अत: ऐसी स्थिति में बीमा कम्पनी का कोई उत्तरदायित्व नहीं है।
अपीलार्थी के विद्वान अधिवक्ता ने कहा कि चूँकि बीमा कम्पनी ने प्रतिपूर्ति करने का दायित्व ले रखा था, अत: उसे यह धनराशि देनी चाहिए। यदि ऐसा होता तो कोई भी डॉक्टर विपक्षी के साथ अनाप-सनाप धनराशि का समझौता कर ले और फिर बीमा कम्पनी से उसकी धनराशि की मांग करे। समझौता लिखित होने की दशा में बीमा कम्पनी आवश्यक पक्षकार होगी क्योंकि प्रतिपूर्ति उसे ही करनी है।
वर्तमान मामले में ऐसा कोई लिखित स्वीकृति पत्र नहीं है, जो बीमा कम्पनी ने स्वीकार किया हो। उपरोक्त तथ्यों एवं परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए हम इस निष्कर्ष पर पहुँचते हैं कि विद्वान जिला उपभोक्ता आयोग द्वारा दिया गया प्रश्नगत निर्णय एवं आदेश विधि सम्मत है और इसमें किसी प्रकार के हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है। तद्नुसार वर्तमान
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अपील निरस्त किए जाने योग्य है।
आदेश
वर्तमान अपील निरस्त की जाती है। जिला उपभोक्ता आयोग, बुलन्दशहर द्वारा परिवाद सं0-191/2005 में पारित प्रश्नगत निर्णय एवं आदेश दिनांक 05-08-2014 की पुष्टि की जाती है।
अपील व्यय उभय पक्ष पर।
उभय पक्ष को इस निर्णय की प्रमाणित प्रति नियमानुसार उपलब्ध करायी जाए।
वैयक्तिक सहायक से अपेक्षा की जाती है कि वह इस निर्णय को आयोग की वेबसाइट पर नियमानुसार यथाशीघ्र अपलोड कर दें।
(सुशील कुमार) (राजेन्द्र सिंह)
सदस्य सदस्य
निर्णय आज खुले न्यायालय में हस्ताक्षरित, दिनांकित होकर उद्घोषित किया गया।
(सुशील कुमार) (राजेन्द्र सिंह)
सदस्य सदस्य
प्रमोद कुमार
वैय0सहा0ग्रेड-1,
कोर्ट नं.-2.