Uttar Pradesh

StateCommission

A/2003/2791

Prem Pal Singh - Complainant(s)

Versus

M/S Punjab Tractors Ltd. - Opp.Party(s)

Arun Tandan

31 Oct 2023

ORDER

STATE CONSUMER DISPUTES REDRESSAL COMMISSION, UP
C-1 Vikrant Khand 1 (Near Shaheed Path), Gomti Nagar Lucknow-226010
 
First Appeal No. A/2003/2791
( Date of Filing : 14 Oct 2003 )
(Arisen out of Order Dated 15/09/2003 in Case No. C/159/2002 of District Etah)
 
1. Prem Pal Singh
Etah
...........Appellant(s)
Versus
1. M/S Punjab Tractors Ltd.
Ropar
...........Respondent(s)
 
BEFORE: 
 HON'BLE MR. JUSTICE ASHOK KUMAR PRESIDENT
 
PRESENT:
 
Dated : 31 Oct 2023
Final Order / Judgement

( मौखिक )

राज्‍य उपभोक्‍ता विवाद प्रतितोष आयोग, उ0प्र0 लखनऊ।

 

अपील संख्‍या : 2791/2003

 

 

प्रेम पाल सिंह पुत्र श्री बहोरी सिंह

बनाम्

 

पंजाब ट्रेक्‍टर्स लिमिटेड व दो अन्‍य

समक्ष  :-

     1-मा0 न्‍यायमूर्ति श्री अशोक कुमार,       अध्‍यक्ष।   

 

     उपस्थिति :

     अपीलार्थी  की ओर से उपस्थित-   श्री अरूण टंण्‍डन।

     प्रत्‍यर्थी  की ओर से उपस्थित-        कोई नहीं।

दिनांक :31-10-2023

मा0 न्‍यायमूर्ति श्री अशोक कुमार, अध्‍यक्ष  द्वारा उदघोषित निर्णय

     प्रस्‍तुत अपील अत्‍यन्‍त पुरानी है और वर्ष 2003 से इस न्‍यायालय के सम्‍मुख सुनवाई हेतु लम्बित है। आज अपील की सुनवाई के समय अपीलार्थी के विद्धान अधिवक्‍ता श्री अरूण टंण्‍डन उपस्थित है, जब कि प्रत्‍यर्थी की ओर से कोई उपस्थित नहीं है। अपीलार्थी के विद्धान अधिवक्‍ता श्री अरूण टंण्‍डन को सुना गया तथा पत्रावली पर उपलब्‍ध समस्‍त  प्रपत्रों एवं जिला आयोग द्वारा पारित निर्णय एवं आदेश का भली-भॉंति अवलोकन करने के पश्‍चात अपील का निस्‍तारण आज ही गुणदोष के आधार पर किया जा रहा है।

 

-2-

     परिवाद संख्‍या-159/2002 प्रेम पाल सिंह  बनाम पंजाब ट्रेक्‍टर्स लि0 व दो अन्‍य में जिला उपभोक्‍ता आयोग, एटा द्वारा पारित निर्णय और आदेश दिनां‍क 15-09-2003 के विरूद्ध  प्रस्‍तुत अपील उपभोक्‍ता संरक्षण अधिनियम के अन्‍तर्गत इस न्‍यायालय के सम्‍मुख प्रस्‍तुत की गयी है।

     ‘’आक्षेपित निर्णय एवं आदेश के द्वारा विद्धान जिला आयोग ने परिवाद निरस्‍त कर दिया है।‘’

     विद्धान जिला आयोग द्वारा पारित निर्णय एवं आदेश से क्षुब्‍ध होकर   परिवाद के परिवादी की ओर से यह अपील इस न्‍यायालय के सम्‍मुख योजित की गयी है।

     अपील के निर्णय हेतु संक्षिप्‍त सुसंगत तथ्‍य इस प्रकार है कि परिवादी ने विपक्षी संख्‍या-3 से, जो कि विपक्षी संख्‍या-1 व 2 के अधिकृत एजेन्‍ट है, से एक ट्रैक्‍टर क्रय किया और परिवादी ने जब ट्रैक्‍टर से कृषि व अन्‍य कार्य करना प्रारम्‍भ किया तो ट्रैक्‍टर ने अपनी क्षमता के अनुसार लोड नहीं लिया, जिसकी शिकायत परिवादी ने विपक्षी संख्‍या-3 से की। विपक्षी संख्‍या-3 द्वारा ट्रैक्‍टर का परीक्षण किया गया और ट्रैक्‍टर को ठीक कराने का आश्‍वासन दिया किन्‍तु छ: माह का समय व्‍यतीत हो जाने के पश्‍चात भी विपक्षी संख्‍या-3 द्वारा ट्रैक्‍टर को ठीक नहीं कराया गया। परिवादी ने विपक्षी संख्‍या-3 से ट्रैक्‍टर को ठीक कराने हेतु पुन: अनुरोध किया किन्‍तु विपक्षीगण द्वारा ट्रैक्‍टर को सही नहीं कराया गया, जिससे परिवादी को काफी मानसिक, शारीरिक व आर्थिक कष्‍ट का सामना करना

 

 

-3-

पडा, जो कि विपक्षीगण के स्‍तर से सेवा में कमी है अत: विवश होकर परिवादी ने परिवाद जिला आयोग के समक्ष योजित किया है।

     विपक्षीगण को नोटिस भेजी गयी। बावजूद तामीला विपक्षीगण की ओर से कोई उपस्थित नहीं हुआ। अत: विपक्षीगण के विरूद्ध एकतरफा कार्यवाही की गयी।

     विद्धान जिला आयोग द्वारा परिवादी को विस्‍तारपूर्वक सुनने तथा पत्रावली पर उपलब्‍ध समस्‍त प्रपत्रों का सम्‍यक परिशीलन एवं परीक्षण करने के उपरान्‍त विपक्षीगण के स्‍तर से  सेवा में किसी प्रकार की कोई कमी न पाते हुए परिवाद निरस्‍त कर दिया है।

     अपीलार्थी  के विद्धान अधिवक्‍ता का तर्क है कि विद्धान जिला आयोग द्वारा पारित निर्णय एवं आदेश साक्ष्‍य एवं विधि के विरूद्ध है और विद्धान जिला आयोग द्वारा समस्‍त तथ्‍यों पर गहनतापूर्वक विचार किये बिना विधि विरूद्ध ढंग से निर्णय एवं आदेश पारित किया गया है। अत: अपील स्‍वीकार करते हुए जिला आयोग द्वारा पारित निर्णय एवं आदेश को अपास्‍त किया जावे।

     मेरे द्वारा अपीलार्थी  के विद्धान अधिवक्‍ता  को विस्‍तारपूर्वक सुना गया तथा जिला  आयोग द्वारा पारित निर्णय एवं आदेश एवं पत्रावली पर उपलब्‍ध समस्‍त प्रपत्रों का भली-भॉंति परिशीलन एवं परीक्षण किया गया।

 

 

-4-

     अपीलार्थी के विद्धान अधिवक्‍ता को सुनने तथा पत्रावली पर उपलब्‍ध समस्‍त प्रपत्रों एवं जिला आयोग द्वारा पारित निर्णय एवं आदेश का सम्‍यक परिशीलन एवं परीक्षण करने के उपरान्‍त मैं इस मत का हूँ कि विद्धान जिला आयोग द्वारा समस्‍त तथ्‍यों पर गहनतापूर्वक विचार करने के पश्‍चात विधि अनुसार निर्णय एवं आदेश पारित किया गया है जिसमें हस्‍तक्षेप हेतु उचित आधार नहीं है। तदनुसार प्रस्‍तुत अपील निरस्‍त किये जाने योग्‍य है।

आदेश

     अपील निरस्‍त की जाती है। विद्धान जिला आयोग द्वारा पारित निर्णय एवं आदेश की पुष्टि की जाती है।

     अपील योजित करते समय अपीलार्थी द्वारा अपील में जमा धनराशि (यदि कोई हो) तो नियमानुसार अर्जित ब्‍याज सहित जिला आयोग को विधि अनुसार निस्‍तारण हेतु यथाशीघ्र प्रेषित की जावे।

     आशुलिपिक से अपेक्षा की जाती है कि वह इस निर्णय/आदेश को आयोग की वेबसाइट पर नियमानुसार यथाशीघ्र अपलोड कर दें।

 

 

(न्‍यायमूर्ति अशोक कुमार)

अध्‍यक्ष

प्रदीप मिश्रा, आशु0 कोर्ट नं0-1

 
 
[HON'BLE MR. JUSTICE ASHOK KUMAR]
PRESIDENT
 

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