राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, उ0प्र0, लखनऊ।
सुरक्षित
अपील संख्या-1368/2003
(जिला उपभोक्ता फोरम, फैजाबाद द्वारा वाद संख्या-8/1996 में पारित निर्णय/आदेश दिनांक 30.04.2003 के विरूद्ध)
1. सुप्रीटेण्डेंट आफ पोस्ट आफिसेज, डिवीजन फैजाबाद, जिला फैजाबाद।
2. असिस्टेण्ट पोस्ट मास्टर, पोस्ट आफिस, जहांगीरगंज, जिला अम्बेडकर नगर, डिवीजन, फैजाबाद।
अपीलार्थीगण/विपक्षी संख्या-2 व 3
बनाम्
1. मनोज कुमार पाण्डेय पुत्र श्री राम दत्त पाण्डेय, निवासी कस्बा जहांगीरगंज, पोस्ट जहांगीरगंज, जिला अम्बेडकर नगर, फैजाबाद।
2. परशुराम यादव पुत्र श्री मुसई यादव, निवासी ग्राम मभोरा, पोस्ट अलान्दीरपुर, जिला अम्बेडकर नगर, पोस्ट मैन, पोस्ट आफिस जहांगीरगंज, जिला अम्बेडकर नगर।
प्रत्यर्थीगण/परिवादी/विपक्षी संख्या-1
समक्ष:-
1. माननीय श्री जितेन्द्र नाथ सिन्हा, पीठासीन सदस्य।
2. माननीय श्री संजय कुमार, सदस्य।
अपीलार्थीगण की ओर से उपस्थित : डा0 उदय वीर सिंह, विद्वान अधिवक्ता।
प्रत्यर्थी संख्या-1 की ओर से उपस्थित : श्री आर0के0 मिश्रा, विद्वान अधिवक्ता।
प्रत्यर्थी संख्या-2 की ओर से उपस्थित : कोई नहीं।
दिनांक 20.10.2016
मा0 श्री संजय कुमार, सदस्य द्वारा उदघोषित
निर्णय
यह अपील, परिवाद संख्या-8/1996, मनोज कुमार पाण्डेय बनाम विपक्षी संख्या-1 परशुराम यादव, तत्कालीन पोस्ट मैन, पोस्ट आफिस जहांगीरगंज, जिला फैजाबाद एवं विपक्षी संख्या-2 सहायक पोस्ट मास्टर, पोस्ट आफिस जहांगीरगंज, जिला फैजाबाद तथा विपक्षी संख्या-3 प्रवर अधीक्षक डाकघर, फैजाबाद में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष फोरम, फैजाबाद द्वारा पारित निर्णय/आदेश दिनांक 30.04.2003 से क्षुब्ध होकर विपक्षी संख्या-2 व 3/अपीलार्थीगण की ओर से योजित की गयी है, जिसके अन्तर्गत जिला फोरम द्वारा निम्नवत् आदेश पारित किया गया है :-
‘’ परिवाद पत्र स्वीकार किया जाता है। विपक्षीगण को आदेशित किया जाता है, कि वह परिवादी को रजिस्टर्ड व सामान्य डाकें समय से पहुँचा दें, और मु0 50,000/- (पचार हजार रूपये) क्षतिपूर्ति एक माह के अन्दर परिवादी को अदा कर दें अन्यथा उपरोक्त धनराशि पर दिनांक 03.1.96 (प्रार्थना पत्र प्रस्तुत करने की तिथि) से 6 % प्रतिवर्ष की दर से ब्याज भी परिवादी विपक्षीगण से पाने का अधिकारी होगा। ‘’
उपरोक्त वर्णित निर्णय/आदेश से क्षुब्ध होकर वर्तमान अपील, विपक्षी संख्या-2 व 3/अपीलार्थीगण की ओर से योजित की गयी है।
अपीलार्थीगण की ओर से विद्वान अधिवक्ता डा0 उदय वीर सिंह तथा प्रत्यर्थी संख्या-1 की ओर से विद्वान अधिवक्ता श्री आर0के0 मिश्रा उपस्थित हैं। प्रत्यर्थी संख्या-2 को पंजीकृत डाक के माध्यम से नोटिस भेजा गया था, जो बिना तामील वापस प्राप्त नहीं हुआ है। इस प्रकार प्रत्यर्थी संख्या-2 पर तामीला पर्याप्त स्वीकार करते हुए विद्वान अधिवक्तागण को विस्तार से सुना गया एवं प्रश्नगत निर्णय/आदेश तथा उपलब्ध अभिलेखों का गम्भीरता से परिशीलन किया गया।
परिवाद पत्र का अभिवचन संक्षेप में इस प्रकार है कि परिवादी/प्रत्यर्थी संख्या-1 की कस्बा, जहांगीरगंज, में वर्ष 1980 से अजय आटोसेल्स के नाम से एक दुकान चल रही है और वह दुकान का प्रोपराइटर भी है। प्रश्नगत दुकान के शेष भाग में ही वह अपने परिवार के साथ निवास भी करता है। परिवादी ने वर्ष 1990 में बीको इण्डस्ट्रीज, नई दिल्ली से बीको ग्राण्ड डीजल व मोबिल फिल्टर एजेंसी ली थी, जो जनवरी 1995 तक सुचारू रूप से चलती रही एवं विगत कुछ समय पूर्व से विपक्षी संख्या-1/प्रत्यर्थी संख्या-2, परशुराम यादव, तत्कालीन पोस्ट मैन ने अपने लड़के के नाम से जहांगीरगंज में एक दुकान खोली और विपक्षी संख्या-1/प्रत्यर्थी संख्या-2, परशुराम यादव, तत्कालीन पोस्ट मैन के भाई ने भी डीजल व मोबिल फिल्टर की एक दुकान जहांगीरगंज बाजार में चलाना शुरू कर दी, तभी से विपक्षी संख्या-1/प्रत्यर्थी संख्या-2, परशुराम यादव, तत्कालीन पोस्ट मैन ने अपने लड़के और भाई से पारिवारिक सम्बन्ध को निभाते हुए व्यावसायिक प्रतिबद्धता के कारण परिवादी/प्रत्यर्थी संख्या-1 की दुकान से रंजिस रखने लगा और उसके नुकसान की फिराक में लग गया। माह जनवरी 1995 में बीको इण्डस्ट्रीज नई दिल्ली द्वारा परिवादी/प्रत्यर्थी संख्या-1 को माल बिल्टी द्वारा भेजा गया और पूर्व की भांति उस माल की बिल्टी परिवादी/प्रत्यर्थी संख्या-1, अजय आटोसेल्स, जहांगीरगंज, फैजाबाद के पते पर रजिस्ट्री डाक से दिनांक 17.01.1995 को पोस्ट कर दी। विपक्षी संख्या-1/प्रत्यर्थी संख्या-2, परशुराम यादव, तत्कालीन पोस्ट मैन ने रजिस्ट्री पत्र पर जांचबूझकर फर्जी इस आशय की टिप्पणी कर दी कि पता नहीं चला। फिर दूसरी रजिस्ट्री पर लिखा कि प्राप्तकर्ता बाहर सर्विस करता है, अत: वापस। बीको इण्डस्ट्रीज ने पुन: परिवादी/प्रत्यर्थी संख्या-1 को माल की बिल्टी आदि छुड़ाने के लिए आवश्यक कागजातों को रजिस्ट्री पत्र दिनांक 28.01.1995 को भेजा, वह रजिस्ट्री पत्र भी पोस्ट आफिस, जहांगीरगंज में आया, इस रजिस्ट्री पत्र में भी विपक्षी संख्या-1/प्रत्यर्थी संख्या-2, परशुराम यादव, तत्कालीन पोस्ट मैन ने जानबूझकर परिवादी/प्रत्यर्थी संख्या-1 को क्षति कारित करने की नियत से फर्जी तौर पर लिखा कि प्राप्तकर्ता नहीं मिला और इस टिप्पणी के साथ दिनांक 08.02.1995 को रजिस्ट्री वापस कर दी।
परिवाद पत्र में इस आशय का स्पष्ट अभिवचन किया गया कि दोनों रजिस्ट्री पत्र के बावत जानकारी होने पर परिवादी ने विपक्षी संख्या-2/अपीलार्थी संख्या-2, सहायक पोस्ट मास्टर, पोस्ट आफिस, जहांगीरगंज को विपक्षी संख्या-1/प्रत्यर्थी संख्या-2, परशुराम यादव, तत्कालीन पोस्ट मैन के कृत्य से अवगत कराया और उसकी शिकायत की, परन्तु उनके द्वारा इस पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। यह भी अभिवचित किया गया कि विपक्षी संख्या-1 व 2 के साजिशपूर्ण कृत्य के कारण परिवादी/प्रत्यर्थी संख्या-1 को अपनी बिल्टी का माल छुड़ाने हेतु रू0 34/- का अर्थदण्ड देना पड़ा और रूपये 10,000/- के माल की भी क्षति हुई, जिससे परिवादी/प्रत्यर्थी संख्या-1 के व्यापार पर असर पड़ा एवं बिल्टी को न छुड़ाये जाने के कारण बीको इण्डस्ट्रीज, नई दिल्ली ने परिवादी/प्रत्यर्थी संख्या-1 के सन्दर्भ में निर्गत एजेन्सी को भी निरस्त कर दिया। अत: परिवादी/प्रत्यर्थी संख्या-1 ने विपक्षी संख्या-1 व 2 की शिकायत विपक्षी संख्या-3/अपीलार्थी संख्या-1, प्रवर अधीक्षक, डाकघर फैजाबाद से की, परन्तु उनके द्वारा भी इस पर कोई कार्यवाही नहीं की गयी। तत्पश्चात परिवादी/प्रत्यर्थी संख्या-1 ने प्रश्नगत परिवाद रू0 50,000/- की क्षतिपूर्ति दिलाये जाने हेतु एवं विपक्षीगण को इस सन्दर्भ में आदेशित करने का अनुरोध किया कि परिवादी की दुकान अजय आटोसेल्स जहांगीरगंज, फैजाबाद के नाम से आने वाले सभी रजिस्टर्ड व सामान्य पत्रों की डिलीवरी परिवादी/प्रत्यर्थी संख्या-1 को किया जाना सुनिश्चित किया जाये।
जिला फोरम के समक्ष विपक्षी संख्या-2 व 3 की ओर से परिवाद पत्र का विरोध किया गया और यह मुख्य रूप से अभिवचित किया गया कि परिवादी अजय आटोसेल्स जहांगीरगंज के नाम से कोई बोर्ड भी प्रश्नगत दुकान में नहीं लगा है एवं परिवादी द्वारा पोस्ट आफिस को इस आशय की सूचना भी नहीं दी गयी कि अयज आटोसेल्स का, परिवादी प्रोपराइटर है। ऐसी स्थिति में प्रश्गनत परिवाद खारिज किये जाने योग्य है।
जिला फोरम के समक्ष विपक्षी संख्या-1 की ओर से कोई लिखित कथन प्रस्तुत किया जाना नहीं पाया जाता है।
जिला फोरम द्वारा उभय पक्ष के अभिवचन और उपलब्ध अभिलेखों पर विचार करते हुए उपरोक्त वर्णित निर्णय/आदेश पारित किया गया।
उक्त वर्णित निर्णय/आदेश से क्षुब्ध होकर वर्तमान अपील, विपक्षी संख्या-2 व 3/अपीलार्थीगण की ओर से योजित करते हुए मुख्य रूप से यह तर्क प्रस्तुत किया गया कि परिवादी/प्रत्यर्थी संख्या-1 विपक्षी संख्या-2 व 3/अपीलार्थीगण के सन्दर्भ में उपभोक्ता की श्रेणी में नहीं आता है, क्योंकि जिन पत्रों को वापस किये जाने की बात कही जाती है, वह पत्र परिवादी/प्रत्यर्थी संख्या-1 ने नहीं भेजा था, बल्कि बीको इण्डस्ट्रीज, नई दिल्ली द्वारा भेजा जाना कहा जाता है। अत: परिवादी/प्रत्यर्थी संख्या-1 द्वारा योजित प्रश्नगत परिवाद जिला फोरम के समक्ष अपोषणीय है। अपीलार्थीगण के विद्वान अधिवक्ता द्वारा यह भी कहा गया कि धारा-6 भारतीय पोस्ट आफिस एक्ट 1989 के प्रावधानों को दृष्टिगत रखते हुए प्रश्नगत परिवाद निरस्त होने योग्य है। अपीलार्थीगण के विद्वान अधिवक्ता ने अपने कथन के समर्थन में मा0 राष्ट्रीय आयोग द्वारा Union off India & Ors Vs M.L. Bora 2011 (2) CPC 179 की ओर पीठ का ध्यान आकर्षित कराया। उपोक्त वर्णित नजीर में मा0 राष्ट्रीय आयोग द्वारा स्पष्ट रूप से निम्नलिखित मत व्यक्त किया गया है :-
“ Section 6 grants complete immunity to the Government for the loss, misdelivery or damage to the postal articles. In the present case neither any allegation has been made against any officer of the Postal Department that the loss or damage was caused due to fraudulent or willful act or default of such an officer, nor any of the employees of the Department has been impleaded as a party-Respondent making allegations as stated above. In the absence of same no relief can be granted against any of the officers of the department.
We, respectfully follow the view taken in the aforesaid judgment and set aside the interpretation put by the For a below on Section 6, as the same runs counter to the law laid down by this Commission.”
वर्तमान प्रकरण में परिवादी/प्रत्यर्थी संख्या-1 द्वारा विपक्षी संख्या-1/प्रत्यर्थी संख्या-2, परशुराम यादव, तत्कालीन पोस्ट मैन के कृत्य के सन्दर्भ में उपरोक्त अभिवचन किया गया, जिसको पुन: दोहराये जाने का कोई औचित्य नहीं है। प्रस्तुत प्रकरण में मात्र इतना ही कहना पर्याप्त है कि जिला फोरम के समक्ष भी विपक्षी संख्या-1/प्रत्यर्थी संख्या-2, परशुराम यादव, तत्कालीन पोस्ट मैन उपस्थित नहीं हुए थे और वर्तमान अपील में भी वह उपस्थित नहीं हुए। विपक्षी संख्या-2 व 3/अपीलार्थीगण की ओर से भी अपने अधीन कार्यरत उपरोक्त कर्मचारी अर्थात् विपक्षी संख्या-1, परशुराम यादव, तत्कालीन पोस्ट मैन के शपथ पत्र को भी प्रस्तुत नहीं किया गया। इस प्रकार विपक्षी संख्या-1/प्रत्यर्थी संख्या-2, परशुराम यादव, तत्कालीन पोस्ट मैन के सन्दर्भ में जो अभिवचन परिवादी/प्रत्यर्थी संख्या-1 द्वारा किये गये हैं, उनका खण्डन नहीं किया जा सका। अपीलार्थीगण द्वारा यह कहा गया कि विपक्षी संख्या-1/प्रत्यर्थी संख्या-2, परशुराम यादव, तत्कालीन पोस्ट मैन द्वारा नियम के अधीन कार्य किया गया है। अत: पीठ इस निष्कर्ष पर पहुँचती है कि विपक्षी संख्या-1/प्रत्यर्थी संख्या-2, परशुराम यादव, तत्कालीन पोस्ट मैन द्वारा किया गया कृत्य Fraudulently या willful act की श्रेणी में आता है। इस सन्दर्भ में जिला फोरम द्वारा जो निष्कर्ष दिया गया है, उसमें कोई विधिक त्रुटि होना नहीं पाया जाता है। वर्तमान प्रकरण में विपक्षी संख्या-1/प्रत्यर्थी संख्या-2, परशुराम यादव, तत्कालीन पोस्ट मैन द्वारा परिवादी/प्रत्यर्थी संख्या-1 को रजिस्ट्री पत्र जानबूझकर उपलब्ध नहीं कराया गया, जिससे परिवादी/प्रत्यर्थी संख्या-1 को आर्थिक क्षति उठानी पड़ी और एजेंसी को भी निरस्त कर दिया गया। इस प्रकार वर्तमान प्रकरण में धारा-6 भारतीय पोस्ट आफिस एक्ट 1989 का कोई लाभ अपीलार्थीगण को प्राप्त नहीं है तथा अपीलार्थीगण की ओर से प्रस्तुत उपरोक्त नजीर का भी कोई लाभ वर्तमान प्रकरण में उनको प्राप्त नहीं है। वर्तमान प्रकरण में अविवादित रूप से विपक्षी संख्या-1/प्रत्यर्थी संख्या-2, परशुराम यादव, तत्कालीन पोस्ट मैन के कृत्य से परिवादी/प्रत्यर्थी संख्या-1 को क्षति कारित हुई और अविवादित रूप से वह विपक्षी संख्या-2 व 3/अपीलार्थीगण का कर्मचारी है, अत: विपक्षी संख्या-2 व 3/अपीलार्थीगण भी विपक्षी संख्या-1/प्रत्यर्थी संख्या-2 के कृत्य के लिए (वाइकेरियन्स लाइबिल्टी) Vicariouns liability के अन्तर्गत जिम्मेदार हैं।
अब प्रश्न यह उठता है कि जिला फोरम द्वारा रू0 50,000/- का क्षतिपूर्ति का जो आदेश पारित किया गया है, उसके सन्दर्भ में कोई विवेचना नहीं की गयी है और रू0 50,000/- की क्षति किस आधार पर निश्चित की गयी है, इस सन्दर्भ में भी कोई उल्लेख नहीं किया गया है। विपक्षी संख्या-2 व 3/अपीलार्थीगण सार्वजनिक संस्था है और जनहित में कार्य करती है। ऐसी स्थिति में रू0 50,000/- की क्षति का आदेश उचित प्रतीत नहीं होता है, अत: मुकदमें की परिस्थितियों को देखते हुए पीठ इस निष्कर्ष पर पहुँचती है कि वर्तमान प्रकरण में रू0 10,000/- क्षतिपूर्ति उचित होगी। इस प्रकार रू0 50,000/- के स्थान पर रू0 10,000/- क्षतिपूर्ति संशोधित किया जाना न्यायसंगत पाया जाता है। तदनुसार वर्तमान अपील अंशत: स्वीकार होने योग्य है।
आदेश
वर्तमान अपील अंशत: स्वीकार की जाती है। जिला फोरम, फैजाबाद द्वारा परिवाद संख्या-8/1996, मनोज कुमार पाण्डेय बनाम विपक्षी संख्या-1 परशुराम यादव, तत्कालीन पोस्ट मैन, पोस्ट आफिस जहांगीरगंज, जिला फैजाबाद एवं विपक्षी संख्या-2 सहायक पोस्ट मास्टर, पोस्ट आफिस जहांगीरगंज, जिला फैजाबाद तथा विपक्षी संख्या-3 प्रवर अधीक्षक डाकघर, फैजाबाद में पारित निर्णय/आदेश दिनांक 30.04.2003 के अन्तर्गत आदेशित क्षतिपूर्ति रू0 50,000/- के स्थान पर रू0 10,000/- संशोधित किया जाता है। शेष आदेश की पुष्टि की जाती है।
(जितेन्द्र नाथ सिन्हा) (संजय कुमार)
पीठासीन सदस्य सदस्य
लक्ष्मन, आशु0, कोर्ट-2