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Yomesh kumar filed a consumer case on 27 Jul 2015 against Manager, United India Insurance Company Ltd. in the Kota Consumer Court. The case no is CC/260/2010 and the judgment uploaded on 03 Aug 2015.
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष मंच, कोटा (राजस्थान)।
परिवाद संख्या:-260/2010
योमेश कुमार पुत्र रमेश चन्द्र उम्र 22 साल निवासी 3 ए 15 छत्रपुरा तालाव, विज्ञान नगर, कोटा। -परिवादी
बनाम
प्रबंधंक, यूनाईटेड इंडिया इंशोरेन्स कं.लि. 27, झालावाड रोड, कोटा राजस्थान। -विपक्षी
समक्ष:-
भगवान दास ः अध्यक्ष
महावीर तंवर ः सदस्य
हेमलता भार्गव ः सदस्य
परिवाद अन्तर्गत धारा 12 उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986
उपस्थित:-
01. श्री मंगलेश त्रिपाठी, अधिवक्ता, परिवादी की ओर से।
02. श्री बी0एस0यादव, अधिवक्ता, विपक्षी की ओर से।
निर्णय दिनांक 27.07.2015
परिवादी ने विपक्षी के विरूद्ध उपभोक्त संरक्षण अधिनियम की धारा 12 के अन्तर्गत लिखित परिवाद प्रस्तुत कर संक्षेप में प्रकट किया है कि उसके बीमित वाहन आर जे 20 यू ए 1662 अज्ञात वाहन के द्वारा टक्कर मारने से बीमा अवधि में दिनांक 04.12.09 को क्षतिग्रस्त हो गया, जिसकी तत्काल बीमा कंपनी को सूचना दी गई, जिसके निर्देशानुसार सर्वे करवाकर मरम्मत में 25,963/- रूपये खर्च हुये, जिसका क्लेम विपक्षी बीमा कंपनी को प्रेषित करने पर गलत एवं अनुचित रूप से खारिज कर दिया गया। जबकि पूर्व की बीमा कंपनी से प्राप्त राशि का विवरण विपक्षी बीमा कंपनी व उसके एजेन्ट को दे दिया गया था। क्लेम खारिज करने से परिवादी को आर्थिक नुकसान के साथ-साथ मानसिक संताप हुआ।
विपक्षी के जवाब का सार है कि परिवादी के क्लेम की जांच में पाया गया कि उसने पूर्व में अपने वाहन का बीमा रिलायन्स जनरल इंशोरेन्स क.लि. से कराया था। इस तरह उसने उस पालिसी के अन्तर्गत 5,740/- रूपये क्षति क्लेम के पेटे दावा राशि प्राप्त की थी,जबकि इस सही तथ्य को उनसे बीमा लेते समय जानबूझकर छिपाया इस तथ्य को सत्य रूप से उद्घाटन नहीं किया, अपितु नो क्लेम बोनस के संबंध में यह स्पष्ट घोषणा की गई कि पूर्व बीमा पालिसी के अन्र्तगत वाहन की स्वयं क्षति का कोई दावा नही हुआ है। इस प्रकार जानबूझकर असत्य कथन करके कपट एवं धोखे से बीमा संविदा की। इसलिये बीमा पालिसी के अन्तर्गत कोई क्लेम देय नही होने के कारण उसका क्लेम सही खारिज किया गया, जिसकी सूचना पंजीकृत डाक के जरिये परिवादी को भेज दी गई। परिवादी के नोटिस का भी उचित एवं सही जवाब दे दिया गया। परिवाद झूंठा पेश किया गया है।
परिवादी ने साक्ष्य में अपने शपथ-पत्र के अलावा बीमा पालिसी, क्लेम खारिज करने का पत्र, मरम्मत के बिल, विपक्षी कंपनी को प्रेषित कानूनी नोटिस,कोरियर की रसीदें, विपक्षी कंपनी के पत्र दिनांक 15.03.10 आदि दस्तावेजात की प्रति प्रस्तुत की है।
विपक्षी ने साक्ष्य में जी.सी. जैन अधिकारी के शपथ-पत्र के अलावा परिवादी की ओर से प्रस्तुत दावा प्राप्ति, दावा सूचना, प्रस्ताव-पत्र, पूर्व बीमा कंपनी की पालिसी, उनको प्रेषित पत्र, क्लेम खारिज करने के पत्र, बीमा प्रमाण-पत्र, सर्वे रिर्पोट आदि दस्तावेजात की प्रतियां पेश किये है।
हमने दोनो पक्षों की बहस सुनी। पत्रावली का अवलोकन किया गया। विपक्षी बीमा कंपनी ने परिवादी के बीमित वाहन की क्षति क्लेम इस आधार पर खारिज किया कि उसने पूर्व बीमा कंपनी (रिलायन्स जनरल इंशोरेन्स क.लि.) से दुर्घटना दावा राशि 5,740/- रूपये प्राप्त किया था, जबकि उसने बीमा कराते समय यह असत्य घोषणा की कि पूर्व में बीमा कंपनी से कोई दावा नहीं लिया।
विचारणीय प्रश्न है कि क्या विपक्षी बीमा कंपनी ने इस आधार पर बीमित वाहन का क्लेम खारिज कर सेवा में कमी की या नही?
इस बारे में विवाद की स्थिति नहीं है कि परिवादी ने पूर्व में अपने वाहन का बीमा रिलायन्स जनरल इंशोरेन्स कंपनी लिमिटेड से कराया था तथा उससे दुर्घटना के कारण दावा राशि 5,740/- रूपये प्राप्त की थी, क्योंकि इस तथ्य को परिवाद में ही स्वीकार किया गया है विपक्षी बीमा कंपनी ने परिवादी द्वारा उनसे अपने वाहन का बीमा कराते समय प्रस्ताव-पत्र की प्रति प्रस्तुत की है जिस पर परिवादी के हस्ताक्षर है। इस प्रस्ताव-पत्र में परिवादी ने यह स्पष्ट घोषणा की है ष्कि पूर्व पाॅलिसी के अन्र्तगत वाहन में स्वयं क्षति दावा नहीं हुआ है। यदि कथन असत्य हो तो इस हेतु किसी भी परिणाम के प्रति में स्वयं उत्तरदायी होगा।ष् इस प्रकार इस दस्तावेज से स्पष्ट हो जाता है कि परिवादी ने जानबूझकर विपक्षी बीमा कंपनी से बीमा संविदा करते समय यह असत्य कथन किया कि पूर्व में पालिसी के अन्तर्गत वाहन क्षति का दावा नहीं हुआ है। इससे स्पष्ट है कि परिवादी ने विपक्षी बीमा कंपनी के साथ संविदा करते समय कपट एवं धोखा किया तथा ऐसी संविदा के अन्तर्गत कानूनन कोई लाभ, परिवादी प्राप्त करने का अधिकारी नहीं है। माननीय राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग ने न्यायिक विनिश्चय टाटा ए आई जी जनरल इंशोरेन्स कंपनी लिमिटेड और अन्य बनाम गुलजारी सिंह भाग प्रथम (2010) सी0पी0जे0 272 (एन सी) में यह स्पष्ट व्यवस्था दी हेै कि बीमाधारी द्वारा नो क्लेम बोनस के संबंध में गलत सूचना देना तथा जानबूझकर छिपाना परिवादी, बीमा कंपनी से बीमा पालिसी के अन्तर्गत लाभ पाने का अधिकारी नहीं है। उपरोक्त विनिश्चय प्रस्तुत मामले में भलीभाॅति लागू होता है।
उपरोक्त विवेचन के आधार पर हम इस निष्कर्ष पर आते है कि विपक्षी बीमा कंपनी द्वारा परिवादी के बीमित वाहन का क्षति क्लेम खारिज करके सेवा में कोई कमी नहीं की है, इसलिये उसका परिवाद खारिज होने योग्य है।
आदेश
अतः परिवादी योमेश कुमार राज का परिवाद, विपक्षी के विरूद्ध खारिज किया जाता है। परिवाद खर्च पक्षकारान अपना-अपना स्वयं वहन करेगे।
(महावीर तंवर) (हेमलता भार्गव) (भगवान दास)
सदस्य सदस्य अध्यक्ष
निर्णय आज दिनंाक 27.07.2015 को लिखाया जाकर खुले मंच में सुनाया गया।
सदस्य सदस्या अध्यक्ष
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