Uttar Pradesh

StateCommission

A/524/2017

Panchimanchal Vidyut Vitaran Nigam - Complainant(s)

Versus

Makhkhan Singh - Opp.Party(s)

Isar Husain

09 Jul 2019

ORDER

STATE CONSUMER DISPUTES REDRESSAL COMMISSION, UP
C-1 Vikrant Khand 1 (Near Shaheed Path), Gomti Nagar Lucknow-226010
 
First Appeal No. A/524/2017
( Date of Filing : 20 Mar 2017 )
(Arisen out of Order Dated 18/02/2017 in Case No. C/55/2016 of District Shambhal)
 
1. Panchimanchal Vidyut Vitaran Nigam
Meerut
...........Appellant(s)
Versus
1. Makhkhan Singh
Sambhal
...........Respondent(s)
 
BEFORE: 
 HON'BLE MR. JUSTICE AKHTAR HUSAIN KHAN PRESIDENT
 
For the Appellant:
For the Respondent:
Dated : 09 Jul 2019
Final Order / Judgement

                                                                                                        

                                               (सुरक्षित)

राज्‍य उपभोक्‍ता विवाद प्रतितोष आयोग, उ0प्र0, लखनऊ

 

अपील सं0- 524/2017

(जिला उपभोक्‍ता विवाद प्रतितोष फोरम, सम्‍भल द्वारा परिवाद सं0- 55/2016 में पारित निर्णय व आदेश दि0 18.02.2017 के विरूद्ध)

1. Pachimanchal vidyut vitran nigam ltd. through its Managing Director, Victoria park, Meerut.

2. Executive Engineer, electricity distribution division, Chandausi, District: Sambhal.                                                                                

                                 ……..Appellants

 

                                                      Versus

Makhkhan singh S/o Dember singh R/o Village: Kaima, Tahsil and District: Sambhal.                                                                        

                                  ………Respondent 

 

समक्ष:-                       

माननीय न्‍यायमूर्ति श्री अख्‍तर हुसैन खान, अध्‍यक्ष   

अपीलार्थीगण की ओर से उपस्थित    :  श्री इसार हुसैन,

                                  विद्वान अधिवक्‍ता।

प्रत्‍यर्थी की ओर से उपस्थित          :  कोई नहीं।  

 

दिनांक:- 09.08.2019

माननीय न्‍यायमूर्ति श्री अख्‍तर हुसैन खान, अध्‍यक्ष  द्वारा उद्घोषित

                                                 

निर्णय

          परिवाद सं0- 55/2016 मक्‍खन सिंह बनाम पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लि0 व एक अन्‍य में जिला फोरम, सम्‍भल द्वारा पारित निर्णय व आदेश दि0 18.02.2017 के विरूद्ध यह अपील धारा 15 उपभोक्‍ता संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत राज्‍य आयोग के समक्ष प्रस्‍तुत की गई है।

          आक्षेपित निर्णय और आदेश के द्वारा जिला फोरम ने परिवाद आंशिक रूप से स्‍वीकार करते हुए निम्‍न आदेश पारित किया है:-

          ‘’परिवाद आंशिक रूप से विपक्षीगण के विरुद्ध स्‍वीकार किया जाता है। विपक्षीगण को आदेश दिया जाता है कि वह परिवादी के नलकूप पर लगे प्रश्‍नगत ट्रांसफार्मर को न हटायें। वाद परिस्थिति में दोनों पक्ष अपना-अपना वाद व्‍यय स्‍वयं वहन करेंगे।‘’

          जिला फोरम के निर्णय और आदेश से क्षुब्‍ध होकर परिवाद के विपक्षीगण ने यह अपील प्रस्‍तुत की है। 

          अपील की सुनवाई के समय अपीलार्थीगण की ओर से विद्वान अधिवक्‍ता श्री इसार हुसैन उपस्थित आये हैं। प्रत्‍यर्थी की ओर से नोटिस तामीला के बाद भी कोई उपस्थित नहीं हुआ है।   

          मैंने अपीलार्थीगण के विद्वान अधिवक्‍ता के तर्क को सुना है और आक्षेपित निर्णय व आदेश तथा पत्रावली का अवलोकन किया है। 

          अपील के निर्णय हेतु संक्षिप्‍त सुसंगत तथ्‍य इस प्रकार हैं कि प्रत्‍यर्थी/परिवादी ने उपरोक्‍त परिवाद जिला फोरम के समक्ष अपीलार्थी/विपक्षीगण के विरुद्ध इस कथन के साथ प्रस्‍तुत किया है कि उसके निजी नलकूप का विद्युत कनेक्‍शन सं0- 301/138238 है जिसका स्‍वीकृत भार 7.5 हार्सपावर है। वह अपीलार्थी/विपक्षीगण से उपरोक्‍त विद्युत कनेक्‍शन प्राप्‍त कर नलकूप का प्रयोग अपने जीविकोपार्जन एवं भरण-पोषण हेतु करता है। मार्च 2016 तक वह अपने उपरोक्‍त नलकूप कनेक्‍शन के समस्‍त देयों का भुगतान कर चुका है जिसके सम्‍बन्‍ध में अपीलार्थी/विपक्षी सं0- 2 के कार्यालय द्वारा रसीद सं0- 545936 रूपये 1,000/- की उसके पक्ष में जारी की गई है।

          परिवाद पत्र के अनुसार प्रत्‍यर्थी/परिवादी का कथन है कि उसने अपीलार्थी/विपक्षी सं0- 2 से मिलकर कई बार अनुरोध किया कि उसे मासिक विद्युत बिल प्रेषित की जाए जिससे प्रत्‍यर्थी/परिवादी को अनावश्‍यक नुकसान न हो और विद्युत बकाये की धनराशि अनावश्‍यक न बढ़े, परन्‍तु विपक्षी सं0- 2 ने कोई कार्यवाही नहीं की और दि0 09.03.2016 को अपीलार्थी/विपक्षीगण के अधीनस्‍थ कर्मियों एवं अवर अभियंता उसके निजी ट्यूवेल को विद्युत आपूर्ति करने वाले ट्रांसफार्मर को हटाने लगे और पूछने पर कहा कि प्रत्‍यर्थी/परिवादी मासिक रूप से विद्युत धनराशि अदा नहीं कर रहा है। इस कारण अपीलार्थी/विपक्षी सं0- 2 ने प्रत्‍यर्थी/परिवादी के निजी नलकूप का 7.5 हार्सपावर का विद्युत कनेक्‍शन हटाने का निर्देश दिया है और उसका विद्युत कनेक्‍शन विच्‍छेदित किया जाना है। तदोपरांत अपीलार्थी/विपक्षीगण के अधीनस्‍थ कर्मियों ने प्रत्‍यर्थी/परिवादी के विरोध के बावजूद ट्रांसफार्मर हटाकर उसका विद्युत कनेक्‍शन विच्‍छेदित कर दिया। उसके बाद दि0 19.05.2016 को प्रत्‍यर्थी/परिवादी, अपीलार्थी/विपक्षी सं0- 2 से मिला और उन्‍हें सूचित किया कि उसके द्वारा विद्युत बिलों का भुगतान किया जा चुका है। उसके निजी ट्यूवेल से 7.5 हार्सपावर से सम्‍बन्धित ट्रांसफार्मर न हटाया जाए तो अपीलार्थी/विपक्षी सं0- 2 ने उसकी कोई मदद करने से मना कर दिया। अत: क्षुब्‍ध होकर प्रत्‍यर्थी/परिवादी ने परिवाद जिला फोरम के समक्ष प्रस्‍तुत कर निम्‍न अनुतोष चाहा है:-

          अ- विपक्षीगण को आदेशित किया जाये कि वह ग्राम कैमा तह0 व जिला सम्‍भल स्थित गाटा सं0- 309 में स्‍थापित परिवादी के निजी नलकूप विद्युत कनेक्‍शन सं0- 301/138238 स्‍वीकृत भार 7.5 हार्सपावर से सम्‍बन्धित ट्रांसफार्मर को न हटाये और न हटवाये तथा मासिक नियमित बिल परिवादी को प्रेषित करे।

          ब- विपक्षीगण के कृत्‍यों से परिवादी को हुए मानसिक कष्‍ट व आर्थिक हानि का मूल्‍यांकन रूपये 20,000/- किया जाता है और प्रार्थना कि जाती है कि क्षतिपूर्ति की धनराशि विपक्षीगण से दिलायी जाये।

          स- परिवाद व्‍यय विपक्षीगण से दिलाया जाये।

          द- अन्‍य कोई अनुतोष जो मा0 फोरम उचित और आवश्‍यक समझे परिवादी के पक्ष में विपक्षीगण के विरुद्ध दिलाया जाये।

          जिला फोरम के समक्ष अपीलार्थी/विपक्षीगण ने लिखित कथन प्रस्‍तुत कर कहा है कि प्रत्‍यर्थी/परिवादी ने 33/11 के0वी0ए0 विद्युत उपकेन्‍द्र खिरनी से गलत सर्वे कराकर विभाग को गुमराह कराकर दो परिवर्तक ट्रांसफार्मर से विद्युत लाइन का निर्माण करा लिया था। एक ट्रांसफार्मर जो 25 के0वी0ए0 का है उससे प्रत्‍यर्थी/परिवादी मक्‍खन सिंह और गुलफाम सिंह पुत्र श्री डम्‍बर सिंह ग्राम कैला दोनों के नलकूप चल सकते हैं। गुलफाम सिंह के ट्रांसफार्मर से मक्‍खन सिंह की लाइन एल0टी0 बना दी गई जायेगी। दोनों के नलकूप को एक ही ट्रांसफार्मर से जोड़ दिया जायेगा।

          लिखित कथन में अपीलार्थी/विपक्षीगण की ओर से कहा गया है कि गुलफाम सिंह और मक्‍खन सिंह दोनों भाइयों ने अवैध सर्वे कराकर अपने नलकूप पर अलग-अलग ट्रांसफार्मर लगवा लिये हैं जिससे अपीलार्थी/विपक्षीगण के विभाग को आर्थिक हानि हो रही है।

          जिला फोरम ने उभय पक्ष के अभिकथन एवं उपलब्‍ध साक्ष्‍यों पर विचार करने के उपरांत परिवाद आंशिक रूप से स्‍वीकार करते हुए आदेश पारित किया है जो ऊपर अंकित है।

          अपीलार्थी/विपक्षीगण के विद्वान अधिवक्‍ता का तर्क है कि जिला फोरम द्वारा पारित निर्णय और आदेश तथ्‍य एवं विधि के विरुद्ध है। अपीलार्थी/विपक्षीगण के विद्वान अधिवक्‍ता का तर्क है कि प्रत्‍यर्थी/परिवादी व उसके भाई के निजी नलकूप को विद्युत आपूर्ति एक ट्रासंफार्मर से की जा सकती है। प्रश्‍नगत ट्रांसफार्मर हटाने से प्रत्‍यर्थी/परिवादी के ट्यूवेल की विद्युत आपूर्ति में कोई बाधा नहीं आ सकती है। ट्रांसफार्मर हटाकर अपीलार्थी/विपक्षीगण द्वारा दूसरे ट्रांसफार्मर से विद्युत आपूर्ति किये जाने से प्रत्‍यर्थी/परिवादी की सेवा में कमी नहीं आ सकती है।

          मैंने अपीलार्थी/विपक्षीगण के विद्वान अधिवक्‍ता के तर्क पर विचार किया है।

          अपीलार्थी/विपक्षीगण द्वारा लिखित कथन में किये गये कथन से यह स्‍पष्‍ट है कि प्रत्‍यर्थी/परिवादी के ट्यूवेल हेतु प्रश्‍नगत ट्रांसफार्मर सर्वे के बाद विभाग द्वारा लगाया गया है और उससे विद्युत आपूर्ति प्रत्‍यर्थी/परिवादी के ट्यूवेल को की जा रही थी। प्रत्‍यर्थी/परिवादी के अनुरोध पर सर्वे के बाद उसके ट्यूवेल को विद्युत आपूर्ति हेतु ट्रांसफार्मर लगाये जाने के बाद उसे विभाग द्वारा हटाये जाने को कोई उचित और युक्तिसंगत आधार नहीं दिखता है। जिला फोरम ने जो आक्षेपित निर्णय और आदेश पारित किया है वह अनुचित नहीं कहा जा सकता है।

          परिवाद पत्र में स्‍पष्‍ट रूप से प्रत्‍यर्थी/परिवादी ने कहा है कि वह अपीलार्थी/विपक्षीगण के प्रश्‍नगत विद्युत कनेक्‍शन से ट्यूवेल का प्रयोग अपने जीविकोपार्जन व परिवार के भरण-पोषण हेतु करता है। अत: प्रत्‍यर्थी/परिवादी उपभोक्‍ता संरक्षण अधिनियम के धारा 2(1)D के स्‍पष्‍टीकरण के आधार पर उपभोक्‍ता है और परिवाद उपभोक्‍ता संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत ग्राह्य है।

          उपरोक्‍त विवेचना के आधार पर मैं इस मत का हूं कि जिला फोरम द्वारा पारित आक्षेपित निर्णय और आदेश में हस्‍तक्षेप हेतु उचित आधार नहीं है। अत: अपील निरस्‍त की जाती है।                        

          अपील में उभय पक्ष अपना-अपना वाद व्‍यय स्‍वयं वहन करेंगे।

 

 (न्‍यायमूर्ति अख्‍तर हुसैन खान)                                              

                                       अध्‍यक्ष                            

शेर सिंह आशु0,

कोर्ट नं0-1

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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[HON'BLE MR. JUSTICE AKHTAR HUSAIN KHAN]
PRESIDENT

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