राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, उ0प्र0, लखनऊ।
(सुरक्षित)
अपील संख्या :705/2012
(जिला मंच, दितीय आगरा द्धारा परिवाद सं0-321/2003 में पारित निर्णय/ आदेश दिनांक 17.02.2012 के विरूद्ध)
1 Manager, Speed Post Center, Pratappura, Agra.
2 Post Master, Sanjay Palace Post Office, Agra.
3 Chief Post Master General, U.P. Circle, Lucknow.
........... Appellants/Opp. Parties
Versus
Mahesh Khare S/o Late P.S. Khare, R/o 13/204, Mandi Sayeed Khan, Agra.
……..…. Respondent/Complainant.
समक्ष :-
मा0 श्री रामचरन चौधरी, पीठासीन सदस्य
मा0 श्री संजय कुमार, सदस्य
अपीलार्थी के अधिवक्ता : डॉ0 उदय वीर सिंह
प्रत्यर्थी के अधिवक्ता : कोई नहीं।
दिनांक : 20-04-2017
मा0 श्री रामचरन चौधरी, पीठासीन सदस्य द्वारा उदघोषित
निर्णय
मौजूदा अपील जिला उपभोक्ता फोरम, दितीय आगरा द्वारा परिवाद सं0-321/2003 में पारित निर्णय/आदेश दिनांकित 17.02.2012 के विरूद्ध योजित की गई है, जिसमें जिला उपभोक्ता फोरम, दितीय आगरा द्वारा निम्न आदेश पारित किया गया है:-
"वादी का वाद, विपक्षीगण के खिलाफ संयुक्त रूप से तथा अलग-अलग रूप आंशिक रूप से स्वीकार किया जाता है। विपक्षीगण को आदेशित किया जाता है कि वादी को मानसिक पीड़ा की क्षतिपूर्ति के रूप में 25000 (पच्चीस हजार रूपया) तथा वाद व्यय के रूप में 2000 (दो हजार रूपया) विपक्षीगण, वादी को 30 दिन के अन्दर अदा करे। निर्णय की प्रति प्राप्त होने के अन्दर 30 दिन अगर विपक्षीगण आदेश का अनुपालन नहीं करते
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हैं तो डिक्री की सम्पूर्ण धनराशि पर वादी वाद प्रस्तुत करने की तिथि से ताअदायगी 09 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी वसूल पा सकेगा।
आदेश की कापी दोनों पक्षकारों को डाक द्वारा भेजी जाये। फाइल रिकार्ड रूप आज ही भेज दी जायं।"
संक्षेप में केस के तथ्य इस प्रकार है कि परिवादी का पुत्र अभिषेक खेर, उ0प्र0 सैनिक स्कूल, लखनऊ के विज्ञापन के अनुसार उसमें दाखिला लेना और स्कूल की प्रवेश परीक्षा में सम्मिलित होना चाहता था। परिवादी ने दिनांक 04.01.2003 को 180.00 रू0 का बैंक ड्राफ्ट नं0-204678 प्रधानाचार्य उ0प्र0 सैनिक स्कूल, लखनऊ के नाम बनवाया तथा उसी दिन स्पीड पोस्ट के जरिये, रू0 30.00 खर्च कर प्रतिवादीगण के माध्यम से प्रधानाचार्य उ0प्र0 सैनिक स्कूल, लखनऊ को भेजा दिया था और प्रतिवादी सं0-2 के कर्मचारियों ने उसे आश्वासन दिया था कि परिवादी की स्पीड पोस्ट 24 घण्टे के अन्दर लखनऊ पहुंच जावेगी, क्योंकि दिनांक 05.01.2003 का रविवार था, इसलिए परिवादी को यह आश्वासन दिया गया कि स्पीड पोस्ट डाक दिनांक 06.01.2003 को प्रधानाचार्य उ0प्र0 सैनिक स्कूल, लखनऊ में डिलेवर कर दिया जावेगा। सैनिक स्कूल लखनऊ में आवेदन पत्र जारी करने की अंतिम तिथि 10.01.2003 थी तथा विद्यार्थी का भरा हुआ फार्म प्रधानाचार्य उ0प्र0 सैनिक स्कूल, लखनऊ जमा होने की अंतिम तिथि 15.01.2003 थी, जब उसे दिनांक 09.01.2003 तक फार्म नहीं मिला, तो उसने प्रतिवादी सं0-1 से दूरभाष पर अपनी शिकायत दर्ज करवायी और उसके तुरन्त बाद उसकी कापी भी प्रतिवादी सं0-2 के पास देकर दिनांक 09.01.2003 को परिवादी ने अपनी शिकायत दर्ज करवा दी, परन्तु जब विपक्षी सं0-3 के कर्मचारी प्रधानाचार्य उ0प्र0 सैनिक स्कूल, लखनऊ के कार्यालय में परिवादी के पुत्र का आवेदन पत्र रजिस्टर्ड लिफाफा डाक लेकर गये तो स्कूल वालों ने दिनांक 11.01.2003 को वह लिफाफा लेने से इंकार कर दिया क्योंकि फार्म जारी करने की अंतिम तिथि 10.01.2003 थी और वह लिफाफा प्रतिवादी सं0-3 ने दिनांक 13.01.2003 को परिवादी को वापस कर दिया। परिवादी ने दिनांक 09.01.2003 को
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प्रतिवादी सं0-1 को जो शिकायत की थी, वह प्रतिवादी सं0-1 को दिनांक 14.01.2003 को मिली थी। प्रतिवादी सं0-1 ने अपने पत्र दिनांकित 24.01.2003 मे यह कहा है कि परिवादी का लिफाफे की डिलेवरी में विलम्ब के लिए विपक्षी सं0-2 दोषी है एवं विपक्षीगण द्वारा उनकी सेवा में कमी के कारण परिवादी का पुत्र परीक्षा में सम्मिलित होने से वंचित रह गया और भविष्य में वह कमी भी स्कूल में प्रवेश नहीं ले सकता है, अत: परिवादी द्वारा प्रतिवादीगण से मु0 9,02,130.00 रू0 का अनुतोष दिलाये जाने हेतु जिला उपभोक्ता फोरम के समक्ष परिवाद योजित किया है।
जिला उपभोक्ता फोरम, दितीय आगरा के समक्ष प्रतिवादीगण की ओर से अपना जवाब दावा प्रस्तुत किया गया और यह कथन किया गया है कि परिवादी ने दिनांक 04.01.2003 को संजय प्लेस डाकघर आगरा में समय 18.20 बजे अपनी स्पीड पोस्ट प्रधानाचार्य उ0प्र0 सैनिक स्कूल, सरोजनीनगर, लखनऊ के लिए बुक किया था, परन्तु उनके कर्मचारियों ने परिवादी को ऐसा कोई आश्वासन नहीं दिया था कि स्पीड पोस्ट लखनऊ में 24 घण्टे में डिलेवर कर दी जावेगी। उनके कर्मचारियों को दिनांक 11.01.2003 को परिवादी की स्पीड पोस्ट लखनऊ में अवध एक्सप्रेस से मिली थी, जो प्रतिवादीगण के कर्मचारियों ने दिनांक 11.01.2003 को प्रधानाचार्य उ0प्र0 सैनिक स्कूल, लखनऊ में लिफाफे लेकर गये तो उ0प्र0 सैनिक स्कूल, लखनऊ वालों ने वह लिफाफा लेने से इंकार कर दिया। उसके बाद परिवादी का लिफाफा परिवादी को वापस भेज दिया गया था। यह भी कथन किया गया है कि लखनऊ की जॉच आख्या के अनुसार परिवादी की स्पीड पोस्ट आगरा-लखनऊ के बीच रेलवे वालों ने कहीं रोक ली थी एवं स्पीड पोस्ट आर्टीकल के अन्दर कौन सी वस्तु भेजी गई थी, इस बात का उन्हें ज्ञान नहीं है। यह भी कथन किया गया कि प्रतिवादीगण की ओर से कोई विलम्ब नहीं किया गया है और परिवादी किसी किस्म की धनराशि पाने का अधिकारी नहीं है एवं परिवादी द्वारा दिया गया पोस्टल चार्ज 30.00 रू0 का चेक, परिवादी को 25 दिन के बाद वापस कर दिया गया था एवं यह भी कथन किया गया है कि इस वाद में भारत संघ तथा
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रेलवे विभाग को पक्षकार नहीं बनाया गया है, इसलिए परिवाद खारिज होने योग्य है।
अपीलार्थी की ओर से विद्वान अधिवक्ता डॉ0 उदय वीर सिंह उपस्थित आये। प्रत्यर्थी की ओर से कोई उपस्थित नहीं है। प्रत्यर्थी की ओर से इस केस में लिखित कथन पहले ही दाखिल किया जा चुका है, अत: अपीलार्थी के विद्वान अधिवक्ता को सुना गया तथा जिला उपभोक्ता फोरम के निर्णय/आदेश दिनांकित 17.02.2012 का अवलोकन किया गया तथा अपील आधार का अवलोकन किया गया।
अपीलार्थी ने धारा-6 पोस्ट आफिस एक्ट 1898 का हवाला दिया था, लेकिन जिला उपभोक्ता फोरम ने उस पर कोई ध्यान नहीं दिया और जिला उपभोक्ता फोरम ने लिख दिया कि पोस्ट आफिस अधिनियम की धारा-6 प्रस्तुत परिवाद में एप्लीकेबल नहीं है। अपीलार्थी के तरफ से माननीय राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग नई दिल्ली की रूलिंग दाखिल की गई है:-
1- रिवीजन पिटीशन सं0- 2411/2006 यूनियन आफ इंडिया एण्ड अन्य बनाम एम0एल0 बोरा, निर्णय तिथि- 13-10-2010 दाखिल किया, जिसमें कहा गया है कि-
Consumer Protection Act, 1986- Sections 3 & 21 (b)- Indian Post Office Act, 1898- Section 6- Postal service- Non delivery of letter- Complainant sent two registered letters containing 532 shares but letters were not deliverd to the addressees-District Forum allowing complaint of complainant (respondent) directed petitioner/OP to pay Rs. 2,58,254 in one case and Rs.1,76,244 in another case- State Commission upheld the order passed by the District Forum- Revision filed- Held, as section 6 of the Post Office Act provides complete immunity to Government from loss or mis- delivery of postal articles- petitioner cannot be held liable especially when no specific allegation of any willful act on the part of any official has benn made- Relief granted by the Fora below set aside.
अपीलार्थी की तरफ से यह कहा गया कि परिवादी का कोई ऐसा कथन इस सम्बन्ध में नहीं है कि जानबूझकर देरी किया गया है, या कोई
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छल-कपट किया गया है और किसी कर्मचारी के बारें में भी जानबूझकर कोई गलती किये जाने का आरोप नहीं लगाया गया है।
2- राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग, नई दिल्ली के ऊषा मिश्रा बनाम चीफ पोस्ट मास्टर जनरल, निर्णीत दिनांक 30-05-2016 को भी पेश किया गया।
अपीलार्थी के विद्वान अधिवक्ता को सुनने एवं उपरोक्त रूलिंग के दृष्टिगत हम यह पाते हैं कि जिला उपभोक्ता फोरम के द्वारा जो निर्णय/आदेश पारित किया गया है, वह विधि सम्मत् नहीं है और निरस्त किये जाने योग्य है। अपीलार्थी की अपील स्वीकार होने योग्य है।
आदेश
अपीलार्थी की अपील स्वीकार की जाती है तथा जिला उपभोक्ता फोरम, दितीय आगरा द्वारा परिवाद सं0 321/2003 में पारित निर्णय/आदेश दिनांकित 17-02-2012 को निरस्त किया जाता है।
उभय पक्ष अपना-अपना अपीलीय व्यय भार स्वयं वहन करेंगे।
(रामचरन चौधरी) (संजय कुमार)
पीठासीन सदस्य सदस्य
हरीश आशु.,
कोर्ट सं0-2