(सुरक्षित)
राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, उ0प्र0, लखनऊ
अपील सं0- 1002/2018
(जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष फोरम द्वितीय, मुरादाबाद द्वारा परिवाद सं0- 18/2017 में पारित निर्णय व आदेश दि0 12.02.2018 के विरूद्ध)
मैसर्स, गनेश मेडिकल अमरोहा गेट, तहसील व जिला मुरादाबाद, द्वारा प्रोपराइटर अनुज पुत्र स्व0 श्री गनेश टण्डन, निवासी मियां साहब वाली गली, तहसील व जिला मुरादाबाद।
..........अपीलकर्ता
बनाम
महेन्द्र कुमार शर्मा पुत्र स्व0 श्री कालीचरन शर्मा, निवासी- 45 वेलदारान, दीवान का बाजार, जिला मुरादाबाद।
........... प्रत्यर्थी
समक्ष:-
माननीय न्यायमूर्ति श्री अख्तर हुसैन खान, अध्यक्ष।
अपीलार्थी की ओर से उपस्थित : श्री एस0पी0 पाण्डेय,
विद्वान अधिवक्ता।
प्रत्यर्थी की ओर से उपस्थित : व्यक्तिगत रूप से।
दिनांक:- 14.08.2019
माननीय न्यायमूर्ति श्री अख्तर हुसैन खान, अध्यक्ष द्वारा उद्घोषित
निर्णय
परिवाद सं0- 18/2017 महेन्द्र कुमार शर्मा बनाम मैसर्स गनेश मेडिकल अमरोहा गेट में जिला फोरम द्वितीय, मुरादाबाद द्वारा पारित निर्णय व आदेश दि0 12.02.2018 के विरूद्ध यह अपील धारा 15 उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत राज्य आयोग के समक्ष प्रस्तुत की गई है।
आक्षेपित निर्णय और आदेश के द्वारा जिला फोरम ने परिवाद स्वीकार करते हुए निम्न आदेश पारित किया है:-
‘’परिवादी का परिवाद विरुद्ध विपक्षी स्वीकार किया जाता है। विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि विपक्षी इस आदेश से एक माह के अन्दर प्रश्नगत दवाओं की कीमत अंकन-36,000/-रूपये मय 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज वाद दायरा तिथि तावसूली परिवादी को अदा करे।
विपक्षी अंकन-2000/-रूपये क्षतिपूर्ति एवं अंकन-2500/-रूपये परिवाद व्यय भी परिवादी को अदा करे।
इस आदेशानुसार परिवादी को भुगतान करने पर विपक्षी फोरम में सीलबन्द हालत में रखी गई अपनी दवायें वापस ले सकता है।‘’
जिला फोरम के निर्णय और आदेश से क्षुब्ध होकर परिवाद के विपक्षी मैसर्स गनेश मेडिकल अमरोहा गेट ने यह अपील प्रस्तुत की है।
अपील की सुनवाई के समय अपीलार्थी की ओर से विद्वान अधिवक्ता श्री एस0पी0 पाण्डेय उपस्थित आये हैं। प्रत्यर्थी महेन्द्र कुमार शर्मा व्यक्तिगत रूप से उपस्थित आये हैं।
मैंने उभय पक्ष के तर्क को सुना है और आक्षेपित निर्णय व आदेश तथा पत्रावली का अवलोकन किया है।
अपील के निर्णय हेतु संक्षिप्त सुसंगत तथ्य इस प्रकार हैं कि प्रत्यर्थी/परिवादी ने उपरोक्त परिवाद जिला फोरम के समक्ष अपीलार्थी/विपक्षी के विरुद्ध इस कथन के साथ प्रस्तुत किया है कि उसके मित्र का इथोपिया से भारतवर्ष में ई-मेल प्राप्त हुआ कि उन्हें लाइफ सेविंग ड्रग्स Ledipasvir 90 mg & Sofosbuvir 400 mg की आवश्यकता है जो भारत में अपेक्षाकृत सस्ती है। तदोपरांत प्रत्यर्थी/परिवादी ई-मेल लेकर अपीलार्थी/विपक्षी के मेडिकल स्टोर पर गया और उपरोक्त दवाओं की मांग की। तब अपीलार्थी/विपक्षी ने कहा कि दो दिन में दवा मंगाकर वह उसे दवा दे सकता है। अत: दि0 12.02.2016 को प्रत्यर्थी/परिवादी ने उसे दवा का ऑर्डर दिया और जब अपीलार्थी/विपक्षी के पास दवा आ गई तो उसने एक पैकेट दवा की कीमत 18,000/-रु0 बतायी। अत: दि0 05.03.2016 को दो पैकेट दवा का मूल्य 36,000/-रू0 देकर उसने दवा खरीदी, परन्तु अपीलार्थी/विपक्षी ने कहा कि एक-दो दिन में बिल दे देगा। उसके बाद प्रत्यर्थी/परिवादी ने जब दवायें डॉक्टर को दिखायी तो डॉक्टर ने बताया कि ये वे दवायें नहीं हैं जो उन्होंने प्रेसक्राइव की हैं। इन दवाओं को लेने से नुकसान हो सकता है तब प्रत्यर्थी/परिवादी ने अपीलार्थी/विपक्षी से यह बात बतायी और जुलाई 2016 में दवायें लेकर अपीलार्थी/विपक्षी के पास गया तो प्रत्यर्थी/परिवादी ने आश्वासन दिया कि वह दवायें बिकवाकर पैसा वापस कर देगा, किन्तु विपक्षी ने न तो दवायें बिकवायी और न उसका पैसा वापस किया। अत: विवश होकर प्रत्यर्थी/परिवादी ने अपीलार्थी/विपक्षी को नोटिस भेजा, परन्तु उन्होंने कोई सुनवाई नहीं की तब क्षुब्ध होकर उसने परिवाद जिला फोरम के समक्ष प्रस्तुत किया है।
जिला फोरम के समक्ष अपीलार्थी/विपक्षी नोटिस तामीला पर्याप्त माने-जाने के बाद भी उपस्थित नहीं हुआ है और न उसकी ओर से लिखित कथन प्रस्तुत किया गया है। अत: जिला फोरम ने परिवाद की कार्यवाही एकपक्षीय रूप से करते हुए निम्न आदेश पारित किया है जो ऊपर अंकित है।
अपीलार्थी/विपक्षी के विद्वान अधिवक्ता का तर्क है कि प्रत्यर्थी/परिवादी ने अपीलार्थी/विपक्षी के यहां से कोई दवा क्रय नहीं की है और न ही दवा खरीदने का कोई पर्चा प्रस्तुत किया है। जिला फोरम का निर्णय और आदेश तथ्य एवं विधि के विरुद्ध है। अत: अपील स्वीकार कर जिला फोरम का निर्णय व आदेश अपास्त किया जाये।
प्रत्यर्थी/परिवादी का कथन है कि प्रत्यर्थी/परिवादी ने अपीलार्थी/विपक्षी के यहां से दवा क्रय किया है, परन्तु अपीलार्थी/विपक्षी ने दवा का बिल नहीं दिया। बिल दो-एक दिन में देने को कहा, परन्तु नहीं दिया।
प्रत्यर्थी/परिवादी का कथन है कि इथोपिया से उसके मित्र ने ई-मेल के द्वारा जो दवायें खरीदने को कहा था वे दवायें अपीलार्थी/विपक्षी ने न देकर दूसरी दवा 36,000/-रू0 मूल्य में प्रत्यर्थी/परिवादी को दिया था, जिसे देखकर डॉक्टर ने कहा कि यह वह दवा नहीं है यह दवा खाने से नुकसान हो सकता है। अत: प्रत्यर्थी/परिवादी उक्त दवा लेकर अपीलार्थी/विपक्षी के यहां वापस करने गया, परन्तु उसने दवा वापस नहीं ली और उसका मूल्य वापस नहीं किया। अत: जिला फोरम का निर्णय व आदेश तथ्य और विधि के अनुकूल है।
प्रत्यर्थी/परिवादी का तर्क है कि जिला फोरम के समक्ष अपीलार्थी/विपक्षी नोटिस तामीला के बाद भी उपस्थित नहीं आया है। अत: जिला फोरम ने आक्षेपित निर्णय और आदेश उसके विरुद्ध एकपक्षीय रूप से पारित कर कोई गलती नहीं की है।
मैंने उभय पक्ष के तर्क पर विचार किया है।
उपरोक्त वर्णित तथ्यों से स्पष्ट है कि जिला फोरम ने अपीलार्थी/विपक्षी के विरुद्ध आक्षेपित निर्णय व आदेश एकपक्षीय रूप से उसकी अनुपस्थिति में पारित किया है। अपीलार्थी/विपक्षी ने जिला फोरम के समक्ष लिखित कथन प्रस्तुत नहीं किया है। अपीलार्थी/विपक्षी के विद्वान अधिवक्ता का कथन है कि उसे नोटिस प्राप्त नहीं हुई है।
सम्पूर्ण तथ्यों पर विचार करने के उपरांत मैं इस मत का हूं कि अपीलार्थी/विपक्षी को जिला फोरम के समक्ष अपना लिखित कथन प्रस्तुत करने का अवसर दिया जाए और उसके बाद जिला फोरम उभय पक्ष को साक्ष्य और सुनवाई का अवसर देकर पुन: विधि के अनुसार परिवाद में निर्णय और आदेश पारित करे।
जिला फोरम के निर्णय और आदेश के अनुसार नोटिस तामीला पर्याप्त पाये जाने के बाद भी अपीलार्थी/विपक्षी जिला फोरम के समक्ष उपस्थित नहीं हुआ है और लिखित कथन प्रस्तुत नहीं किया है। अत: उचित प्रतीत होता है कि अपीलार्थी/विपक्षी को 500/-रु0 हर्जा पर लिखित कथन प्रस्तुत करने का अवसर प्रदान किया जाये।
उपरोक्त निष्कर्ष के आधार पर अपील स्वीकार की जाती है और जिला फोरम द्वारा पारित आक्षेपित निर्णय व आदेश अपीलार्थी/विपक्षी द्वारा प्रत्यर्थी/परिवादी को 500/-रू0 हर्जा अदा किये जाने पर अपास्त किया जाता है तथा पत्रावली जिला फोरम को इस निर्देश के साथ प्रत्यावर्तित की जाती है कि जिला फोरम अपीलार्थी/विपक्षी को लिखित कथन प्रस्तुत करने का अवसर देकर उभय पक्ष को साक्ष्य और सुनवाई का अवसर प्रदान करे और उसके बाद पुन: विधि के अनुसार लिखित कथन प्रस्तुत करने हेतु नियत तिथि से 02 माह के अन्दर निर्णय और आदेश पारित करे।
उभय पक्ष जिला फोरम के समक्ष दि0 27.09.2019 को उपस्थित हों।
इस निर्णय में हाजिरी हेतु निश्चित तिथि से 30 दिन के अन्दर लिखित कथन प्रस्तुत करने हेतु समय जिला फोरम अपीलार्थी/विपक्षी को देगा और उसके बाद पुन: लिखित कथन हेतु कोई समय नहीं दिया जायेगा तथा परिवाद की कार्यवाही जिला फोरम द्वारा उपरोक्त प्रकार से सम्पादित की जायेगी।
धारा 15 उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत अपील जमा धनराशि व उस पर अर्जित ब्याज से 500/-रु0 उपरोक्त हर्जे की धनराशि प्रत्यर्थी/परिवादी को अदा की जायेगी और अवशेष धनराशि अपीलार्थी/विपक्षी को वापस कर दी जायेगी।
(न्यायमूर्ति अख्तर हुसैन खान)
अध्यक्ष
शेर सिंह आशु0,
कोर्ट नं0-1