Uttar Pradesh

StateCommission

A/3324/2017

Purvanchal Vidyut Vitaran nigam - Complainant(s)

Versus

Madhuri Singh - Opp.Party(s)

Deepak Mehrotra

03 Jul 2019

ORDER

STATE CONSUMER DISPUTES REDRESSAL COMMISSION, UP
C-1 Vikrant Khand 1 (Near Shaheed Path), Gomti Nagar Lucknow-226010
 
First Appeal No. A/3324/2017
( Date of Filing : 13 Dec 2017 )
(Arisen out of Order Dated 14/11/2017 in Case No. C/90/2016 of District Jaunpur)
 
1. Purvanchal Vidyut Vitaran nigam
Jaunpur
...........Appellant(s)
Versus
1. Madhuri Singh
Jaunpur
...........Respondent(s)
 
BEFORE: 
 HON'BLE MR. JUSTICE AKHTAR HUSAIN KHAN PRESIDENT
 
For the Appellant:
For the Respondent:
Dated : 03 Jul 2019
Final Order / Judgement

राज्‍य उपभोक्‍ता विवाद प्रतितोष आयोग, उ0प्र0, लखन

अपील संख्‍या-3324/2017

(सुरक्षित)

(जिला उपभोक्‍ता फोरम, जौनपुर द्वारा परिवाद संख्‍या 90/2016 में पारित आदेश दिनांक 14.11.2017 के विरूद्ध)

1. Adhishashi Abhiyanta, Purvananchal Vidyut Vitran Khand-II, Jaunpur.

2. Junior Engineer, Purvananchal Vidyut Vitran Khand, Badlapur, Jaunpur.

               ...................अपीलार्थीगण/विपक्षीगण सं01 व 2

बनाम

1. Madhuri Singh, wife of Sri Daljeet Singh, resident of Mauja, Nakahara – Khandev, Post Office and P.S. Singramau, District, Jaunpur.

2. Rajesh Singh, son of Sri Sita Ram Singh, resident of Mauja, Nakahara – Khandev, Post Office and P.S. Singramau, District, Jaunpur.

             ...................प्रत्‍यर्थीगण/परिवादिनी व विपक्षी सं03

समक्ष:-

माननीय न्‍यायमूर्ति श्री अख्‍तर हुसैन खान, अध्‍यक्ष।

अपीलार्थीगण की ओर से उपस्थित : श्री  दीपक  मेहरोत्रा  के                                  

                              सहयोगी श्री मनोज कुमार,                               

                              विद्वान अधिवक्‍ता।

प्रत्‍यर्थी सं01 की ओर से उपस्थित : श्री नवीन कुमार तिवारी,

                              विद्वान अधिवक्‍ता।

प्रत्‍यर्थी सं02 की ओर से उपस्थित : कोई नहीं।

दिनांक: 02.08.2019  

मा0 न्‍यायमूर्ति श्री अख्‍तर हुसैन खान, अध्‍यक्ष द्वारा उदघोषित

निर्णय

परिवाद संख्‍या-90/2016 माधुरी सिंह बनाम अधिशासी अभियंता पूर्वांचल विद्युत वितरण लिमिटेड खण्‍ड द्वितीय जौनपुर व दो अन्‍य में जिला उपभोक्‍ता विवाद प्रतितोष फोरम, जौनपुर द्वारा पारित निर्णय और आदेश  दिनांक 14.11.2017  के  विरूद्ध

 

-2-

यह अपील धारा-15 उपभोक्‍ता संरक्षण अधिनियम 1986 के अन्‍तर्गत राज्‍य आयोग के समक्ष प्रस्‍तुत की गयी है।

आक्षेपित निर्णय और आदेश के द्वारा जिला फोरम ने परिवाद स्‍वीकार करते हुए निम्‍न आदेश पारित किया है:-

''हस्‍तगत परिवाद विपक्षीगण के विरूद्ध निस्‍तारित करते हुए विपक्षीगण को आदेश दिया जाता है कि परिवादिनी माधुरी सिंह का प्रश्‍नगत विद्युत कनेक्‍शन संख्‍या 2325/152897 निर्णय की तिथि से एक माह के अन्‍दर जोड़ कर नियमानुसार विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करे।

परिवादिनी वर्तमान प्रकरण में स्‍वयं के शारीरिक, मानसिक कष्‍ट एवं अनावश्‍यक भागदौड़ के लिए विपक्षीगण से 10,000रू0 की धनराशि बतौर क्षतिपूर्ति भी पाने की मुस्‍तहक होगी। क्षतिपूर्ति की धनराशि में से आधी-आधी धनराशि अर्थात 5000रू0-5000रू0 विपक्षीगण सं0 2 व 3 के वेतन से काटा जायेगा।

निर्धारित अवधि में उपरोक्‍त निर्णय का अनुपालन न करने की स्थिति में क्षतिपूर्ति की उपरोक्‍त धनराशि पर भुगतान की वास्‍तविक तिथि तक 6 प्रतिशत साधारण वार्षिक ब्‍याज भी देय होगा।

निर्णय/आदेश की एक-एक प्रति पक्षकारो को नि:शुल्‍क प्रदान किया जाना सुनिश्चित किया जाये।''

जिला फोरम के निर्णय से क्षुब्‍ध होकर परिवाद के विपक्षीगण अधिशासी अभियन्‍ता, पूर्वांचल विद्युत वितरण खण्‍ड-II, जौनपुर और जूनियर इंजीनियर, पूर्वांचल विद्युत वितरण  खण्‍ड,  बदलापुर,

            

-3-

जौनपुर ने यह अपील प्रस्‍तुत की है।

अपील की सुनवाई के समय अपीलार्थीगण की ओर से विद्वान अधिवक्‍ता श्री दीपक मेहरोत्रा के सहयोगी श्री मनोज कुमार और प्रत्‍यर्थी/परिवादिनी की ओर से विद्वान अधिवक्‍ता श्री नवीन कुमार तिवारी उपस्थित आये हैं।

मैंने उभय पक्ष के विद्वान अधिवक्‍तागण के तर्क को सुना है और आक्षेपित निर्णय व आदेश तथा पत्रावली का अवलोकन किया है।

अपील के निर्णय हेतु संक्षिप्‍त सुसंगत तथ्‍य इस प्रकार हैं  कि प्रत्‍यर्थी/परिवादिनी माधुरी सिंह ने उपरोक्‍त परिवाद अपीलार्थी/विपक्षीगण एवं प्रत्‍यर्थी संख्‍या-2 राजेश सिंह के विरूद्ध जिला फोरम के समक्ष इस कथन के साथ प्रस्‍तुत किया है कि उसने दिनांक 14.08.2014 को विपक्षी विद्युत निगम से विद्युत कनेक्‍शन संख्‍या 2325/152897 लिया, परन्‍तु प्रत्‍यर्थी संख्‍या-2, जो परिवाद में विपक्षी संख्‍या-3 है, प्रत्‍यर्थी/परिवादिनी से रंजिश रखता है और उसने अपीलार्थी/विपक्षी संख्‍या-2 सत्‍य प्रकाश, जूनियर इंजीनियर को अपने प्रभाव में करके प्रत्‍यर्थी/परिवादिनी का विद्युत कनेक्‍शन जोड़ने नहीं दे रहा है तथा धमकी दे रहा है कि जब तक वह रहेगा प्रत्‍यर्थी/परिवादिनी का कोई कनेक्‍शन जोड़वा नहीं पायेगा।

     परिवाद पत्र के अनुसार प्रत्‍यर्थी/परिवादिनी ने विपक्षी विद्युत निगम के जूनियर इंजीनियर, सहायक अभियन्‍ता और अधिशासी अभियन्‍ता से शिकायत की, परन्‍तु कोई कार्यवाही  नहीं  की  गयी।

 

-4-

तब विवश होकर उसने तहसील दिवस में उपजिलाधिकारी बदलापुर जौनपुर को प्रार्थना पत्र दिया, लेकिन उनके स्‍तर से भी समस्‍या का समाधान नहीं कराया गया।

     परिवाद पत्र के अनुसार प्रत्‍यर्थी/परिवादिनी का कथन है कि उसका उपरोक्‍त कनेक्‍शन दिनांक 14.08.2014 से विद्युत विभाग के कागजों पर चला रहा है, लेकिन मौके पर कनेक्‍शन जोड़ा नहीं जा रहा है, जिसके परिणामस्‍वरूप उस पर विद्युत अधिभार बढ़ता जा रहा है। अत: विवश होकर उसने परिवाद जिला फोरम के समक्ष प्रस्‍तुत किया है।

     अपीलार्थी/विपक्षी संख्‍या-1 ने जिला फोरम के समक्ष लिखित कथन प्रस्‍तुत किया है और कहा है कि प्रत्‍यर्थी/परिवादिनी के कनेक्‍शन में विद्युत प्रवाह बराबर होता रहा है। जब भी विद्युत लाईन डिस्‍टर्ब हुई तो अविलम्‍ब जोड़ दी गयी है। वह अपना विद्युत बिल आंशिक रूप से जमा करती रही है। वर्तमान में उसके ऊपर 50,000/-रू0 से अधिक का बकाया है।

     लिखित कथन में अपीलार्थी/विपक्षी संख्‍या-1 की ओर से कहा गया है कि जे0ई0 सत्‍य प्रकाश की लिखित रिपोर्ट के अनुसार प्रत्‍यर्थी/परिवादिनी का कनेक्‍शन संख्‍या 2325/152897 माह अगस्‍त 2016 में जोड़ दिया गया है। वर्तमान में कोई विवाद पक्षकारों के बीच नहीं है। पूर्व में प्रत्‍यर्थी/परिवादिनी व सत्‍य प्रकाश के बीच कुछ विवाद था, जो समाप्‍त हो गया है। वर्तमान में प्रत्‍यर्थी/परिवादिनी की लाईन सुचारू रूप से चल  रही  है।  प्रत्‍यर्थी/परिवादिनी  द्वारा

 

-5-

प्रस्‍तुत परिवाद निरस्‍त किये जाने योग्‍य है।

     जिला फोरम के समक्ष परिवाद के विपक्षीगण संख्‍या-2 व 3 अर्थात् सत्‍य प्रकाश जूनियर इंजीनियर एवं राजेश सिंह लाईनमैन ने लिखित कथन प्रस्‍तुत नहीं किया है। अत: उनके विरूद्ध परिवाद की कार्यवाही एकपक्षीय रूप से की गयी है।

     जिला फोरम ने उभय पक्ष के अभिकथन एवं उपलब्‍ध साक्ष्‍यों पर विचार करने के उपरान्‍त यह माना है कि प्रत्‍यर्थी/परिवादिनी ने दिनांक 14.08.2014 को अपीलार्थी/विपक्षी संख्‍या-1 के माध्‍यम               से विद्युत कनेक्‍शन लिया है, जिसका कनेक्‍शन संख्‍या 2325/152897 है और प्रत्‍यर्थी/परिवादिनी ने प्रश्‍नगत विद्युत कनेक्‍शन से सम्‍बन्धित अपने स्‍तर से समस्‍त औपचारिकतायें पूर्ण करते हुए दिनांक 14.08.2014 को 1350/-रू0 निगम के यहॉं जमा कर दिया है। उसके बाद से वह विपक्षीगण के यहॉं बराबर प्रयास करती रही है, लेकिन विपक्षीगण ने उसका विद्युत कनेक्‍शन नहीं जोड़ा है। जिला फोरम ने अपने निर्णय में यह भी उल्‍लेख किया है कि अपीलार्थी/विपक्षी संख्‍या-2 सत्‍य प्रकाश जे0ई0 ने मंच को भ्रमित करने के उददेश्‍य से झूठी रिपोर्ट भी दाखिल की है कि प्रत्‍यर्थी/परिवादिनी का कनेक्‍शन जोड़ दिया गया है। जिला फोरम ने अपने निर्णय में उल्‍लेख किया है कि सीलिंग प्रमाण पत्र प्रत्‍यर्थी/परिवादिनी को दिया जाना कानूनी रूप से अपेक्षित था, परन्‍तु सीलिंग प्रमाण पत्र विपक्षीगण द्वारा जारी किया जाना प्रमाणित नहीं  है।  अत:  जिला  फोरम  ने  यह  माना  है  कि

 

-6-

अपीलार्थी/विपक्षी संख्‍या-2 सत्‍य प्रकाश जे0ई0 ने गलत रिपोर्ट प्रस्‍तुत की है। उपरोक्‍त निष्‍कर्ष के आधार पर जिला फोरम ने परिवाद स्‍वीकार करते हुए उपरोक्‍त आदेश विपक्षीगण के विरूद्ध पारित किया है।

     अपीलार्थी/विपक्षीगण के विद्वान अधिवक्‍ता का तर्क है कि जिला फोरम द्वारा पारित आक्षेपित निर्णय और आदेश तथ्‍य और विधि के विरूद्ध है। प्रत्‍यर्थी/विपक्षी संख्‍या-3 राजेश सिंह प्रत्‍यर्थी/परिवादिनी की प्रश्‍नगत लाईन का लाईनमैन नहीं है।

     अपीलार्थी/विपक्षीगण के विद्वान अधिवक्‍ता का तर्क है कि जिला फोरम ने अधिवक्‍ता आयुक्‍त की रिपोर्ट को गलत ढंग से पढ़ा है। अधिवक्‍ता आयुक्‍त की रिपोर्ट से यह स्‍पष्‍ट है कि प्रत्‍यर्थी/परिवादिनी के भवन में इलैक्ट्रिक फिटिंग्‍स पायी गयी हैं।

     अपीलार्थी/विपक्षीगण के विद्वान अधिवक्‍ता का यह भी तर्क है कि जूनियर इंजीनियर श्री सत्‍य प्रकाश ने प्रत्‍यर्थी/परिवादिनी का कनेक्‍शन अगस्‍त 2016 में बहाल किया है और प्रत्‍यर्थी/परिवादिनी के कनेक्‍शन में जब भी विद्युत आपूर्ति में बाधा आयी है उसका निदान किया गया है।

     अपीलार्थी/विपक्षीगण के विद्वान अधिवक्‍ता का तर्क है कि जिला फोरम ने जो 10,000/-रू0 क्षतिपूर्ति प्रत्‍यर्थी/परिवादिनी को प्रदान की है, वह उचित नहीं है। जिला फोरम ने जो क्षतिपूर्ति की धनराशि 5000/-रू0 की कटौती अपीलार्थी/विपक्षी संख्‍या-2 के वेतन से करने को कहा है वह भी विधि विरूद्ध है।

 

-7-

     प्रत्‍यर्थी/परिवादिनी के विद्वान अधिवक्‍ता का तर्क है कि जिला फोरम द्वारा पारित आक्षेपित निर्णय और आदेश साक्ष्‍य और विधि के अनुकूल है। प्रत्‍यर्थी/परिवादिनी ने दिनांक 14.08.2014 को अपीलार्थी/विपक्षी संख्‍या-1 से विद्युत कनेक्‍शन प्राप्‍त किया है और आवश्‍यक औपचारिकतायें पूरी करते हुए वांछित धनराशि 1350/-रू0 जमा किया है। फिर भी मौके पर उसका कनेक्‍शन जोड़ा नहीं गया है और यह तथ्‍य अधिवक्‍ता आयुक्‍त की रिपोर्ट से प्रमाणित है। अत: जिला फोरम ने प्रत्‍यर्थी/परिवादिनी को जो क्षतिपूर्ति की धनराशि प्रदान की है वह उचित है। जिला फोरम के निर्णय में किसी हस्‍तक्षेप की आवश्‍यकता नहीं है।

     मैंने उभय पक्ष के तर्क पर विचार किया है।

     प्रत्‍यर्थी/परिवादिनी ने अपीलार्थी/विपक्षी संख्‍या-1 से कनेक्‍शन संख्‍या 2325/152897 दिनांक 14.08.2014 को प्राप्‍त किया है और समस्‍त औपचारिकतायें पूरी करते हुए दिनांक 14.08.2014 को 1350/-रू0 जमा किया है, परन्‍तु प्रत्‍यर्थी/परिवादिनी के अनुसार मौके पर उसका विद्युत कनेक्‍शन परिवाद के विपक्षी संख्‍या-3             श्री राजेश सिंह और विपक्षी संख्‍या-2 श्री सत्‍य प्रकाश, जूनियर इंजीनियर के षड्यंत्र से नहीं जोड़ा गया है। इन दोनों विपक्षीगण ने परिवाद पत्र के कथन का खण्‍डन लिखित कथन प्रस्‍तुत कर नहीं किया है और अपीलार्थी/विपक्षी संख्‍या-1 ने अपने लिखित कथन में कहा है कि प्रत्‍यर्थी/परिवादिनी का प्रश्‍नगत विद्युत कनेक्‍शन माह अगस्‍त 2016 में जोड़  दिया  गया  है,  जबकि  उसका  प्रश्‍नगत

 

-8-

विद्युत कनेक्‍शन दिनांक 14.08.2014 को स्‍वीकृत किया गया है और उसने समस्‍त औपचारिकतायें पूर्ण करते हुए वांछित धनराशि 1350/-रू0 दिनांक 14.08.2014 को जमा किया है। जिला फोरम ने अपने निर्णय में यह उल्‍लेख किया है कि वाद आयुक्‍त की आख्‍या से यह साबित है कि उनकी निरीक्षण की तिथि दिनांक 25.06.2017 तक प्रत्‍यर्थी/परिवादिनी का कनेक्‍शन नहीं जोड़ा गया था और न उसके भवन में मीटर लगा था। जिला फोरम के निर्णय में यह उल्‍लेख है कि वाद आयुक्‍त ने मकान के अन्दर दक्षिण दिशा में एक कमरे में पंखा टंगां होने और अस्‍थायी तार लगे होने का उल्‍लेख किया है तथा अंकित किया है कि पूंछने पर बताया कि बैटरी द्वारा लाईट और पंखा चलाता हूँ, जो दुकान से चार्ज करायी जाती है।

     अपीलार्थी/विपक्षीगण के विद्वान अधिवक्‍ता का तर्क है कि पंखा और लाईट प्रत्‍यर्थी/परिवादिनी के कमरे में लगा पाये जाने के कारण यह मानने हेतु उचित आधार है कि प्रत्‍यर्थी/परिवादिनी के भवन को विद्युत आपूर्ति होती रही है। अपीलार्थी/विपक्षीगण के विद्वान अधिवक्‍ता के इस तर्क से मैं सहमत नहीं हूँ। निर्विवाद रूप से प्रत्‍यर्थी/परिवादिनी का विद्युत कनेक्‍शन अगस्‍त 2014 में स्‍वीकार किया गया है और उसने वांछित धनराशि उसी समय जमा की है। अत: विद्युत प्राप्‍त किये जाने की प्रत्‍याशा में उसके द्वारा घर में पंखा लगाया जाना व अस्‍थायी वायरिंग की व्‍यवस्‍था किया जाना स्‍वाभाविक है। इसके अतिरिक्‍त आयुक्‍त की आख्‍या  से  यह

 

-9-

स्‍पष्‍ट है कि उनके निरीक्षण के समय प्रत्‍यर्थी/परिवादिनी के घर में

विद्युत पोल से जुड़ा कनेक्‍शन नहीं पाया गया है और न ही विद्युत मीटर पाया गया है। स्‍वयं अपीलार्थी/विपक्षी संख्‍या-1 के लिखित कथन के अनुसार माह अगस्‍त 2016 में प्रत्‍यर्थी/परिवादिनी का विद्युत कनेक्‍शन जोड़ा गया है, जबकि उसका विद्युत कनेक्‍शन अगस्‍त 2014 में स्‍वीकार किया गया है और उसी समय उसने आवश्‍यक औपचारिकतायें पूरी कर वांछित धनराशि जमा की है। अपीलार्थी/विपक्षी संख्‍या-1 का यह कथन अपीलार्थी/विपक्षी संख्‍या-2 सत्‍य प्रकाश जूनियर इंजीनियर की रिपोर्ट पर आधारित है, जिसके सम्‍बन्‍ध में स्‍पष्‍ट आरोप प्रत्‍यर्थी/परिवादिनी ने लगाया है कि वह प्रत्‍यर्थी/विपक्षी संख्‍या-3 राजेश सिंह से षड्यंत्र कर प्रत्‍यर्थी/परिवादिनी का विद्युत कनेक्‍शन नहीं जोड़ रहा है। अपीलार्थी/विपक्षी संख्‍या-1 ने स्‍वयं प्रत्‍यर्थी/परिवादिनी के विद्युत कनेक्‍शन की स्थिति जानने के लिए मौके का निरीक्षण नहीं किया है, जबकि आयुक्‍त की आख्‍या से यह स्‍पष्‍ट होता है कि माह अगस्‍त 2016 में प्रत्‍यर्थी/परिवादिनी का कनेक्‍शन जोड़े जाने का कथन गलत है।

     पत्रावली पर उपलब्‍ध सम्‍पूर्ण तथ्‍यों, साक्ष्‍यों और परिस्थितियों पर विचार करने के उपरान्‍त मैं इस मत का हूँ कि जिला फोरम ने अपीलार्थी/विपक्षीगण की सेवा में कमी के सम्‍बन्‍ध में जो निष्‍कर्ष निकाला है, वह आधार युक्‍त है और साक्ष्‍य व विधि के अनुसार है। जिला फोरम के निष्‍कर्ष में हस्‍तक्षेप हेतु उचित आधार नहीं है।

 

-10-

     उपरोक्‍त विवरण से यह स्‍पष्‍ट है कि प्रत्‍यर्थी/परिवादिनी का कनेक्‍शन दिनांक 14.08.2014 को अपीलार्थी/विपक्षी संख्‍या-1 द्वारा स्‍वीकार किया गया है और उसने आवश्‍यक औपचारिकतायें पूरी कर दिनांक 14.08.2014 को ही वांछित धनराशि 1350/-रू0 जमा किया है। फिर भी उसे विद्युत विभाग द्वारा कनेक्‍शन नहीं दिया गया है और उसकी शिकायत पर कोई प्रभावी कार्यवाही नहीं की गयी है। अत: जिला फोरम ने जो प्रत्‍यर्थी/परिवादिनी को                 10,000/-रू0 क्षतिपूर्ति शारीरिक और मानसिक कष्‍ट हेतु दिलाया है, वह उचित है।

     उपरोक्‍त सम्‍पूर्ण विवेचना के आधार पर मैं इस मत का हूँ कि जिला फोरम द्वारा पारित निर्णय तथ्‍य और विधि के अनुकूल है और उसमें किसी हस्‍तक्षेप की आवश्‍कता नहीं है। अपील बल रहित है अत: निरस्‍त की जाती है।    

उभय पक्ष अपील में अपना-अपना वाद व्‍यय स्‍वयं वहन करेंगे।

अपील में धारा-15 उपभोक्‍ता संरक्षण अधिनियम 1986 के अन्‍तर्गत जमा धनराशि अर्जित ब्‍याज सहित जिला फोरम को विधि के अनुसार निस्‍तारण हेतु प्रेषित की जाए।

 

(न्‍यायमूर्ति अख्‍तर हुसैन खान)

                  अध्‍यक्ष                      

जितेन्‍द्र आशु0,

कोर्ट नं0-1    

 

 
 
[HON'BLE MR. JUSTICE AKHTAR HUSAIN KHAN]
PRESIDENT

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