Uttar Pradesh

StateCommission

RP/27/2019

Ex. Engg Vidyut Vitran Nigam Ltd - Complainant(s)

Versus

Kusumadevi Mahavidyalaya - Opp.Party(s)

Isar Husain

30 Aug 2019

ORDER

STATE CONSUMER DISPUTES REDRESSAL COMMISSION, UP
C-1 Vikrant Khand 1 (Near Shaheed Path), Gomti Nagar Lucknow-226010
 
Revision Petition No. RP/27/2019
( Date of Filing : 12 Apr 2019 )
(Arisen out of Order Dated 04/01/2019 in Case No. EX/33/2017 of District Kanshiram Nagar)
 
1. Ex. Engg Vidyut Vitran Nigam Ltd
EDD (Rural Kasganj
...........Appellant(s)
Versus
1. Kusumadevi Mahavidyalaya
Through its manager Tahsil Sahavar Distt. Kasganj
...........Respondent(s)
 
BEFORE: 
 HON'BLE MR. JUSTICE AKHTAR HUSAIN KHAN PRESIDENT
 
For the Petitioner:
For the Respondent:
Dated : 30 Aug 2019
Final Order / Judgement

राज्‍य उपभोक्‍ता विवाद प्रतितोष आयोग, उ0प्र0, लखन

पुनरीक्षण संख्‍या-27/2019

(मौखिक)

(जिला उपभोक्‍ता फोरम, कासगंज द्वारा इजरा वाद संख्‍या 23/2017 में पारित आदेश दिनांक 04.01.2019 के विरूद्ध)

Executive Engineer, VidyutVitran Nigam Ltd, Electricity distribution Division (Rural) Kasganj.

                          ....................पुनरीक्षणकर्ता/निर्णीत ऋणी

बनाम

Kusumadevi Mahavidyalaya through its Manager, Tahsil, Sahavar, district: Kasganj.              

                                     ................विपक्षी/डिक्रीदार

समक्ष:-

माननीय न्‍यायमूर्ति श्री अख्‍तर हुसैन खान, अध्‍यक्ष।

पुनरीक्षणकर्ता की ओर से उपस्थित : श्री इसार हुसैन,                                            

                               विद्वान अधिवक्‍ता।

विपक्षी की ओर से उपस्थित : कोई नहीं।

दिनांक: 30-08-2019

मा0 न्‍यायमूर्ति श्री अख्‍तर हुसैन खान, अध्‍यक्ष द्वारा उदघोषित

निर्णय

इजरा वाद संख्‍या-23/2017 कुसुमादेवी महाविद्यालय बनाम  अधिशाषी अभियन्‍ता वि0वि0 निगम लि0 में जिला उपभोक्‍ता फोरम, कासगंज द्वारा पारित आदेश दिनांक 04.01.2019 के विरूद्ध यह पुनरीक्षण याचिका इजरा वाद के निर्णीत ऋणी एक्‍जीक्‍यूटिव इंजीनियर, विद्युत वितरण निगम लि0, इलैक्ट्रिसिटी डिस्‍ट्रीब्‍यूशन डिवीजन (रूरल) कासगंज की ओर से धारा-17 (1) (बी) उपभोक्‍ता संरक्षण अधिनियम 1986 के अन्‍तर्गत राज्‍य आयोग के समक्ष प्रस्‍तुत की गयी है।

आक्षेपित आदेश के द्वारा जिला फोरम ने पुनरीक्षणकर्ता/निर्णीत ऋणी को आदेशित किया है कि वह पुन: वादी के संयोजन के सन्‍दर्भ  में

 

-2-

निर्णयानुसार औसत खपत के आधार पर विद्युत बिल प्रेषित करे, जिसमें किसी भी प्रकार की पेनाल्‍टी व सरचार्ज न लगाया जाये।

पुनरीक्षणकर्ता की ओर से उनके विद्वान अधिवक्‍ता श्री इसार हुसैन उपस्थित आये हैं। विपक्षी की ओर से विद्वान अधिवक्‍ता श्री नीरज पालीवाल उपस्थित हुए हैं, परन्‍तु सुनवाई के समय अनुपस्थित रहे हैं। अत: पुनरीक्षणकर्ता के विद्वान अधिवक्‍ता के तर्क को सुनकर और आक्षेपित आदेश तथा पत्रावली का अवलोकन करके पुनरीक्षण याचिका का निस्‍तारण किया जा रहा है।

पुनरीक्षणकर्ता के विद्वान अधिवक्‍ता का तर्क है कि इजरा वाद में जिला फोरम द्वारा पारित आक्षेपित आदेश जिला फोरम द्वारा निष्‍पादन अधीन आदेश, जो परिवाद में पारित किया गया है, के विरूद्ध है। अत: जिला फोरम का आक्षेपित आदेश निरस्‍त किया जाना आवश्‍यक है।

पुनरीक्षणकर्ता के विद्वान अधिवक्‍ता का तर्क है कि जिला फोरम द्वारा परिवाद में पारित निष्‍पादन अधीन आदेश दिनांक 08.08.2017 में मात्र विद्युत मीटर स्‍थापित करके उससे होने वाली विद्युत खपत के आधार पर औसतन खपत के आधार पर विद्युत बिल जारी करने का निर्देश दिया गया है और यह धनराशि बकाया बिल के रूप में प्राप्‍त करने को कहा गया है। ऐसी स्थिति में जिला फोरम ने इजरा वाद में पारित आक्षेपित आदेश में जो पेनाल्‍टी और सरचार्ज न लगाये जाने का आदेश किया है, वह इजरा न्‍यायालय के अधिकार से परे है।

मैंने पुनरीक्षणकर्ता के विद्वान अधिवक्‍ता के तर्क पर विचार किया है।

 

-3-

उपरोक्‍त इजरा वाद जिला फोरम, कासगंज के समक्ष परिवाद संख्‍या-29/2016 कुसुमादेवी महाविद्यालय बनाम अधिशाषी अभियन्‍ता दक्षिणांचल विद्युत वितरण नि0लि0 खण्‍ड कासगंज में जिला फोरम, कासगंज द्वारा पारित आदेश दिनांक 08.08.2017 के निष्‍पादन हेतु पंजीकृत किया गया है।

उपरोक्‍त परिवाद संख्‍या-29/2016 में जिला फोरम द्वारा पारित निष्‍पादन अधीन आदेश दिनांक 08.08.2017 निम्‍न है:-

''प्रस्‍तुत परिवाद परिवादी सव्‍यय आंशिक रूप से स्‍वीकार किया जाता है तथा विपक्षी को निर्देशित किया जाता है कि वह सही विद्युत मीटर स्‍थापित करके उससे होने वाली विद्युत खपत के आधार पर औसतन खपत‍ के दृष्टिगत विद्युत बिल प्रेषित करे और विधियुक्‍त धनराशि बकाया बिल के रूप में प्राप्‍त करे इसके साथ ही टूटी हुई विद्युत केबिल को अविलम्‍ब दुरुस्‍त कर विद्युत आपूर्ति यथावत् चालू रखे।

याची को शारीरिक मानसिक क्षति व वाद व्‍यय के एवज में विपक्षी 5000/-रुपया (पांच हजार रू0) दो माह के अन्‍दर अदा किया जाना सुनिश्चित करे।''

जिला फोरम ने इजरा वाद में पारित आक्षेपित आदेश में उल्‍लेख किया है कि इजरा वाद में पारित आदेश दिनांक 09.10.2018 के परिप्रेक्ष्‍य में विभाग द्वारा मैनुअल बिल विवाद की ति‍थि से निर्णय की तिथि तक के लिए जारी किया गया है, जिस पर प्रार्थी/परिवादी द्वारा घोर आपत्ति की गयी है। जिला फोरम ने अपने आदेश में उल्‍लेख  किया

 

-4-

है कि मैनुअल बिल में भी विपक्षी द्वारा सरचार्ज व पेनाल्‍टी अधिरोपित किया गया है, जबकि निर्णय के अनुसार विपक्षी पेनाल्‍टी व सरचार्ज प्राप्‍त करने का अधिकारी नहीं पाया जाता है क्‍योंकि परिवादी द्वारा किसी भी स्‍तर पर कोई गलती नहीं की गयी है बल्कि विभाग द्वारा सेवा में घोर कमी व लापरवाही की गयी है।

जिला फोरम ने उपरोक्‍त उल्‍लेख के आधार पर आक्षेपित आदेश पारित करते हुए पुनरीक्षणकर्ता/निर्णीत ऋणी को निष्‍पादन अधीन निर्णय के अनुसार औसत खपत के आधार पर विद्युत बिल प्रेषित करने का निर्देश दिया है और स्‍पष्‍ट किया है कि पुनरीक्षित बिल में किसी भी प्रकार की पेनाल्‍टी व सरचार्ज न लगाया जाये।

परिवाद में जिला फोरम द्वारा पारित निष्‍पादन अधीन आदेश दिनांक 08.08.2017 से स्‍पष्‍ट है कि जिला फोरम ने पुनरीक्षणकर्ता, जो परिवाद में विपक्षी है, को निर्देशित किया है कि सही विद्युत मीटर स्‍थापित करके उससे होने वाली विद्युत खपत के आधार पर औसतन खपत को दृष्टिगत रखते हुए बिल प्रेषित करे और बकाया बिल के रूप में प्राप्‍त करे। जिला फोरम के आदेश से स्‍पष्‍ट है कि जिला फोरम ने पुनरीक्षणकर्ता, जो परिवाद में विपक्षी है, को आदेशित किया है कि वह पहले सही मीटर पुनरीक्षण याचिका के विपक्षी अर्थात् परिवाद के परिवादी के संयोजन में लगाये और उसके आधार पर औसत खपत को देखते हुए परिवादी को पुनरीक्षित बिल बकाये के लिए भेजा जाये। जिला फोरम के इस निर्देश के आधार पर यह स्‍पष्‍ट है कि जो भी बिल सही मीटर के अनुसार औसत उपभोग के आधार पर  भेजा  जायेगा  वह  पहली  बार

 

-5-

परिवादी को भेजा जायेगा और ऐसी स्थि‍ति में जिला फोरम के निष्‍पादन अधीन आदेश को दृष्टिगत रखते हुए इजरा वाद में जिला फोरम ने जो यह आदेशित किया है कि निष्‍पादन अधीन आदेश के अनुसार पुनरीक्षित बिल में पेनाल्‍टी और सरचार्ज की धनराशि नहीं लगायी जायेगी, वह निष्‍पादन अधीन निर्णय के अनुसार सही है। जिला फोरम द्वारा परिवाद में पारित निष्‍पादन अधीन आदेश का अक्षरश: पालन करने हेतु पुनरीक्षणकर्ता, जो परिवाद का विपक्षी है, बाध्‍य है। जिला फोरम ने अपने निर्णय में मात्र पुनरीक्षित बिल सही मीटर लगाकर औसत खपत के आधार पर जारी करने का निर्देश दिया है। जिला फोरम ने पेनाल्‍टी व सरचार्ज लगाने का कोई आदेश नहीं दिया है।

उपरोक्‍त विवेचना के आधार पर मैं इस मत का हूँ कि जिला फोरम द्वारा इजरा वाद में पारित आक्षेपित आदेश परिवाद में जिला फोरम द्वारा पारित निष्‍पादन अधीन आदेश के अनुकूल है। अत: इजरा वाद में जिला फोरम द्वारा पारित आक्षेपित आदेश में किसी हस्‍तक्षेप की आवश्‍यकता नहीं है। पुनरीक्षण याचिका निरस्‍त की जाती है।

 

 

(न्‍यायमूर्ति अख्‍तर हुसैन खान)

                     अध्‍यक्ष

 

जितेन्‍द्र आशु0

कोर्ट नं0-1

 

 
 
[HON'BLE MR. JUSTICE AKHTAR HUSAIN KHAN]
PRESIDENT
 

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