राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, उ0प्र0, लखनऊ।
(सुरक्षित)
अपील संख्या:-1191/2012
(जिला उपभोक्ता फोरम, गोरखपुर द्धारा परिवाद सं0-211/2011 में पारित निर्णय/आदेश दिनांक 02.5.2012 के विरूद्ध)
1- General Post Office, Lucknow through its Chief Post Master (General)
2- General Post Office, Gorakhpur through its Post Master. (General)
........... Appellants/ Opp. Parties
Versus
1- Kailash Jaiswal, S/o Sri Kedar Nath Jaiswal, R/o 123/387, Purdilpur, M.G. College Road, Gorakhpur.
……..…. Respondent/ Complainant
2- Passport Officer, Passport Office Complex behind R.B.I., Vipin Khand, Gomti Nagar, Lucknow.
……..…. Respondent/ Opp. Party
समक्ष :-
मा0 श्री रामचरन चौधरी, पीठासीन सदस्य
मा0 श्रीमती बाल कुमारी, सदस्य
अपीलार्थी के अधिवक्ता : डॉ0 उदय वीर सिंह
प्रत्यर्थी के अधिवक्ता : श्री आदित्य श्रीवास्तव
दिनांक : 24-01-2018
मा0 श्री रामचरन चौधरी, पीठासीन सदस्य द्वारा उदघोषित
निर्णय
मौजूदा अपील जिला उपभोक्ता फोरम, गोरखपुर द्धारा परिवाद सं0-211/2011 में पारित निर्णय/आदेश दिनांक 02.5.2012 के विरूद्ध योजित की गई है, जिसमें जिला उपभोक्ता फोरम द्वारा निम्न आदेश पारित किया गया है:-
"परिवादी का परिवाद विपक्षीगण के विरूद्ध स्वीकार किया जाता है। विपक्षी सं0-1 को निर्देशित किया जाता है कि निर्णय व आदेश के दिनांक से एक माह की अवधि के अन्तर्गत परिवादी से नया नियत प्रपत्र प्राप्त करके व तत्काल सेवा के अन्तर्गत निर्धारित फीस प्राप्त करके नया पासपोर्ट परिवादी को जारी किया जाए और पूर्व में जारी किए गए पासपोर्ट को
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निरस्त किया जाए एवं सभी संबंधित व्यक्तियों को इसकी सूचना दी जाए। विपक्षी सं0-2 व 3 की लापरवाही व सेवा में कमी के कारण चूंकि पूर्व में निर्गत पासपोर्ट परिवादी को प्राप्त नहीं हुआ है, इसलिए परिवादी विपक्षी सं0-2 व 3 से 20000.00 (बीस हजार रू0) एवं वाद व्यय के लिए 1000.00 (एक हजार रू0) प्राप्त करने का अधिकारी है, विपक्षी सं0-2 व 3 को निर्देशित किया जाता है कि एक माह की अवधि के अन्तर्गत इस धनराशि को परिवादी को प्रदान करे या मंच के समक्ष बैंक ड्राफ्ट के माध्यम से जमा करें जाए, जो परिवादी को दिलाई जा सके। नियत अवधि में आदेश का परिपालन न किए जाने पर विपक्षीगण के विरूद्ध विधि अनुसार कार्यवाही की जाएगी।”
संक्षेप में इस केस के तथ्य इस प्रकार है कि परिवादी ने एक पासपोर्ट प्राप्त करने के लिए प्रार्थना पत्र प्रतिवादी के समक्ष प्रस्तुत किया और काफी समय तक उसे पासपोर्ट प्राप्त नहीं हुआ तब वह स्वयं पासपोर्ट कार्यालय गया और जानकारी प्राप्त की तो उसे बताया गया कि प्रार्थना पत्र नं0- एल0के0ओ0-जेड 262833/2010 के आधार पर पासपोर्ट जारी कर दी गई है और उसे शीघ्र मिल जाएगा। पासपोर्ट प्राप्त न होने पर उसने सूचना अधिकारी अधिनियम के अन्तर्गत आवेदन किया तब उसे सूचना प्रदान की गई कि परिवादी को पासपोर्ट नं0-62436 दिनांक 16.8.2010 को स्पीड पोस्ट नं0-062436 दिनांक 24.8.2010 को भेजा जा चुका है। परिवादी को सूचित किया गया कि पोस्ट आफिस से सम्पर्क करे। परिवादी ने पोस्ट आफिस जी0पी0ओ0 लखनऊ में आवेदन किया उसकी शिकायत दिनांक29.11.2010 को अंकित की गई। जी0पी0ओ0 लखनऊ ने जी0पी0ओ0 गोरखपुर से सूचना प्राप्त की तो पता चला कि उनको पत्र प्राप्त नहीं हुआ है। परिवादी दौड-धूप करने के पश्चात भी अपना पासपोर्ट प्राप्त नहीं कर सका। परिवादी को डर है कि उसके पासपोर्ट का गलत प्रयोग किया जा सकता है, उसे कोई दूसरा व्यक्ति प्रयोग कर सकता है। परिवादी ने प्रतिवादीगण को नोटिस भी भेजा, लेकिन उसका कोई जवाब प्राप्त नहीं हुआ अत: परिवादी द्वारा प्रतिवादीगण के विरूद्ध जिला उपभोक्ता फोरम के
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समक्ष इस अनुतोष के साथ प्रस्तुत किया गया है कि प्रतिवादी सं0-1 को निर्देशित किया जाए कि परिवादी को पासपोर्ट प्रदान किया जाय या डुप्लीकेट पासपोर्ट जारी किया जाय और उसे 25500.00 रू0 क्षतिपूर्ति के रूप में दिलाया जाय।
प्रतिवादी सं0-2 व 3 की ओर से जिला उपभोक्ता फोरम के समक्ष अपना प्रतिवाद पत्र प्रस्तुत कर यह कथन किया गया है कि स्पीड पोस्ट आर्टिकिल नं0 इ0यू0 850624364 आई0एन0 दिनांक 24.8.2010 को प्रापक को प्राप्त हुआ था, यह तथ्य जॉच से स्पष्ट हुआ, चूंकि शिकायत देर से प्राप्त हुई इसलिए पूरी जॉच नहीं की जा सकी। परिवाद के तथ्य गलत प्रस्तुत किए गए है, विश्वसनीय नहीं है एवं पोस्ट आफिस एक्ट व नियम के अन्तर्गत नियत क्षतिपूर्ति की धनराशि परिवादी को दिलाईजा सकती है और धारा-6 पोस्ट आफिस एक्ट के अन्तर्गत किसी पत्र के न पहुंचने की जिम्मेदारी पोस्ट आफिस की नहीं है। अत: परिवाद निरस्त किए जाने योग्य है।
इस सम्बन्ध में जिला उपभोक्ता फोरम के प्रश्नगत निर्णय/आदेश दिनांकित 02.5.2012 तथा आधार अपील का अवलोकन किया गया एवं अपीलार्थी की ओर से विद्वान अधिवक्ता डॉ0 उदय वीर सिंह तथा प्रत्यर्थी की ओर से विद्वान अधिवक्ता श्री आदित्य श्रीवास्तव उपस्थित आये। उभय पक्ष के विद्वान अधिवक्तागण की बहस सुनी तथा पत्रावली पर उपलब्ध अभिलेखों तथा लिखित बहस का अवलोकन किया गया है।
अपीलार्थी की ओर से यह कहा गया है कि इस केस में परिवादी उपभोक्ता नहीं है और परिवादी ने कोई पत्र पोस्ट नहीं किया था और यदि कोई प्रतिकर बनता भी है, तो वह आर्टिकिल भेजने वाले के पक्ष में हो सकता है और अपीलार्थी उपभोक्ता नहीं है और परिवादी ने उसने कोई सेवा नहीं ली थी और इस सम्बन्ध में अपीलार्थी की ओर से मा0 राष्ट्रीय आयोग की नजीर Speed Post Through Manager Speed Post, Gpo Building, Jaipur Vs. Laxman Singh. 2010 NCJ 309 (NC) की
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ओर पीठ का ध्यान दिलाया गया है, जिसमें मा0 राष्ट्रीय आयोग द्वारा यह उल्लेख किया गया है:-
“Indian Post Office-Speed Post Services-Delayed-Legality of compensation-Held-For deleyed delivery in speed post, compensation equal to composite speed post charges in payable only-Consumer for a can not grant compensation more than what is statutory fixed.”
इस सम्बन्ध में अपीलार्थी की ओर से मा0 राष्ट्रीय आयोग की एक अन्य नजीर Union of India & Ors. Vs. M.L. Bora 2011 (2) CPC की ओर पीठ का ध्यान दिलाया गया है, जिसमें मा0 राष्ट्रीय आयोग द्वारा यह उल्लेख किया गया है:-
“Held, as section 6 of the Post Office Act provides complete immunity to Government from loss or mis-delivery of postal articles- Petitioner cannot be held liable especially when no specific allegation of any wilful act on the part of any official has been made- Relief granted by the For a below set aside.”
केस के तथ्यों व परिस्थितियों तथा अपीलार्थी की ओर से दाखिल नजीरों में प्रतिपादित सिद्धांत को देखते हुए हम यह पाते हैं कि मौजूदा केस में जिला उपभोक्ता फोरम द्वारा पारित निर्णय/आदेश विधि सम्मत नहीं है और निरस्त किए जाने योग्य है। तद्नुसार अपीलार्थी की अपील स्वीकार किए जाने योग्य है।
आदेश
अपीलार्थी की अपील स्वीकार की जाती है तथा जिला उपभोक्ता फोरम, गोरखपुर द्धारा परिवाद सं0-211/2011 में पारित निर्णय/आदेश दिनांक 02.5.2012 को निरस्त किया जाता है।
उभय पक्ष अपीलीय व्यय भार स्वयं वहन करेगें।
(रामचरन चौधरी) (बाल कुमारी)
पीठासीन सदस्य सदस्य
हरीश आशु.,
कोर्ट सं0-5