राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, उ0प्र0, लखनऊ।
अपील संख्या– 1199/2010 सुरक्षित
(जिला उपभोक्ता फोरम, देवरिया द्वारा परिवाद सं0 126/2005 में पारित निर्णय/आदेश दिनांकित 01-05-2010 के विरूद्ध)
1-सीनियर अधीक्षक आफ पोस्ट आफिस, वैशाली डिवीजन, वैशाली (बिहार)
2-सीनियर अधीक्षक, आफ पोस्ट आफिस, देवरिया डिवीजन, देवरिया। अपीलार्थीगण/विपक्षीगण
बनाम
जगदीश प्रसाद नांगलिया, निवासी- सरस्वती आयल एण्ड फ्लोर मिल, मोतीलाल रोड़, देवरिया यू0पी0। प्रत्यर्थी/परिवादी
समक्ष:-
माननीय श्री आर0सी0 चौधरी, पीठासीन सदस्य।
माननीय श्री राज कमल गुप्ता, सदस्य।
अपीलार्थी की ओर से उपस्थिति : श्री सुधीर प्रताप सिंह, विद्वान अधिवक्ता।
प्रत्यर्थी की ओर से उपस्थिति : श्री संजय कुमार वर्मा, विद्वान अधिवक्ता।
दिनांक-30-11-2016
माननीय श्री आर0सी0 चौधरी, पीठासीन सदस्य, द्वारा उद्घोषित
निर्णय
प्रस्तुत अपील जिला उपभोक्ता फोरम, देवरिया द्वारा परिवाद सं0 126/2005 में पारित निर्णय/आदेश दिनांकित 01-05-2010 के विरूद्ध प्रस्तुत की गई है, जिसमें जिला उपभोक्ता फोरम के द्वारा निम्न आदेश पारित किया गया है
विपक्षी सं0-एक और दो के द्वारा रजिस्टर्ड डाक न मिलने के कारण परिवादी को (20,000-00 का ड्राफ्ट नहीं पाने की) क्षतिपूर्ति 4000-00 रूपये अदा करें। विपक्षी सं0-तीन व चार को निर्देश दिया जाता है कि परिवादी को 27-11-2004 से बैंक ड्राफ्ट की रकम 20,000-00 रूपये को भुगतान की वास्तविक अदायगी तक बचत खाता के ब्याज सहित अदा करें। विपक्षी सं0-1 व 2 परिवादी को वाद व्यय हेतु 1500-00 रूपये मात्र समान भाग में अदा करेंगे।
संक्षेप में केस के तथ्य इस प्रकार से है कि परिवादी के पास श्री कन्हैया लाल जायसवाल लक्ष्मण पुर हाट महुआ जिला वैशाली बिहार प्रदेश ने एक पंजीकृत लिफाफा सं0-07/26/10/2004 को भेजा उक्त लिफाफे में दिनांकित 26-10-2004 था जो सेंट्रल बैंक आफ इंडिया शाखा हरपुर बेलवा वाया सिधारा लक्ष्मणपुर हाट जिला वैशाली से बनवाया गया था, जो कि परिवादी के नाम से था। परिवादी को भेजा गया डाक उसे 11-12-2004 तक प्राप्त नहीं हुआ उसने इस सम्बन्ध में विपक्षी सं0-1 व दो से 11-12-2004 में स्पीड पोस्ट से पत्र प्रेषित किया, परन्तु विपक्षी सं0-1 और दो द्वारा कोई समुचित कार्यवाही नहीं की गई। उक्त प्रकरण का हवाला देते हुए परिवादी द्वारा विपक्षी सं0-1 को पत्र दिया गया। विपक्षीगण एक व दो को कई बार रजिस्टर्ड
(2)
पत्र देने के बावजूद भी कोई प्रभावी कार्यवाही नहीं की गई। विपक्षी सं0-3 व 4 को भी नान पेमेन्ट के सम्बन्ध में पत्र दिये गये परन्तु कोई कार्यवाही नहीं की गई। विपक्षीगण के अनुचित व्यापार प्रथा के कारण परिवादी को यह परिवाद प्रस्तुत करना पड़ रहा है। परिवादी ने अनुतोष के रूप में 20,000-00 का डिमाण्ड ड्राफ्ट देने और ड्राफ्ट जारी होने के दिनांक से भुगतान की वास्तविक तिथि तक 18 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित अदा करने की मांग किया है।
जिला उपभोक्ता फोरम के समक्ष विपक्षी सं0-2 के तरफ से कहा गया है कि परिवादी को परिवाद दाखिल करने का कोई वाद कारण उत्पन्न नहीं है। परिवादी विपक्षीगण का उपभोक्ता नहीं है और न ही विपक्षीगण की कोई सेवाएं प्राप्त की है और परिवादी का परिवाद इसी आधार पर खारिज होने योग्य है।
इस सम्बन्ध में अपीलार्थी के विद्वान अधिवक्ता श्री सुधीर प्रताप सिंह तथा प्रत्यर्थी की ओर से विद्वान अधिवक्ता श्री संजय कुमार वर्मा, उपस्थित है। दोनों पक्षों के विद्वानअधिवक्ता की बहस सुनी गई तथा अपील आधार एवं जिला उपभोक्ता फोरम के निर्णय/आदेश दिनांकित 01-05-2010 का अवलोकन किया गया।
अपीलार्थी के विद्वान अधिवक्ता ने अपने बहस में कहा कि परिवादी उपभोक्ता नहीं है। और परिवादी ने कोई रजिस्ट्री पत्र नहीं भेजा था, बल्कि रजिस्ट्री भेजने वाले कन्हैयालाल जायसवाल को पक्षकार नहीं बनाया गया है और रजिस्ट्री का कोई नम्बर नहीं दिया गया है।
केस के तथ्यों परिस्थितियों को देखते हुए एवं उभय पक्ष के विद्वान अधिवक्ता को सुनने के उपरान्त तथा अपील आधार को देखते हुए हम यह पाते हैं कि परिवादी उपभोक्ता की श्रेणी में नहीं आता है, क्योंकि पंजीकृत लिफाफा श्री कन्हैया लाल जायसवाल ने भेजा था। अत: परिवादी को कोई अनुतोष नहीं दिया जा सकता है और जिला उपभोक्ता फोरम के द्वारा जो परिवादी को 4,000-00 रूपये व ब्याज दिलाया गया है, वह विधि सम्मत् नहीं है एवं उसका कोई औचित्य नहीं है और समाप्त किये जाने योग्य है और अपीलकर्ता की अपील स्वीकार होने योग्य है।
(3)
आदेश
अपीलकर्ता की अपील स्वीकार की जाती है तथा जिला उपभोक्ता फोरम देवरिया द्वारा परिवाद सं0 126/2005 में पारित निर्णय/आदेश दिनांकित 01-05-2010 को निरस्त किया जाता है।
उभय पक्ष अपना-अपना व्यय भार स्वयं वहन करेंगे।
(आर0सी0 चौधरी) (राज कमल गुप्ता)
पीठासीन सदस्य सदस्य,
आर.सी.वर्मा, आशु.
कोर्ट नं0-4