राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, उ0प्र0, लखनऊ।
सुरक्षित
अपील सं0-2463/2007
(जिला उपभोक्ता फोरम, उन्नाव द्वारा परिवाद संख्या-१२/२००२ में पारित निर्णय/आदेश दिनांक-२५/०७/२००७ के विरूद्ध)
- हेड पोस्ट आफिस उन्नाव द्वारा पोस्ट मास्टर हेड आफिस उन्नाव।
- डिवीजन पोस्ट आफिस द्वारा चीफ पोस्ट मास्टर जीपीओ लखनऊ।
- पोस्ट आफिस मोरावं द्वारा सब डिवीजन मास्टर मोरावं उन्नाव।
.............अपीलार्थीगण.
बनाम
- ज्ञान प्रकाश पुत्र श्री शिव पाल यादव निवासी मोहल्ला चन्दन गंज बाजार कस्बा एवं परगना मोरावं जिला उन्नाव।
..............प्रत्यर्थी/परिवादी.
- जिला सलेक्शन कमिटी उन्नाव द्वारा जिला मजिस्ट्रेट उन्नाव।
..............प्रोफार्मा प्रत्यर्थी
समक्ष:-
- माननीय श्री उदय शंकर अवस्थी, पीठा0सदस्य
- माननीय श्री गोवर्धन यादव, सदस्य ।
अपीलकर्तागण की ओर से उपस्थित : डा0 उदय वीर सिंह विद्वान अधिवक्ता।
प्रत्यर्थी की ओर से उपस्थित: श्री एस0के0 शुक्ला विद्वान अधिवक्ता।
दिनांक:06-03-2017
माननीय श्री उदय शंकर अवस्थी, पीठा0सदस्य द्वारा उदघोषित
निर्णय
प्रस्तुत अपील जिला उपभोक्ता फोरम, उन्नाव द्वारा परिवाद संख्या-१२/२००२ में पारित निर्णय/आदेश दिनांक-२५/०७/२००७ के विरूद्ध योजित की गयी है।
संक्षेप में तथ्य इस प्रकार हैं कि प्रत्यर्थी/परिवादी के कथनानुसार उसने मूल परिवाद के विपक्षी सं0-4 द्वारा विज्ञापित कनिष्ठ लिपिक के पद हेतु परीक्षा में सम्म्िालित होने हेतु आवेदन पत्र पंजीकृत डाक से विपक्षी सं0-1 द्वारा दिनांक ०३/०९/२००१ को विपक्षी सं0-4 के पते पर भेजा गया था, किन्तु अपीलकर्ता/विपक्षी ने प्रत्यर्थी/परिवादी द्वारा प्रेषित पंजीकृत पत्र विपक्षी सं0-4 के कार्यालय में नहीं पहुंचाया, जिससे प्रत्यर्थी/परिवादी को विपक्षी सं0-4 द्वारा संचालित परीक्षा में प्रवेश हेतु प्रवेश पत्र प्राप्त नहीं हो सका, जिसके कारण प्रत्यर्थी/परिवादी परीक्षा में सम्मिलित नहीं हो सका। प्रत्यर्थी/परिवादी द्वारा प्रेषित पंजीकृत पत्र विपक्षी सं0-4 को प्रेषित न करने के संदर्भ में प्रत्यर्थी/परिवादी ने अपीलकर्तागण के अधिकारियों एवं कर्मचारियों से संपर्क किया तथा लिखित रूप से प्रार्थना पत्र भी प्रस्तुत किया किन्तु उसे संतोषजनक उत्तर प्राप्त नहीं हुआ। अपीलकर्ता की लापरवाही के कारण प्रत्यर्थी/परिवादी नौकरी प्राप्त करने से वंचित हुआ। अत: क्षतिपूर्ति के रूप में ०४ लाख रूपये दिलाए जाने हेतु परिवाद जिला मंच के समक्ष प्रत्यर्थी/परिवादी द्वारा प्रेषित किया गया।
अपीलकर्तागण के कथनानुसार वास्तव में प्रश्नगत पंजीकृत पत्र दिनांक ०३/०९/२००१ को मोरावं डाक घर द्वारा उन्नाव डाक घर भेजा गया, किन्तु उन्नाव डाक घर द्वारा उक्त पत्र का निस्तारण नहीं किया गया । अपीलकर्तागण का यह भी कथन है कि पोस्ट आफिस अधिनियम की धारा ०६ के अन्तर्गत अपीलकर्तागण क्षतिपूर्ति की अदायगी हेतु उत्तरदायी नहीं है। जिला मंच ने प्रश्नगत निर्णय द्वारा प्रत्यर्थी/परिवादी का परिवाद स्वीकार करते हुए अपीलकर्तागण को आदेशित किया कि वह ५००००/-रू0 बतौर क्षतिपूर्ति परिवादी को ०३ माह के अन्दर अदा करेंगे। निर्धारित अवधि में धनराशि अदा न किए जाने की स्थिति में अपीलकर्तागण दावा दायर करने की तिथि २३/०१/२००२ से १२ प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज भी प्राप्त करने हेतु उत्तरदायी होंगे। इसके अतिरिक्त अपीलकर्तागण से प्रत्यर्थी/परिवादी ०२ हजार रूपये बतौर वाद व्यय भी प्राप्त करने का अधिकारी होगा।
इस निर्णय से क्षुब्ध होकर यह अपील योजित की गयी है।
हमने अपीलकर्तागण के विद्वान अधिवक्ता डा0 उदय वीर सिंह एवं प्रत्यर्थी के विद्वान अधिवक्ता श्री एस0के0 शुक्ला के तर्क सुने तथा अभिलेखों का अवलोकन किया।
प्रस्तुत अपील प्रश्नगत निर्णय दिनांक २५/०७/२००७ के विरूद्ध दिनांक ०८/११/२००७ को योजित की गयी है। इस प्रकार यह अपील अधिनियम की धारा १५ के अन्तर्गत निर्धारित समय सीमा के अन्तर्गत योजित नहीं की गयी है। अपील के प्रस्तुतीकरण में हुए विलंब को क्षमा किए जाने हेतु प्रार्थना पत्र अपीलकर्तागण की ओर से प्रस्तुत किया गया है। इस प्रार्थना पत्र के समर्थन में वी0बी0 चौबे का शपथ पत्र संलग्न किया गया है। इस शपथ पत्र के विरूद्ध कोई प्रति शपथ पत्र प्रत्यर्थी की ओर से प्रस्तुत नहीं किया गया है। अपील के प्रस्तुतीकरण में हुए विलंब का पर्याप्त स्पष्टीकरण अपीलकर्तागण द्वारा प्रस्तुत किया गया है। अत: अपील के प्रस्तुतीकरण में हुए विलंब को क्षमा किया जाता है।
अपीलकर्तागण के विद्वान अधिवक्ता द्वारा यह तर्क प्रस्तुत किया गया है कि पोस्ट आफिस अधिनियम की धारा ०६ के अन्तर्गत डाक के गन्तव्य स्थान पर प्राप्त कराए जाने में विलंब, डाक के नष्ट हो जाने अथवा गलत स्थान पर वितरित किए जाने के संदर्भ में डाक विभाग उत्तरदायी नहीं होगा, जब तक कि यह प्रमाणित नहो कि जानबूझकर अथवा धोंखा देने की नियत से उपरोक्त त्रुटियां कारित की गयी है।
पोस्ट आफिस अधिनियम की धारा ०६ के अनुसार-
‘’ Exemption from liability for loss, misdelivery, delay or damage- The Government shall not incur any liability by reason of the loss, misdelivery or delay of, or damage to, any postal article in course of transmission by post except in so far as such liability may in express terms be undertaken by the Central Government as hereinafter provided; and no officer of the post office shall incur any liability by reason of any such loss, misdelivery, delay or damage, unless he has caused the same fraudulently or by his willful act or default ”.
प्रत्यर्थी के विद्वान अधिवक्ता का तर्क है कि प्रश्नगत प्रकरण में अपीलकर्तागण के कर्मचारियों द्वारा जानबूझकर प्रत्यर्थी/परिवादी की डाक का वितरण नहीं किया गया ।
अपीलकर्तागण के विद्वान अधिवक्ता द्वारा यह तर्क प्रस्तुत किया गया कि प्रत्यर्थी/परिवादी ने जिला मंच के समक्ष ऐसी कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं की है, जिससे यह प्रमाणित हो कि प्रश्नगत डाक अपीलकर्ता के कर्मचारियों द्वारा जानबूझकर अथवा धोंखे की नियत से वितरित नहीं की गयी।
प्रश्नगत निर्णय के अवलोकन से यह विदित होता है कि वस्तुत: ऐसी कोई साक्ष्य जिला मंच के समक्ष प्रत्यर्थी/परिवादी द्वारा प्रस्तुत नहीं की गयी । मात्र परिवाद के अभिकथनों के आधार पर कोई तथ्य स्वत: प्रमाणित नहीं माना जा सकता है। प्रत्यर्थी/परिवादी द्वारा यह साबित नहीं किया गया है कि वस्तुत: प्रश्नगत डाक अपीलकर्ता के कर्मचारियों द्वारा जानबूझकर अथवा धोंखे की नियत से वितरित नहीं की गयी है। उपरोक्त पोस्ट आफिस अधिनियम की धारा ०६ के आलोक में मात्र इस आधार पर कि प्रत्यर्थी/परिवादी द्वारा भेजी गयी डाक गन्तव्य स्थान तक नहीं पहुंची, क्षतिपूर्ति की अदायगी हेतु अपीलकर्ता को उत्तरदायी नहीं माना जा सकता।
हमारे विचार से विद्वान जिला मंच ने प्रश्नगत मामले का उचित परिशीलन न करते हुए प्रश्नगत निर्णय पारित किया है, जो निरस्त किए जाने योग्य है। तदनुसार अपील स्वीकार किए जाने योग्य है।
आदेश
अपील स्वीकार की जाती है। विद्वान जिला उपभोक्ता फोरम, उन्नाव द्वारा परिवाद संख्या-१२/२००२ में पारित निर्णय/आदेश दिनांक-२५/०७/२००७ निरस्त किया जाता है। परिवाद भी निरस्त किया जाता है।
उभयपक्ष अपना-अपना वाद व्यय स्वयं वहन करेंगे।
उभयपक्षों को इस निर्णय की प्रमाणित प्रतिलिपि नियमानुसार नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाए।
(उदय शंकर अवस्थी) (गोवर्धन यादव)
पीठा0सदस्य सदस्य
सत्येन्द्र, आशु0 कोर्ट नं0-3