सुरक्षित
राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, उ0प्र0 लखनऊ
(जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष फोरम, शाहजहांपुर द्वारा परिवाद संख्या 172/2009 में पारित प्रश्नगत निर्णय एवं आदेश दिनांक 25.11.2011 के विरूद्ध)
अपील संख्या 05 सन 2012
1 सुपरिण्टेंडेंट सब पोस्ट आफिस, रेलवे स्टेशन शाहजहांपुर ।
2 सुपरिण्टेंडेंट आफ पोस्ट आफिस, शाहजहांपुर डिवीजन शाहजहांपुर
.......अपीलार्थी/प्रत्यर्थी
-बनाम-
गौरव कुमार वर्मा निवासी नगला वाडू जई पेशावरी, डिवीजन शाहजहांपुर ।
.........प्रत्यर्थी/परिवादी
समक्ष:-
मा0 श्री उदय शंकर अवस्थी, पीठासीन सदस्य।
मा0 श्री गोवर्धन यादव, सदस्य।
अपीलार्थी की ओर से विद्वान अधिवक्ता - डा0 उदयवीर सिंह के सहयोगी
श्री कृष्ण पाठक।
प्रत्यर्थी की ओर से विद्वान अधिवक्ता - अजय प्रताप सिंह ।
दिनांक:-
श्री गोवर्धन यादव, सदस्य द्वारा उद्घोषित
निर्णय
प्रस्तुत अपील, जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष फोरम, शाहजहांपुर द्वारा परिवाद संख्या 172/2009 में पारित प्रश्नगत निर्णय एवं आदेश दिनांक 25.11.2011 के विरूद्ध प्रस्तुत की गयी है ।
संक्षेप में, प्रकरण के आवश्यक तथ्य इस प्रकार हैं कि परिवादी ने सचिव लोक सेवा आयोग, उ0प्र0 इलाहाबाद को स्पीड पोस्ट से दिनांक 02.09.2008 को अपना फार्म विपक्षी सुपरिण्टेंडेंट सब पोस्ट आफिस, रेलवे स्टेशन शाहजहांपुर के कार्यालय से भेजा था लेकिन परिवादी का फार्म निर्धारित तिथि 26.12.2008 तक गन्तब्य तक नहीं पहुंचा । जब परिवादी को प्रवेश पत्र प्राप्त नहीं हुआ तो उसने दिनांक 26.12.08 को शिकायती पत्र दिया जिसका कोई संतोषजनक उत्तर उसे नहीं दिया गया । परिवादी का कहना है कि उसकी एक वर्ष की कड़ी मेहनत तथा कैरयर का अवसर विपक्षीगण ने बरवाद कर दिया, अत: परिवादी ने जिला मंच के समक्ष क्षतिपूर्ति हेतु परिवाद योजित किया।
जिला मंच के समक्ष विपक्षीगण ने परिवाद पत्र का विरोध करते हुए उल्लिखित किया कि नियमानुसार अंतरदेशीय स्पीड पोस्ट पत्र की शिकायत बुकिंग के एक माह के अंदर की जानी चाहिए परन्तु परिवादी ने तीन माह के उपरांत शिकायत की है जो अवधि से बाधित है। परिवादी द्वारा बुक कराया गया स्पीड पोस्ट विपक्षी द्वारा गन्तव्य स्थान को प्रेषित कर दिया गया । इस प्रकार उसकी सेवा में कोई कमी नहीं है। विपक्षीगण का यह भी कहना है कि परिवादी का परिवाद धारा-6 भारतीय डाक अधिनियम 1998 के प्राविधानों से बाधित है।
जिला मंच ने उभय पक्ष के साक्ष्य एवं अभिवचनों के आधार पर निम्न आदेश पारित किया :-
'' परिवाद संख्या 172/09 गौरव कुमार वर्मा बनाम डाकघर आदि स्वीकार किया जाता है। विपक्षीगण अधीक्षक उपडाकघर रेलवे स्टेशन शाहजहांपुर आदि को आदेशित किया जाता है कि वे एक माह के अंदर 11000.00 रू0 की क्षतिपूर्ति परिवादी को अदा करे। इस अवधि के पश्चात परिवादी इस धनराशि पर 10 प्रतिशत वार्षिक की दर से ब्याज भी पाने का अधिकारी है। ''
उक्त आदेश से क्षुब्ध होकर प्रस्तुत अपील योजित की गयी है।
अपील के आधारों में कहा गया है कि जिला मंच का प्रश्नगत निर्णय विधिपूर्ण नहीं है तथा सम्पूर्ण तथ्यों को संज्ञान में लिए बिना प्रश्नगत निर्णय पारित किया गया है जो अपास्त किए जाने योग्य है।
हमने अपीलार्थी के विद्वान अधिवक्ता डा0 उदयवीर सिंह के सहयोगी श्री कृष्ण पाठक तथा प्रत्यर्थी के विद्वान अधिवक्ता श्री अजय प्रताप सिंह के तर्क विस्तार पूर्वक सुने एवं पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का सम्यक अवलोकन किया।
पत्रावली के अवलोकन से स्पष्ट होता है कि परिवादी ने सचिव लोक सेवा आयोग, उ0प्र0 इलाहाबाद को स्पीड पोस्ट से दिनांक 02.09.2008 को अपना फार्म विपक्षी सुपरिण्टेंडेंट सब पोस्ट आफिस, रेलवे स्टेशन शाहजहांपुर के कार्यालय से भेजा था लेकिन परिवादी का फार्म निर्धारित तिथि 26.12.2008 तक गन्तब्य तक नहीं पहुंचा । जब परिवादी को प्रवेश पत्र प्राप्त नहीं हुआ तो उसने दिनांक 26.12.08 को शिकायती पत्र दिया जिसका कोई संतोषजनक उत्तर उसे नहीं दिया गया जबकि विपक्षीगण का कथन है कि नियमानुसार अंतरदेशीय स्पीड पोस्ट पत्र की शिकायत बुकिंग के एक माह के अंदर की जानी चाहिए परन्तु परिवादी ने तीन माह के उपरांत शिकायत की है जो अवधि से बाधित है। परिवादी द्वारा बुक कराया गया स्पीड पोस्ट विपक्षी द्वारा गन्तव्य स्थान को प्रेशित कर दिया गया । इस प्रकार उसकी सेवा में कोई कमी नहीं है।
बहस के दौरान अपीलार्थी के विद्वान अधिवक्ता द्वारा यह अवगत कराया गया कि डाकघर द्वारा दी गयी सेवायें मात्र Statutory and there is no contractual liability हैं। उनका यह भी तर्क है कि समान्यतया पंजीकृत पत्र को एक स्थान से उनके गन्तव्य तक एक सप्ताह का समय लगता है। अपीलार्थी द्वारा प्रश्नगत प्रपत्र गन्तब्य तक पहुंचा दिया था ऐसी स्थिति में अपीलार्थी की ओर से कोई सेवा में कमी नहीं की गयी है। अपीलार्थी के विद्वान अधिवक्ता का यह भी तर्क है कि प्रश्नगत प्रकरण इण्डियन पोस्ट आफिस एक्ट की धारा-06 से बाधित है, जो निम्नवत् अंकित है :-
Section 6 of the Indian Post Office Act. 1989 reads as under :
“6, Exemption from liability for loss, misdelivery, delay or damage - The Government shall not incur any liability by reason of the loss, misdelivery or delay of or damage to, any postal article in course of transmission by post, except insofar as such liability may in express terms be undertaken by the Central Government as hereinafter provided and no officer of the Post Office shall incur any liability by reason of any such loss, misdelivery, delay or damage, unless he has caused the same fraudulently or by his willful act or default.”
अपीलार्थी के विद्वान अधिवक्ता ने अपने तर्क के समर्थन में मा0 राष्ट्रीय आयोग नई दिल्ली द्वारा IV (2017) CPJ 10 (NC) MANAGER, SPEED POST &ORS VS BHANWAR LAL GORA में पारित विधि व्यवस्था को सन्दर्भित किया है।
उपरोक्त विश्लेषण के आधार पर पीठ इस निष्कर्ष पर पहुँचती है कि भारतीय डाक अधिनियम की धारा-06 एवं माननीय राष्ट्रीय आयोग के द्वारा अवधारित विधि व्यवस्था के आलोक में जिला मंच द्वारा पारित प्रश्नगत निर्णय एवं आदेश विधि संगत एवं न्यायोचित नहीं है। फलस्वरूप अपील स्वीकार करते हुए जिला मंच का प्रश्नगत निर्णय एवं आदेश अपास्त होने योग्य है।
आदेश
प्रस्तुत अपील स्वीकार करते हुए जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष फोरम, शाहजहांपुर द्वारा परिवाद संख्या 172/2009 में पारित प्रश्नगत निर्णय एवं आदेश दिनांक 25.11.2011 निरस्त किया जाता है।
उभय पक्ष इस अपील का अपना अपना व्यय स्वयं वहन करेंगे।
(उदय शंकर अवस्थी) (गोवर्धन यादव)
पीठासीन सदस्य सदस्य
कोर्ट-3
(S.K.Srivastav,PA)