Uttar Pradesh

StateCommission

A/1529/2016

Bhagwat Singh - Complainant(s)

Versus

Ex.Engineer Gramin Anchal Vidyut Vibhag Gonda - Opp.Party(s)

Sandeep Kumar Pandey

26 Jun 2019

ORDER

STATE CONSUMER DISPUTES REDRESSAL COMMISSION, UP
C-1 Vikrant Khand 1 (Near Shaheed Path), Gomti Nagar Lucknow-226010
 
First Appeal No. A/1529/2016
( Date of Filing : 05 Aug 2016 )
(Arisen out of Order Dated 08/07/2015 in Case No. C/68/2015 of District Gonda)
 
1. Bhagwat Singh
S/O Sri Adil Singh Vill. and Post Barasara Tahsil Tarbaganj Distt. Gonda
...........Appellant(s)
Versus
1. Ex.Engineer Gramin Anchal Vidyut Vibhag Gonda
Civil Line Gonda
...........Respondent(s)
 
BEFORE: 
 HON'BLE MR. JUSTICE AKHTAR HUSAIN KHAN PRESIDENT
 
For the Appellant:
For the Respondent:
Dated : 26 Jun 2019
Final Order / Judgement

                                                     

                                              (मौखिक)

राज्‍य उपभोक्‍ता विवाद प्रतितोष आयोग, उ0प्र0, लखनऊ

 

अपील सं0-  1529/2016 

(जिला उपभोक्‍ता विवाद प्रतितोष फोरम, गोण्‍डा द्वारा परिवाद सं0- 68/2015 में पारित निर्णय दि0 08.07.2016 के विरूद्ध)

भगवत सिंह उम्र लगभग 71 वर्ष पुत्र आदिल सिंह निवासी ग्राम व पोस्‍ट- बरसड़ा, तहसील- तरबगंज, जिला – गोण्‍डा।

                                            .......अपीलार्थी

                         बनाम

श्रीमान अधिशासी अभियंता ग्रामीण अंचल विद्युत विभाग, गोण्‍डा सिविल लाइन, गोण्‍डा।

                                            ......... प्रत्‍यर्थी

समक्ष:-   

माननीय न्‍यायमूर्ति श्री अख्‍तर हुसैन खान, अध्‍यक्ष। 

अपीलार्थी की ओर से उपस्थित     : श्री संदीप कुमार पाण्‍डेय,

                                                     विद्वान अधिवक्‍ता।                                     

प्रत्‍यर्थी की ओर से उपस्थित       : कोई नहीं।

                               

दिनांक:- 26.06.2019

 माननीय न्‍यायमूर्ति श्री अख्‍तर हुसैन खान, अध्‍यक्ष  द्वारा उद्घोषित

                                                

निर्णय

          परिवाद सं0- 68/2015 भगवत सिंह बनाम अधिशासी अभियंता ग्रामीण अंचल विद्युत विभाग गोण्‍डा सिविल लाइन गोण्‍डा में जिला फोरम, गोण्‍डा द्वारा पारित निर्णय दि0 08.07.2016 के विरुद्ध यह अपील धारा 15 उपभोक्‍ता संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत राज्‍य आयोग के समक्ष प्रस्‍तुत की गई है।

          जिला फोरम ने आक्षेपित निर्णय के द्वारा परिवाद निरस्‍त कर दिया है जिससे क्षुब्‍ध होकर परिवाद के परिवादी भगवत सिंह ने यह अपील प्रस्‍तुत की है।

          अपील की सुनवाई के समय अपीलार्थी की ओर से विद्वान अधिवक्‍ता श्री संदीप कुमार पाण्‍डेय उपस्थित आये हैं। प्रत्‍यर्थी की ओर से नोटिस तामीला के बाद भी कोई उपस्थित नहीं हुआ है।      

          मैंने अपीलार्थी के विद्वान अधिवक्‍ता के तर्क को सुना है और आक्षेपित निर्णय तथा पत्रावली का अवलोकन किया है। 

          अपील के निर्णय हेतु संक्षिप्‍त सुसंगत तथ्‍य इस प्रकार हैं कि अपीलार्थी/परिवादी ने उपरोक्‍त परिवाद प्रत्‍यर्थी/विपक्षी के विरुद्ध इस कथन के साथ प्रस्‍तुत किया है कि उसने प्रत्‍यर्थी/विपक्षी से पांच हार्स पावर का विद्युत कनेक्‍शन सं0- 24/24111 ट्यूबवेल हेतु प्राप्‍त किया था। उसके इस कनेक्‍शन की आपूर्ति लाइन का ट्रांसफार्मर वर्ष 2009 में खराब हो गया, जिससे विद्युत आपूर्ति बन्‍द हो गई। उसने प्रत्‍यर्थी/विपक्षी के कर्मचारियों से शिकायत की, परन्‍तु ट्रांसफार्मर ठीक नहीं किया गया और विद्युत आपूर्ति नहीं की गई जिससे उसका कृषि कार्य भी प्रभावित हुआ और लाखों की क्षति हुई। अत: उसने प्रत्‍यर्थी/विपक्षी को कानूनी नोटिस भेजा, फिर भी कोई कार्यवाही नहीं हुई तो विवश होकर अपीलार्थी/परिवादी ने परिवाद जिला फोरम के समक्ष प्रस्‍तुत किया और निम्‍न अनुतोष चाहा :-

          अ- यह कि माह जून 2009 ई0 से अब तक विद्युत आपूर्ति न होने, के कारण विद्युत बिल समाप्‍त किया जाय।

          ब- यह कि माह जून 2009 से अब तक हुए नुकसान के मद्देनजर मु0 90000/-रूपये (नब्‍बे हजार रूपये) अतिरिक्‍त नुकसान के बावत दिलाया जाय।

          स- यह कि प्रार्थी को प्रतिवादी से न्‍याय खर्च तथा मानसिक उत्‍पीड़न हेतु समुचित मुआवजा दिलाया जाय।

          द- यह कि अन्‍य न्‍याय प्रतिकर वहक वादी, विरुद्ध प्रतिवादी न्‍यायिक दृष्टि न्‍यायालय के होवे को दिलाने की कृपा की जाय। 

          जिला फोरम ने अपीलार्थी/परिवादी द्वारा प्रस्‍तुत परिवाद काल बाधित मानते हुए आक्षेपित निर्णय के द्वारा निरस्‍त कर दिया है।

          अपीलार्थी के विद्वान अधिवक्‍ता का तर्क है कि जिला फोरम ने परिवाद को काल बाधित मानकर जो निरस्‍त किया है वह तथ्‍य और विधि के विरुद्ध है। जिला फोरम का निर्णय अपास्‍त करते हुए जिला फोरम को परिवाद का निस्‍तारण गुण-दोष के आधार पर करने हेतु निर्देशित किया जाना आवश्‍यक है।  

          अपीलार्थी/परिवादी के विद्वान अधिवक्‍ता का तर्क है कि माह जून 2009 में ट्रांसफार्मर खराब होने के बाद से अब तक अपीलार्थी/परिवादी को कोई विद्युत आपूर्ति नहीं की गई है, फिर भी उसे दि0 30.03.2015 को 1,28,518/-रू0 का विद्युत बिल भेजा गया है। अत: बिल दि0 30.03.2015 के आधार पर परिवाद काल बाधित नहीं है।

          मैंने अपीलार्थी/परिवादी के विद्वान अधिवक्‍ता के तर्क पर विचार किया है।

          अपीलार्थी ने वर्तमान परिवाद दि0 08.04.2014 को प्रस्‍तुत किया है और वर्तमान परिवाद में बिल दि0 30.03.2015 का उल्‍लेख नहीं किया है। परिवाद में अपीलार्थी/परिवादी ने माह जून 2009 से विद्युत आपूर्ति न होने के कारण विद्युत बिल समाप्‍त किये जाने की मांग की है और परिवाद पत्र के उपरोक्‍त विवरण से स्‍पष्‍ट है कि अपीलार्थी/परिवादी की आपूर्ति लाइन का ट्रांसफार्मर माह जून 2009 में खराब हुआ है और उसके बाद से कथित रूप से ठीक नहीं किया गया है तथा अपीलार्थी/परिवादी को विद्युत आपूर्ति नहीं की गई है। इस प्रकार यह स्‍पष्‍ट है कि अपीलार्थी/परिवादी द्वारा परिवाद प्रस्‍तुत करने का वाद हेतुक माह जून 2009 में उत्‍पन्‍न हुआ है, परन्‍तु उसने परिवाद दि0 08.04.2014 को प्रस्‍तुत किया है। ऐसी स्थिति में जिला फोरम ने जो मियाद बाधा के आधार पर परिवाद निरस्‍त किया है वह अनुचित और अवैधानिक नहीं कहा जा सकता है।

          उपरोक्‍त विवरण से स्‍पष्‍ट है कि अपीलार्थी/परिवादी ने अपने परिवाद में दि0 30.03.2015 को 1,28,518/-रू0 की वसूली के सम्‍बन्‍ध में प्रेषित बिल के सम्‍बन्‍ध में कोई अभिकथन नहीं किया है। यदि इस बिल से अपीलार्थी/परिवादी को कोई पीड़ा है तो वह बिल के सम्‍बन्‍ध में विधि के अनुसार परिवाद प्रस्‍तुत करने हेतु स्‍वतंत्र है।

          उपरोक्‍त निष्‍कर्ष के आधार पर मैं इस मत का हूं कि जिला फोरम के निर्णय में हस्‍तक्षेप हेतु उचित आधार नहीं है। अत: अपील निरस्‍त की जाती है। अपीलार्थी/परिवादी कथित बिल दि0 30.03.2015 के आधार पर की जा रही वसूली के सम्‍बन्‍ध में विधि के अनुसार परिवाद प्रस्‍तुत करने हेतु स्‍वतंत्र है।   

             ‍  

                (न्‍यायमूर्ति अख्‍तर हुसैन खान)                                                       

                                    अध्‍यक्ष                                                 

 

शेर सिंह आशु0,

कोर्ट नं0-1

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

                           

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 
 
[HON'BLE MR. JUSTICE AKHTAR HUSAIN KHAN]
PRESIDENT

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