Uttar Pradesh

StateCommission

A/1300/2018

Krishana Kumari - Complainant(s)

Versus

Ex. Engg. Madhyanchal Vidyut Nigam - Opp.Party(s)

Akhilesh Trivedi

21 Feb 2019

ORDER

STATE CONSUMER DISPUTES REDRESSAL COMMISSION, UP
C-1 Vikrant Khand 1 (Near Shaheed Path), Gomti Nagar Lucknow-226010
 
First Appeal No. A/1300/2018
( Date of Filing : 12 Jul 2018 )
(Arisen out of Order Dated 05/06/2018 in Case No. C/141/2016 of District Bareilly-II)
 
1. Krishana Kumari
W/O Sri Jaiveer Singh R/O Biharipur Civil Lines Distt. Bareilly
...........Appellant(s)
Versus
1. Ex. Engg. Madhyanchal Vidyut Nigam
Katju Marg Distt. Bareilly
...........Respondent(s)
 
BEFORE: 
 HON'BLE MR. JUSTICE AKHTAR HUSAIN KHAN PRESIDENT
 
For the Appellant:
For the Respondent:
Dated : 21 Feb 2019
Final Order / Judgement

(सुरक्षित)

राज्‍य उपभोक्‍ता विवाद प्रतितोष आयोग, उ0प्र0 लखनऊ।

अपील संख्‍या : 1300 /2018

(जिला उपभोक्‍ता फोरम, द्धितीय बरेली द्वारा परिवाद संख्‍या-141/2016 में पारित निर्णय एवं आदेश दिनांक 05-06-2018 के विरूद्ध)

Krishana Kumari, W/o Jaiveer Singh R/o Biharipur Civil Lines, Dist-Bareilly.                    ......अपीलार्थी/परिवादिनी

बनाम्

  1. Chief Excutive Madhyanchal Vidyut Nigam Katju Marg, District-Bareilly.
  2. Vidyut Nagriya Vitran Khand First Bareilly, Through Adhishasi Abhiyanta.
  3. L.D.O. Biharipur Vidyut Nagriya Vitran Khand First Bareilly.
  4. A.E. Meter Madhyanchal Vidyut Vitran Nigam, Bareilly.                                         

                                           .......प्रत्‍यर्थीगण/विपक्षीगण

समक्ष  :-

1- मा0 न्‍यायमूर्ति श्री अख्‍तर हुसैन खान,  अध्‍यक्ष ।

उपस्थिति :

अपीलार्थी  की ओर से उपस्थित-   श्री अखिलेश त्रिवेदी।

प्रत्‍यर्थी की ओर से उपस्थित-      कोई नहीं।

दिनांक : 12-03-2019

 

मा0 न्‍यायमूर्ति श्री अख्‍तर हुसैन खान, अध्‍यक्ष द्वारा उद्घोषित निर्णय

   परिवाद संख्‍या-141/2016 कृष्‍णा कुमारी बनाम् मुख्‍य अभियन्‍ता मध्‍यांचल विद्युत निगम व तीन अन्‍य में जिला उपभोक्‍ता फोरम, द्धितीय बरेली द्वारा पारित आक्षेपित निर्णय और आदेश           दिनां‍क 05-06-2018 के विरूद्ध यह अपील धारा-15 उपभोक्‍ता संरक्षण

 

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अधिनियम के अन्‍तर्गत इस आयोग के समक्ष प्रस्‍तुत की है।

   जिला फोरम ने आक्षेपित निर्णय के द्वारा परिवाद निस्‍तारित करते हुए निम्‍न आदेश पारित किया है :-

   ‘’परिवाद इस निर्देश के साथ निस्‍तारित किया जाता है कि यदि परिवादिनी बकाया विद्युत प्रभार को किश्‍तों में भुगतान करने हेतु प्रतिपक्षीगण के समक्ष प्रार्थना पत्र देती है तो प्रतिपक्षीगण उस पर नियमानुसार कार्यवाही करना सुनिश्चित करेंगे।  उभयपक्ष अपना-अपन वाद व्‍यय स्‍वयं वहन करेंगे।‘’

   जिला फोरम के निर्णय से परिवादिनी कृष्‍णा कुमारी संतुष्‍ट नहीं है अत: परिवादिनी ने यह अपील प्रस्‍तुत की है।

   अपील की सुनवाई के समय अपीलार्थी की ओर से विद्धान अधिवक्‍ता श्री अखिलेश त्रिवेदी उपस्थित आए। प्रत्‍यर्थीगण की ओर से नोटिस तामीला के बाद भी कोई उपस्थित नहीं हुआ।

   अत: अपीलार्थी के विद्धान अधिवक्‍ता के तर्क को सुनकर एवं आक्षेपित निर्णय व आदेश तथा पत्रावली का अवलोकन कर इस अपील का निस्‍तारण किया जा रहा है।

   अपील के निर्णय हेतु संक्षिप्‍त सुसंगत तथ्‍य इस प्रकार है कि अपीलार्थी/परिवादिनी ने परिवाद जिला फोरम, द्धितीय, बरेली के समक्ष इस कथन के साथ प्रस्‍तुत किया है कि उसका एक विद्युत संयोजन संख्‍या-3809/54704 है और वह अपने इस विद्युत संयोजन के बिलों का भुगतान नियमित रूप से करती चली आ रही है। माह-दिसम्‍बर, 2015 में उसे रू0 42,397/- का बिल भेजा गया, तो परिवादिनी ने इसकी शिकायत अवर अभियन्‍ता से की, तो उन्‍होंने बिल ठीक कराकर देने के लिए कहा, तब अगले दिन विद्युत विभाग के कर्मचारी परिवादिनी के घर आये और उसका मीटर उतार कर ले गये। उसके बाद अपीलार्थी/परिवादिनी ने अवर अभियन्‍ता से बात की, तो उन्‍होंने कहा कि बिल अधिक है, वह 10,000/-रू0 दे दे तो बिल ठीक करके जमा कर

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दिया जायेगा। इस पर उसने कहा कि उसका बिल रीडिंग के अनुसार रू0 42,397/- कहॉं है, और बिल इतना अधिक कैसे हो गया तो अवर अभिन्‍ता ने बिल में हाथ से कटिंग करके रू0 1,23,620/- का बिल देकर परिवादिनी को जमा करने को कहा, और उसके बाद अपीलार्थी/परिवादिनी को रू0 1,36,113/- का बिल भेजा गया, जिसकी शिकायत उसने विपक्षी विभाग से की किन्‍तु कोई समाधान नहीं किया गया।

   विपक्षीगण की ओर से जिला फोरम के समक्ष लिखित कथन प्रस्‍तुत किया गया और कहा गया है कि अपीलार्थी/परिवादिनी के परिसर में लगे विद्युत मीटर की दिनांक 02-12-2015 को 9290 Unit Stone reading पायी गयी। जिस कारण परिवादिनी को रू0 1,23,620/- का विद्युत बिल मास-दिसम्‍बर, 2015 में दिया गया।

   लिखित कथन में विपक्षीगण की ओर से कहा गया है कि परिवादिनी के विद्युत मीटर संख्‍या-3317646 की रीडिंग दिनांक 05-04-2016 को 10335 पायी गयी थी जिसके आधार पर परिवादिनी को रू0 13,6,113/- का विद्युत बिल दिनांक 05-04-2016 को भेजा गया था।

   लिखित कथन में विपक्षीगण की ओर से कहा गया है कि प्रत्‍यर्थी/परिवादिनी के जिम्‍मा रू0 रू0 1,39,940/-का विद्युत बिल ब‍काया है जिसे उसने जमा नहीं किया है।

   जिला फोरम ने उभयपक्ष के अभिकथन एवं उपलब्‍ध साक्ष्‍यों पर विचार करने के उपरान्‍त यह निष्‍कर्ष अंकित किया है कि विपक्षीगण का यह कथन विश्‍वास किये जाने योग्‍य प्रतीत होता है कि परिवादिनी के विद्युत मीटर में यूनिट संग्रहीत थी और उसके बाद परिवादिनी नियमित बिल का भुगतान करती रही परन्‍तु उसने वास्‍तविक मीटर रीडिंग के अनुसार भुगतान नहीं किया है। इसके साथ ही जिला फोरम ने यह भी कहा है कि पत्रावली पर इस बात का कोई साक्ष्‍य नहीं है कि विपक्षीगण ने सेवा में कमी की है। अत: जिला फोरम ने अपने आक्षेपित निर्णय में यह माना है कि परिवादिनी विपक्षीगण को बिद्युत बिल की अवशेष

 

 

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धनराशि अदा करने हेतु उत्‍तरदायी है। अत: जिला फोरम ने परिवाद स्‍वीकार करते हुए अवशेष धनराशि किश्‍तों में अदा करने हेतु अपीलार्थी/परिवादिनी को विपक्षीगण के समक्ष प्रतिवेदन प्रस्‍तुत करने की झूट प्रदान की है।

   अपीलार्थी के विद्धान अधिवक्‍ता का तर्क है कि जिला फोरम का निर्णय अपीलार्थी/परिवादिनी द्वारा कथित तथ्‍यों पर विचार किये बिना पारित किया गया है।

   अपीलार्थी के विद्धान अधिवक्‍ता का तर्क है कि जिला फोरम ने परिवादिनी को भेजे गये बिल को बिना किसी उचित आधार के मान्‍यता प्रदान करते हुए आक्षेपित आदेश पारित किया है जबकि अपीलार्थी की शिकायत इन बिलों के विरूद्ध थी। अत: बिलों का सत्‍यापन विपक्षगण को विधि के अनुसार करने हेतु निर्देशित किया जाना चाहिए था।

   मैंने अपीलार्थी के विद्धान अधिवक्‍ता के तर्क पर विचार किया है।

   अपीलार्थी के विद्धान अधिवक्‍ता का कथन है कि उसके द्वारा उपभोग की गयी विद्युत से अधिक विद्युत यूनिट का बिल भेजा गया है और अत्‍यधिक धनराशि की मांग की गयी है। यदि अपीलार्थी को विद्युत बिलों की वास्‍तविकता पर आपत्ति है तो विपक्षीगण के विद्युत विभाग के सक्षम अधिकारी के समक्ष अपनी आपत्ति प्रस्‍तुत कर सकती है जिस पर नियमानुसार जॉंच कर सक्षम अधिकारी द्वारा निर्णय लिया जा सकता है।

   अत: सम्‍पूर्ण तथ्‍यों और परिस्थितियों पर विचार करते हुए अपील आंशिक रूप से स्‍वीकार की जाती है और जिला फोरम द्वारा पारित आक्षेपित निर्णय और आदेश संशोधित करते हुए प्रत्‍यर्थी/विपक्षीगण को आदेशित किया जाता है कि यदि अपीलार्थी/परिवादिनी इस निर्णय की तिथि से दो माह के अंदर अपने प्रश्‍नगत विद्युत बिलों की वास्‍तविकता

 

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के संदर्भ में आपत्ति विद्युत विभाग में सक्षम अधिकारी के समक्ष प्रस्‍तुत करती है तो विपक्षीगण के विद्युत विभाग के समक्ष अधिकारी आवश्‍यक जॉंच कर विधि के अनुसार आपत्ति का निस्‍तारण दो माह के अंदर करेंगे।

   अपीलार्थी/परिवादिनी अपने प्रश्‍नगत विद्युत बिल के संबंध में अपनी आपत्ति प्रत्‍यर्थी/विपक्षीगण के सक्षम अधिकारी के समक्ष इस निर्णय की तिथि से दो माह के अंदर प्रस्‍तुत कर सकती है ।

   अपील में उभयपक्ष अपना अपना वाद व्‍यय स्‍वयं वहन करेंगे।

 

 

(न्‍यायमूर्ति अख्‍तर हुसैन खान)

  •  

प्रदीप मिश्रा, आशु0

कोर्ट नं0-1

    

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 
 
[HON'BLE MR. JUSTICE AKHTAR HUSAIN KHAN]
PRESIDENT

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