Uttar Pradesh

Faizabad

cc/54/95

RAMFER VISWAKARMA - Complainant(s)

Versus

ELEC. BOARD - Opp.Party(s)

17 Jun 2015

ORDER

DISTRICT CONSUMER DISPUTES REDRESSAL FORUM
Judgement of Faizabad
 
Complaint Case No. cc/54/95
 
1. RAMFER VISWAKARMA
TEH. TANDA DIS FAIZABAD
...........Complainant(s)
Versus
1. ELEC. BOARD
AKBARPUR ELEC.DEP. FAIZABAD
............Opp.Party(s)
 
BEFORE: 
 HON'BLE MR. JUSTICE MR. CHANDRA PAAL PRESIDENT
 HON'BLE MRS. MAYA DEVI SHAKYA MEMBER
 HON'BLE MR. VISHNU UPADHYAY MEMBER
 
For the Complainant:
For the Opp. Party:
ORDER

जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष फोरम फैजाबाद ।

 

उपस्थित -     (1) श्री चन्द्र पाल, अध्यक्ष
        (2) श्रीमती माया देवी शाक्य, सदस्या
(3) श्री विष्णु उपाध्याय, सदस्य

              परिवाद सं0-54/1995

               
रामफेर विष्वकर्मा पुत्र श्री भग्गल निवासी माड़र मऊ बाजार परगना बिड़हर तहसील टाण्डा जिला फैजाबाद।                                                  .............. प्रार्थी 
बनाम
1.    अधिषाशी अभियंता ई0डी0डी0 अकबरपुर विद्युत विभाग फैजाबाद।
2.    उत्तर प्रदेष राज्य विद्युत परिशद षक्ति भवन लखनऊ द्वारा चेयर मैन
                                                           ............. विपक्षीगण
निर्णय दिनाॅंक 17.06.2015            
उद्घोषित द्वारा: श्री विश्णु उपाध्याय, सदस्य।
                        निर्णय
    परिवादी के परिवाद का संक्षेप इस पकार है कि परिवादी ने वेल्डिंग मषीन चलाने हेतु विपक्षीगण से विद्युत कनेक्षन संख्या 2301/010156 सन 1989 में लिया था। कनेक्षन लेने के बाद परिवादी नियमित बिलों का भुगतान करता रहा। विपक्षीगण द्वारा परिवादी को उपभोग किये गये यूनिटों से अधिक यूनिटों का बिल भेजा जा रहा है, जिन्हें ठीक करा कर परिवादी बिलों का भुगतान करता रहा है। परिवादी ने विभिन्न रसीदों का विवरण दिया है जिसके अनुसार उसने बिलों का भुगतान किया है। परिवादी ने अंतिम बिल का भुगतान दिनांक 25-09-1991 को रुपये 2,500/- का किया है। घरेलू स्थिति ठीक न होने के कारण परिवादी उक्त कनेक्षन को चला न सका और अस्थाई रुप से नवम्बर 1991 में कटवा दिया। परिवादी की बिलों की षिकायत पर दिनांक 23.10.1992 को नया मीटर स्थापित किया गया। परिवादी उस समय कनेक्षन का स्तेमाल नहीं करना चाहता था इसलिये दिनांक 12-03-1993 को विभाग द्वारा परिवादी के कनेक्षन की केबल उतार दी गयी और परिवादी का कनेक्षन स्थाई रुप से विच्छेदित कर दिया। केबिल उतारने के बाद विपक्षीगण ने परिवादी के विरुद्ध वसूली नोटिस (आर0सी0) रुपये 18,200/- जारी कर दी और दिसम्बर में रुपये 28,171.60 पैसे का विद्युत बिल भेज दिया। विपक्षीगण हिसाब करने के बाद ही भुगतान न करने पर वसूली प्रमाण पत्र जारी कर सकते हैं। विपक्षीगण ने जनवरी 1995 में हिसाब करने से मना कर दिया इसलिये परिवादी को अपना परिवाद दाखिल करना पड़ा। विपक्षीगण को निर्देषित किया जाये कि परिवादी द्वारा किये गये अधिक भुगतान रुपये 6,124.97 पैसे को समायोजित कर देय बिलों का निर्धारण करें। परिवादी को खर्चा मुकदमा तथा अन्य कोई उपषम जो न्यायालय उचित प्रतीत करे परिवादी को विपक्षीगण से दिलावें। 
    विपक्षीगण ने अपना उत्तर पत्र प्रस्तुत किया है तथा कहा है कि परिवादी का विद्युत कनेक्षन कामर्षियल है इसलिये परिवादी उपभोक्ता की श्रेणी मंे नहीं आता है। परिवादी ने वाद का कार्यकारण वर्श 1991 बताया है इस आधार पर परिवादी का परिवाद काल बाधित है। परिवादी को नियमानुसार बिल जारी किये गये हैं। परिवादी मूल रसीदें प्रस्तुत करे तभी सत्यता का पता लग सकता है। विपक्षीगण ने विषेश कथन में कहा है कि परिवादी ने अपना परिवाद बिल बकाये के आधार पर किया है जो फोरम में चलने योग्य नहीं है। परिवादी के परिवाद की सुनवाई का क्षेत्राधिकार अम्बेडकर नगर फोरम को है फैजाबाद को नहीं। परिवादी का परिवाद असेसमेंट निर्धारण से संबन्धित है जो कि पोशणीय नहीं है। परिवादी ने स्वयं स्वीकार किया है कि वह वर्श 1991 में कनेक्षन नहीं चला सका, इस प्रकार उत्तरदाता ने अपनी सेवा में कोई कमी नहीं की है। परिवादी यदि किसी बिल से असंतुश्ट है तो उसे अंडर प्रोटेस्ट जमा कर के अपना वाद ला सकता है। परिवादी ने अपना परिवाद विपक्षीगण को हैरान व परेषान करने की नीयत से किया है जो कि सव्यय निरस्त किये जाने योग्य हैैैै।
    परिवादी की ओर से बहस के लिये कोई उपस्थित नहीं हुआ। परिवादी को बहस के लिये समय दिया गया किन्तु निर्णय के पूर्व तक परिवादी की ओर से किसी ने बहस नहीं की। विपक्षीगण के विद्वान अधिवक्ता की बहस को सुना एवं पत्रावली का भली भांति परिषीलन किया और परिवाद का निर्णय गुण दोश के आधार पर किया। परिवादी ने अपने पक्ष के समर्थन में कुछ विद्युत बिलों की छाया प्रतियां व कुछ बिलों के भुगतान की रसीदें तथा विद्युत कनेक्षन के आवेदन पत्र की छाया प्रति दाखिल की है जो षामिल पत्रावली है। विपक्षीगण ने अपने पक्ष के समर्थन में अपना लिखित कथन दाखिल किया है जो षामिल पत्रावली है। परिवादी एवं विपक्षीगण द्वारा दाखिल प्रपत्रों से प्रमाणित है कि विपक्षीगण ने अपनी सेवा में कमी नहीं की है। परिवादी ने अपने पक्ष के समर्थन में स्थाई विद्युत विच्छेदन का कोई प्रमाण दाखिल नहीं किया है। परिवादी ने ऐसा कोई प्रमाण दाखिल नहीं किया है जिससे विपक्षीगण की सेवा में कमी का मामला प्रमाणित होता हो। परिवादी का विद्युत कनेक्षन कामर्षियल है इस प्रकार परिवादी उपभोक्ता की श्रेणी में नहीं आता है। विपक्षीगण की ओर से एक प्रार्थना पत्र दिनांक 28.10.2013 इस आषय का दिया है कि परिवादी का मामला विद्युत चोरी का है और परिवादी ने विद्युत अधिनियम की धारा 126 व 127 का अनुपालन नहीं किया है और धनराषि निर्धारण की आधी धनराषि जमा नहीं की है। इस आधार पर भी परिवादी का परिवाद फोरम में चलने लायक नहीं है। विपक्षीगण ने अपनी सेवा में कमी नहीं की है। परिवादी का परिवाद कामर्षियल की श्रेणी में होने के कारण, उपभोक्ता की श्रेणी मंे न आने के कारण और सेवा में कमी प्रमाणित न होने के कारण खारिज किये जाने योग्य है।     
आदेश
    परिवादी का परिवाद खारिज किया जाता है।  
          (विष्णु उपाध्याय)         (माया देवी शाक्य)             (चन्द्र पाल)              
              सदस्य                  सदस्या                   अध्यक्ष      
निर्णय एवं आदेश आज दिनांक 17.06.2015 को खुले न्यायालय में हस्ताक्षरित एवं उद्घोषित किया गया।

          (विष्णु उपाध्याय)         (माया देवी शाक्य)             (चन्द्र पाल)           
              सदस्य                  सदस्या                    अध्यक्ष

 
 
[HON'BLE MR. JUSTICE MR. CHANDRA PAAL]
PRESIDENT
 
[HON'BLE MRS. MAYA DEVI SHAKYA]
MEMBER
 
[HON'BLE MR. VISHNU UPADHYAY]
MEMBER

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